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Monday, February 20, 2017

स्तनों में दूध बढ़ाने के उपाय,How to increase Breast milk Production in Hindi,

स्तनों में दूध बढ़ाने के उपाय,How to increase Breast milk Production in Hindi
माँ के दूध को शिशु की रोग निरोधक क्षमता के लिए पहली रामबाण औषधि माना जाता हैं। नवजात के लिए मां का दूध औषधि व पौष्टिकता से पूर्ण होता है। जिन बच्चों को जन्म के पहले छह महीनों के दौरान सिर्फ़ माँ का दूध पिलाया जाता है उनके जीवित रहने की सम्भावना 14 गुना ज़्यादा होती है. जबकि जिन बच्चों को माँ का दूध नहीं पिलाया जाता है, पहले छह महीनों के दौरान उनके जीवन को 14 गुना ज़्यादा ख़तरा होता है. जन्म के बिल्कुल बाद से ही माँ का दूध पिलाना शुरू करने से शिशु की मौत का ख़तरा 45 प्रतिशत तक कम हो जाता है. माँ का दूध अच्छी तरह से मिलने से बच्चे में तेज़ी से सीखने की क्षमता बढ़ती है, साथ ही इससे बच्चे के मोटा होने का ख़तरा कम होता है और आगे चलकर जीवन में अनेक बीमारियों से भी सुरक्षा रहती है.

यह एक गंभीर विषय है अगर माँ अपने नवजात बच्चे के लिए भरपूर मात्रा में दुग्ध अपने स्तनों से उपलब्ध नहीं करवा पाती है तो बच्चे के पोषण में कमी आ सकती है. इसलिए प्रत्येक माता ये चाहती है की उसके सतनों से कम से कम इतना दूध जरूर निकले की उसका बच्चा अपना पेट भर पाये और उसको किसी भी प्रकार से पौषक तत्वों की कमी न हो. इसके लिए समझदार माता गर्भधारण करने के बाद से ही अपने खान पान पर ध्यान देने लगती है ताकि वो एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे सके. अगर माता अपना दूध बच्चे को पिलाती है तो उसके बच्चे भी उसके प्यार को पाकर प्रसन्न हो जाते है बच्चा समझने लगता है की उसका भोजन उसकी माता के दूध पर ही निर्भर है इसलिए वो बच्चा अपनी माँ को देखते ही प्रसन्नचित हो जाता है.

 जन्म के 1 घंटे तक शिशु में स्तनपान करने की बहुत इच्छा होती है। बाद में उसे नींद आने लगती है। इसलिए जन्म के बाद जितनी जल्दी माँ अपने बच्चे को दूध पिलाना शुरू कर दे उतना ही अच्छा है। आमतौर पर जन्म के 45 मिनट के अंदर स्वस्थ बच्चे को स्तनपान शुरू कर देना चाहिए।

स्तनों में दूध बढ़ाने के उपाय,Food to Increase Breast Milk in Hindi,

  • शतावर का चूर्ण रोजाना 3 से 5 ग्राम गाय के दूध के साथ सेवन करने से माँ के दूध में वृद्धि होती है और जिन माताओं का दूध सुख जाता है या कम हो जाता है इसके सेवन से स्तनों में दूध उतर जाता है
  • तुलसी के सेवन करने से न केवल बीमारियां ठीक हो जाती है बल्कि यह स्तन क दूध को बढ़ाने में भी मददगार होता है। इसके अंदर विटामिन क की मात्र अधिक पायी जाती है। आप इसको सूप म या कच्चे शहद के साथ भी खा सकते है।
  • करेला में विटामिन और मिनरल अच्छी मात्रा में पाये जाते है। इससे स्तन का दूध बढ़ने की क्षमता बढ़ जाती है। करेला बनाते वक़्त हलके मसालों का उपयोग करना चाहिए, जिससे यह आसानी से हजम हो सके और आप स्वस्थ रह सके।
  • लहसुन खाने से भी दूध बढ़ाने की क्षमता बढ़ जाती है। कच्चा लहसुन खाने से जगह आप इसको मीट, करी, सब्जी या दाल में डाल कर पकाये। अगर आप लहसुन को रोज़ाना खाना शुरू करेगी तो यह आपके लिए बहुत फायदेमंद होगा।
  • एक चम्मच सफेद जीरे का चूर्ण ले और इस चूर्ण मे एक चम्मच मिश्री को पीसकर मिलाकर रोजाना एक गिलास हल्के गर्म दूध के साथ पीने माँ के दूध में वृद्धि होती है इस चूर्ण का प्रयोग सुबह और शाम के समय प्रयोग करें | इसके आलावा सफेद जीरे में चावल मिलाकर इसकी खीर बनाकर खाने से माँ के दूध में वृद्धि होती है
  • शतावर का चूर्ण गर्भवती महिला यदि अपनी गर्भा अवस्था के समय में प्रयोग करें तो प्रसव होने के बाद माँ के दूध में कमी नहीं होगी | प्रसव होने के बाद भी महिलाओं को शतावर का चूर्ण का प्रयोग करते रहना चाहिए | इस चूर्ण को रोजाना 50 – 50 ग्राम की मात्रा में गाय या भैस के दूध के साथ सेवन करे |इसके रोजाना प्रयोग से माँ के दूध में कमी नहीं होती
  • एक कप पानी में एक चम्मच जीरा मिलाकर भिगो कर रख दे , एक घंटे बाद इसको छानकर पी ले , ऐसा करने से आपके स्तनों के दूध में वर्धि होगी.
  • मटर की सब्जी ज़्यादा खाए, कच्चे मटर खाने से भी दूध में वृद्धि होती हैं।
  • शिशु जन्म के बाद यदि स्त्री के स्तनों से दूध पर्याप्त ना निकले तो उसको उड़द की दाल खिलानी चाहिए।
  • जीरा भूनकर सुबह शाम मिश्री से साथ 1 चम्मच ले।
  • अरहर की दाल में यथेष्टि घी मिलाकर पिलाने से स्त्री के स्तनों में दूध की मात्रा बढ़ जाती हैं।
  • दूध में चने भिगो कर खिलाये।
  • नासपाती, अंगूर, चीकू, पपीता के सेवन से भी स्तनों में दूध की वृद्धि होती हैं।
  • रात को गेंहू भिगो कर रखे दे, सुबह उन्हें हाथो से अच्छी तरह मसल कर गुड के साथ खाए और ऊपर से वह पानी पी ले।

Tuesday, November 29, 2016

खसरा का घरेलू इलाज,Home Remedies for The Treatment of Measles in Hindi,

खसरा का घरेलू इलाज,Home Remedies for The Treatment of Measles in Hindi,
खसरा एक संक्रामक रोग होता है। यह ज्यादातर बच्चों पर हावी होता है। इस रोग में पहले बुखार आता है फिर दूसरे या तीसरे दिन इसमें दाने नजर आने लगता है और फफोलों का रूप ले लेते हैं और फिर चौथे दिन से पपड़ी जमकर गिरने लगती है। यह एक सूक्ष्म विषाणुजनित रोग होता है।
खसरा बच्चों को होने वाला छूत का रोग है और यह रोग संक्रमण के कारण दूसरे स्वस्थ बच्चे को होता है। इसलिए खसरा रोग जब किसी बच्चे को हो जाए तो उसके पास अन्य बच्चों को नहीं आने देना चाहिए क्योंकि हो सकता है कि दूसरे बच्चे को भी खसरा रोग हो जाए। खसरा का संक्रमण (वायरस) सबसे ज्यादा छोटे बच्चों में फैलता है। खसरा रोग के हो जाने के कारण रोगी के शरीर में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है

