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Monday, April 11, 2016

योनि में खुजली,Vaginitis Infection,Veginal Infection Treatment in Hindi,


    नीम की निवोली का रस निकाल कर उसको योनि की दीवारों पर धीरे-2 उंगलियों से मलें।अगर ताजा निबोली न मिल सकें तो सूखी निबोली का चूर्ण बनाकर पानी में मिलाकर निचोड़ कर भी प्रयोग कर सकते है लैकिन सबसे अच्छा यह रहैगा कि आप नीम का तेल लेकर उसे लगा लें यह हर समय उपलब्ध रहेगा औऱ आसानी से मिल भी सकेगा।
      • घर में ताजा दही जमा कर उस दही को योनि में तथा आसपास लगाने से इस रोग में आशातीत लाभ मिलता है।
      • गाय का धारोष्ण दूध एक अच्छा बैक्टीरिया नाशक है।ताजा दूध लैकर योनि को धोएं इससे खुजली के कीटाणु नष्ट होंगे तथा रोग ठीक हो जाएगा।
      • हरड़, बहैड़ा,आँवला,नीम,व जमालगोटा की जड़ सब चीजें 100-100 ग्राम ले करजौ जैसा कूट कर किसी डिब्बे में रख लें तथा प्रतिदिन 1 चम्मच रात को 1 गिलास पानी में डाल दें सुबह रात के पानी सहित को चूल्है पर रख कर उवाले जव इसका काढ़ा 1कप वन जाए तो छान लें इस छने हुए पानी से प्रतिदिन इसी प्रकार वनाकर साफ रुई से या साफ कपड़े से योनि को धोएं लैकिन ध्यान रहै धोकर साफ पानी से धोए विना ही आप 1-2 घण्टा के लिए लेटी रहैं लाभ तभी होगा।इस प्रयोग को रात को सोते समय भी कर सकते है किन्तु ध्यान रहे एसी स्थिति में चूर्ण भीगने के लिए तब सुबह को ही डालें।और इसके बाद ऱात को धातक्यादि तैल का फाहा योनि में रखकर सो जाने से बहुत ही जल्दी फायदा होगा
      • योनि में खुजली होने पर तुलसी के पत्‍तों का लेप लगाएं। खुजली ठीक हो जाएगी।
      • केले के गूदे में आंवले का रस और मिश्री मिलाकर खाने से खुजली ठीक हो जाती है।
      • नारियल के तेल में भीमसेनी कपूर मिलाकर यो‍निमार्ग में लगाने से भी खुजली ठीक हो जाती है।
      • नीम की पत्‍ती, गिलोय, मुलहठी, त्रिफला और शरपुंखा को एक समान मात्रा में लेकर कूट लें। फिर 10 ग्राम चूर्ण को पांच सौ ग्राम पानी में उबालें। जब आधा पानी रह जाए, तो उतार कर छान लें। इस पानी से 2-3 बार नियमित रूप से योनि को धोने से खुजली दूर हो जाएगी।
      • अच्‍छी क्‍वालिटी के अल्‍कोहल से योनिमार्ग को धोने से खुजली से आराम मिलता है।
      • 200 ग्राम गेहूं को रात में पानी में भिगो दें। सुबह इसे पीस कर शुद्ध घी में इसका हलवा बनाकर दिन में 2 3 बार खाएं। खुजली में आराम मिलेगा।
      • योनिमार्ग और उसके आस पास के अंग को हमेशा साफ रखें।
      • योनि की खुजली के कारण अगर योनि में दर्द हो और सूजन आ गई हो या घाव हो गया हो, तो अरंड के तेल को रूई के फाहे में भिगोकर योनि के अंदर रखें। एक सप्‍ताह में संतोष जनक आराम मिलेगा।
      • एक ग्‍लास छाछ में एक नींबू निचोड़कर सुबह खाली पेट पीने से 4-5 दिन में योनि की खुजली दूर हो जाएगी
      • अगर श्‍वेदप्रदर के कारण खुजली हो रही है, तो सुबह शाम पांच पांच ग्राम आंवले का चूर्ण चीनी के साथ लेने से आराम मिलता है।
      • गूलर की ताजी पत्तियां पचास ग्राम ले लेकर आधा लीटर पानी में उबालिए, जब पानी आधा रह जाए तो उतार कर छान लीजिए। फिर इसमें डेढ़ ग्राम सुहागा पीस कर मिला लें। इसके बाद गुनगुने पानी को किसी पिचकारी में भरकर योनि को अच्‍छी तरह साफ करें। गूलर के सत्‍व को गर्म पानी में घोलकर डूश करने से गर्भाशय की खुजली में भी आराम मिलता है।

