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Friday, January 6, 2017

होंठ फटना,Cracked Lips Treatment in Hindi,


सर्दियों का मौसम आते ही जहां पूरा शरीर शुष्क होने लगता है वहीं होंठों के फटने की समस्या भी हो जाती है. ये एक बेहद आम परेशानी है. ये तो आप भी जानते होंगे कि हमारे होंठों की त्वचा, शरीर के किसी भी दूसरे भाग की तुलना में कहीं अधिक पतली और संवेदनशील होती है.
ठंडी हवाओं और मौसम के बदलने से होंठों की नमी कहीं खो सी जाती है और वे फटने लग जाते हैं. ऐसे में ये बेहद जरूरी हो जाता है कि हम अपने होंठों का अच्छी तरह से ख्याल रखें ताकि वो हमेशा कोमल, मुलायम और खूबसूरत बने रहें.
सर्दियों में होंठ फटने की परेशानी आम सुनने को मिलती है। य़ह शरीर के बाकी अंगों में से सबसे नाजुक और कोमल अंग है, जिसकी देखभाल करनी बहुत जरूरी है। इन्हें मुलायम रखने के लिए लड़किया लिप बाम का इस्तेमाल करती हैं। लिप बाम की मदद से कुछ देर के लिए आप होंठों को सॉफ्ट कर सकती हैं लेकिन बाद में यह फिर ड्राई हो जाते हैं। इसकी जगह पर होममेड लिप स्क्रब का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे आपके होंठ लंबे समय तक मुलायम के साथ साथ गुलाबी भी रहेंगे।

होंठों के फटने के कारण  Dry Cracked lips causes in Hindi

सर्दियों के मौसम में फटे या रूखे होठ एक आम समस्या है । रूखे और फटे होठों के मुख्य कारण नीचे दिए जा रहे कारणों में से कोई भी हो सकते है
  • अत्यधिक धूम्रपान
  • होठों को बार-बार चाटना
  • विटामिन की कमी
  • धूप या शुष्क हवा के संपर्क में रहने से
  • सर्दियों के दौरान सूखी और ठंडी हवा और मौसम में परिवर्तन ।
  • सबसे अहम चीज उचित खान-पान की कमी, पानी कम पीने की वजह से शरीर में मॉश्चराइजर की कमी हो जाती है जिससे शरीर में रूखापन और खुश्की जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है ।
  • होंठो के लिए उपयोग में लाये जाने वाले कॉस्मेटिक चीजे की गुणवत्ता यानी poor quality भी फटे या रूखे होठ की वजह बन सकती है
  • शरीर में विटामिन ई की कमी, कैल्शियम व आयरन की पर्याप्त मात्रा न मिल पाना, सूखे तथा फटे होंठों की मुख्य वजहो में एक हो सकती है
  • होंठों की सफाई को अनदेखा करना, अगर आप कही धूल-मिट्टी या धूप से आ रहे हो तो चेहरे तथा होठो की सफाई जरुरी हैं नहीं तो फटे या रूखे होठ होना तो निश्चित ही है।

होंठ फटना,Cracked Lips Treatment in Hindi,

  • मुलेठी : वातज´ रोग में मुलेठी, लोबान, राल, गुग्गल, देवदारू को बराबर मात्रा मे मिलाकर पीस लें ओर छान लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से होठों पर लगाने से होंठ फटना बन्द हो जाता है।
  • मोम : मोम, गुड़ और राल को बराबर मात्रा में एकसाथ मिलाकर तेल या घी में पकाकर लेप बना लें। इस लेप को होंठों पर लगाने से होठों की कठोरता, सुई चुभने जैसा दर्द और होंठों में से पीब आदि निकलना बन्द हो जाता है।
  • धनिया : धनिया, राल, गेरू, मोम, घी और सेंधानमक को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर और छानकर लेप करने से होंठों के घाव दूर हो जाते हैं।
  • अनन्तमूल : अनन्तमूल की जड़ को पीसकर होंठों पर या शरीर के किसी भी भाग पर जहां पर त्वचा के फटने की वजह से खून निकलता हो लगाने से लाभ होता है।
  • अजमोद : 1 से 4 ग्राम अजमोद के फल के चूर्ण को रोजाना सुबह और शाम खाने से होंठ ही नहीं, शरीर में कही भी त्वचा फटकर खून निकलता हो उसमें लाभ होता है।
  • मेथी : मेथी के बीज का चूर्ण 5 से 10 ग्राम सुबह और शाम गुड़ के साथ खाने से त्वचा या होंठ फटने की वजह से खून निकलने की शिकायत दूर हो जाती है।
  • जायफल : जायफल को पीसकर लेप करने से भी होंठ फटने की शिकायत या बिवाई (एड़ियां फटना) की शिकायत दूर हो जाती है।
  • अखरोट : अखरोट की मिंगी (बीज) को लगातार खाने से होंठ या त्वचा के फटने का रोग दूर हो जाता है।
  • सिंहोरा : सिंहोरा का दूध लगाने से होंठ या त्वचा के फटने की शिकायत दूर होती है।
  • खीरे : खीरे का पानी लगाने से होंठों का फटना बन्द हो जाता है।
  • मक्खन : मक्खन में नमक मिलाकर लगाने से होंठ नहीं फटते हैं।
  • शहद : 20 ग्राम शहद में 10 ग्राम सुहागा मिलाकर दिन में 3 बार मलने से होंठों का फटना दूर हो जाता है।
  • नारियल : 5 ग्राम मोम को 25 मिलीलीटर नारियल के गर्म तेल में डालकर घोट लें। इसे दिन में 3 बार होठों पर मलने से लाभ होता है।
  • मूंगफली : नहाने से पहले हथेली में चौथाई चम्मच मूंगफली का तेल लेकर अंगुली से हथेली में रगड़ लें और फिर होंठों पर इस तेल से मालिश करने से होंठ सुंदर बन जाते हैं।
  • मौसमी : होंठों पर मौसमी का रस रोजाना 2 से 3 बार लगाने से होंठों का कालापन दूर होता है और होठ प्राकृतिक रूप से लाल रहते हैं।
  • इलायची : होठों पर जब पपड़ी जम जाती है तो उनके उतरने पर बहुत दर्द होता है। इलायची को पीसकर मक्खन में मिलाकर कम से कम 7 दिन तक रोजाना 2 बार होंठों पर लगाने से लाभ होता है।
  • ग्लिसरीन : ग्लिसरीन को रोजाना 3 बार होंठों पर लगाने से लाभ होता है।
  • बादाम : 5 बादाम रोजाना सुबह और शाम खाने से होंठ नहीं फटते हैं।
  • बादाम रोगन : रात को सोते समय होंठों पर बादाम रोगन लगाकर सो जाएं। इससे सुबह उठने पर पपड़ी हट जायेगी और होंठ मुलायम रहेंगे तथा आगे से होंठों पर पपड़ी भी नहीं जमेगी। हमेशा ध्यान रखें कि होठों पर जमी हुई पपड़ी को नाखून या दांत से कभी नहीं नोंचे और मुंह से सांस न लें।
  • दही : दही के मक्खन में केसर मिलाकर होठों पर लगाने से होंठ लाल हो जाते हैं।
  • मलाई : सर्दियों में खुष्की से होंठ फट जाये तो उन पर आधा चम्मच दूध की मलाई में चुटकीभर हल्दी का बारीक चूर्ण मिलाकर धीरे-धीरे मलने से या लगाने से होंठ चिकने और मुलायम हो जाते हैं।
  • घी में थोड़ा सा नमक मिलाकर होंठों व नाभि पर लगाने से होंठ फटना बन्द हो जाते हैं।
  • वनस्पति घी को होंठों पर लगाने से होंठ फटना बन्द हो जाते हैं।
  • घी मे नमक मिलाकर रोजाना 2-3 बार नाभि पर लगाने से होंठों का फटना पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
  • गुलाब के एक फूल को पीसकर उसमें थोड़ी सी मलाई मिला लेते हैं। फिर इसे 10 मिनट तक होंठो पर लगाये रहते हैं। इसके बाद इसे धो देते हैं। कुछ दिनों तक इस प्रयोग को करने से होंठों की रंगत सुंदर हो जाती है।
  • गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर उसमें थोड़ी सी ग्लिसरीन मिला लें। इस मिश्रण को रोजाना होंठों पर लगाने से होंठों का कालापन दूर होता है और होंठ सुंदर बनते हैं। इस दौरान स्त्रियों को लिपस्टिक लगाना बन्द कर देना चाहिए।
  • गुलाब के एक फूल को पीसकर उसमें थोड़ी सी मलाई मिलाकर होंठों पर लगाकर लेप कर दें। आधे घंटे के बाद इसे धो लें। कुछ ही दिनों तक यह लगाने से होंठ फटेंगे नहीं और होठों का रंग बिल्कुल गुलाब जैसा लाल हो जायेगा।
  • सोने से पहले सरसों का तेल नाभि पर लगाने से होंठ नहीं फटते है।
  • ठंड़ी हवा के कारण होंठों को फटने से बचाने के लिए रात को सोते समय शुद्ध सरसों के तेल या गुनगुने घी को नाभि में लगाने से लाभ होता है।
  • निर्गुण्डी : फटे होंठों पर निर्गुण्डी के तेल को लगाने से आराम मिलता हैं।

Wednesday, December 21, 2016

दांतों का पीलापन दूर करने के उपाय,Home Remedies for Teeth Whitening in Hindi,

दांतों का पीलापन दूर करने के उपाय,Home Remedies for Teeth Whitening in Hindi,
दांतों का पीलापन आज के समय में एक आम समस्या है। सही ढंग से केयर न करने या प्लांक जमने के कारण दांत पीले हो जाते हैं। इसके अलावा, खाने की कुछ चीजों के लगातार उपयोग, बढ़ती उम्र या अधिक दवाइयों का सेवन भी दांतों के पीलेपन के कारण हो सकते हैं।

पीले दांतों के कारण न सिर्फ चेहरे की खूबसूरती प्रभावित होती है, बल्कि आत्मविश्वास में भी कमी आती है। आज हम आपको दांतों का पीलापन दूर करने के कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं। ये नुस्खे आपके दांतों का पीलापन दूर करने में बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं

दांत किसी के भी व्यक्तित्व को खूबसूरत बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे ठीक विपरीत अगर किसी के भी दांत गंदे, बदरंग या पीले हों तो व्यक्तित्व को खराब कर सकते हैं। इसीलिए जरूरी है कि आप अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने के लिए अपने दांतों का विशेष ख्याल रखें। यदि आप दांतों को जीवनभर मजबूत और सड़नरहित बनाए रखना चाहते हैं तो हम आपको बता रहे हैं दांतो की केयर के कुछ खास तरीके। इन्हें अपना लेंगे तो दांत हमेशा चमचमाते सफेद बने रहेंगे।

