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Tuesday, March 7, 2017

रेबीज से बचने के उपाय,Rabies Prevention in Hindi,

 

रेबीज से बचने के उपाय,Rabies Prevention in Hindi,
कुत्ते बंदर के काटने पर कभी भी लापरवाही न बरतें अन्यथा आप रेबीज का शिकार हो सकते हैं। जब कोई कुत्ता या बंदर काटे तो तुरंत नजदीकी चिकित्सक से इलाज करवाएं। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अक्सर में कुत्ते या बंदर के काटने पर घूरेलू उपचार करने लग जाते हैं। इससे रेबीज का खतरा बढ़ जाता है व घायल व्यक्ति की मौत भी हो सकती है

किसी संक्रमित पशु के काटने या खुले घाव को चाटने से यह इन्फेक्शन होता है। यह इन्फेक्शन पशुओं में लड़ने या काटने से फैलता है। जब ऐसे संक्रमित पशु आदमी के संपर्क में आते हैं तो इसे आदमी में भी फैलाते हैं। आदमी से आदमी में यह इन्फेक्शन नहीं फैलता। वायरस आदमी के शरीर में प्रवेश करने यह इंद्रियों पर आक्रमण करता है और मेरूदंड से मस्तिष्क तक जाकर एनसेफ लाइटिस उत्पन करता है जो कि घातक होती है। इनफेक्शन के फैलने से बचने का उपाय एंटीबॉडिज है जो टीकाकरण द्वारा दिया जाता है। यह काटने के 24 घटे भीतर दिया जाना चाहिए। इससे इन्फेक्शन रुक जाता है।

रेबीज से बचने के उपाय,Rabies Prevention in Hindi,

इन सभी लक्षणों से बचना है तो कुत्ता, बिल्ली या बंदर के काटने के 24 घंटे के अंदर ऐंटि-रेबीज टीकों के जरिए इलाज शुरू करवा दें।
  • अगर कुत्ता प्यार से भी चाटता है, तो होशियार हो जाएं। अगर कुत्ते में रेबीज का इन्फ़ेक्शन होगा तो आपके शरीर में रेबीज के वायरस जाने की आशंका बनी रहती है, खासकर अगर कुत्ते ने शरीर के उस हिस्से को चाट लिया हो, जहां चोट की वजह से मामूली कट या खरोंच हो।
  • अगर किसी कुत्ते के काटने के बाद स्किन पर उसके एक या दो दांतों के निशान दिखाई पड़ते हैं, तो समझिए कि एहतियात बरतने की जरूरत है।
  • ऐसे कई लोग हैं, जो यह सोचकर कि कुत्ते को रेबीज न रहा होगा, एक या दो दांतों के निशान को मामूली जख्म की तरह ट्रीट करते हैं।
  • ऐसी अनदेखी घातक साबित हो सकती है, क्योंकि रेबीज का वायरस एक बार आपके शरीर में जाकर बरसों-बरस डॉर्मन्ट (सुप्तावस्था में) रह सकता है।
  • कई बरस बाद जब यह अपना असर दिखाना शुरू करता है तो इलाज के लिए कुछ नहीं बचता।
  • कुत्ता आमतौर पर तीन जगहों में किसी एक जगह पर काटता है: हाथ, चेहरा या टांग।
  • अगर हाथ या चेहरे पर काटने के बाद एक भी गहरा निशान बनता है या दांतों के तीन-चार निशान दिखाई देते हैं तो समझिए मामला बेहद संजीदा है और इलाज के लिए फौरन जाना चाहिए।
  • जितना हो सके घाव को बहते गुनगुने पानी से धोना चाहिए ।
  • घाव को कभी ढकें नहीं। इसकी पट्टी न करें और टांकें न लागवाएं।
  • नजदीकी दवाखाने में या सरकारी अस्पताल में जाएं जहां एआरवी उपलब्ध होती हैं।
  • कुत्ता या पशु का निरीक्षण 10 दिन तक करें।
  • यदि कुत्ता पालतू है तो जानें कि उसे टीका दिलाया गया अथवा नहीं और जानें की उसे घुमाने ले जाया जाता है या नहीं।
  • कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने को हल्के में लेना बड़ी भूल है। इससे जानलेवा रेबीज हो सकता है।
  • कुत्ते के काटने के बाद अब भी कई लोगों को यह लगता है कि पेट में 14 इंजेक्शन लगेंगे। यह गलत है। वैक्सिनेशन के तरीके और टाइम पीरियड अब बदल चुके हैं। यह भी जान लेना जरूरी है कि कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने पर आपके काम का डॉक्टर जनरल फिजिशन (फैमिली डॉक्टर) ही है।
  • रेबीज को रोकने के लिए प्रॉपर वैक्सिनेशन (ऐंटि-रेबीज वैक्सिनेशन) की जाती है।
  • ऐंटि-रेबीज वैक्सीन सेंट्रल नर्वस सिस्टम (जहां रेबीज के वायरस अटैक करते हैं) पर रक्षात्मक परत बना कर उस वायरस के असर को खत्म कर देती है।
  • वैक्सिनेशन दो तरह से की जाती है: ऐक्टिव और पैसिव। अगर जख्म गहरा हो तो ऐक्टिव वैक्सिनेशन के तहतदो इंजेक्शन फौरन लगते हैं। इसमें ऐंटि-रेबीज सीरम कोपहले मसल्स (बाजू या हिप्स) में और फिर ठीक उस जगह पर जहां कुत्ते, बिल्ली या बंदर ने काटा हो, इंजेक्शन के जरिए डाला जाता है।
  • इसके बाद बारी आती है पैसिव वैक्सिनेशन की। इसमें पांच इंजेक्शन एक खास टाइम पीरियड में लेने पड़ते हैं।

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