      Sunday, March 20, 2016

      हमेशा जवान दिखने के बेहतरीन नुस्खे,Skin Care Tips in Hindi,

      उम्र भर त्वचा जवान बनी रहे। इसके लिए खानपान पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है। कुछ चीजें स्वस्थ आहार का एक हिस्सा हैं, जो कि आपकी बढ़ती हुई उम्र को रोक सकती हैं। इन खाद्य पदार्थों में एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइटोकेमिकल्स की भरमार होती हैं, जो अपक्षय संबंधी बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं। कुछ ऐसी ही साधारण चीजें जिन्हें खाने पर त्वचा हमेशा जवान बनी रहती है।
      • खट्टे फल-खट्टे फल जैसे संतरा, मौसमी, अंगूर, नींबू आदि। इनमें विटामिन सी, बायोफ्लेवोनॉइड और लाइमोनीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इन फलों में पर्याप्त मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो कि त्वचा को लंबी उम्र तक जवान बनाए रखते हैं।
      • लहसुन में एलीसिन नामक तत्व पाया जाता है। यह ब्लड से बेड कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स को कम करता है। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। इसलिए लहसुन के नियमित सेवन त्वचा लंबी उम्र तक जवान बनी रहती हैं। साथ ही दिल से जड़ी बीमारियां पास नहीं आती हैं।
      • सेब और स्ट्रॉबेरी में घुलनशील फाइबर ब्लड शुगर को कम करते हैं। साथ ही, इन फलों में भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं।इसलिए इनके नियमित सेवन से स्किन हमेशा यंग दिखाई देती है। ये कैंसर से लड़ने में भी मदद करते हैं। दरअसल, ये कैंसर कोशिकाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले एंजाइम को अवरुद्ध कर देते हैं।
      • गोभी, पत्ता गोभी, ब्रोकली, ब्रसेल्स स्प्राउट्स व गोभी परिवार के अन्य सदस्य बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करते हैं। इन सब्जियों में पाए जाने वाले बीटा-कैरोटीन, इंडोलेसग्ल्यूकोइन्नोलेट्स और आइसोथियोसायनेट्स (जो विशेष रूप से ब्रोकली में पाए जाते हैं) त्वचा को जवान बनाए रखते हैं।
      • जई (ओट्स)-रोज आधा कप सूखा जई का चोकर या एक कप सूखा जई का दलिया कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है। जई (ओट्स) के सेवन से ब्लड सर्कुलेशन नियंंत्रित रहता है। साथ ही, त्वचा भी जवान बनी रहती है।
      • हरी सब्जियां-पत्तेदार साग पालक, मेथी, सलाद पत्ता, अजवाइन, आदि में बीटा केरोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा इसमें कैल्शियम, आयरन, फोलिक एसिड, विटामिन सी और पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। हरी सब्जियों के पर्याप्त मात्रा में सेवन से स्किन हमेशा यंग रहती है।
      • जैतून का तेल-जैतून या सरसों तेल चेहरे पर लगाने से व खाने में इनके नियमित उपयोग से त्वचा पर झुर्रियां नहीं पड़ती हैं।
      • टमाटर-टमाटर में लाइकोपिन पाया जाता है, यह एक तरह का कैरीटिनॉइड होता है। साथ ही, एंटीऑक्सीडेंट्स भी मौजूद होते हैं, जो कि त्वचा को जवान बनाए रखते हैं।
      • दही-दही में जीवित बैक्टीरिया होते हैं जो पाचन में मदद करते हैं। कैल्शियम का एक अच्छा स्त्रोत है। यह त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है।
      • पीले रंग के फल-पपीता, गाजर, नारंगी फलों और सब्जियों जैसे कद्दू, आम, खुबानी, शकरकंद, बीटा कैरोटीन और विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसलिए इन चीजों को अपने भोजन में जरूर शामिल करें। त्वचा जवान बनी रहेगी।