दांतों का पीलापन दूर करने के उपाय,Home Remedies for Teeth Whitening in Hindi,

  • रोजाना गाजर खाने से भी दांतों का पीलापन कम हो जाता है। दरअसल, भोजन करने के बाद गाजर खाने से इसमें मौजूद रेशे दांतों की अच्छे से सफाई कर देते हैं।
  • नीम का उपयोग प्राचीन काल से ही दांत साफ करने के लिए किया जाता रहा है। नीम में दांतों को सफेद बनाने व बैक्टीरिया को खत्म करने के गुण पाए जाते हैं। यह नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-सेप्टिक है। रोजाना नीम के दातून से दांत साफ करने पर दांतों के रोग नहीं होते व दांतों का पीलापन भी दूर हो जाता है
  • तुलसी में दांतों का पीलापन दूर करने की अद्भुत क्षमता पाई जाती है। साथ ही, तुलसी मुंह और दांत के रोगों से भी बचाती है। तुलसी के पत्तों को धूप में सुखा लें। इसके पाउडर को टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करने से दांत चमकने लगते हैं।
  • नमक से दांत साफ करने का नुस्खा बहुत पुराना है। नमक में 2-3 बूंद सरसों का तेल मिलाकर दांत साफ करने से पीलापन दूर हो जाता है और दांत चमकने लगते हैं।
  • संतरे के छिलके और तुलसी के पत्तों को सुखाकर पाउडर बना लें। ब्रश करने के बाद इस पाउडर से दांतों पर हल्के से रोजाना मसाज करें। संतरे में मौजूद विटामिन सी और कैल्शियम के कारण दांत मोती जैसे चमकने लगते हैं।
  • बेकिंग सोडा पीले दांतों को सफेद बनाने का सबसे अच्छा घरेलू तरीका है। ब्रश करने के बाद थोड़ा-सा बेकिंग सोडा लेकर दांतों को साफ करें। इससे दांतों पर जमी पीली पर्त धीरे-धीरे साफ हो जाती है। बेकिंग सोडा और थोड़ा नमक टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करने से भी दांत साफ हो जाते हैं।
  • एक नींबू का रस निकालकर उसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिला लें। खाने के बाद इस पानी से कुल्ला करें। यह उपाय रोज करने से दांतों का पीलापन चला जाता है और सांसों की दुर्गंध भी दूर हो जाती है।
  • स्ट्रॉबेरी दांतों को चमकदार बनाने का सबसे टेस्टी उपाय है। स्ट्रॉबेरी में पाया जाने वाला मैलिक एसिड दांतों को सफेद और चमकदार बनाता है। पहले स्ट्रॉबेरी को पीस लें। इसके पल्प में थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाएं। ब्रश करने के बाद इस मिश्रण को उंगली से दांतों पर लगाएं। कुछ दिनों तक यह उपाय नियमित रूप से करने पर दांत चमकने लगेंगे।
  • केले को पीस कर इसका पेस्ट बना लें। इसके पेस्ट से दांतों को रोज एक मिनट तक मसाज करें। उसके बाद दांतों को ब्रश करें। रोजाना ये उपाय करने से धीरे-धीरे दांतों का पीलापन खत्म हो जाएगा।
  • एक चम्मच जैतून के तेल में एप्पल विनेगर मिला लें। इस मिश्रण में अपना टूथब्रश डुबाए और दांतों पर हल्के-हल्के घुमाएं। ये प्रक्रिया तब तक दोहराएं, जब तक मिश्रण खत्म न हो जाएं। इस नुस्खे को अपनाने से दांतों का पीलापन मिट जाता है। साथ ही, सांसों की दुर्गंध की समस्या भी नहीं रहती है।

Tuesday, May 17, 2016

हींग के फ़ायदे,Health Benefits of Hing in Hindi,

हींग  का प्रयोग हम मुख्य तौर पर खाने में मसाले के रूप में ही करतेहै, हींग को खाने के स्वाद को बढाने केसाथ साथ कई तरह के घरेलू नुस्खों मेंभी प्रयोग किया जाता है। हींगको दाल और रायते में छौंक लगाने मेंभी प्रयोग किया जाता है, आज हम हींगसे होने वाले फायदों के बारे में बात करेंगें क्योकि हींग में बहुत से लाभदायक गुण पाये जाते है।
  • यदि कभी आपको अचानक से पेट दर्द होने लगे तब थोड़ी सी हींग को पानी में घोलकर हल्का सा गर्म करके नाभि तथा इसके आसपास लेप लगायें, ऐसा करने से पेट दर्द में तुरंत ही आराम मिल जायेगा। 
  • दांत दर्द की समस्या होने पर हींग में थोड़ा सा कपूर मिलाकर दर्द वाली जगह पर लगाने से दांत में दर्द होना बंद हो जाता है। 
  • अपने रोज के खाने में दाल, कढ़ी और सब्जियों में हींग का प्रयोग करने से खाने को पचने में सहायता मिलती है। 
  • यदि आपके शरीर के किसी जगह पर कांटा चुभ गया हो तो उस जगह पर हींग का घोल लगा दें , ऐसा करने से काँटा चुभने का दर्द भी कम होगा और कांटा अपने आप ही निकल जायेगा। 
  • एसिडिटी की समस्या होने पर थोड़ी सी हींग को गुड़ में मिलाकर गरम पानी के साथ खा लें, इससे गैस से होने वाले दर्द में आराम मिल जायेगा। 
  • पेट में दर्द व ऐंठन होने पर अजवाइन और काले नमक नमक के साथ हींग का सेवन करने से दर्द में काफी फायदा मिल जाता है। 
  • माइग्रेन और सिरदर्द में आधा कप पानी में हींग मिलाकर पीने से आराम मिलता है। 
  • दाद, खाज, खुजली जैसे त्वचा संबंधी रोगों के लिए हींग बहुत फायदेमंद होती है। चर्म रोग होने पर हींग को पानी में घिसकर प्रभावित स्थानों पर लगाने से फायदा होता है। 
  • अफीम का नशा उतारने के लिए थोडी सी हींग को पानी में घोलकर पिला दें, इससे नशा जल्दी उतर जाता है। 
  • जुकाम होने पर बहुत से लोगो की नाक बंद हो जाती है जिससे साँस लेने में काफी तकलीफ हो जाती है, हींग सूंघने से जुकाम से बंद हुई नाक खुल 
  • पसलियों में दर्द हो तो पानी में हींग घोलकर पसलियों पर लेप करें, आराम मिलेगा 
  • बच्चों को न्यूमोनिया में हींग का पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में देते रहने से बहुत आराम मिलता है। 
  • भोजन में हींग के नियमित सेवन से महिलाओं के गर्भाशय का संकुचन होता है और मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं। 
  • यदि आपको दाद की समस्या है तो गन्ने के रस में सिरके के साथ थोड़ा हींग पाउडर मिलाएं। सुबह-शाम दाद पर लगाएं। कुछ ही दिनों में दाद खत्म हो जाएगा। 
  • पुराने गुड़ में थोड़ी-सी हींग मिलाकर सेवन करने से हिचकी तुरंत बंद हो जाती है। 
  • यदि कोई जहर खा ले तो उसे तुरंत हींग का पानी पिलाएं। ऐसा करने से उल्टी के द्वारा जहर बाहर निकल जाता है और जहर का प्रभाव खत्म हो जाता है। 
  • हिस्टीरिया के रोगी को हींग सुंघाने पर तुरंत होश आ जाता है

Thursday, May 5, 2016

संतरे के छिलके के फायदे,Health Benefits of Orange Peels,

संतरा गुणों की खान होता है। इसमें विटामिन सी एवं फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं जो आपके शरीर को काफी फायदा पहुंचाता हैं।लेकिन इसका छिलका भी कम गुणवान नहीं होता। इसके छिलके में भी सैकड़ों गुण छुपे होते हैं जो आपके शरीर को ढेरों फायदा पहुंचाते हैं। ।जब हम संतरे को खाते हैं तो सामान्यत: हम उसके छिलके को फेंक देते हैं या उसके छिलके का उपयोग एक दूसरे की आंखों में डालने व रुलाने के लिए मस्ती में करते हैं जो एक तरह से एक उपयोगी चीज का नुकसान करना ही कहलाएगा। जी हां आपको ये सुनकर आश्चर्य जरूर हो रहा होगा लेकिन यह सच है। आइये जाने संतरे के छिलकों के कुछ अद्भुत फायदे
  • बालों को खूबसूरत बनाता है- अगर आपके बाल एकदम रफ और बेजान दिखाई देते हैं तो संतरे के छिलके आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। 
  • संतरे के छिलकों को पीसकर बालों में लगाकर कुछ देर रखें और फिर बाल धो लें। बाल चमकीले और मुलायम हो जाएंगे। संतरे के छिलकों को पीस कर उसमे गुलाब जल मिलाकर चहरे पर लगाने से दाग व धब्बे मिटते हैं।
  • यह भूख को नियंत्रित कर मोटापे को कम करता है. 
  • इसमें केल्शियम और फ्लेवेनोइड ऑस्‍टियोपोरोसिस से बचाते है.
  • यह ऑयली स्‍किन के लिये लाभदायक है साथ ही पिंपल की रोकथाम भी करता है। इसको फेस पैक में डालने से डेड स्‍किन साफ होती है और ब्‍लैकहेड्स भी निकलते हैं।
  • छिलके में क्‍लीजिंग, एंटी इन्‍फिलेमेट्री, एंटी फंगल और एंटी बैक्‍टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो कि पिंपल और एक्‍ने से लड़ने में सहायक होते हैं।घर में आ रही बदबू को मिटाने के लिये संतरे के छिलके को लौंग या दालचीनी के साथ पानी डाल कर उबालिये।
  • कई प्रकार के खानों में इसका प्रयोग स्‍वाद बढाने के लिये किया जाता है। साथ ही ब्राउन शुगर में नमी को खतम करने के लिये सूखे छिलको का प्रयोग कर सकती हैं।
  • आप संतरे के छिलकों को उबाल कर उसकी चाय बना कर पी सकते है जिससे हमें उसके लाभ मिले. इसे पीने से अनिंद्रा में भी काफी आराम मिलता है।
  • इसमें भरपूर विटामिन और खनिज होते है जो हमें दिमागी रोगों जैसे डिप्रेशन ,तनाव माइग्रेन आदि से बचाते है और हमारी नर्वस सिस्टम को ठीक रखते है. इनमे मौजूद विटा.सी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है. इसमें मौजूद विटामिन ए हमारी त्वचा को और रक्त संचारण को ठीक रखता है. इसमें पेक्टिन होता है जो कब्ज़ को दूर करता है.
  • यह कैंसर से बचाता है. संतरे व नींबू जैसे खट्टे फलों में मोनोटरपीनिज नाम का तेल पाया जाता है। यह तेल त्वचा, पेट और फेफड़ों को कैंसर से सुरक्षा देता है
  • संतरे के छिलके के अंदरूनी सफेद हिस्सों में हेरपेरिदिन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, रक्तचाप को सामान्य रखने और पैक्टिन तत्व शुगर के स्तर को सामान्य रखने मे मददगार साबित होता है।
  • स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं- संतरे के छिलके में क्लीजिंग, एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो कि पिंपल और एक्ने से लडऩे में सहायक होते हैं। 
  • संतरे के छिलके को सुखाकर पीसकर उसे दही मिलाकर स्किन पर लगाने से स्किन ग्लोइंग व स्मूथ बनती है। संतरे के छिलकों को बेसन में मिलाकर लगाना ऑइली स्किन वालों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है और पिंपल्स को खत्म कर देता है।
  • कोलेस्टॉल के रोगियों के लिए फायदेमंद है - एक अध्ययन के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को कोलेस्ट्रॉल की प्रॉब्लम हो तो ऐसे में संतरे के छिलके उपयोगी साबित हो सकते हैं। संतरे के छिलको में ऐसा गुण पाया जाता है जिससे उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर है जो मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों को फायदा हो सकता है। साथ ही ये कैंसर व हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याओं में भी विशेष रूप से लाभदायक है।
  • पाचन शक्ति बढ़ाता है- इसके छिलके में पाचनशक्ति बढ़ाने की क्षमता होती है। यह पाचन में सुधार, गैस, उल्टी, हार्ट बर्न और अम्लीय डकार को दूर करने में मदद करता है। 
  • यह भूख बढाता है और मतली से राहत दिलाने का काम करता है साथ ही संतरे का छिलका कृमि का नाश करने वाला व बुखार को मिटाने वाला भी होता है। इसलिए इन सभी रोगों के रोगियों को संतरे का छिलका पीसकर खिलाने पर फायदा होता है।
  • अनिद्रा की समस्या को दूर करता है- नारंगी के छिलके में एक विशेष प्रकार की गंध वाला तेल पाया जाता है। जी हां नारंगी के छिलके में एक विशेष प्रकार की गंध वाला तेल पाया जाता है। इस तेल का उपयोग तंत्रिकाओं को शांत करने व गहरी नींद के लिए किया जाता है। नहाने के पानी में इसका दो से तीन बूंद तेल डालिए और फिर देखिए कितनी मीठी नींद आती है।