खसरा रोग के लक्षण,Symptoms of measles

खसरा रोग से पीड़ित रोगी को छींके आने लगती हैं तथा उसकी नाक से पानी बहने लगता है और आंखें लाल हो जाती हैं। खसरा रोग की शुरुआती अवस्था में रोगी व्यक्ति को तेज खांसी और बुखार रहता है। जब रोगी व्यक्ति को बुखार होता है तो उसके तीसरे दिन से उसके चेहरे तथा छाती पर लाल-लाल दाने दिखाई देने लगते हैं जो 4-5 दिनों तक रहते हैं। जैसे-जैसे रोगी के चेहरे के दाने ठीक होने लगते हैं वैसे-वैसे उसकी खांसी तथा बुखार भी कम हो जाता है। इस रोग से पीड़ित रोगी को कभी-कभी निमोनिया भी हो जाता है।
  • इस बीमारी में सबसे पहले जुकाम और सर्दी होती है। फिर छीकें आतीं हैं और सूखी खाँसी आती है। इसके बाद बुखार आने लगता है। 
  • आँख,मुँह फूले हुए एवं लाल दिखाई देतें हैं। ज्वर के चौथे दिन समस्त दिन शरीर एवं चेहरे पर बहुत छोटे-छोटे लाल दाने निकल आतें हैं। 
  • खसरे में पहले गले में खरास के साथ नाक से स्त्राव, छीकें आना, नेत्र लाल हो जाना, आंसू बहना, स्वरभंग, सिरदर्द, हाथ-पैर में पीड़ा, ज्वर (101 डिग्री फॉरेन हाइट से 140 डिग्री फारेनहाइट तक)।
  • खसरा एक संक्रामक रोग है। इसलिए रोगी को अन्य लोगों के सम्पर्क से दूर रखना चाहिए वरना उन्हें भी खसरा होने की सम्भावना रहती है।

खसरा रोग होने के कारण

  • खसरा रोग बच्चों के गलत खान-पान तथा अस्वस्थ वातावरण में रहने के कारण होता है। मैले कपड़े पहनने, गन्दे बिस्तर पर सोने के कारण तथा बंद कमरे में रहने के कारण खसरा रोग हो जाता है।
  • खसरा रोग से पीड़ित रोगी के द्वारा इस्तेमाल की गई चीजों का इस्तेमाल करने के कारण भी यह रोग हो जाता है। 
  • लापरवाही बरतने के कारण खसरा रोग के संक्रमण एक रोगी के शरीर से किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और उस स्वस्थ व्यक्ति को भी खसरा रोग हो जाता है। 
  • खसरा रोग से पीड़ित रोगी को तली-भुनी, मिर्च-मसालेदार, दूषित भोजन, मिठाइयां तथा नमक नहीं खाने चाहिए।

खसरा के उपचार,Treatment of Measles

खसरा रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार- खसरा रोग को ठीक करने के लिए रोगी को रसाहार चीजों का अधिक सेवन करना चाहिए, जिनमें प्रमुख रूप से संतरे का रस, नींबू का रस तथा कई प्रकार के फलों के रस आदि आते हैं। खसरा रोग से पीड़ित रोगी को रोग के दौरान सामान्य भोजन करना चाहिए
  • नीम, पित्त पापड़ा, पाठा, परवल के पत्ते, कुटकी, सफेद चंदन, खस, आँवला और अडूसा सभी को मिलाकर काढ़ा बनायें। इसमें शक्कर मिलाकर रोगी को पिलायें इससे खसरे में लाभ होगा।
  • आंवला, खस, गिलोय(गुरुचि), धनिया और नागरमोथा सबको सम्भाग में लेकर चूर्ण बनायें। एक चम्मच चूर्ण को दो गिलास पानी में उबालें। जब एक गिलास पानी शेष रह जाये। तो उतार लें। इससे आधा-आधा चम्मच की मात्रा में रोगी को बार-बार पिलायें। यह मात्रा बच्चों के लिए है। इससे दूसरे रोगों में भी आराम मिलता है।
  • खसरे की छोटी-छोटी फुंसियों पर खुजली और जलन हो तो चंदन को पत्थर पर घिसकर लेप लगायें।
  • पिडिकाओं को नीम और गूलर की छाल का क्वाथ बनाकर साफ़ करें, फिर उन पर नीम का तेल लगायें।
  • ब्राम्ही के स्वरस में मधु मिलाकर पीने से लाभ होता है।
  • एक लीटर पानी उबालकर चतुर्थांश रहने पर बच्चे को थोडा-थोडा यह पानी पिलायें। इससे खसरे में बार-बार लगने वाली प्यास शांत होती है।
  • खसरे में निकले लाल दानों से होने वाली तकलीफ को दूर करने के लिए आँवले को पीसकर उसका लेप लगायें। इससे बच्चे की छटपटाहट थम जायेगी। खसरा निकल जाने के बाद बदन में खुजली और जलन हो तो सूखे आँवले को पानी में उबालकर फिर उसे ठंडाकर लें। इसमें कपड़े को भिगोकर शरीर पर फेरें। इससे रोगी को राहत मिलेगी।
  • खसरे में खुजलाने से जो चिपचिपा पदार्थ निकलता है। उसके लिए 100 ग्राम नारियल के तेल में 20 ग्राम कपूर मिलायें। इस मिश्रण को शरीर में तीन से चार बार लगायें। इससे खसरे से राहत मिलती है।
  • आँखों में लाली या जलन हो तो इस काढ़े को स्वच्छ कपड़े में छानकर उसमें पानी मिलाकर रोगी की आँखों को बार-बार पोछें। काढ़े में कपड़ा या रूई डुबोकर आँखों पर रखने से भी फायदा होता है।
  • किसी अन्य जानकारी के लिए सम्बंधित टैग्स पर क्लिक करें।
  • अक्सर खसरा होने पर शरीर से टॉक्सिन जमा हो जाते हैं। ऐसे में हल्के गर्म पानी का सेवन करना काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे शरीर में मौजूद विषाक्त पदार्थ आसानी से बाहर निकल जाते हैं जिससे खसरे के लक्षणों में कमी देखी जा सकती है।
  • खसरे से ग्रस्त रोगी में बुखार की समस्या भी होती है इसलिए रोगी के पेट पर दिन में दो बार मड पैक लगाएं। इससे रोगी के बुखार में कमी देखने को मिलेगी। इस प्रक्रिया को तब तक अपनाएं जब तक रोगी का बुखार पूरी तरह से ठीक ना हो जाए।
  • खसरे में रोगी के शरीर में खुजली की समस्या आम है। कई बार खुजली से त्वचा क्षतिग्रस्त भी हो जाती है। इसके लिए नीम के पत्तों को गर्म पानी में डालकर कुछ देर छोड़ दें। उसके बाद उसी पानी से रोगी को स्नान कराएं। इससे खुजली की समस्या अपनेआप दूर हो जाएगी।
  • नींबू का सेवन काफी रोगों से निजात दिलाने के लिए जाना जाता है। क्या आप जानते हैं खसरे से ग्रस्त रोगी के लिए भी नींबू बहुत फायदेमंद है। जब भी रोगी को प्यास का अहसास हो तो उसे नींबू पानी ही पीने को दें। यह रोगी में पानी पीने की इच्छा को और बढ़ाता है।
  • खसरे में संतरे का जूस पीना बहुत फायदेमंद है। इससे रोगी की पाचन शक्ति बढ़ती है जिससे उसे भूख का एहसास होता है। आप चाहें तो संतरे के जूस पीने की जगह संतरा खा भी सकते हैं। यह शरीर में पानी की मात्रा को बनाए रखता है और रोगी के हाइड्रेट रहता है।

Friday, June 17, 2016

बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना,How to Stop Bed Wetting in Hindi,


बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना,How to Stop Bed Wetting in Hindi,

यह रोग अधिकतर बच्चों में पाया जाता है। इस रोग से पीड़ित बच्चा रात को सोते समय बिस्तर पर पेशाब कर देता है। अक्सर 2 वर्ष तक के बच्चे इस रोग से ज्यादा ग्रस्त होते हैं। लेकिन अगर 3 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले बच्चों को भी इस प्रकार की शिकायत बनी रहे तो उस अवस्था को असंयतमूत्रता कहते हैं। 
  • यह अवस्था लड़कियों की अपेक्षा लड़कों तथा 3 वर्ष से 14 वर्ष की आयु वाले बच्चों में अधिक पाया जाता है। कई बच्चों में तो यह रोग इतना अधिक बढ़ जाता है कि बच्चे सोते ही बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं तथा कुछ पहली नींद आते ही तथा कुछ आधी रात के बाद या सुबह होने से कुछ घंटे पहले ही पेशाब कर देते हैं। 
  • कुछ बच्चों में यह रोग मौसम के अनुसार होता है जैसे- सर्दियों और बरसात के मौसम में। यह रोग उन बच्चों को अधिक होता है जिन्हें नींद अधिक आती है। 
  • बच्चों का थोड़ा बड़े होने पर पेशाब करना एक आम समस्या है | इस समस्या के बहुत से कारण हो सकते हैं | कई अनुभवियों के अनुसार स्नायु विकृति के कारण या पेट में कीड़े होने पर भी बच्चे सोते हुए बिस्तर पर पेशाब कर देते हैं | 
  • पेशाब की नली में रोग के कारण भी बच्चा सोते हुए पेशाब कर देता है | कई बार कुछ गरिष्ठ भोजन व ठंडे पदार्थों के अधिक सेवन से भी यह समस्या उत्पन्न हो जाती है | 
  • इस समस्या को समाप्त करने के लिए कोई भी औषधि देने से पूर्व माता-पिता को बच्चे के भोजन की कुछ आदतें सुधारनी जरूरी हैं | बच्चों को सोने से एक घंटा पहले भोजन करा देना चाहिए और सोने के बाद उसे जगाकर कुछ भी खाने-पीने को नहीं देना चाहिए | 
  • बच्चे को बिस्तर पर जाने से पहले एक बार पेशाब अवश्य करा देना चाहिए |