      Thursday, March 10, 2016

      कमर दर्द के घरेलू उपचार ,Back Pain Treatment at Home,

      कमर दर्द सुनने में एक सामान्य सी बीमारी लगता है किन्तु इसका अनुभव वह ही बता सकता है जिसको इस समस्या से दो-चार होना पडा हो| पहले यह समस्या मुख्यतः वृद्धावस्था में परेशान करती थी किन्तु पिछले दो दशक में मुख्यतः खानपान में आये परिवर्तन और जीवनशैली के अनियमित हो जाने से अब यह रोग हर तीसरे-चौथे इन्सान को होने लगा है, तो चलिये इस बारे में कुछ बातें करते हैं|

      कमर दर्द होने के कारण,reasons of back Pain,


      कमर दर्द होने के बहुत से कारण आज गिनवाये जा सकते हैं जिनमें से प्रमुख हैं बढती हुई उम्र, पोषण की कमी, रात को देर तक जागना, बैठने की गलत स्थिति, ठण्डी चीजों का अधिक प्रयोग व सेवन,बहुत अधिक वजन, बहुत कम वजन, लम्बी बीमारी के बाद, किसी चीज को झटके से उठा देने आदि कारणों से अल्पकाल अथवा स्थाई रूप से कमर दर्द रहने लगता है| इसके अतिरिक्त पुरुषों में धातरोग एवं महिलाओं में प्रदर रोग में भी कमर दर्द बहुत परेशानी का कारण बन जाता है|  मांसपेशियों पर अत्यधिक तनाव। अधिक वजन। गलत तरीके से बैठना। हमेशा ऊंची एड़ी के जूते या सेंडिल पहनना। गलत तरीके से अधिक वजन उठाना। शरीर में लम्बे समय से बीमारियों का होना। अधिक नर्म गद्दों पर सोना।

      घरेलु उपाय,Back Pain Treatment at Home,back pain treatment ,

      • कमर दर्द के लिये रोज सुबह खाली पेट पाँच ग्राम सौंठ को गुनगुने जल के साथ सेवन करना हबुत लाभदायक होता है| 
      • कमर दर्द में देशी घी से नियमित मालिश करना एक राहत प्रदान करने वाला उपाय है| 
      • कम वजन के कारण कमर दर्द रहता हो तो अश्वगंधा और मेथी को समान मात्रा में लेकर बनाया गया चूर्ण तीन तीन ग्राम रोज दो बार दूध के साथ लेना लाभकारी होता है| 
      • रात को सोते समय सप्ताह में दो बार दो मि०ली० एरण्ड तैल का सेवन करने से, शरीर में खुश्की के कारण होने वाले कमर दर्द से राहत पायी जा सकती है| 
      • ज्यादा वजन अथवा बढी तोंद के कारण होने वाली कमर दर्द में वजन कम करने के उपाय करने चाहिये साथ ही देशी गाय के दूध मे एक-दो दाने काली मिर्च के पकाकर नियमित पीने चाहियें| 
      • जडीबूटी की दुकान से मीठी सुरंजन लाकर उसका चूर्ण बनाकर एक-एक ग्राम दिन में तीन बार गुनगुने पानी से सेवन करना विशेष लाभ देता है| 
      • रोज सुबह सरसों या नारियल के तेल में लहसुन की तीन-चार कलियॉ डालकर (जब तक लहसुन की कलियां काली न हो जायें) गर्म कर लें। ठंडा होने पर इस तेल से कमर की मालिश करें। 
      • नमक मिले गरम पानी में एक तौलिया डालकर निचोड़ लें। इसके बाद पेट के बल लेट जाएं। दर्द के स्थान पर तौलिये से भाप लें। कमर दर्द से राहत पहुंचाने का यह एक अचूक उपाय है। 
      • कढ़ाई में दो-तीन चम्मच नमक डालकर इसे अच्छे से सेक लें। इस नमक को थोड़े मोटे सूती कपड़े में बांधकर पोटली बना लें। कमर पर इस पोटली से सेक करने से भी दर्द से आराम मिलता है। 
      • अजवाइन को तवे के पर थोड़ी धीमी आंच पर सेंक लें। ठंडा होने पर धीरे-धीरे चबाते हुए निगल जाएं। इसके नियमित सेवन से कमर दर्द में लाभ मिलता है। 
      • अधिक देर तक एक ही पोजीशन में बैठकर काम न करें। हर चालीस मिनट में अपनी कुर्सी से उठकर थोड़ी देर टहल लें। 
      • नर्म गद्देदार सीटों से परहेज करना चाहिए। कमर दर्द के रोगियों को थोड़ा सख्ते बिस्तर बिछाकर सोना चाहिए। 
      • योग भी कमर दर्द में लाभ पहुंचाता है। भुन्ज्गासन, शलभासन, हलासन, उत्तानपादासन, आदि कुछ ऐसे योगासन हैं जो की कमर दर्द में काफी लाभ पहुंचाते हैं। कमर दर्द के योगासनों को योगगुरु की देख रेख में ही करने चाहिए। 
      • कैल्शियम की कम मात्रा से भी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं, इसलिए कैल्शियमयुक्त चीजों का सेवन करें। 
      • कमर दर्द के लिए व्यायाम भी करना चाहिए। सैर करना, तैरना या साइकिल चलाना सुरक्षित व्यायाम हैं। तैराकी जहां वजन तो कम करती है, वहीं यह कमर के लिए भी लाभकारी है। साइकिल चलाते समय कमर सीधी रखनी चाहिए। व्यायाम करने से मांसपेशियों को ताकत मिलेगी तथा वजन भी नहीं बढ़ेगा। 
      • कमर दर्द में भारी वजन उठाते समय या जमीन से किसी भी चीज को उठाते समय कमर के बल ना झुकें बल्कि पहले घुटने मोड़कर नीचे झुकें और जब हाथ नीचे वस्तु तक पहुंच जाए तो उसे उठाकर घुटने को सीधा करते हुए खड़े हो जाएं। 
      • कार चलाते वक्त सीट सख्त होनी चाहिए, बैठने का पोश्चर भी सही रखें और कार ड्राइव करते समय सीट बेल्ट टाइट कर लें।