Saturday, March 26, 2016

जोड़ों का दर्द,Joint Pain Treatment in Hindi,Arthritis Pain,

आर्थरायटिस अथवा गठिया वात अथवा जोड़ो का दर्द और तकलीफ होना आदिकाल से चली आ रही बीमारी है यह मानव जाति की अति प्राचीन बीमारी है जोड़ो की तकलीफ मनुष्यों को तो होती ही है स्तन्पायी जानवरों को भी ऐसी ही तकलीफ होती है  आयुर्वेद मे आर्थराइटिस बीमारी का बहुत अच्छा विवरण दिया गया है , इसके कारणों का उल्लेख भी किया गया है और इस तकलीफ से बचने के लिये क्या करना चाहिये और ऐसा जीवन शैली मे क्या बदलाव करने चाहिये , खान पान मे क्या एहतियात बरतना चाहिये आदि बातों के बारे मे बहुत ही सार गर्भित स्वरूप मे बताया गया है

इसके अलावा आयुर्वेद यह भी बताता है कि अगर arthritis अथवा arthritis जैसी बीमारी हो जाती है तो उसका उपचार करना चाहिये ताकि स्वास्थय और आरोग्य प्राप्त किया जा सके ? आयुर्वेद यह भी बताता है कि उपचार मे किस तरह की दवाओ का सेवन करना चाहिये और इलाज मे मदद और सहायता पहुचाने के लिये किस तरह की सहायक चिकित्सा यथा पन्च कर्म और मालिश और वाहरी उपयोगी उपचार की व्यवस्था किया जाये ताकि शीघ्र लाभ प्राप्त हो सके

जोड़ों का दर्द उपाय,Arthritis Pain Relief,Heumatoid Arthritis Pain Relief,Knee Pain,
  • हल्दी-चूर्ण, गुड़, मैथी दाना पाऊडर और पानी सामान मात्रा में मिलाकर, गरम करके इनका लेप, रात को घुटनों पर करें व पट्टी बाँधकर रातभर बंधे रहने दें. सुबह पट्टी हटा कर साफ कर लें. कुछ ही दिनों में जबरदस्त फायदा महसूस होने लग जाएगा
  • अलसी के दानों के साथ 2 अखरोट की मिगी सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.
  • मैथी के लड्डू खाने से हाथ-पैर और जोड़ों के दर्दो में आराम मिलता है.
  • अँकुरित मैथी दाने खाएँ और उसके खाने के बाद आधे घंटे तक कुछ न खाएँ.
  • 30 की उम्र के बाद मैथी दाने की फाँकी लेने से शरीर के जोड़ मजबूत बने रहते हैं तथा बुढ़ापे तक मधुमेह, ब्लड प्रेशर और गठिया जैसे रोगों से बचाव होता है.
  • मैथी दानों को तवे या कढ़ाही में गुलाबी होने तक सेकें. ठंडा होने पर पीस लें. रोज सुबह खाली पेट आधा चम्मच, एक गिलास पानी के साथ लें.
  • मैथी दानों को दरदरा कूटकर सर्दियों में 2 चम्मच और गर्मी में एक चम्मच की फाँकी सुबह-सुबह खाली पेट पानी के साथ लें.
  • नीम का तेल एवं अरंडी का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम इसकी मालिश कीजिए.
  • अगर कैल्शियम की कमी से जोड़ों का दर्द हो तो खाने वाला चूना खाईए. गेंहू के दाने के आकार का चूना दही या दूध में घोल कर दिन में एक बार के हिसाब से, 90 दिन तक लीजिए. ध्यान रखें 90 दिन से अधिक नहीं लेना है
  • अगर घुटनों की चिकनाई ख़तम हुई हो गई हो और जोड़ो के दर्द में किसी भी प्रकार की दवा से आराम ना मिलता हो तो ऐसे लोग हारसिंगार (पारिजात) पेड़ के 12 पत्तों को कूटकर 1 गिलास पानी में उबालें. जब पानी एक चौथाई बच जाए तो बिना छाने ही ठंडा करके पी लें. 90 दिन में चिकनाई पूरी तरह वापिस बन जाएगी. अगर कुछ कमी रह जाए तो 1 महीने का अंतर देकर फिर से 90 दिन तक इसी क्रम को दोहराएँ. निश्चित लाभ की प्राप्ति होती है.
  • गाजर में जोड़ों में दर्द को दूर करने के गुण मौजूद हैं |चीन में सैंकडों वर्षों से गाजर का इस्तेमाल संधिवात पीड़ा के लिए किया जाता रहा है| गाजर को पीस लीजिए और इसमें थोड़ा सा नीम्बू का रस मिलाकर रोजाना खाना उचित है| यह घुटनों के लिगामेंट्स का पोषण कर दर्द निवारण का काम करता है
  • मैथी के बीज संधिवात की पीड़ा निवारण करते हैं एक चम्मच मैथी बीज रात भर साफ़ पानी में गलने दें सुबह पानी निकाल दें और मैथी के बीज अच्छी तरह चबाकर खाएं| शुरू में तो कुछ कड़वा लगेगा लेकिन बाद में कुछ मिठास प्रतीत होगी| भारतीय चिकित्सा में मैथी बीज की गर्म तासीर मानी गयी है| यह गुण जोड़ों के दर्द दूर करने में मदद करता है
  • प्याज अपने सूजन विरोधी गुणों के कारण घुटनों की पीड़ा में लाभकारी हैं दर असल प्याज में फायटोकेमीकल्स पाए जाते हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम को ताकतवर बनाते हैं प्याज में पाया जाने वाला गंधक जोड़ों में दर्द पैदा करने वाले एन्जाईम्स की उत्पत्ति रोकता है| एक ताजा रिसर्च में पाया गया है कि प्याज में मोरफीन की तरह के पीड़ा नाशक गुण होते हैं
  • गरम तेल से हल्की मालिश करना घुटनों के दर्द में बेहद उपयोगी है एक बड़ा चम्मच सरसों के तेल में लहसुन की २ कुली पीसकर डाल दें इसे गरम करें कि लहसुन भली प्रकार पक जाए| आच से उतारकर मामूली गरम हालत में इस तेल से घुटनों या जोड़ों की मालिश करने से दर्द में तुरंत राहत मिल जाती है|इस तेल में संधिवात की सूजन दूर करने के गुण हैं| घुटनों की पीड़ा निवारण की यह असरदार चिकित्सा है
  • प्रतिदिन नारियल की गिरी का सेवन करें|इससे घुटनों को ताकत आती है
  • लगातार 20 दिनों तक अखरोट की गिरी खाने से घुटनों का दर्द समाप्त होता है
  • बिना कुछ खाए प्रतिदिन प्रात: एक लहसन कली, दही के साथ दो महीने तक लेने से घुटनों के दर्द में चमत्कारिक लाभ होता है।घुटनों में दर्द को कम करने के लिए गरम या ठंडे पेड से सिकाई की जरूरत हो सकती है
  • घुटनों में तीव्र पीड़ा होने पर आराम की सलाह डी जाती है ताकि दर्द और सूजन कम हो सके\ फिजियो थेरपी में चिकित्सक विभिन्न प्रक्रियाओं के द्वारा घुटनों के दर्द और सूजन को कम करने का प्रयास करते हैं घुटनों के लचीलेपन को बढाने के लिए दाल चीनी,जीरा,अदरक और हल्दी का उपयोग उत्तम फलकारी है| इन पदार्थों में ऐसे तत्त्व पाए जाते हैं जो घुटनों की सूजन और दर्द का निवारण करते हैं
क्या आप भी जोड़ो के दर्द से परेशान हैं और तरह-तरह के पेन किलर खा कर हार चुके हैं एक बार इसे जरूर आजमाएं-
आमवातारि रस एक रस
  • आमवातारि रस एक रस-औषधि है जिसमें रस, पारा है। पारे को ही आयुर्वेद में रस या पारद कहा जाता है और बहुत सी दवाओं के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। 
  • पारा एक विषाक्त धातु है और इसे आयुर्वेद में केवल सही प्रकार से शोधित कर के ही इस्तेमाल किया जाता है। रस औषधियां शरीर पर शीघ्र प्रभाव डालती हैं।
  • आमवातारि रस का प्रयोग बहुत से वात-रोगों के उपचार में होता है। इसका सेवन जोड़ों की जकड़न, दर्द, सूजन आदि में आराम देता है। आमवात आयुर्वेद में रयूमेटोइड आर्थराइटिस को कहा जाता है और आमवातारि रस इसकी अच्छी औषधि है।
यह दवा किसी आयुर्वेदिक स्टोर से भी खरीद सकते है 

NOTE-किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें

    Tuesday, March 8, 2016

    डायबिटीज/शुगर/मधुमेह के कारण लक्षण,शुगर का घरेलू इलाज,Sugar Treatment in Hindi‎,

    डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लाँघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आँकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। ड़ायबीटिज एक बहुत हीं खतरनाक बीमारी है लेकिन अगर आप प्राकृतिक उपायों से इस पर नियंत्रण कर सके तो मधुमेह से आपको घबराने की जरुरत नहीं है। डायबीटिज को समझें और उसका उपचार करें। निम्न कुछ प्राकृतिक उपचार से आप ड़ायबीटिज पर नियंत्रण पा सकते हैं।

    मधुमेह के मुख्य लक्षण

    • थकान, कमजोरी, पैरों में दर्द, क्योंकि ग्लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता।
    • पैर का घाव ठीक न होना और गैंग्रीन का रूप ले लेना। 
    • अधिक पेशाब और भूख लगना। 
    • तेजी से वजन गिरना। 
    • बार-बार चश्मे का नंबर बदलना। 
    • जननांगों में खुजली और संक्रमण होना। 
    • हृदय आघात, मस्तिष्क आघात का होना।