नींद में पेशाब करने के कारण 

नींद में पेशाब करने के कई कारण होते है जैसे- बढ़ी हुई उत्तेजना, अधीरता या मानसिक तनाव , शरीर में खून की कमी , शारीरिक रूप से अधिक कमजोर होना तथा कुछ बच्चों को रात में पेशाब करने की आदत पड़ना आदि। इस रोग के अन्य कारण भी हो सकते है जैसे- पेट में कीड़े होना , लिंगमुण्ड की कठोरता, अतिशय अम्लता, शाम को तरल पदार्थों का अधिक सेवन करना या फिर शरीर के मसाने की पेशियों का अनुपयुक्त विकास होना आदि। यह रोग अनेक रोगों के कारण भी हो सकता है जैसे- मधुमेह , पेशाब सम्बन्धी बीमारियों, गिल्टियां, लगातार पीठ के बल लेटना या पेशाब सम्बन्धी बीमारी होना आदि।

नींद में पेशाब करने के उपचार

  • पचास ग्राम अजवायन का चूर्ण कर लें | प्रतिदिन एक ग्राम चूर्ण को रात को सोने से पूर्व बच्चे को खिलाएं ऐसा कुछ दिनों तक नियमित रूप से करने से यह रोग ठीक हो जाता है | 
  • यदि बच्चा रात को सोते-सोते बिस्तर पर पेशाब करता है तो एक अखरोट की गिरी तथा पांच ग्राम किशमिश रात में सोने से पहले नित्य एक बार खिलाएं। सप्ताह-दस दिन में आराम होगा 
  • दो मुनक्कों के बीज निकालकर उसमें १-१ काली मिर्च डालकर बच्चों को रात को सोने से पहले खिला दें | ऐसा दो हफ़्तों तक नियमित रूप से सेवन करने से यह बीमारी दूर हो जाती है | 
  • प्रतिदिन दो अखरोट और बीस किशमिश बच्चों को खिलाने से बिस्तर में पेशाब करने की समस्या दूर हो जाती है | 
  • रात को सोते समय बच्चों को शहद खिलाने से यह रोग समाप्त हो जाता है | 
  • जामुन की गुठलियों को छाया में सुखाकर बारीक पीस लें | इस चूर्ण का २-२ ग्राम दिन में दो बार पानी के साथ सेवन करने से बच्चे बिस्तर पर पेशाब करना बंद कर देते हैं | 
  • २५० मिली दूध में एक छुहारा डालकर उबाल लें | इसे दो घंटे तक रखा रहने दें | इसके बाद इसमें से छुहारा निकाल कर बच्चे को खिला दें और इस दूध को हल्का गर्म करके ऊपर से पिला दें | ऐसा प्रतिदिन करने से कुछ ही दिनों में बच्चों का बिस्तर पर पेशाब करना बंद हो जाता है |हिए। रात को सोते समय अपने मसाने के ऊपरी भाग में ।

Tuesday, June 7, 2016

दिमाग तेज करने के घरेलू उपाय

दिमाग तेज करने के घरेलू उपाय
आप यह बात ठीक से याद रखें कि हमारी यादशक्ति हमारे ध्यान पर और मन की एकाग्रता पर निर्भर करती है। हम जिस तरफ जितना ज्यादा एकाग्रतापूर्वक ध्यान देंगे, उस तरफ हमारी विचारशक्ति उतनी ज्यादा केन्द्रित हो जायेगी। जिस कार्य में भी जितनी अधिक तीव्रता, स्थिरता और शक्ति लगायी जायेगी, उतनी गहराई और मजबूती से वह कार्य हमारे स्मृति पटल पर अंकित हो जायेगा। स्मृति को बनाये रखना ही स्मरणशक्ति है और इसके लिए जरूरी है सुने हुए व पढ़े हुए विषयों का बार-बार मानना करना, अभ्यास करना। जो बातें हमारे ध्यान में बराबर आती रहती हैं, 

उनकी याद बनी रहती है और जो बातें लम्बे समय तक हमारे ध्यान में नहीं आतीं, उन्हें हम भूल जाते हैंदिमाग हमारे शरीर का वो हिस्‍सा है जिसके संकेत के बिना शरीर का कोई भी अंग काम नहीं कर सकता। लेकिन कई बार बढ़ती उम्र, गलत आदतों, नशे और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी आदि से याददाश्त कमजोर होने लगती है। लेकिन अपने आहार में कुछ विशेष जड़ी-बूटियों को शामिल करके आप अपने दिमाग को तेज कर सकते हैं। आईए जानें ऐसी कौन सी जड़ी-बूटियाँ हैं जिनको अपने आहार में शामिल कर दिमाग आसानी से तीव्र किया जा सकता है:

पालक ,spinach,

पालक में विटामिन बी 9 प्रचूर मात्रा में पाया जाता है जिसे फोलेट या फोलिक एसिड के नाम से भी जाना जाता है। इस विटामिन की कमी के कारण मष्तिष्क सम्बन्धी कई विकार उत्पन्न होने लगते हैं जैसे अवसाद, माईग्रेन, डिप्रेशन, तनाव, स्मरण शक्ति का ह्रास होना इत्यादि। इस विटामिन की कमी से तंत्रिका सिस्टम सम्बन्धी कई रोग उत्मन्न होने लगते है। अगर आप नियमित रूप से पालक का सेवन करते हैं तो आपको डिप्रेशन या अवसाद नहीं घेरेगा तथा आपकी स्मरण शक्ति तेज होगी। विटामिन बी 9 के अलावा पालक में विटामिन बी 2 और विटामिन बी 6 भी पाए जाते हैं जो आपके दिमाग को तेज करते हैं एवं सोचने समझने की शक्ति को बढाते हैं।

पालक में ओमेगा 3 फैटी एसिड्स भी प्रचूर मात्रा में होते हैं जो इंसान के मष्तिष्क के लिए बहुत हीं जरुरी एवं फायदेमंद होते हैं । इनसे आपकी स्मरण शक्ति, तर्क करने की शक्ति एवं एकाग्रता बढती है। इसके सेवन से आप किसी भी काम में ध्यान लगा पाते हैं।

जटामांसी,spikenard

जटामांसी औषधीय गुणों से भरपूर जड़ी-बूटी है। इसे जटामांसी इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी जड़ों में जटा बाल जैसे तंतु लगे होते हैं। यह दिमाग के लिए एक रामबाण औषधि है, यह धीमे लेकिन प्रभावशाली ढंग से काम करती है। इसके अलावा यह याददाश्त को तेज करने की भी अचूक दवा है। एक चम्मच जटामासी को एक कप दूध में मिलाकर पीने से दिमाग तेज होता है।

ब्राह्मी,Brahmi

ब्राह्मी नामक जड़ी-बूटी को दिमाग का टॉनिक भी कहा जाता है। यह दिमाग को शांति और स्पष्टता प्रदान करती है और याददास्त को मजबूत करने में भी मदद करती है। आधे चम्मच ब्राह्मी के पाऊडर और शहद को गर्म पानी में मिलाकर पीने से दिमाग तेज होता है।

शंख-पुष्पी,Shankpushpi

शंख-पुष्‍पी दिमाग एवं बुद्धि को कुशाग्र बनाने के साथ-साथ दिमाग में रक्त का सही सर्कुलेशन कर, मस्तिष्क की रचनात्मकता को भी बढ़ावा देती है। यह जड़ी-बूटी हमारी याद करने की क्षमता और सीखने की क्षमता को भी बढ़ाती है। दिमाग को तेज करने के लिए आधा चम्मच शंख-पुष्पी को एक कप गरम पानी में मिला कर लें।