        क्या खायें,What to eat back pain

        कमर दर्द के रोगी को सर्वप्रथम पौष्टिक आहार विहार पर ध्यान देना चाहिये| गाय के घी का सेवन करना चाहिये| सौंठ, जीरा, अजवायन, मेथीदाना आदि का अपने भोजन में समावेश करें| चोकरयुक्त आटे की चपातियॉ खायें, कद्दू, परवल, गाजर,लहसुन, सेंधानमक,योग प्राणायाम आदि का सेवन/अभ्यास करना उचित रहता है

        क्या न खायें,Do not eat

        ठण्डे और गुरू आहार जैसे कि, राजमा, उडद, दही, तक्र, बर्फ के बने सामान, ठण्डा दूध, दिन में सोना, रात को देर तक जागना, वजन उठाना, खटाई, फ्रिज में रखा खाना आदि का सेवन नही करना चाहिये|

        Wednesday, March 2, 2016

        कापर टी क्या है-What is copper T in Hindi

        गर्भनिरोध के उपाय -How to Birth Control in Hindi कापर टी क्या है-What is copper t in Hindi

        विज्ञान के बढते हुए तेज कदम ने निश्चित रुप से हमारे जीवन को थोड़ा आसान कर दिया है,तब बात चाहे किसी भी क्षेत्र की हीं क्यों ना हो.इसी क्रम में एक उल्लेखनीय सुविधा का नाम कापर टी है. आइए प्रश्न और उत्तर के माध्यम से जानें कि यह क्या है,और कैसे काम करता है. कैसे काम करता है आई यू डी वीर्य को अण्डे से मिलने से रोकती है. ऐसा करने के लिए यह अण्डे को वीर्य तक जाने मंर असमर्थ बनाकर और गर्भाशय के अस्तर को बदल कर करती है.
        यह डिवाइस एक छोटी - सी सर्जरी के जरिए वेजाइना के अंदर यूटरस में फिट की जाती है। ऐसी महिलाएं जो मां बन चुकी हैं और प्रेग्नेंसी रोकने के लिए लॉन्ग टर्म सल्यूशन चाहती हैं , उनके लिए यह तरीका काफी मुफीद है। नॉर्मल हो या सीजेरियन , कैसी भी डिलिवरी के बाद मां बनने वाली महिलाएं इस तरीके को अपना सकती हैं। इसे फिक्स करने के बाद एक निश्चित समय के लिए प्रेग्नेंसी से बचाव हो जाता है। फिर जब दोबारा मां बनने की इच्छा हो , इसे आसानी से हटवाया जा सकता है।

        कॉपर टी कैसे काम करती है? How copper-T works?