    कैसे करें डायबिटीज कंट्रोल, डायबीटिज के उपचार के लिए.Sugar Treatment

    • दालचीनी,-अध्ययन से पता चलता है कि दालचीनी मधुमेह को नियंत्रित करने में बहुत हीं महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दालचीनी लगभग हर घर में पाया जाता है। यह हानिकारक कोलेस्ट्रोल को कम करता है और आपके शरीर में रक्त शर्करा कि मात्रा को भी घटाता है जिससे मधुमेह के रोगियों को बहुत हीं लाभ पहुँचता है। दालचीनी भले हीं मधुमेह का प्राकृतिक उपचार करने में सहायक सिद्ध होता है लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे लाभ कि बजाये नुकसान हो सकता है। आप दालचीनी पीस लें और चुटकी भर चाए में उबालकर दिन में एक दो बार पिया करें। जो लोग मधुमेह के शिकार हो चुके हैं और उसके लिए दवाइयां ले रहे हैं वे दालचीनी का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर कि सलाह अवश्य लें। लेकिन जिन्हें मधुमेह नहीं हुआ है या जो अब तक मधुमेह कि दवाइयां नहीं ले रहे हैं वे अगर दालचीनी का नियमित रूप से सेवन करें तो वे ड़ायबिटिज के शिकार होने से बच सकते हैं।
    • अंजीर के पत्ते-अंजीर के पत्ते कई प्रकार के रोगों के उपचार में लाभ पहुंचाते हैं जैसे ब्रोंकाइटिस, जननांग मौसा, लीवर सिरोसिस, उच्च रक्तचाप इत्यादि। लेकिन मधुमेह के इलाज के लिए अंजीर के पत्ते सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। अंजीर के पत्तों से न सिर्फ मधुमेह का उपचार किया जाता है बल्कि ये पत्ते और भी कई बीमारियों में लाभ पहुंचाते है। इसके पत्ते को उबालकर, छानकर, पानी को ठंढा करके पीया करें।
    • आम के पत्ते-यूँ तो पका हुआ आम मधुमेह के मरीजों के लिए पूरी तरह से वर्जित होता है लेकिन इसके विपरीत आम के पत्ते मधुमेह के मरीजों को काफी लाभ पहुंचाते हैं। आप आम के कुछ ताजे पत्तों को एक ग्लास पानी में उबाल लें और रात भर उसे वैसे हीं छोड़ दें। सुबह होने पर पानी को स्वच्छ कपडे से छान लें और खाली पेट में पी लिया करें। ऐसा नियमित रूप से कई दिनों तक करने से ड़ायबीटीज के मरीजों को काफी फायदा पहुंचता है। यह मधुमेह के लिए एक बहुत हीं प्रभावी प्राकृतिक एवं घेरेलू उपाय है।
    • जामुन की चार-पांच पत्तियां सुबह एवं शाम को खाकर चार-पांच रोज पश्चात शुगर टेस्ट करवायें । आशा से अधिक वांछित परिणाम आयेगें ।
    • नीम की सात से आठ हरी मुलायम पत्तियां सुबह हर रोज खाली पेट चबाकर उसका रस निगल जाये ऐसा नियमित करते रहने से शुगर पर नियन्त्रण बना रहता है, एवं दस-पन्द्रह दिन तक यह प्रयोग करने के बाद आप जरूरत के मुताबिक चाय मिठी और मीठा भोजन भी ले सकते हैं । शुगर आपका कोई भी नुकसान नहीं कर सकती है ।
    • मेथी के बीज-ड़ायबीटिज को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मेथी के बीज भी बहुत हीं कारगर सिद्ध होते हैं। मेथी के बीज में कुछ ऐसे घटक छिपे होते हैं जो आपके शरीर के भीतर मौजूद रक्त शर्करा को कम करते हैं। इसमें ४ हाईड्रोओक्सीसोल्युसीन नामक अमीनो एसिड होता है। यह अमीनो एसिड आपके अग्न्याशय से इंसुलिन का स्राव उत्तेजित करते हैं जिसकी वजह से आपके रक्त में मौजूद शर्करा इंधन के रूप में बदल जाता है। इस तरह एक ओर जहाँ इस प्रक्रिया से आपको शक्ति एवं उर्जा मिलती है वही दूसरी ओर आपके शरीर में रक्त शर्करा की मात्रा कम होती है। मेथी के बीज में जेनटियानाइन, ट्रीगोनेलीन और कारपाइन नामक घटक भी पाए जाते हैं जो आपके भोजन से कार्बोहाईडरेट का अवशोषण धीमा करते हैं और आपके रक्त प्रवाह में ग्लूकोज की मात्रा घटाते हैं।
    • करेले का रस-ताजे करेले का रस भी ड़ायबीटिज को नियंत्रित करने का एक बहुत हीं प्रभावकारी प्राकृतिक उपचार है। एक छोटे से करेले का बीज निकाल लें और करेले का रस निकलकर रोजाना सुबह सुबह खाली पेट में पीया करें। यह आपके लीवर और अग्न्याशय को स्वस्थ रखता है जिससे कि इंसुलिन का उत्पादन सुचारू रूप से होता रहता है और आपके रक्त में रक्त शर्करा की मात्रा बढ़ने नहीं पाती। 
    • अमरूद का एक या दो स्वच्छ किटाणु रहित पत्तों को थोड़ा कुटकर रात्रि को कांच के गिलास में (पात्र धातु का न हो) या चीनी मिट्टी के प्याले में भिगोकर सुबह खाली पेट पीने से एक माह में ही अनुकूल परिणाम नजर आयेगें ।

    • आयुर्वेद की दवा का जरूर इस्तेमाल करें
    • 100 ग्राम (मेथी का दाना )ले ले इसे धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
    • 100 ग्राम (तेज पत्ता ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
    • 150 ग्राम (जामुन की गुठली )लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
    • 250 ग्राम (बेलपत्र के पत्ते ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
    • मेथी का दना - 100 ग्राम -तेज पत्ता -100 ग्राम-जामुन की गुठली -150 ग्राम-बेलपत्र के पत्ते - 250 ग्राम तो इन सबका पाउडर बनाकर इन सबको एक दूसरे मे मिला लें ! बस दवा तैयार है इसे सुबह -शाम (खाली पेट ) 1 से डेड चम्मच से खाना खाने से एक घण्टा पहले गरम पानी के साथ लें 2 से 3 महीने लगातार इसका सेवन करें !! (सुबह उठे पेट साफ करने के बाद ले लीजिये कई बार लोगो से सीधा पाउडर लिया नहीं जाता ! तो उसके लिए क्या करें
    • आधे से आधा गिलास पानी को गर्म करे उसमे पाउडर मिलाकर अच्छे से हिलाएँ !! वो सिरप की तरह बन जाएगा ! उसे आप आसानी से एक दम पी सकते है ! उसके बाद एक आधा गिलास अकेला गर्म पानी पी लीजिये

    सावधानी एवं बचने के उपाय

    • सुव्यवस्थित तथा स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली अपनाएँ। 
    • रक्त में शक्कर के स्तर की नियमित जाँच करवाएँ। 
    •  एक आहार विशेषज्ञ द्वारा तय किए गए डाइट चार्ट से मधुमेह पर नियंत्रण रखा जा सकता है। 
    • उचित दवाइयाँ समय पर लें। 
    • कसरत करें और अपने आपको शारीरिक श्रम में व्यस्त रखें।
    • छोटे अंतराल तक पैदल घूमना 
    • 20 मिनट द्रुत गति से पैदल चलना (दिन में दो बार तथा सप्ताह में पाँच बार) 
    • ऐसी कसरत से पैरों में तथा पंजों में रक्त संचार होगा तथा रक्त शिराएँ मजबूत एवं विकसित होंगी। पैदल चलना दिल की धड़कनों के लिए अच्छा होता है।

    Saturday, March 5, 2016

    प्याज के गुण-Health Benefits of Onion in Hindi

    प्याज के गुण-Health Benefits of Onion in Hindi

      दिखने में साधारण-सा प्याज एक बेहतरीन सब्जी भी है और एक बेजोड़ औषधि भी। आइये जानते हैं इसके औषधीय गुण हम प्याज का सलाद एवं सब्जी के रूप में तो उपयोग करते ही हैं,यह एक बेहतरीन औषधि भी है।प्याज अजीर्ण और पतले दस्त में लाभकारी है।यह जीवाणुरोधी, तनावरोधी व दर्द निवारक, मधुमेह नियंत्रक, प्रदाह निवारक, पथरी हटाने वाला और गठियारोधी भी है।कहा तो यह भी गया है कि त्वचा पर घिसने से यह बालों में वृद्धि करता है।
        • लू-लपट में घर से निकलने के पूर्व जेब में प्याज रखकर निकलने की हिदायत तो बुजुर्ग देते ही रहते हैं।वैज्ञानिकों का दावा है कि प्याज खाने से दिल संबंधी रोगों का खतरा बहुत हद तक घट जाता है :वैज्ञानिकों की मानें तो भारतीय खाने में प्याज का इस्तेमाल बैड कोलेस्ट्रोल को शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है, जिससे हर्ट अटैक और स्ट्रोक्स का खतरा कम रहता है। गौरतलब है कि शरीर में कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ने से ही हर्ट अटैक आता है। प्याज का सेवन शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रोल का स्तर बढ़ाने में भी मददगार साबित होता है। हांगकांग के वैज्ञानिकों ने लाल प्याज के शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव को जानने के लिए यह अध्ययन किया था।
        • इसके लिए वैज्ञानिकों ने उच्च-कोलेस्ट्रोल युक्त आहार में प्याज को शामिल कर उसके प्रभाव को जानने की कोशिश की। वैज्ञानिकों ने पाया कि जिन लोगों ने आठ सप्ताह तक प्याज का सेवन किया था, उनके शरीर में बैड कोलेस्ट्रोल के स्तर में 20 फीसदी तक की कमी आई। इस अध्ययन के आधार पर हांगकांग के चाइनीज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक झेन यू चेन ने दावा किया है कि प्याज का नियमित सेवन करने से ह्वदय संबंधी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है हर घर में, हर रसोई में, हर सब्जी की टोकरी में प्याज सदा उपलब्ध रहता है। इसके गुण अपार हैं। इनका लाभ नहीं उठाने वाले को तो डाक्टरों के क्लीनिक के चक्कर तो काटने ही पड़ेंगे। जब जागो, तभी सबेरा।आंखों के लिए यह बेहतरीन

        प्याज के लाभ

        • लू लगने पर – गर्मियों के मौसम में प्याज खाने सू लू नहीं लगती है। लू लगने पर प्याज के दो चम्मच रस को पीना चाहिए और सीने पर रस की कुछ बूंदों से मालिश करने पर फायदा होता है। एक छोटा प्याज साथ में रखने पर भी लू नहीं लगती है। 

        बालों के लिए

        • बाल गिरने की समस्या से निजात पाने के लिए प्याज बहुत ही असरकारी है। गिरते हुए बालों के स्थान पर प्याज का रस रगडने से बाल गिरना बंद हो जाएंगे। इसके अलावा बालों का लेप लगाने पर काले बाल उगने शुरू हो जाते हैं।

        पेशाब बंद होने पर

        • पेशाब बंद होने पर अगर पेशाब होना बंद हो जाए तो प्याज दो चम्मच प्याज का रस और गेहूं का आटा लेकर हलुवा बना लीजिए। इसको गर्म करके पेट पर इसका लेप लगाने से पेशाब आना शुरू हो जाता है। पानी में उबालकर पीने से भी पेशाब संबंधित समस्या समाप्त हो जाती है।