दालचीनी,Cinnamon

दालचीनी सिर्फ गर्म मसाला ही नहीं, बल्कि एक जड़ी-बूटी भी है। यह दिमाग को तेज करने की बहुत अच्‍छी दवा है। रात को सोते समय नियमित रूप से एक चुटकी दालचीनी पाऊडर को शहद के साथ मिलाकर लेने से मानसिक तनाव में राहत मिलती है और दिमाग तेज होता है।

हल्‍दी,turmeric

हल्दी दिमाग के लिए बहुत अच्‍छी जड़ी-बूटी है। यह सिर्फ खाने के स्वाद और रंग में ही इजाफा नहीं करती है, बल्कि दिमाग को भी स्वस्थ रखने में मदद करती है। हल्दी में पाया जाने वाला रासायनिक तत्व कुरकुमीन दिमाग की क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को रिपेयर करने में मदद करता है और इसके नियमित सेवन से एल्जाइमर (भूलने का) रोग नहीं होता है।

जायफल,Nutmeg,

दिमाग को तेज करने वाली जड़ी-बूटियों में जायफल भी एक उपयोगी जड़ी-बूटी है। गर्म तासीर वाले जायफल की थोड़ी मात्रा का सेवन करने से दिमाग तेज होता है। इसको खाने से आपको कभी एल्‍जाइमर यानी भूलने की बीमारी नहीं होती।

अजवाईन की पत्तियाँ,Celery leaves,

अजवाईन की पत्तियाँ भोजन में सुगंध के अलावा शरीर को स्‍वस्‍थ बनाए रखने में भी मदद करती हैं। इसमें भरपूर मात्रा में मौजूद एंटी-ऑक्‍सीडेंट दिमाग के लिए एक औषधि की तरह काम करता है।

तुलसी,Basil

तुलसी कई प्रकार की बीमारियों के इलाज के लिए एक जानी-मानी जड़ी बूटी है। इसमें मौजूद शक्तिशाली एंटीऑक्‍सीडेंट हृदय और मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह में सुधार करता है। साथ ही इसमें पाए जाने वाला एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व, अल्‍जाइमर (भूलने) जैसे रोग से सुरक्षा प्रदान करता हैं।

केसर,saffron,

केसर एक ऐसी जड़ी-बूटी है, जिसका उपयोग खाने में स्‍वाद बढ़ाने के सा‍थ-साथ अनिद्रा और डिप्रेशन दूर करने वाली दवाओं में किया जाता है। इसके सेवन से दिमाग तेज होता है।

काली-मिर्च,Black pepper

काली-मिर्च में पाया जाने वाला पेपरिन नामक रसायन शरीर और दिमाग की कोशिकाओं को आराम देता है। डिप्रेशन को दूर करने के लिए भी यह रसायन जादू सा काम करता है। इसीलिए दिमाग को स्वस्थ बनाए रखने के लिए काली-मिर्च का उपयोग करें।

Sunday, May 1, 2016

पेट के कीड़े का इलाज,Gharelu Nuskhe for Stomach Worms in Hindi,worms in bowel

पेट के कीड़े का इलाज,Gharelu Nuskhe for Stomach Worms in Hindi,worms in bowel

आंतों में कीड़े होने का रोग अधिकतर बच्चों को होता हैं क्योंकि बच्चे अपने पेट की सफाई के बारे में पूरी तरह ध्यान नहीं देते। बच्चे खेलते समय दूषित मिट्टी व गंदी चीजों के संपर्क में आ जाते हैं। कभी-कभी छोटे बच्चे मिट्टी से सनी हुई उंगलियां खेलते-खेलते अपने मुंह में डाल लेते हैं, जिससे संक्रमण उनके पेट के अन्दर फैल जाता है, क्योंकि ये परजीवी कीड़े अपने अण्डे मिट्टी में देते हैं। यह कीड़े नाखूनों के द्वारा मुंह में आसानी से अन्दर चले जाते हैं। कीड़े पालतू जानवरों के साथ खेलने से भी पेट के अन्दर चले जाते हैं। लेकिन कभी-कभी बड़े व्यक्तियों की आंतों में भी कीड़े हो जाते हैं। इन कीड़ों के संक्रमण के कारण बच्चों में कई प्रकार के रोग होने का खतरा बना रहता है। आंतों में कई प्रकार के कीड़े हो जाते हैं जिनमें एक परजीवी कीड़ा भी होता है।

कीड़े के प्रकार-Types of worms,

  • टेप वार्म- ये कीड़े 5 से 10 मीटर लम्बे होते हैं। इन कीड़ों के कारण दिमाग पर बहुत अधिक असर पड़ता है तथा उसमें किसी प्रकार का रोग हो जाता है। ये कीड़े अधपके मांस के द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं या कुत्ते का झूठा भोजन सेवन करने से शरीर में चले जाते हैं।
  • गायरडिया- ये कीड़े एक प्रकार के बैक्टीरिया के जीवाणु होते हैं। ये कीड़े आंखों से दिखाई नहीं देते हैं। जब ये कीड़े शरीर में पंहुच जाते हैं तो टांगों को कमजोर कर देते हैं।
  • थ्रैड वार्म- ये कीड़ें धागे के आकार के होते हैं और इनका रंग सफेद होता है और इन कीड़ों की चौड़ाई आधे से 1 इंच तक होती हैं। इन कीड़ों के कारण रोगी को कभी दस्त तो कभी कब्ज बनी रहती है।
  • राउण्ड वार्म- ये कीड़े बरसाती केंचुओं की तरह मटमैले रंग के तथा कई इंच लम्बे होते हैं। इन कीड़ों के कारण रोगी को मिचली, उल्टी, वजन घटना, बुखार, चिड़चिड़ापन आदि परेशानियां पैदा हो जाती हैं।
  • हुक वार्म- ये कीड़े 5.10 मीटर लंबे होते हैं तथा ये दिमाग को बहुत अधिक प्रभावित करते हैं। ये कीड़े अधपके मांस द्वारा शरीर में प्रवेश करते हैं तथा कुत्ते के द्वारा छोड़ा गया भोजन खाने से शरीर में चले जाते हैं।

कीड़ों से रोग होने का कारण.Reason OF Worms,

  • जब ये कीड़े रोगी के आमाशय तथा आंतों में पंहुचकर अण्डे देते हैं तथा वहीं विकसित होते हैं तो ये आमाशय तथा आंतों को रोगग्रस्त कर देते हैं। कभी-कभी तो ये कीड़े पाचन मार्गों पर चले जाते हैं तथा उल्टी के द्वारा बाहर निकलते हैं।
  • इन कीड़ों के द्वारा रोगी को बुखार, पेट में दर्द तथा डायरिया जैसे रोग हो जाते हैं। जब बच्चों के पेट में कीड़े हो जाते हैं तो वह दांत-किटकिटाता रहता है। ये कीड़े आंतों की दीवारों से चिपककर खून की नसों में छेद करके खून पीते रहते हैं और उसी पर निर्भर रहते हैं।
  • कभी-कभी कीड़ों के अण्डे मल के साथ बाहर आ जाते हैं। अण्डों में से कीड़े शरीर के बाहर निकलते हैं। जब कोई व्यक्ति अपने नंगे हाथ अथवा पैर दूषित मिट्टी के संपर्क लाता है या किसी प्रकार से छोटे-छोटे कीड़े त्वचा के द्वारा शरीर में प्रवेश करके रक्तवाहिनी नसों द्वारा फेफड़ों में चले जाते हैं तो वह व्यक्ति रोगग्रस्त हो जाता है। ये कीड़े -कभी-कभी गले तक आ जाते हैं और दुबारा पेट में पहुंच जाते हैं और व्यक्ति के शरीर में रोग उत्पन्न कर देते हैं।
  • कुछ कीड़े बहुत छोटे होते हैं और त्वचा में प्रवेश कर जाते हैं। ये कीड़े त्वचा में खुजली तथा जलन पैदा कर देते हैं तथा वहां पर घाव तथा ददोड़े भी बना देते हैं। जब आंतों के अन्दर ये कीड़े बढ़ने लगते हैं तो शरीर के भीतरी अंगों की कार्य प्रणाली प्रभावित हो जाती है जिसके कारण रोगी को सिर में दर्द, भूख न लगना, डायरिया, बेचैनी, आलस्य, सांस का फूलना तथा वजन का कम होना आदि रोग हो जाते हैं।
  • यदि कोई व्यक्ति अपने गुदाद्वार के चारों ओर की त्वचा को साफ तथा सूखा नही रखता तो उस व्यक्ति के शरीर में इन कीड़ों का संक्रमण तेजी से होता है।