        कॉपर (ताँबा) के तार द्वारा कॉपर के आयन निकलना प्रारम्भ हो जाते हैं जो गर्भाशयी वातावरण को प्रभावित करके गर्भधारणा को रोकता हैं। कॉपर के आयन गर्भाशय के तरल तथा गर्भाशयी ग्रीवा के श्लेष्म से मिल जाता है और अपने सम्पर्क में ने वाले शुक्राणु को नष्ट कर देते हैं। कॉपर के आयन शुक्राणुओं की गति को रोकते हैं क्योंकि कॉपर आयन युक्त तरल शुक्राणुओं के लिये विषाक्त होते हैं। अगर कोई संघर्षशील शुक्राणु अण्डाणु को निषेचित भी कर देता है तो कॉपर आयन युक्त वातावारण इस निषेचित अण्डे को गर्भाशय में स्थापित नहीं होने देते हैं और इस प्रकार गर्भधारण को रोकते हैं।

        आई यु डी किस प्रकार की होती है आ यु डी के अलग-अलग प्रकार हैं 

        • कॉपर लगी आई यू डी - इसमें एक प्लास्टिक की ट्यब के अन्दर कॉपर की तार लगी रहती है.
        • नई प्रकार के आई यु डी में हॉरमोन छोड़ने वाला आई यु डी है - जो कि प्लास्टिक से बना होता है और उसमें प्रोजेस्ट्रोन हॉरमोन छोटी मात्रा में भरा रहता है.

        कॉपर की आई यु डी की अपेक्षा हॉरमोन वाले आई यु डी के क्या लाभ हैं

        तांबे की बनी एक पत्ती होती है , जिसके साथ कॉइल लगी होती है। पत्ती टी शेप की होती है , इसीलिए इसे कॉपर टी बोला जाता है। अमूमन जो महिलाएं मां नहीं बनी हैं , उन्हें यह तरीका रिकमंड नहीं किया जाता है।

        हॉरमोन वाले युडी कॉपर वाले आई यु डी से अधिक प्रभावशाली हैं माहवारी को हल्का बनाते हैं. कॉपर की आई यु डी की अपेक्षा हॉरमोन वाले आई डी यु की क्या हानियां हैं? हॉरमोन वाले आई यु डी कापर वाले की अपेक्षा महंगे हैं उपयोग के पहले छह महीनों में अनियमित रक्तस्राव या धब्बे लगने की समस्या हो सकती है

        आई यु डी के लाभ है

        • यह गर्भनिरोध के लिए अत्यन्त प्रभावशाली है.
        • सुविधाजनक है - पिल लेने का कोई झंझट नहीं है. मंहगा नहीं है.
        • डाक्टर किसी समय भी निकाल सकते हैं.
        • तुरन्त काम शुरू कर देता है.
        • सहप्रभावों को आशंका कम रहती है.
        • आई यू डू का उपयोग करने वाली माताएं सुरक्षा पूर्वक स्तनपान करवा सकती हैं.

        गर्भनिरोधक में आई यू डी कितनी प्रभावशाली है

        यह गर्भनिरोध का सबसे प्रभावशाली साधन है. इसे यदि सही ढंग से लगाया जाए तो यह 99 प्रतिशत प्रभावशाली है.आई यू डी कितनी देर तक प्रभावशाली रहता है निर्भर करता है कि आपका डाक्टर आपको कौन सा आई यू डी लगवाने को कहता है. कॉपर आई यू डीः टी यू 380 ए जो कि अब राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम के अन्तर्गत उपलब्ध है, वह दस वर्ष के लम्बे समय तक आपके शरीर में रह सकता है. हॉरमोन वाले आई यू डी को हर पांचवे वर्ष में बदलने की जरूरत पड़ती है. इनमें से किसी को भी आपका डाक्टर हटा सकता है. यदि आप गर्भधारण करना चाहें या प्रयोग न करना चाहें तो.