        जुकाम के लिए

        • जुकाम के लिए – प्याज गर्म होती है इसलिए सर्दी के लिए बहुत फायदेमंद होती है। सर्दी या जुकाम होने पर प्याज खाने से फायदा होता है। उम्र के लिए – प्याज खाने से कई शारीरिक बीमारियां नहीं होती हैं।इसके आलावा प्याज कई बीमारियों को दूर भगाता है। इसलिए यह कहा जाता है कि प्याज खाने से उम्र बढती है, क्योंकि इसके सेवन से कोई बीमारी नहीं होती और शरीर स्वस्थ्य रहता है।

        पथरी के लिए

        • अगरआपको पथरी की शिकायत है तो प्याज आपके लिए बहुत उपयोगी है। प्याज के रस को चीनी में मिलाकर शरबत बनाकर पीने से पथरी की से निजात मिलता है। प्याज का रस सुबह खाली पेट पीने से पथरी अपने-आप कटकर बाहर निकल जाती है।

        गठिया के लिए

        • गठिया में प्याज बहुत ही फायदेमंद होता है। गठिया में सरसों का तेल व प्याज का रस मिलाकर मालिश करें, फायदा होगा। 

        यौन शक्ति के लिए

        • प्याज खाने से शरीर की यौन क्षमता बढती है। शारीरिक क्षमता को बढाने के लिए पहले से ही प्याज का इस्तेमाल होता आया है। प्याज आदमियों के लिए यौन शक्ति बढाने का सबसे अच्छा टॉनिक है। 

        अन्य उपयोग

        • मोतियाबिंद, सिर दर्द, कान दर्द और सांप के काटने पर भी प्रयोग किया जाता है।
        • प्याज का पेस्ट लगाने से फटी एडियों को राहत मिलती है। कान बहता हो, उसमें दर्द या सूजन हो तो प्याज तथा अलसी के रस को पकाकर दो- दो बूंदें कई बार कान में डालने से आराम मिलता है। यदि कोई अंग आग से जल गया हो तो तुरंत प्याज कूटकर प्रभावित स्थान पर लगाना चाहिए। 
        • विषैले कीड़े, बर्र, कनखजूरा और बिच्छू काटने पर प्याजको कुचलकर उसका लेप लगाना चाहिए। बिल्ली या कुत्ते के काटने पर रोगी को डॉक्टर केपास जाने तक प्याजऔर 
        • पुदीने के रस को तांबे के बर्तन पर डालकर प्रभावित स्थान पर लगाइए इससे विष उतरजाएगा। हिस्टीरिया या मानसिक आघात से यदि रोगी बेहोश हो गया हो तो उसे होश में लाने के लिए प्याज कूटकर सुंघाएं इससे रोगी तुरंत होश में आ जाता है। 
        • मूत्राशय की पथरी को दूर करने के लिए रोगी को प्याज के रस में शकर डालकर शर्बत बनाकरपिलाएं।ऐसा शर्बत नियमित रूप से पिलाने से पथरी कट-कटकर निकल जाती है। इस दौरान रोगी को टमाटर, साबुत मूंग तथा चावल न खाने दें। रोगी को भोजन के साथ एक खीरा खाने को दें। साथ ही रोगी को खूब पानी पीने के लिए कहें। किसी नशे में धुत व्यक्ति को यदि एक कप प्याज का रस पिला दिया जाए तो नशे का प्रभाव काफी कम हो जाता है। 
        • आज से ही प्याज से मित्रता करें और इससे सस्ता इलाज और कोई नहीं होता।बच्चे हों या बड़े, खांसी, कफ का सताना, ऐसे में आाप प्याज का रस एक चम्मच निकालें। इसमें पिसी चीनी अथवा गुड़ मिलाएं। रोगी को चटा दें। दिन में तीन बार। आराम मिलेगा।कान में किसी प्रकार का दर्द हो। 
        • महसूस करेंगे कुछ लोग, विशेषकर महिलाएं जोड़ों के दर्दों से अत्यंत दु:खी रहती है। प्याज का रस तथा सरसों तेल बराबर मात्रा में लेकर मिला दें। इससे दर्द करने वाले अंश पर मालिश करें। आराम पाते जाएंगे।यदि त्वचा पर कहीं जलन हो तो भी प्याज के रस और सरसों के तेल की बराबर मात्रा लें। इससे हल्की 
        • मालिश करें, त्वचा जलन से बच सकते हैं।अगर मसूड़े दर्द कर रहे हों या इनमें सूजन हो जाए तो भी प्याज को याद करें। 10 ग्राम के रस में नमक मिलाकर पी लें। दो-चार ऐसी बूंदों से मसूड़ों पर मालिश करें। आराम पा लेंगे।नाक से खून गिरे तो प्याज के रस की दो बूंद डालें सफेद प्याज का रस निकाल कर काजल की तरह 
        • आंखों में डालेंगे तो मिर्गी का दौरा भी खत्म हो जाता है।अधिक गर्मी से हो जाए सिर दर्द तो ऐसे में प्याज तोड़कर सूंघ लें। आराम पा लेंगे। कुछ और भी प्रयोग हैं। आप आजमाएं इन्हें भी या चिकित्सक से सलाह लें

        Thursday, February 18, 2016

        लाल मिर्च के फायदे-The Health Benefits of Cayenne Pepper in Hindi,

        लाल मिर्च के फायदे-Health Benefits of Cayenne Pepper,The Health Benefits of Cayenne Pepper

        • लाल मिर्च के सेवन से मल-मूत्र में आने वाली समस्याएं दूर हो जाती है। लाल मिर्च खाना मोटापा कम करने और भोजन के बाद अधिक कैलोरी जलाने में मददगार हो सकता है
        • Anti-Irritant Properties
        • Anti-Cold and Flu Agent
        • Anti-Fungal Properties
        • Migraine Headache Prevention.
        • Anti-Allergen
        • Digestive Aid.
        • Anti-Redness Properties.
        • Helps Produce Saliva
        • लाल मिर्च पर किए गए वैज्ञानिक शोध से पता चला है कि इसमें से तत्व मौजूद हैं जो शरीर में उठने वाले दर्द के निवारण के लिए लाभदायक होती है।
        • लाल मिर्च की लुगदी बना लें जिस ओर की आंख लाल हो या दर्द हो उसी पैर के अंगूठे पर व लुगदी का लेप करें, यदि दोनों आंख में हो रही हों तो दोनों में करें- 2 घंटे में आंख ठीक हो जायेगी।
        • अशुद्ध पानी से पेट में होने वाली परेशानी है तो लाल मिर्च की चटनी को घी में छोंककर खाने से गंदे पानी का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है।
        • अगर किसी को सांप कांट ले तो मिर्च कड़वी नहीं लगती । मिर्च खिलाने से विष खत्म होगा।
        • विच्छू के काटने पर लाल मिर्च का लेप लगायें ठंडक पड़ जायेगी।
        • गर्मी में हरी मिर्च खाने से इसके बीज अगर आपके पेट में हैं तो हैजा का डर नहीं होता है।
        • हरी मिर्च खाने के साथ खाएं। अचार खाएं इसमें विटामिन सी पर्याप्त मात्रा में होता है।
        • यदि गले में इन्फेंकशन हो गया हो या खांसी हो तो लाल मिर्च की चटनी अवश्य ग्रहण करें।
        • आपको जिस तरह पसंद हो वैसे लाल मिर्च खाएं। लाल मिर्च बेसन में डालकर पकोड़े बनाकर खाएं।

          बवासीर के घरेलू उपचार-Ayurvedic Treatment Of Piles In Hindi,

          बवासीर के घरेलू उपचार-Ayurvedic Treatment Of Piles In Hindi,

          बवासीर के घरेलू उपचार-Ayurvedic Treatment Of Piles In Hindi, 

          बवासीर आजकल एक आम बीमारी के रूप में प्रचलित है। इस रोग मे गुदे की खून की नसें (शिराएं) फ़ूलकर शोथयुक्त हो जाती हैं,जिससे दर्द,जलन,और कभी कभी रक्तस्राव भी होता है।बवासीर का प्रधान कारण कब्ज का होना है।जिगर मे रक्त संकुलता भी इस रोग कारण होती है। मोटापा, व्यायाम नहीं करना और भोजन में रेशे(फ़ाईबर) की कमी से भी इस रोग की उत्पत्ति होती है। बवासीर दो प्रकार की होती है

          Type of piles

          • खूनी बवासीर -अंदर की बवासीर से खून निकलता है इसलिए इसे खूनी बवासीर कहते हैं।
          • बादी-बवासीर -बाहर की बवासीर में दर्द तो होता है लेकिन उनसे खून नहीं निकलता है इसलिए इसे बादी-बवासीर कहते हैं

          बवासीर रोग होने के कारण,cause of piles,

          • मलत्याग करते समय में अधिक जोर लगाकर मलत्याग करना। 
          • बार-बार जुलाव का सेवन करना। बार-बार दस्त लाने वाली दवाईयों का सेवन करना। 
          • उत्तेजक पदार्थों का अधिक सेवन करना। अधिक मिर्च-मसालेदार भोजन का सेवन करना।
          • अधिक कब्ज की समस्या होना। वंशानुगत रोग या यकृत रोग होना। 
          • शारीरिक कार्य बिल्कुल न करना। 
          • शराब का अधिक मात्रा में सेवन करना। पेचिश रोग कई बार होना। 
          • निम्नस्तरीय चिकनाई रहित खुराक लेना। घुड़सवारी करना। 
          • गर्भावस्था के समय में अधिक कष्ट होना तथा इस समय में कमर पर अधिक कपड़ें का दबाव रखना। रात के समय में अधिक जागना। 
          • मूत्र त्याग करने के लिए अधिक जोर लगना। 
          मस्से के लिये कई घरेलू ईलाज हैं,लेकिन सबसे महत्वपूर्ण और आधार भूत बात यह है कि रोगी को 24 घंटे में 4 से 6 लिटर पानी पीने की आदत डालनी चाहिये। ज्यादा पानी पीने से शरीर से विजातीय पदार्थ बाहर निकलते रहेंगे और रोगी को कब्ज नहीं रहेगी जो इस रोग का मूल कारण है। हरी पत्तेदार सब्जियां,फ़ल और ज्यादा रेशे वाले पदार्थों का सेवन करना जरुरी है। 