शरीर में कीड़े होने के लक्षण-symptoms of Parasite

  • यदि किसी व्यक्ति के शरीर में कीड़े हो जाते हैं तो उसे कई प्रकार के रोग हो जाते हैं जैसे- चेहरे का रंग फीका पड़ना, भोजन में अरुचि, दस्त लगना, नाक में खुजली होना, रात में सोते समय दांत किटकिटाना, मलद्वार में खुजली होना, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा, सांस में बदबू, आंखों के नीचे कालापन, बार-बार खाने की इच्छा होना, बुरे-बुरे सपने आना, मिचली, उल्टी, वजन कम होना, बुखार, पैरों में कमजोरी, बदहजमी तथा पेट मे दर्द होना आदि।

पेट में कीड़े होने का घरेलू इलाज-Parasite Treatments,human parasites treatment,

इन कीड़ों को मारकर पेट से बाहर निकालने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को कीड़े होने के सभी कारणों को दूर करना चाहिए उसके बाद अपना उपचार करना चाहिए। प्राकृतिक चिकित्सा के द्वारा पेट के कीड़ों को समाप्त करने के लिए सबसे पहले रोगी व्यक्ति को 3 दिन तक सिर्फ पानी में नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए और फिर उपवास रखना चाहिए। रोगी को आवश्यकतानुसार रसाहार खाद्य पदार्थों का सेवन करके कुछ दिनों तक उपवास रखना चाहिए। इसके बाद कुछ दिनों तक रोगी को फल, सलाद आदि का सेवन करना चाहिए और फिर सामान्य भोजन पर आ जाना चाहिए।
  • बच्चों को दूध का भोजन नहीं देना चाहिए बल्कि इसके बदले फलों का रस देना चाहिए क्योंकि दूध के सेवन से ये कीड़े पेट में और ज्यादा पनपने लगते हैं।
  • बच्चों को कच्ची सब्जियां तथा पके फल जिन्हें बच्चा चबाकर खा सके, खाने के लिए देनी चाहिए। इसके अलावा उसे दही और मट्ठा पीने के लिए दे सकते हैं।
  • यदि किसी व्यक्ति के पेट में टेपवार्म कीड़े हो जाए तो रोगी व्यक्ति को लंबे समय तक उपवास रखना चाहिए तथा पेट पर गर्म ठंडा सेंक करना चाहिए। प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार पानी में शहद या नींबू का रस मिलाकर एनिमा या नीम की पत्ती को पानी में उबालकर उस पानी का एनिमा रोगी को लेना चाहिए तथा अपने शरीर पर प्रतिदिन मिट्टी की पट्टी करते रहना चाहिए। इसके बाद रोगी को कटिस्नान करना चाहिए। इससे टेपवार्म कीड़े मरकर पेट से बाहर निकल जाते हैं।
  • टेपवार्म कीड़ों को मारने के लिए रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन शंख प्रक्षालन क्रिया करनी चाहिए तथा इसके साथ-साथ प्राकृतिक चिकित्सा से अपना उपचार भी करना चाहिए। इससे ये कीड़े कुछ ही दिनों में मरकर पेट से बाहर निकल जाते हैं।
  • प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार प्रतिदिन विभिन्न योगक्रिया करें. नौलि, उडि्डयान बंध, नौकासन तथा मयूरासन आदि।
  • पेट के कीड़ों को मारने के लिए 2 भाग दही तथा 1 भाग शहद को एकसाथ मिलाकर रोगी को प्रतिदिन सुबह तथा शाम चटाना चाहिए। इससे यह कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं।
  • बच्चों को सुबह के समय में 3 चम्मच अनार का रस पिलाने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं।
  • कीड़ों को समाप्त करने के लिए रोगी व्यक्ति को 1 चम्मच पोदीने का रस सुबह.शाम पीना चाहिए।
  • नीम के पत्तों को पीसकर उसका शर्बत बनाकर कुछ दिनों तक पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं।
  • पालक के पत्तों को अजवाइन के साथ पीसकर पानी में घोलकर रोगी को पिलाने से पेट के कीड़े मरकर मलद्वार के रास्ते बाहर आ जाते हैं।
  • छोटे बच्चों के पेट के कीड़ों को समाप्त करने के लिए सुबह तथा शाम 1 चम्मच प्याज का रस गर्म करके बच्चे को पिलाने से लाभ होता है।
  • रोगी को सुबह.शाम 1 चम्मच ताजे आंवले का रस कुछ दिनों तक पिलाने से उसके पेट के कीड़ें जल्दी ही मर जाते हैं।
  • पेट के कीड़ों को मारने के लिए 1 चम्मच बेल पत्थर का रस सुबह-शाम रोगी को पिलाना चाहिए।
  • कीड़ों को मारने के लिए लौकी के बीजों को भिगोकर, छीलकर और पीसकर पीने से बहुत लाभ मिलता है।
  • 1 चम्मच कच्चे पपीते का रस तथा 1 चम्मच शहद को 3.4 चम्मच गर्म पानी में मिलाकर पीने से पेट के कीड़े मरकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।छोटे बच्चों के पेट के कीड़ों को निकालने के लिए सौंफ का तेल ५ मिली थोड़ी सी शकर के साथ ३ से ५ दिन दें|
  • वयस्क लोगों के पेट के कीड़ों के लिए २० मिली सौंफ का तेल कुछ शकर के साथ ४-५ दिन तक दें|
  • सोते वक्त २ चम्मच अरंडी का तेल पिलायें| सुबह की दस्त में तमाम कीड़े निकल जायेंगे|
  • तुलसी के पत्ते का रस पेट के कीड़े ख़त्म करने का अच्छा उपाय है| तुलसी के पत्तों का रस २-३ मिली ७ दिन तक देना चाहिए|
  • मामूली गरम पानी के साथ आधा चम्मच हल्दी की फक्की लेने से पेट के कीड़े मर जाते है| यह उपचार ७ दिन तक करना उचित है|
  •  बच्चों को यदि पेट में कृमि-कीड़ों की शिकायत हो तो लहसुन की कच्ची कलियों का 20-30 बूंद रस एक गिलास दूध में मिलाकर देने से कृमि मर कर शौच के साथ बाहर निकल आते हैं।
  • बेल के पके फलों के गूदे का रस या जूस तैयार करके पिलाने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। बेल के फलों के बजाए पत्तों का रस का सेवन किया जाए तो ज्यादा बेहतर परिणाम प्राप्त होते हैं।
  • प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार रोगी व्यक्ति को बारी-बारी से कटिस्नान गर्म तथा ठंडे पानी से कराने से बहुत अधिक लाभ मिलता है इससे कुछ ही दिनों में कीड़े मरकर मलद्वार के रास्ते बाहर निकल जाते हैं।
  • यदि रोगी व्यक्ति कुछ दिनों तक नियमित रूप से गुनगुने पानी से एनिमा क्रिया करे तो उसके पेट के कीड़े मरकर मल के द्वारा बाहर निकल जाते हैं।
  • रोगी व्यक्ति को रात को सोते समय पेट पर गर्म पट्टी रखनी चाहिए तथा सुबह के समय गर्म पट्टी को हटा देना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है और पेट के कीडे समाप्त हो जाते हैं।
  • 1 चम्मच अजवायन का बारीक चूर्ण 2 गिलास पानी में रात को भिगोने के लिए रख देना चाहिए। सुबह के समय में इस पानी को उबालकर ठंडा करके पी लेना चाहिए। इस पानी को रात के समय में भी पीना चाहिए। इससे पेट के कीड़े मर जाते हैं और मल के साथ बाहर निकल जाते हैं।
  • पेट के कीड़ों को मारकर मल के द्वारा बाहर करने के लिए लहसुन की 4.5 कलियों को शहद के साथ 2 सप्ताह तक लेना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ होता है।
  • कीड़ों को मारकर मल के द्वारा बाहर निकालने के लिए नींबू के बीजों को सुखाकर कूट-पीस कर चूर्ण बना लें। इस 1 चुटकी चूर्ण को दिन में 2 बार गर्म पानी के साथ कुछ दिनों तक लेने से पेट के कीड़े मरकर मल के साथ बाहर निकल जाते हैं।
  • पेट के कीड़ों को मारने के लिए 2.3 अखरोटों को चबाकर ऊपर से 1 गिलास फीका दूध पी लें। इस प्रकार की क्रिया को कम से कम 15 से 20 दिन तक करने से कीड़े मरकर मलद्वार के रास्ते बाहर निकल जाते हैं।
  • भोजन में हींग डालकर कुछ दिनों तक सेवन करने से पेट के कीड़े जल्दी ही समाप्त हो जाते हैं।