        आई यू डी की हानियां हैं

        • तार चुभ सकते हैं– सेक्स के दौरान पेनिट्रेशन के समय कॉपर टी में लगाया गया तार आपके पार्टनर को चुभ सकता है। दरअसल डॉक्टर को यह तार सीधे-सीधे काटना चाहिए। अगर वो ऐसा नहीं करते, तो आपके पार्टनर की पेनिस को बहुत अधिक तकलीफ हो सकती है, विशेषकर अगर वह काफी डीप जाना चाहते हैं। हालांकि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना काफी कम है। लेकिन अगर ऐसा होता है तो अपने डॉक्टर से सम्पर्क करें।
        • गर्भाशय मे आई यू डी लगाने के पहले कुछ घन्टों में आपको सिरदर्द और पेट दर्द हो सकता है.
        • कुछ औरतों को यह लगवाने के बाद कुछ हफ्तों तक रक्त स्राव होता रहता है और उसके बाद भारी माहवारी होती है.
        • बहुत कम पर कभी, आई यू डी अन्दर डालते समय गर्भाशय में घाव हो सकता है.
        • यह आपको एड्स या एस टी डी से सुरक्षा प्रदान नहीं करता. वस्तुतः ऐसे संक्रामक रोग आई यू डी वाली औरतों के लिए संघात्मक हो सकते हैं. इसके अलावा, अधिक लोगों के साथ सम्भोग करने पर संक्रमण की आशंकाएं बढ़ सकती हैं.
        • आई यू डी को गर्भनिरोधक के रूप में काम में लाने के लिए कौन उपयुक्त है?
        • एलर्जी यह गिने-चुने लोगों में ही होता है लेकिन जो महिलायें कॉपर के प्रति एलर्जी वाली होती हैं उनके जननाँगों में दाने पड़ना तथा खुजली हो सकती है। इस स्थिति में उपकरण को हटाना ही श्रेयस्कर होता है। 
        • कुछ महिलाओं में कॉपर टी अपने आप बाहर निकल जाती है । यह उपकरण के लगाने के शुरूआती महीनों में अकसर देखा गया है। 
        • उपकरण लगाते समय गर्भाशय मे कटाव या छेद होना अकसर देखा गया है। यह भी देखा गया है कि उपकरण गर्भाशय की दीवार में छेद कर देता है 
        • जिससे आन्तरिक घाव या रक्तस्राव होने लगता है। अगर उपकरण को तुरन्त न निकाला जाये तो इससे संक्रमण का खतरा रहता है।

        किसी भी परिस्थित में वे औरतें आई यू डी का उपयोग कर सकती हैं जो

        • स्तनपान करा रहीं हों
        • उच्च रक्तचाप, ह्रदय रोग, जिगर या गालब्लैडर के रोग, मधुमेह या मिरगी का उपचार करा रही हों.
        • आई यू डी लगवाने वाले का उचित समय कौन सा है?
        • आई यू डी लगवाने का उचित समय निम्न है –माहवासी चक्र के रहते - माहवारी चक्र के दौरान किसी भी समय - माहवारी रक्तस्राव के आरम्भ होने के बाद के पहले 12 दिनों में लगवाएं.
        •  बच्चे के जन्म गर्भपात- बच्चे के जन्म के 24 घन्टे के अन्दर अन्छर लगवायें.

        आई यू डी कैसे लगाई जाती है

        सामान्यतः एक पीरियड की समाप्ति या उसके तुरन्त बाद लगाया जाता है. हालांकि इसे किसी भी समय लगवाया जा सकता है यदि आपको भरोसा हो कि आप गर्भवती नहीं हैं. आपको योनि परीक्षण करवाना होगा. डाक्टर या नर्स गर्भाशय का माप और स्थिति देखने के लिए एक छोटा सा यन्त्र उसमें डालेंगे. तब आई यू डी लगाया जाएगा. आपको सिखाया जाएगा कि उसके धागे को कैसे महसूस किया जाता है ताकि आप उशे ठीक जगह रख सकें सर्वश्रेष्ठ है कि आप उसे नियमित रूप से चक्र करते रहें, हर महीने के पीरियड के बाद कर लेना उत्तम है.
        आई यू डी अपनी ठीक जगह पर हैं या नहीं, यह कब चैक करने का परामर्श दिया जाता है