          बवासीर के घरेलू उपचार-Ayurvedic Treatment Of Piles In Hindi,

          • कलमी शोरा और रसोंत बराबर मात्रा में लेकर मूली के रस में पीस लें,यह पेस्ट बवासिर के मस्सो पर लगाने से तुरंत राहत मिलती है।
          • जमींकंद को भोभर मे भून लें और दही के साथ खाएं।
          • कमल का हरा पता पीसकर उसमे, मिश्री मिलाकर खाने से बवासीर का खून बंद हो जाता है
          • नाग केशर मिश्री और ताजा मक्खन सम भाग मिलाकर खाने से बवासीर रोग नियंत्रण में आ जाता है
          • गुड़ के साठ हरड खाने से बवासीर में लाभ मिलता है
          • बवासीर में छाछ अमृत तुल्य है| छाछ में सैंधा नमक मिलाकर लेना उचित है|
          • मूली के नियमित सेवन से बवासीर ठीक होने के प्रमाण मिले हैं
          • गेंदे के हरे पत्ते १० ग्राम,काली मिर्च के ५ दाने मिश्री १० ग्राम सबको ५० मिली पानी में पीस कर मिला दें | ऐसा मिश्रण चार दिन तक लेते रहने से खूनी बवासीर खत्म हो जाती है
          • बिदारीकंद और पीपल समान भाग लेकर चूर्ण बनालें। ३ ग्राम चूर्ण बकरी के दूध के साथ पियें।
          • कडवी तोरई की जड को पीसकर यह पेस्ट मस्से पर लगाने से लाभ होता है।
          •  करंज,हरसिंगार.बबूल,जामुन,बकायन,ईमली इन छ: की बीजों की गिरी और काली मिर्च इन सभी चीजों को बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर मटर के दाने के बराबर गोलियां बनालें। २ गोली दिन में दो बार छाछ के साथ लेने से बवासिर में अचूक लाभ होता है।
          • आक के पत्ते और तम्बाखू के पत्ते गीले कपडे मे लपेटकर गरम राख में रखकर सेक लें। फ़िर इन पत्तों को निचोडने से जो रस निकले उसे मस्सों पर लगाने से मस्से समाप्त होते हैं।
          • कनेर के पत्ते,नीम के पत्ते ,सहजन के पत्ते और आक के पत्तेपीसकर मस्सों पर लगावें जरूर फ़ायदा होगा।
          • चिरायता,सोंठ,दारूहल्दी,नागकेशर,लाल चन्दन,खिरेंटी इन सबको समान मात्रा मे लेकर चूर्ण बनालें। 5 ग्राम चूर्ण दही के साथ लेने से पाईल्स ठीक होंगे।
          • एलोवेरा( ग्वार पाठा) का गूदा मस्सों पर लगाने से सूजन दूर होती है।
          • विटामिन सी (एस्कोर्बिक एसीड) खून की नलिकाओं को स्वस्थ बनाती है। ५०० एम जी की २ गोली रोज लेना उपकारी है।
          • पके केले को बीच से चीरकर दो टुकडे कर लें और उस पर कत्था पीसकर छिडक दें,इसके बाद उस केले को खुली जगह पर शाम को रख दें,सुबह शौच से निवृत्त होने के बाद उस केले को खालें, केवल १५ दिन तक यह उपचार करने से भयंकर से भयंकर बवासीर समाप्त हो जाती है।
          • हारसिंगार के फ़ूल तीन ग्राम काली मिर्च एक ग्राम और पीपल एक ग्राम सभी को पीसकर उसका चूर्ण तीस ग्राम शकर की चासनी में मिला लें,रात को सोते समय पांच छ: दिन तक इसे खायें। इस उपचार से खूनी बवासीर में आशातीत लाभ होता है। कब्ज करने वाले भोजन पदार्थ वर्जित हैं।
          • दही और मट्ठे के नियमित उपयोग से बवासीर में हितकारी प्रभाव होता है।
          • प्याज के छोटे छोटे टुकडे करने के बाद सुखालें,सूखे टुकडे दस ग्राम घी मेंतलें,बाद में एक ग्राम तिल और बीस ग्राम मिश्री मिलाकर रोजाना खाने से बवासीर का नाश होता है|
          • एक नीबू लेकर उसे काट लें,और दोनो फ़ांकों पर पांच ग्राम कत्था पीस कर छिडक दें, खुली जगह पर रात भर रहने दें,सुबह बासी मुंह दोनो फ़ांकों को चूस लें,कैसी भी खूनी बबासीर दो या तीन हफ़्तों में ठीक हो जायेगी।
          • आम की गुठली का चूर्ण शहद या पानी के साथ एक चम्मच की मात्रा में लेते रहने से खूनी बवासीर ठीक होती है।
          • सूखे आंवले का चूर्ण रात को सोते वक्त मामूली गरम जल से लें । अर्श में लाभ होगा।
          • नारियल की जटा को जलाकर भस्म(राख) करलें और एक शीशी में भरलें। करना ये है कि 3 ग्राम भस्म एक गिलास मट्ठे या दही के साथ उपयोग करें। उपचार खाली पेट लेना है। ऐसी खुराक दिन मे तीन बार लेना है। बस एक दिन में ही खूनी बवासीर ठीक करने का यह अनोखा उपचार है। बवासीर रोग मे हर्बल चिकित्सा उत्तम परिणामकारक सिद्ध हुई है

            पीपल का पत्ता-Health Benefits of Peepal Tree in Hindi,पीपल के पेड़ के लाभ,

            भारतीय जड़ी बूटियां अपने गुणों में अद्धुत है। इनमें तथा पेड़-पौधों में परमात्मा ने दिव्य शक्तियां भर दी हैं। भारतीय वन संम्पदा के गुणों और रहस्यों को जानकर विश्व आश्चर्य चकित रह जाता है। भारतीय जड़ी बूटियों से मनुष्य का कायाकल्प हो सकता है। खोया हुआ स्वास्थ्य एवं यौवन पुनः लौट सकता है। भयंकर से भयंकर रोगों से छुटकारा पाया जा सकता है तथा आयु को लम्बा किया जा स्कता है।



            पीपल का औषधि बच्चे से लेकर वृद्धों तक यह सभी के लिए लाभदायक है। आयुर्वेद में भी पीपल का कई औषधि के रूप में प्रयोग होता है। श्वास, तपेदिक, रक्त-पित्त विषदाह भूख बढ़ाने के लिए यह वरदान है। शास्त्रों में भी पीपल को बहुपयोगी माना गया है तथा उसको धार्मिक महत्त्व बनाकर उसको काटने का निषेध किया गया हमारे पूर्वजों की हमारे ऊपर यह विशेष कृपा है। इस प्रकार पीपल अपने धार्मिक औषधि एवं सामाजिक गुणों के कारण सभी के लिए वंदनीय है।

            • पीपल रोगों का विनाश करता है। पीपल के औषधीय गुण का उल्लेख सुश्रुत संहिता, चरक संहिता में किया गया है। पीपल फेफड़ों के रोग जैसे तपेदिक, अस्थमा, खांसी तथा कुष्ठ, प्लेग, भगन्दर आदि रोगों पर बहुत लाभदायक सिद्ध हुआ है। इसके अलावा रतौंधि, मलेरिया ज्वर, कान दर्द या बहरापन, खांसी, बांझपन, महिने की गड़बड़ी, सर्दी सरदर्द सभी में पीपल औषधि के रूप में प्रयोग होता है।
            • पीपल का वृक्ष रक्तपित्त और कफ के रोगों को दूर करने वाला होता है। पीपल की छाया बहुत शीतल और सुखद होती है। इसके पत्ते कोमल, चिकने और हरे रंग के होते हैं जो आंखों को बहुत सुहावने लगते हैं।
            • औषधि के रूप में इसके पत्र, त्वक्, फल, बीज और दुग्ध व लकड़ी आदि इसका प्रत्येक अंग और अंश हितकारी लाभकारी और गुणकारी होता है। सांप और बिच्छु का विष उतारने में पीपल की लकडिय़ों का प्रयोग होता है।
            • पीपल वृक्ष के पके हुए फल हृदय रोगों को शीतलता और शांति देने वाले होते हैं। इसके साथ ही पित्त, रक्त और कफ के दोष को दूर करने वाले गुण भी इनमें निहित हैं। दाह, वमन, शोथ, अरूचि आदि रोगों में यह रामबाण है। पीपल का फल पाचक, आनुलोमिक, संकोच, विकास-प्रतिबंधक और रक्त शोषक है। पीपल के सूखे फल दमे के रोग को दूर करने में काफ़ी लाभकारी साबित हुआ है। महिलाओं में बांझपन को दूर करने और सन्तानोत्पत्ति में इसके फलों का सफल प्रयोग किया गया है।
            • पीपल का दूध (क्षीर) अति शीघ्र रक्तशोधक, वेदनानाशक, शोषहर होता है। दूध का रंग सफ़ेद होता है। पीपल का दूध आंखों के अनेक रोगों को दूर करता है। पीपल के पत्ते या टहनी तोड़ने से जो दूध निकलता है उसे थोड़ी मात्रा में प्रतिदिन सलाई से लगाने पर आँखों के रोग जैसे पानी आना, मल बहना, फोला, आंखों में दर्द और आंखों की लाली आदि रोगों में आराम मिलता है। इसकी छाल का रस या दूध लगाने से पैरों की बिवाई ठीक हो जाती है।
            • पीपल की छाल स्तम्भक, रक्त संग्राहक और पौष्टिक होती है। सुजाक में पीपल की छाल का उपयोग किया जाता है। इसके छाल के अंदर फोड़ों को पकाने के तत्व भी होते हैं। इसकी छाल के शीत निर्यास का इस्तेमाल गीली खुजली को दूर करने में भी किया जाता है। पीपल की छाल के चूर्ण का मरहम एक शोषक वस्तु के समान सूजन पर लगाया जाता है। इसकी ताजा जलाई हुई छाल की राख को पानी में घोलकर और उसके निथरे हुए जल को पिलाने से भयंकर हिचकी भी रूक जाती है। इसके छाल का चूर्ण भगन्दर रोग को भगाने में किया जाता है।
            • श्रीलंका में तो इसके छाल का रस दांत मसूड़ों की दर्द को दूर करने में कुल्ले के रूप में किया जाता है। यूनानी मत में पीपल की छाल को कब्ज करने वाली माना गया है। इसकी ताजा छाल को जल में भिगोकर कमर में बांघने से ताकत आती है।
            • यूनानी चिकित्सा में इसके छाल को वीर्य वर्धक माना गया है। इसका अर्क ख़ून को साफ़ करता है। इसकी छाल का क्वाथ पीने से पेशाब की जलन, पुराना सुजाक और हडडी की जलन मिटने की बात कही गयी है।
            • पीपल की अन्तरछाल (छाल के अन्दर का भाग) निकालकर सुखा लें और कूट-पीसकर खूब महीन चूर्ण कर लें, यह चूर्ण दमा रोगी को देने से दमा में आराम मिलता है। पूर्णिमा की रात को खीर बनाकर उसमें यह चूर्ण बुरककर खीर को 4-5 घंटे चन्द्रमा की किरणों में रखें, इससे खीर में ऐसे औषधीय तत्व आ जाते हैं कि दमा रोगी को बहुत आराम मिलता है। इसके सेवन का समय पूर्णिमा की रात को माना जाता है।
            • पीपल की छाल को जलाकर राख कर लें, इसे एक कप पानी में घोलकर रख दें, जब राख नीचे बैठ जाए, तब पानी नितारकर पिलाने से हिचकी आना बंद हो जाता है।
            • मसूड़ों की सूजन दूर करने के लिए इसकी छाल के काढ़े से कुल्ले करें।
            • पीपल के पत्ते आनुलोमिक होते हैं। पीपल के पत्तों को गर्म करके सूजन पर बाधने से कुछ ही दिनों में सूजन उतर आता है। खांसी के रोग में पीपल के पत्तों को छाया में सुखाकर कूट- छानकर समान भागकर मिसरी मिला लें तथा कीकर का गोंद मिलाकर चने के आकार समान गोली बना ले। दिनभर में दो से तीन गोलियां कुछ दिनों तक चूसें, खांसी में आराम मिलेगा।
            • पीपल की ताजी हरी पत्तियों को निचोड़कर उसका रस कान में डालने से कान दर्द दूर होता है। कुछ समय तक इसके नियमित सेवन से कान का बहरापन भी जाता रहता है।
            • पीपल के सूखे पत्ते को खूब कूटें। जब पाउडर सा बन जाए, तब उसे कपड़े से छान लें। लगभग 5 ग्राम चूर्ण को दो चम्मच मधु मिलाकर एक महीना सुबह चाटने से दमा और खांसी में लाभ होता है।
            • सर्दी के सिरदर्द के लिए सिर्फ़ पीपल की दो-चार कोमल पत्तियों को चूसें। दो-तीन बार ऎसा करने से सर्दी जुकाम में लाभ होना संभव है।
            • पीपल के 4-5 कोमल, नरम पत्ते खूब चबा-चबाकर खाने से, इसकी छाल का काढ़ा बनाकर आधा कप मात्रा में पीने से दाद, खाज, खुजली आदि चर्म रोगों में आराम होता है। इसके पत्तों को जलाकर राख कर लें, यह राख घावों पर बुरकने से घाव ठीक हो जाते हैं।
            • पीपल की टहनियों में से दातुन बना लें। प्रतिदिन पीपल का दातुन करने से लाभ होता है। यदि आप पित्त प्रकृति के हैं तो यह दातुन आपको विशेषकर लाभकारी होगा। पीपल के दातुन से दांतों के रोगों जैसे दांतों में कीड़ा लगना, मसूड़ों में सूजन, पीप या ख़ून निकलना, दांतों के पीलापन, दांत हिलना आदि में लाभ देता है। पीपल का दातुन मुंह की दुर्गंध को दूर करता है और साथ ही साथ आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।
            • पीपल की टहनी का दातुन कई दिनों तक करने से तथा उसको चूसने से मलेरिया बुखार उतर जाता है।
            • पीलिया के रोगी को पीपल की नर्म टहनी (जो की पेंसिल जैसी पतली हो) के छोटे-छोटे टुकड़े काटकर माला बना लें। यह माला पीलिया रोग के रोगी को एक सप्ताह धारण करवाने से पीलिया नष्ट हो जाता है।
            • बहुत से लोगों को रात में दिखाई नहीं पड़ता। शाम का झुट-पुट फैलते ही आंखों के आगे अंधियारा सा छा जाता है। इसकी सहज औषधि है पीपल। पीपल की लकड़ी का एक टुकड़ा लेकर गोमूत्र के साथ उसे शिला पर पीसें। इसका अंजन दो-चार दिन आंखों में लगाने से रतौंधी में लाभ होता है। उपचार के लिए इसके उपयोग से पूर्व किसी विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लें।
            • कुछ बच्चे तथा बड़े लोग भी शुद्ध उच्चारण नहीं कर पाते, उन्हें हकलाने या तुतलाने की बीमारी हो जाती है। ऎसी स्थिति में उन्हें पीपल के पके फलों का सेवन कराना चाहिए। इससे कुछ ही दिनों में उनकी हकलाहट तथा तुतलाहट खत्म हो जाती है।
            • अफीम के जहर तथा नशे को उतारने के लिए पीपल की छाल का काढ़ा पिलाना चाहिए। इस उपाय से तुरंत ही अफीम का सारा बुरा असर खत्म हो जाता है
            • यदि किसी के घाव दवाईयां लेने के बाद भी नहीं भर रहा हो तो इससे पीपल की छाल को पीसकर रोटी के साथ खाना चाहिए। इससे घाव के कीड़े मर जाते हैं और घाव जल्दी भर जाता है 
            •  नकसीर की समस्‍या में फायदेमंद-नकसीर फूटने की समस्‍या होने पर पीपल के ताजे पत्तों को तोड़कर उसकर रस निकालकर नाक में डालने से बहुत फायदा होता है। इसके अलावा इसके पत्तों को मसलकर सूंघने से भी नकसीर में आराम होता है।
            • फटी एड़ि‍यों में सहायक-एड़ि‍यों के फटने की समस्या में भी पीपल आपकी काफी मदद करेगा। फटी हुई एड़ियों पर पीपल के पत्‍तों का दूध निकालकर लगाने से कुछ ही दिनों फटी एड़ियां ठीक हो जाती हैं और तालु नरम पड़ जाते हैं।
            • पीलिया में फायदेमंद-पीपल के तीन - चार नए पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर बनाए गए शरबत को पीने से पीलिया रोग में फायदा होता है।