सावधानी-Caution

  • शरीर में कीड़े होने से बचने के लिए प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार सभी व्यक्तियों को सफाई और स्वास्थ्य की रक्षा के नियमों का ध्यानपूर्वक पालन करना चाहिए।
  • बच्चों को गन्दगी में खेलने से रोकना चाहिए।
  • खाना खाने से पहले अपने हाथों को अच्छी तरह से धो लेना चाहिए।
  • खाना खाने वाली चीजों को अच्छी तरह से ढककर रखना चाहिए।
  • नाखूनों को हमेशा काटकर रखना चाहिए क्योंकि बड़े नाखूनों के अन्दर मैल जल्दी बैठ जाता है और नाखूनों के ही द्वारा पेट के अन्दर चला जाता है।
  • सभी व्यक्तियों को अपने खाने में अनन्नास पपीता, गाजर, टमाटर, सेब तथा कई प्रकार की हरी सब्जियों का सेवन करना चाहिए।

Sunday, March 20, 2016

बच्चों की अंगूठा चूसने की आदत,home remedies for thumb sucking baby

अंगूठा चूसने की आदत,home remedies for thumb sucking baby


बच्चों के लिए अंगूठा चूसने की आदत अचानक से छोडऩा थोड़ा मुश्किल होता है। यह आदत सालों से विकसित हो रही होती है। हम यह नहीं सोच सकते कि यह पल भर में ही ख़त्म हो जायेगी।जब उसे ऐसा करने से रोका जाता है, तो वह रो-रोकर पूरे घर में कोहराम मचा देता है।
माता-पिता को बहुत ही समझदारी का परिचय देना होता है बच्चों को इस आदत से बचाकर निकालने के लिए। उन्हें सबसे पहले अपने बच्चे के अकेलेपन को दूर करने के लिए प्रयत्न करना होगा। बच्चों को यह आश्वासन देना होगा कि उनके माता-पिता उनके साथ हैं वे अकेले नहीं हैं। कैसी भी परिस्थिति हो उन्हें हमेशा इस बात का ध्यान रखना है कि अपने वे बच्चे को बेसहारेपन या अकेलेपन का दश नहीं देंगे। जब बच्चे का अकेलापन दूर होगा तो वह इस आदत से मुक्त हो सकेगा।

कई मां तो मजबूर होकर अपने बच्चे का अंगूठा खुद ही उसके मुंह में डाल देती हैं। बहरहाल, जो भी हो बच्चे की और ऐसी मांओं की यह आदत कतई अच्छी नहीं है। कोई-कोई बच्चा तो अपनी सारी उंगलियों को ही अपने मुंह में डाल लेता है, तो कोई अपनी हथेली को चूसता रहता है।

शिशु में कैसे छुड़ाएं अंगूठा चूसने की आदत क्या आप अपने शिशु को मुंह में अंगुठा दबाए चूसते हुए देख तनाव में आ जाती हैं, खैर, अब इसमें तनाव में आने की कोई जरुरत नहीं है। 

ये बच्चे बहुत बड़ी आयु हो जाने पर भी इस आदत से मुक्ति पाने में सफल नहीं हो पाते। हाँ, तब किसी दूसरे के सामने होने पर उन्हें इस बात से शर्म वे महसूस करते हैं कि कोई देखेगा तो क्या कहेगा? उस समय वे लुक-छिपकर अंगूठा चूसते हैं पर आदत को छोड़ नहीं पाते।
 क्योकि इसका सरल उपाय अब मिल चुका है, जिससे शिशु यह आदत पल भर में छोड़ देगा। अंगूठा‬ चूसने वाली तो बच्चों की पुरानी और आम आदत है। ऐसा करने से एंडोफिन्स नामक द्रव का उत्पादन होता है जिससे शिशु का दिमाग शांत हो जाता है और उसे जल्द नींद आ जाती है।

कभी-कभी ऐसा करने से कोई समस्या पैदा नहीं होती पर लगातार अंगूठा चूसते रहने से नाखून की गंदगी पेट में जाने से शिशु बीमार हो सकता है। अगर आपको शिशु की अंगूठा चूसने की आदत छुड़ानी है

  • गुस्सा दिखाने से बात नहीं बनेगी- बच्चे के सामने कभी भी गुस्सा या झुंझलाहट न दिखाएं। इससे बच्चे को क्रोध आएगा और वह इससे वह इस आदत को और भी अपना लेगा। 
  • सबसे बड़ा व महत्त्वपूर्ण कारण मुझे लगता है बच्चे का अकेलापन। घर के लोग जब बच्चे की ओर ले लापरवाह होते है तब वह अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए इस बुरी आदत का सहारा लेता है। 
  • उसे विचलित करें- मार्केट में कई प्रकार की चीज़े उपलब्ध हैं जिससे बच्चे की त्वचा और नाखून को बचाया जा सकता है। उसके मुंह में निप्पल या शुगर कैंडी डाल दें जिससे वह अपने अंगूठे को मुंह में न डाल सके। उसका ध्यान अंगूठे की ओर से हटा कर खिलौने, पज्जल या गाने की ओर आकर्षित करें। 
  • हमेशा वही करें जो शिशु को पसंद हो- जो भी आपका बच्चा करने को कहे उसे कभी भी नजरअंदाज न करें। बताया जाता है कि बच्चा तभी अंगूठा चूसता है, जब वह तनाव में आ जाता है। इसलिए उसकी कही हई बात को नकारे नहीं। 
  • थोड़ा स्मार्ट बने- प्राकृतिक तेल यानी की नीम या सरसों का तेल उसके अंगूठे पर लगा दें, जब उसे अपना अंगूठा कड़वा लगेगा, तो वह खुद ही अंगुठा चूसना बंद कर देगा। इस तरीके को कुछ दिनों तक चलाएं और फर्क देखें। उसको खुश रखें- जब भी वह अकेला महसूस करें, तो उसे कोई कार्य करेन को दे दें और जब वह उस कार्य में सफल हो जाए, तब उसे शाबाशी दें। इससे वह पुरस्कृत महसूस करेगा और अंगूठा चूसना बंद कर देगा। 
  • बच्चे के अंगूठे को उसके मुंह में देखें तो उसे दोनों हाथों से होने वाले कामों में व्यस्त रखें। वह काम हो सकते हैं सॉफ्ट टॉय को पकडऩा, किताब पढऩा या फिर पीएसपी पर मनपसंद गेम खेलना आप बच्चे के अंगूठे को बैंड ऐड, टेप या फिर ऊँगली वाले पपेट से बांधकर रखें तो बच्चे को अंगूठा चूसने में इतना मज़ा नहीं आएगा। सोते समय अगर आपका बच्चा अंगूठा चूस रहा है तो आप सॉक्स का इस्तमाल भी कर सकते हैं।
  • अंगूठे पर नीम्बू का रस लगा देंरू बच्चे अक्सर नीम्बू का रास पसंद नहीं करते। अगर आप उसके अंगूठे पर ढेर सारा नीम्बू का रस लगा देती हैं तो हो सकता है कि आप लकी हों। 
  • बच्चे के अंगूठे में नीम की पत्तियों को या चिरायता को पीसकर लगा दें। वह जब भी अंगूठे को चूसने की कोशिश करेगा, उसे कड़वा लगेगा और फिर धीरे-धीरे चूसना छोड़ देगा। कड़वा लगने पर वह रो भी सकता है, लेकिन आप अपने हृदय को कठोर बनाये रखें। 
  • बच्चे के अंगूठे पर फेमाइट [एक बदबूदार पाउडर] का लेप लगा दें। काले नमक को पीसकर इसका लेप भी लगा सकते हैं।बच्चों को बार-बार खाने की वस्तुएं जैसे फल, तरबूज का रस, गाय का दूध आदि पोषक, आहार के रूप में दें।बाजार में शहद से भरे निप्पल मिलते हैं। 
  • बच्चे की आदत को छुड़ाने के लिए इनका इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन जरूरत से ज्यादा इनका इस्तेमाल न करें।थंब गार्ड का इस्तमाल करेंरू यह प्लास्टिक का ढांचा होता है जो अंगूठे में फिट हो जाता है और यह अंगूठा चूसने की आदत को काफी हद तक सीमित रखता है। पर इसे ज़बरदस्ती अपने बच्चे पर इस्तमाल करने से उसके मन पर बुरा असर भी पड़ सकता है। इसलिए सावधान रहे। 
  • ऐसा तो हो नहीं सकता कि उनकी इस लुका-छुपी की आदत का किसी को पता न चले। जब घर के या बाहर के लोग उनका मजाक उड़ाते हैं तो उन्हें शर्मिन्दगी का सामना करना पड़ता है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का तो दूसरे बच्चे हर समय मजाक बनाते हैं चाहे वे स्कूल में हों या खेल के मैदान में हों।यह तो चर्चा हुई बच्चों की समस्या की। अब हमें विचार यह करना है कि इस समस्या से इन मासूमों को छुटकारा कैसे दिलाया जाए 
  • बच्चा का जब माता-पिता के साथ अपनापा जुड़ता है तो वह उनके करीब हो जाता है। उनके साथ जब वह अपनी परेशानियों को बाँटने लगता है तब उसका डर और अकेलापन सब गायब हो जाते हैं। उस समय वह भी स्वयं को दूसरे बच्चों की तरह सौभाग्यशाली समझने लगता है।

Tuesday, March 8, 2016

खाँसी का घरेलू इलाज ,Treatment For Cough In Hindi,

सर्दी, खांसी, सिरदर्द, जुकाम जैसी कुछ बीमारियां होती हैं जो किसी को भी किसी भी समय हो सकती है। खांसी की समस्या होने पर आप सुकून से कोई काम नहीं कर सकते हैं। खांसी बदलता मौसम, ठंडा-गर्म खाना पीना या फिर धूल या किसी अन्य चीज से एलर्जी के कारण सकती है । खांसी होने पर तकलीफ भी ज्यादा होती है।

खांसी से बचने के कुछ आसान से उपाय

  • सौंठ को पीस कर पानी में खूब देर तक उबालें। जब एक चौथाई रह जाए तो इसका सेवन गुनगुना होने पर दिन में तीन चार बार करें। तुरंत फायदा होगा। 
  • सूखी खांसी होने पर अमृर्ताण्व रस सुबह-शाम पानी से लेनी चाहिए।
  • सितोपलादि चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से खांसी में आराम मिलता है।
  • तालिसादि चूर्ण दिन भर में दो-तीन बार लेने से खांसी में कमी आती है।
  • हल्दी, गुड़ और पकी फिटकरी का चूर्ण मिलाकर गोलियां बनाकर लेने से खांसी कम होती है।
  • तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में सबसे बढि़या रहती हैं।
  • गुनगुने पानी से गरारे करने से गले को भी आराम मिलता है और खांसी भी कम होती है।
  • सूखी खांसी में काली मिर्च को पीसकर घी में भूनकर लेना भी अच्छा रहता है।
  • गुनगुने पानी से गरारे करने से गले को भी आराम मिलता है और खांसी भी कम होती है। 
  • तुलसी पत्ते, 5 काली मिर्च, 5 नग काला मनुक्का, 6 ग्राम गेहूँ के आटे का चोकर , 6 ग्राम मुलहठी, 3 ग्राम बनफशा के फूल लेकर 200 ग्राम पानी में उबालें। 1 /2 रहने पर ठंडा कर छान लें। फिर गर्म करके बताशे डालकर रात सोते समय गरम-गरम पी जाएँ और चादर ओढ़कर सो जाएँ तथा हवा से बचें। कैसी भी खुश्क खाँसी हो, ठीक हो जाएगी। 
  • काली मिर्च, हरड़े का चूर्ण, तथा पिप्पली का काढ़ा बना कर दिन में दो बार लेने से खाँसी जल्दी दूर होती है
  • 1चम्मच शहद में पिसी हुई कालीमिर्च मिलाकर पीने से भी खांसी जल्दी ही दूर हो जाती है
  • 1चम्मच अदरक का रस में एक चोथाई शहद एवं चुटकी भर हल्दी मिलाकर लेने से खांसी जल्दी ही दूर हो जाती है
  • मूली का रस और दूध को बराबर मिलाकर 1 -1 चम्मच दिन में छह बार लेने से भी शीघ्र लाभ मिलता है 
  • हींग, काली मिर्च और नागरमोथा को पीसकर गुड़ के साथ मिलाकर गोलियाँ बना लें। प्रतिदिन भोजन के बाद दो गोलियों का सेवन करने से खाँसी और कफ में लाभ मिलता है । 
  • 1चम्मच अजवाइन एवं हल्दी मिलाकर गरम कर ले,फिर उसे ठंडा होने के बाद शहद मिलाकर पीने से खांसी जल्दी ही दूर हो जाती है।*खांसी होने पर सेंधा नमक की डली को आग पर अच्छे से गरम कर लीजिए। जब नमक की डली गर्म होकर लाल हो जाए तो तुरंत आधा कप पानी में डालकर निकाल लीजिए। उसके बाद इस नमकीन पानी को पी लीजिए। ऐसा पानी 2-3 दिन सोते वक्त पीने पर खांसी समाप्त हो जाती है। 
  • शहद, किशमिश और मुनक्के को मिलाकर लेने से खांसी जल्दी ही ठीक हो जाती है। 
  • हींग, त्रिफला, मुलेठी और मिश्री को नींबू के रस में मिलाकर चाटने से भी खांसी में फायदा मिलता है। 
  • भुने हुए चने को कालीमिर्च के साथ खाने से खांसी बहुत जल्दी गायब हो जाती है। 
  • त्रिफला में बराबर मात्रा में शहद मिलाकर पीने से हर तरह की खांसी में फायदा होता है। 
  • तुलसी, कालीमिर्च और अदरक की चाय पीने से भी खांसी शीघ्र ही समाप्त होती है। 
  • पानी में नमक, हल्द‍ी, लौंग और तुलसी पत्ते उबालें। इस पानी को छानकर रात को सोते समय गुनगुना पिएँ। इसके लगातार सेवन से 7 दिनों के अंदर खाँसी पूरी तरह से समाप्त हो जाती है । 
  • खांसी होने पर खांसी को रोकने के लिए मूंगफली,चटपटी व खट्टी चीजें, ठंडा पानी, दही, अचार, खट्टे फल, केला, कोल्ड ड्रिंक, इमली, तली-भुनी चीजों को खाने से बचना चाहिए । 
  • सूखी खांसी में काली मिर्च को पीसकर घी में भूनकर लेना भी बहुत उत्तम रहता है। 
  • पान का पत्ता और थोड़ी-सी अजवायन , चुटकी भर काला नमक व शहद मिलाकर लेना भी खांसी में लाभ देता है। 
  • सूखी खांसी में काली मिर्च को पीसकर घी में भूनकर लेना भी अच्छा रहता है। 
  • कुछ गोलियों को चूसने से भी खांसी में आराम मिलता है चंदामृत रस भी खांसी में अच्छा रहता है। 
  • हींग, त्रिफला, मुलहठी और मिश्री को नीबू के रस में मिलाकर लेने से खांसी कम करने में मदद मिलती है 
  • त्रिफला और शहद बराबर मात्रा में मिलाकर लेने से भी फायदा होता है। गले में खराश होने पर कंठकारी अवलेह आधा-आधा चम्मच दो बार पानी से या ऐसे ही लें। 
  • पीपली, काली मिर्च, सौंठ और मुलहठी का चूर्ण बनाकर चौथाई चम्मच शहद के साथ लेना अच्छा रहता है
  • पान का पत्ता और थोड़ी-सी अजवायन पानी में चुटकी भर काला नमक व शहद मिलाकर लेना भी खांसी में लाभदायक होता है। खासकर बच्चों के लिए। बताशे में काली मिर्च डालकर चबाने से भी खांसी में कमी आती है। 
  • हालांकि यह साबित हो चुका है कि तीन हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर टीबी की जांच करवा लेनी चाहिए क्योंकि लापरवाही बरतने से खांसी बढ़कर टीबी का रूप ले सकती है। खांसी होने पर पानी पीना चाहिए या फिर पीठ को सहलाने से आराम मिलता है।खाना खाते या बोलते समय खांसी आए तो खाने को धीरे-धीरे छोटी-छोटी बाइट में खाना चाहिए। तालिसादि चूर्ण दिन भर में दो-तीन बार लेने से खांसी में कमी आती है।हल्दी, गुड़ और पकी फिटकरी का चूर्ण मिलाकर गोलियां बनाकर लेने से खांसी कम होती है।तुलसी, काली मिर्च और अदरक की चाय खांसी में सबसे बढि़या रहती हैं। गुनगुने पानी से गरारे करने से गले को भी आराम मिलता है और खांसी भी कम होती है