            99 प्रतिशत ब्लॉकेज को भी रिमूव कर देता है पीपल का पत्ता….

            • पीपल के 15 पत्ते लें जो कोमल गुलाबी कोंपलें न हों, बल्कि पत्ते हरे, कोमल व भली प्रकार विकसित हों। प्रत्येक का ऊपर व नीचे का कुछ भाग कैंची से काटकर अलग कर दें।
            • पत्ते का बीच का भाग पानी से साफ कर लें। इन्हें एक गिलास पानी में धीमी आँच पर पकने दें। जब पानी उबलकर एक तिहाई रह जाए तब ठंडा होने पर साफ कपड़े से छान लें और उसे ठंडे स्थान पर रख दें, दवा तैयार।
            • इस काढ़े की तीन खुराकें बनाकर प्रत्येक तीन घंटे बाद प्रातः लें। हार्ट अटैक के बाद कुछ समय हो जाने के पश्चात लगातार पंद्रह दिन तक इसे लेने से हृदय पुनः स्वस्थ हो जाता है और फिर दिल का दौरा पड़ने की संभावना नहीं रहती। दिल के रोगी इस नुस्खे का एक बार प्रयोग अवश्य करें।
            • पीपल के पत्ते में दिल को बल और शांति देने की अद्भुत क्षमता है।
            • इस पीपल के काढ़े की तीन खुराकें सवेरे 8 बजे, 11 बजे व 2 बजे ली जा सकती हैं।
            • खुराक लेने से पहले पेट एक दम खाली नहीं होना चाहिए, बल्कि सुपाच्य व हल्का नाश्ता करने के बाद ही लें
            • प्रयोगकाल में तली चीजें, चावल आदि न लें। मांस, मछली, अंडे, शराब, धूम्रपान का प्रयोग बंद कर दें। नमक, चिकनाई का प्रयोग बंद कर दें।
            • अनार, पपीता, आंवला, बथुआ, लहसुन, मैथी दाना, सेब का मुरब्बा, मौसंबी, रात में भिगोए काले चने, किशमिश, गुग्गुल, दही, छाछ आदि लें 

            Wednesday, January 20, 2016

            डेंगू के घरेलू उपचार Treatment of Dengue in Hindi

            इन दिनों डेंगू के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। यह एक खास किस्म के वायरस से होता है। इसका संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक प्रत्यक्ष तौर पर तो नहीं फैलता लेकिन डेंगू वायरस से संक्रमित मच्छर के काटने से यह तेजी से फैलता है। डेंगू के मच्छर दिन और रात दोनों वक्त काटते हैं। ऐसे में डेंगू के लक्षणों, इससे बचाव और उपचार के बारे में जानकारी होनी बहुत जरूरी है जिससे आप खुद को व अपने परिवार को इस संक्रमण से दूर रख सकें। 

            यह एक ऐसा वायरल रोग है जिसका मेडिकल चिकित्सा पद्धति में कोई इलाज नहीं है परन्तु आयुर्वेद में इसका इलाज है और वो इतना सरल और सस्ता है की उसे कोई भी कर सकता है l तीव्र ज्वर, सर में तेज़ दर्द, आँखों के पीछे दर्द होना, उल्टियाँ लगना, त्वचा का सुखना तथा खून के प्लेटलेट की मात्रा का तेज़ी से कम होना डेंगू के कुछ लक्षण हैं जिनका यदि समय रहते इलाज न किया जाए तो रोगी की मृत्यु भी सकती है l 

            कैसे होता है डेंगू 

            • डेंगू से बचने के लिये आपको मादा एडीज इजिप्टी मच्छर से बचना पडेगा, इसको पहचानने के लिये देखिये कि इनके शरीर पर चीते जैसी धारियां तो नहीं हैं। ये ज्यादातर शरीर पर घुटने के ऊपर हमला करते हैं। 
            • यह दिन में ज्यादा सक्रिय होते है। ज्यादा ऊपर तक नहीं उड़ पाते है। ठन्डे और छाव वाले जगहों पर रहना ज्यादा पसंद करते है। पर्दों के पीछे या अँधेरे वाली जगह पर रहते है| 
            • अपने प्रजनन क्षेत्र के 200 meter की दुरी के अन्दर ही उड़ते है। गटर या रस्ते पर जमा खराब पानी में कम प्रजनन करते है। पानी सुख जाने के बाद भी इनके अंडे 12 महीनो तक जीवित रह सकते है।

            लक्षण क्या है 

            • इस रोग में तेज बुखार के साथ शरीर के उभरे चकत्तों से खून रिसता हैं। 
            • ऎसे में ठंड लगती है और तेज बुखार होता है। शरीर पर लाल चकते भी बन जाते है जो सबसे पहले पैरों पे फिर छाती पर तथा कभी कभी सारे शरीर पर फैल जाते है।
            • पेट खराब हो जाना, उसमें दर्द होना, दस्त लगना, ब्लेडर की समस्या, लगातर चक्कर आना, भूख ना लगना। 
            • रक्त मे प्लेटलेटस की संख्या कम हो जाना और नब्ज का दबाव कम होना 20 मिमी एच जी दबाव से लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, भूख ना लगना। 
            • खूनी द्स्त लगना और खून की उल्टी आना जब डेंगूहैमरेज ज्वर होता है तो ज्वर बहुत तेज हो जाता है रक्तस्त्राव शुरू हो जाता है, 
            • रक्त की कमी हो जाती है, थ्रोम्बोसाटोपेनिया हो जाता है, कुछ मामलों में तो मृत्यु हो जाती है। 

            बचने के तरीके

            • किसी भी खुली जगह में जैसे की गड्डो में, गमले में या कचरे में पानी जमा न होने दे। अगर पानी जमा है तो उसमे मिटटी डाल दे। 
            • खिड़की और दरवाजे में जाली लगाकर रखे। शाम होने से पहले दरवाजे बंद कर दे। 
            • ऐसे कपडे पहने जो पुरे शरीर को ढक सके। रात को सोते वक्त मच्छरदानी लगाकर सोए। 
            • जहां पानी जमा हो उसमें केरोसिन तेल डाल दें। 
            • पूरे शरीर को ढकने वाले कपडे पहनें और मच्छरदानी लगा कर सोएं। 
            • यदि कूलर का काम ना हो तो उसे सूखा कर रखें वरना उसका पानी रोज बदलते रहें। हफ्ते पानी बदलें। घर के आस-पास पानी जमा न होने दें गंदगी ना फैलने दें। 

            डेंगू के घरेलू उपचार

            • अनार जूस तथा गेहूं घास रस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है, अनार जूस आसानी से उपलब्ध है 
            • यदि गेहूं घास रस ना मिले तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है 
            • पपीते के पेड़ के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है,
            • पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में २ से ३ बार दें ,एक दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संक्या बढ़ने लगेगी l गिलोय बेल की डंडी ले ! डंडी के छोटे टुकड़े करे ! 
            • 2 गिलास पानी मे उबाले ! जब पानी आधा रह जाये !