Friday, December 4, 2015

छोटे बच्‍चों के सर्दी, जुकाम, छींक, खांसी और बुखार सभी के लिए 1 औषधि


सीतोपलादी चूर्ण ।


सीतोपलादी चूर्ण आयुर्वेद का बहुत प्रसिद्ध औषधि है। जब सर्दी, खांसी, बुखार 1 साथ ये सब हो जायें । तो उसके लिए सीतोपलादी चूर्ण प्रयोग करें।
औषधि — सीतोपलादी चूर्ण 1 चुटकी (1/4 चम्‍मच) शहद में मिलाकर प्रात: और सायंकाल खाली पेट चटायें। इससे छोटे बच्‍चों के सर्दी, जुकाम, छींक, खांसी और बुखार ठीक हो जायेगी। बडे लोगों के लिए 1/2 चम्‍मच चूर्ण का प्रयोग करें।


बनाने की विधि- नीचे बताई गयी चीजे किसी भी किराना या पंसारी की दुकान पे आराम से मिल जायेगी।

1- मिश्री-16 भाग 160 g.m

2-वंशलोचन – 8 भाग 80 g.m

3-पिप्पली-4 भाग 40 g.m

4- इलाइची- 2 भाग 20 g.m

5-दालचीनी- 1 भाग 10 g.m इन सब को बरीक पीस ले। और बना गया आप का सितोपलादि चूर्ण ये मधु या घी के साथ लिया जाता है 2 से 4 ग्राम की मात्रा में ले।

वैसे ये किसी भी मेडीकल स्टोर पे उप्लब्द है ।

 बच्चों की खांसी के घरेलू उपाय,Home Remedies Cough Cold Babies

  • अदरख की चाय: अदरख के यूं तो कई फायदे है लेकिन अदरख की चाय सर्दी-जुकाम में भारी राहत प्रदान करती है।  सर्दी-जुकाम या फिर फ्लू के सिम्टम में ताजा अदरख को बिल्कुल बारीक कर ले और उसमें एक कप गरम पानी या दूध मिलाए। उसे कुछ देर तक उबलने के बाद पीए। यह नुस्खा आपको सर्दी जुकाम से राहत पाने में तेजी से मदद करता है।
  • नींबू और शहद: नींबू और शहद के इस्तेमाल से सर्दी और जुकाम में फायदा होता है। दो चम्मच शहद में एक चम्मच नींबू का रस एक ग्लास गुनगुने पानी या फिर गर्म दूध में मिलाकर पीने से इसमें काफी लाभ होता है।
  • एक छोटा चम्‍मच मां का दूध या बकरी का दूध लेकर उसमें आधा चम्‍मच शहद मिलाकर दिन में चार पांच बार चटाएं। यह काली खांसी का अचूक इलाज माना जाता है।
  • मुलहठी और अनार का छिलके को जला कर कपड़े से छन जाने योग्‍य चूर्णं बना लें। फिर थोड़ा सा चूर्णं एक ग्राम शहद में मिलाकर चटाएं।
  • तीन – चार ग्राम शुद्ध किया हुआ नारियल का तेल दिन में तीन बार आधा चम्‍मच पिलाने से भी काली खांसी में बहुत जल्‍दी आराम मिलता है।
  • केले के सूखे फूल को जलाकर भस्‍म बनाएं। इस भस्‍म को १२५ मिली.ग्राम की मात्रा में शहद में मिलाकर बच्‍चे को दिन में तीन – चार बार चटाएं। इसका इस्‍तेमाल बड़े भी कर सकते हैं। बड़ों को ५०० मिली. ग्राम मात्रा में दें।
  • लौंग, छोटी पीपर और जायफल इन तीनों को २० – २० ग्राम तथा काली मिर्च ४० ग्राम और मिश्री १०० ग्राम लेकर कपड़े से छन जाने योग्‍य चूर्णं बनाएं। फिर इसे १ ग्राम की मात्रा में लेकर सुबह शाम पिलाने से काली खांसी दूर हो जाती है।
  • लौंग को आग में भूनकर और बारीक चूर्णं बनाकर शहद के साथ देने से कुकुर खांसी में बहुत लाभ होता है।
  • अनार के छिलके, काली मिर्च, सेंधा नमक, बहेड़े का छिलका सभी को समान मात्रा में लेकर बारीक कपड़े से छन जाने योग्‍य चूर्णं बनाएं। फिर १ ग्राम चूर्णं पान के रस के साथ बच्‍चे को दिन में ४ – ५ बार चटाएं। इसे तुलसी के रस के साथ भी दिया जा सकता है।
  • चने की दाल के बराबर पिसी हुई फिटकरी पानी में मिलाकर दिन में दो बार पिलाने से भी कुकर खांसी में लाभ होता है।
  • जिस कमरे में बच्‍चा सोता हो वहां अंगारों पर नीम, लहसुन, प्‍याज और अनार के छिलकों को डालकर धुआं करने से बच्‍चे को सांस लेने में दिक्‍कत नहीं होगी और काली खांसी में भी आराम मिलेगा।
  • २५० मिली. ग्राम भुनी हुई फिटकरी बराबर मात्रा में चीनी के साथ दिन में दो बार देने से लाभ होता है।
  • अनार के फूल का छिलका सुखाकर उसे पीस कर कपड़े से छन जाने योग्‍य चूर्णं बनाएं। फिर २ ग्राम चूर्णं को पानी में उबालकर छान लें। ठंडा होने पर १ – २ चम्‍मच की मात्रा में दिन में तीन चार बार पिलाएं।
  •  बच्‍चे को तुलसी का रस दें। इससे सर्दी का प्रकोप नहीं होगा।
  • बच्‍चे की छाती में कफ जम जाए तो आप थोड़ा सा गाय का घी छाती पर मलें। इससे कफ पिघल कर बाहर आ जाएगा।
  • आधा इंच अदरक व एक ग्राम तेजपत्‍ते को एक कप पानी में भिगो कर काढ़ा बनाएं। फिर इसमें एक चम्‍मच मिश्री मिलाकर १ – १ चम्‍मच की मात्रा में दिन में तीन बार पिलाएं। इससे दो दिन में ही खांसी जुकाम ठीक हो जाएगा।
  • आधा चम्‍मच तुलसी के रस में आधा चम्‍मच शहद मिलाकर दिन में तीन बार बच्‍चे को पिलाएं। सर्दी खांसी में बहुत आराम मिलेगा।
  • थोड़ा सा सरसों का तेल रोजाना उसकी छाती और गुदा मार्ग पर लगाएं। बहुत जल्‍दी आराम मिलेगा।
  • खांसी होने पर बच्‍चे को वंशलोचन पीसकर शहद के साथ चटाएं। आराम मिलेगा।
  • लहसुन: लहसुन सर्दी-जुकाम से लड़ने में काफी मददगार होता है। लहसुन में एलिसिन नामक एक रसायण होता है जो एंडी बैक्टेरियल, एंटी वायरल और एंटी फंगल होता है। लहसुन की पांच कलियों को घी में भुनकर खाए। ऐसा एक दो बार करने से जुकाम में आराम मिल जाता है। सर्दी जुकाम के संक्रमण को लहसुन तेजी से दूर करता है।
  • तुलसी पत्ता और अदरख: तुलसी और अदरख को सर्दी-जुकाम के लिए रामबाण माना जाता है। इसके सेवन से इसमें तुरंत राहत मिलती है। एक कप गर्म पानी में तुलसी की पांच-सात पत्तियां ले। उसमें अदरख के एक टुकड़े को भी डाल दे। उसे कुछ देर तक उबलने दे और उसका काढ़ा बना ले। जब पानी बिल्कुल आधा रह जाए तो इसे आप धीरे-धीरे पी ले। यह नुस्खा बच्चों के साथ बड़ों को भी सर्दी-जुकाम में राहत दिलाने के लिए असरदार होता है।

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