            बाबा रामदेव ने बताया बताया इलाज

            • बाबा रामदेव ने बताया की डेंगू के इलाज में पपीते के पत्ते का जूस सबसे कारगर है। जूस पीने के चंद घंटों बाद ही प्लेटलेट्स की संख्या में बहुत तेजी से बढ़त होती है।-
            • पपीते का जूस ना मिले तो एलोवेरा या गिलोय का जूस भी प्लेटलेट्स की संख्या में वृद्धि कर देता है। बुखार और उलटी आने पर अनार का जूस बहुत फायदा करता है।
            • रोगी चाहे तो पपीते के पत्तों का रस, गिलोय का रस या एलोवेरा का रस, तीनों में से कोई भी अजमा सकता है। तीनो ही प्लेटलेट्स बढाने का रामबाण इलाज है। पपीता और एलोवेरा लीवर की समस्या ख़त्म कर देता है। इसके अलावा गिलोय का रस बुखार उतारने में क्रोसिन की गोली से भी तेज काम करता है।
            • बाबा रामदेव ने बताया कि अनार का जूस लीवर के लिए भी फायदेमंद है और इसका जूस पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता भी सही हो जाती है। ठंडा होने पर रोगी को पिलाये 
            • मात्र 45 मिनट बाद cell बढ़ने शुरू हो जाएँगे !! गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में २-३ बार दें, इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है, रोग से लड़ने की शक्ति बढती है तथा कई रोगों का नाश होता है l यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी भी नजदीकी पतंजली चिकित्सालय में जाकर "गिलोय घनवटी" ले आयें जिसकी एक एक गोली रोगी को दिन में 3 बार दें l 
            • यदि बुखार 1 दिन से ज्यादा रहे तो खून की जांच अवश्य करवा लें l 
            • यदि रोगी बार बार उलटी करे तो सेब के रस में थोडा नीम्बू मिला कर रोगी को दें, उल्टियाँ बंद हो जाएंगी 
            • नीम और तुलसी का काढ़ा 20 से 50 मिलीलीटर पीने से डेंगू में लाभ होता है। 
            • करेले के रस में जीरा डालकर पीने से डेंगू में लाभ होता है। रात्रि में पुराने गुड़ के साथ जीरा खाने से डेंगू में लाभ होता है। अदरक और किश्मिश का काढ़ा पीने से डेंगू में लाभ होता है। अमरूद दिन में तीन बार खाने से डेंगू में लाभ होता है। ये रोगी को अंग्रेजी दवाइयां दी जा रही है तब भी यह चीज़ें रोगी की बिना किसी डर के दी जा सकती हैं ! 
            • डेंगू जितना जल्दी पकड़ में आये उतना जल्दी उपचार आसान हो जाता है और रोग जल्दी ख़त्म होता है ! रोगी के खान पान का विशेष ध्यान रखें, क्योंकि बिना खान पान कोई दवाई असर नहीं करती !  ऊपर बताए गए इलाजों मे सबसे जल्दी पपीते के पेड़ के पत्ते काम करते हैं फिर गिलोय !!  इससे अच्छा और सस्ता कोई इलाज नहीं डेंगू बुखार का ! अगर आप चाहते हैं के आपको मलेरिया या डेंगू ना ही हो तो भी आप उपरोक्त लिखे उपचार बिना किसी संकोच से कर सकते हैं, और इस के साथ में ये नीचे दिया गया लिंक खोल कर ज़ोर पढ़े के कैसे खीर खा कर आप मलेरिया या डेंगू से बच सकते हैं

            Thursday, January 14, 2016

            रोगनाशक घरेलू औषिधियां-Useful Home Remedies, Ayurvedic Health Tips in Hindi,

            प्रकृति (nature) ने धरती पर इंसान को स्वस्थ (healthy) बनाएं रखने और लंबी उम्र प्रदान करने के लिए कई औषधियां बनाई हैं। जिन्हे यदि एक-एक कर के उपयोग में लाया जाए तो इंसान का शरीर स्वस्थ रहेगा। प्राकृति ने वनस्पतियों के रूप में अनोखी संपदा धरती पर दी है। जो खतरनाक रोगों (dangerous infections) को पूरी तरह से खत्म करने में लाभकारी है। आइये जानते हैं इन प्राकृतिक वनस्पति औषधियों के बारे में। जिनको जानने से आप कई तरह के गंभीर रोगों से बच सकते हो।

            लहसुन

            • मोटापा, जोड़ों के दर्द, सूजन और आर्थराइटिस जैसे गंभीर रोगों से मुक्ति पाने के लिए खाली पेट सुबह 5 ग्राम लहसुन की 3 कलियां छीलकर पानी (water) के साथ निगलें । एैसा करने से आप इन रोगों से बचोगे। 
            • दांतों के दर्द में लहसुन के रस में रूई (cotton) भिगोकर दांतों के बीच में रखें। दांत दर्द में राहत मिलेगी। 
            • श्वास और दमा संबंधी रोगों (asthma) के लिए 20 ग्राम शहद में 5 ग्राम लहसुन का रस डालकर उसे हलके गरम पानी में मिला लें और सुबह खाली पेट इसका सेवन करें आपको लाभ मिलेगा। 
            • पेट दर्द होने पर आधा चम्मच लहसुन का रस 4 चम्मच पानी में घोलकर उसमें हल्का सेंधा नमक डालें। उसका सेवन करने से पेट दर्द (stomach pain) में राहत मिलती है। 
            • पेट का कैंसर यानि कोलन कैंसर से दूर रहने के लिए नियमित रूप से लहसुन का प्रयोग करते रहें।
            • हींग
            • सिरदर्द होने पर गरम पानी में हींग को डालकर लेप बना लें और इस लेप को सिर पर लगाने से सिर दर्द (headache) ठीक हो जाता है। 
            • जिन लोगों को हिस्टीरिया (hysteria) यानि पागलपन के दौरे आते हैं उन्हें हींग सुंघाने से जल्दी चेतना आती है। 
            • गैस, खट्टी डकार और पेट दर्द में हींग को नाभी के आसपास मसलें जल्दी लाभ मिलेगा। 
            • देसी घी में हींग को मिलाकर लगाने से पित्ती उछलना ठीक हो जाता है।
            हल्दी
            • सभी तरह की बीमारियों को दूर करने के लिए हल्दी पाउडर (turmeric powder) को पानी या छाछ में डालकर सेवन करें। 
            • हल्दी को गरम पानी में डाल करके इसके लेप को चोट पर लगाने से चोट के दर्द से मुक्ति मिलती है और कीटाणु (germs) भी खत्म होते हैं। 
            • स्तनों में सूजन या गांठ की वजह से दर्द हो रहा हो तो हल्दी पाउडर को एलोवेरा के रस (alovera juice) के साथ मिलाकर इसे थोडा गर्म करें फिर इसका लेप लगाएं। 
            • खांसी, सर्दी-जुकाम (cough) होने पर हल्दी के चूर्ण को देसी घी में भूनकर गुड के साथ सेवन करे और बाद में गरम दूध पीएं आपको शीध्र लाभ मिलेगा।

            काली मिर्च

            • मांसपेशियों का दर्द ठीक करने के लिए काली मिर्च को तिल के तेल के साथ उच्छे से उबालें (boil) और बाद में इस तेल की मालिश मांसपेशियों पर करें आपको लाभ मिलेगा। 
            • काली मिर्च (black pepper) और गुड का सेवन करने से खांसी ठीक हो जाती है। 
            • काली मिर्च के चूर्ण और नमक (salt) को छाछ में डालकर पीने से पेट के कीडे़ खत्म हो जाते हैं। 
            • तुलसी के पत्ते, 4 काली मिर्च और 2 लौंग के साथ इलायची व अदरक को चाय में उबालकर पीने से बुखार (fever) में राहत मिलती है।

            कपूर

            • मुंह में छाले (mouth infection) होने पर कपूर को घी के साथ मिलाकर दो-चार बार लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं। 
            • कपूर को दांतों के बीच दबाए रखने से दांत दर्द (tooth pain) ठीक हो जाता है। 
            • कपूर का नस्य लेने से जुकाम से हुई बंद नाक खुल जाती है और लाभ मिलता है। 
            • दांत में छेद की वजह से कीडे लगने पर कपूर को उस जगह पर भर दें। 
            • नारियल तेल (coconut oil) में 10 ग्राम कपूर मिलाकर हल्का गरम करें और इसका इस्तेमाल फोड़-फुंसियों और खुजली वाली जगह पर करें। निश्चय ही फायदा होगा।

            लौंग

            • गरम पानी में लौग को घिसकर सिर पर लगाने से सिर का तेज दर्द शांत हो जाता है। 
            • 2. 3 लौंग को चबाकर उसके बाद पानी पीने से हिचकी आना बंद हो जाती है। 
            • खांसी यदि कष्टदायक (painful) हो रही हो तब भुनी हुई लौंग को रात को सोते वक्त चूसना चाहिए। 
            • लौंग का चूर्ण को नींबू के रस (lemon juice) मे मिलाकर दांतों पर लगाने से दांत दर्द ठीक हो जाता है। 
            • काली खांसी से परेशान बच्चों को शहद (honey) के साथ भुनी हुई लौंग को मिलाकर चटाने से बच्चों में खांसी कि दिक्कत दूर होती है। 
            • मसूडों में सूजन होने पर लौंग का तेल (clove oil) को रूई में भिगोकर मसूड़ों पर लगाएं। जल्दी ही मसूडे ठीक हो जाएगें।

            जीरा

            • पानी में जीरे को उबालकर उसे ठंडा कीजिए और फिर इस पानी से चेहरा धोने से त्वचा निखर जाती है।
            • बच्चों को शहद में काला जीरा का चूर्ण मिलाकर देने से बच्चों के पेट में कृमि यानि कीडे नष्ट जो जाते हैं।
            • जीरे के चूर्ण को पुराने गुड के साथ लेने से बुखार में राहत मिलती है।

            शहद

            • गुनगुने पानी में शहद को मिलाकर दो से तीन बार दिन में पीने से जुकाम ठीक हो जाता है। 
            • शु़द्ध शहद को आंखो पर लगाने से आंखों की रोशनी तेज (strong eyesight) बनी रहती है। 
            • प्रतिदिन (everyday) शहद का सेवन करने से शरीर में ताजगी और स्फूर्ति आती है। 
            • लहसुन के साथ शहद लेने से ब्लडप्रेशर (blood pressure) नहीं बढ़ता है। 
            • उल्टी (vomiting) आने पर पुदीने का रस और शहद को लेने से लाभ मिलता है। 
            • छोटे बच्चों को थोड़ा-थोड़ा शहद देने से उन्हें पोषण मिलता है।

            अदरक

            • अदरक (ginger) को दांत दर्द वाली जगह पर रखने से दांत दर्द नहीं होता है। 
            • दमा के रोगीयों को अदरक चूसने से राहत मिलती है। 
            • अदरक के रस में हींग मिलाकर मालिश करने से जोड़ों का दर्द ठीक हो जाता है।

            पुदीना

            • पुदीना (mint) के रस को दाद वाली जगह पर नियमित लगाने से दाद और दाद के निशान दोनों ही दूर होते हैं। 
            • बुखार आने पर तुलसी का रस और पुदीना का रस को मिलाकर पीने से बुखार जल्दी ठीक होता है। 
            • तलवों की जलन हो या फिर हथेलियों में जलन पुदीने को पीसकर उसे लगाने से जलन ठीक हो जाती है। 
            • इन प्राकृतिक वनस्पति औषधियों के प्रयोग से कई बीमारियों (diseases-infection) से बचा जा सकता है। क्योंकि छोटी बीमारियां ही शरीर में बड़े रोगों को पैदा करती है और इंसान की उम्र को भी कम। ये प्राकृतिक औषधियां आपको घर पर ही मिल जाती हैं। बस आपको इनके बारे में पता होना चाहिए। वैदिक वाटिका आप तक और भी एैसी जानकारियां पहुंचाएगा जिससे आप और आपका परिवार स्वस्थ (healthy family) रह सके।

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