        • आई यू डी लगवानें के एक महीने के बाद सप्ताह में एक बार उसे चैक करें
        • असामान्य लक्षण दिखने पर चैक करें.
        • माहवारी के बाद चैक करें.
        • आई यू डी अपनी सही जगह पर है यह चैक करने के लिए महिला को क्या सावधानी बरतनी चाहिए आई यू डी चैक करने के लिए महिला को चाहिए कि
        • अपने हाथ धोये
        • पालथी मार कर बैठे
        • योनि में अपनी अक या दो अंगुली डालें और जब तक धागे को छू न ले अन्दर तक ले जायेय़
        • फिर हाथ से धोये.

        आई यू डी लगवाये हुए महिला को कब डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए?

        तब डाक्टर से मिलना चाहिए जब
        • उसके साथी को सम्भोग के दौरान वह धागा छूता हो और उससे वह परेशान हो.
        • भारी और लम्बी अवधि तक होने वाले रक्त स्राव से होने वाली परेशानी
        • पेट के निचले भाग में तेज और बढ़ता हुआ दर्द विशेषकर अगर साथ में बुखार भी हो
        • एक बार माहवारी न होना
        • योनि से दुर्गन्ध भरा स्राव
        • परिवार नियोजन की कोई और विधि अपनाना चाहें या आई यू डी निकलवाना चाहें तब.

        Sunday, January 31, 2016

        हिस्टीरिया -Hysteria Disorder



        हिस्टीरिया (Hysteria) की कोई निश्चित परिभाषा नहीं है। बहुधा ऐसा कहा जाता है, हिस्टीरिया अवचेतन अभिप्रेरणा का परिणाम है।अवचेतन अंतर्द्वंद्र से चिंता उत्पन्न होती है और यह चिंता विभिन्न शारीरिक, शरीरक्रिया संबंधी एवं मनोवैज्ञानिक लक्षणों में परिवर्तित हो जाती है। रोगलक्षण में बह्य लाक्षणिक अभिव्यक्ति पाई जाती है।तनाव से छुटकारा पाने का हिस्टीरिया एक साधन भी हो सकता है।

        हिस्टीरिया के लक्षण

        • अपनी विकलांग सास की अनिश्चित काल की सेवा से तंग किसी महिला के दाहिने हाथ में पक्षाघात संभव है।अधिक विकसित एवं शिक्षित राष्ट्रों में हिस्टीरिया कम पाया जाता है। हिस्टीरिया भावात्मक रूप से अपरिपक्व एवं संवेदनशील, प्रारंभिक बाल्यकाल से किसी भी आयु के, पुरुषों या महिलाओं में पाया जाता है।दुर्लालित एवं आवश्यकता से अधिक संरक्षित बच्चे इसके अच्छे शिकार होते हैं। किसी दु:खद घटना अथवा तनाव के कारण दौरे पड़ सकते हैं। लक्षणजब हिस्टीरिया होता है, तो इसमें रोगी अचेत अवस्था में पहुंच जाता है। रोग में सिर्फ रोगी को बेहोशी के दौरे ही नहीं पड़ते, बल्कि कभी-कभी दूसरे लक्षण भी सामने आते हैं, 
        • जैसे-हिस्टीरिया का दौरा पड़ने पर कुछ समय के लिए देखना और सुनना बन्द हो जाता है मुंह से आवाज़ निकलनी बंद हो जाती है रोगी के हाथ-पैर काँपने लगते हैं शरीर का कोई भी हिस्सा बिल्कुल सुन्न पड़ जाता है, जैसा कि लकवे में होता है इस रोग में पूरी तरह से बेहोशी नहीं आती है। बेहोशी की हालत समाप्त हो जाने पर स्त्री को खुलकर पेशाब आता है। रोग की उत्पत्ति से पूर्व या आरम्भ में हृदय में पीड़ा, जंभाई, बेचैनी आदि लक्षण भी होते हैं। 
        • पीड़ित स्त्री को सांस लेने में कठिनाई, सिर, पैर, पेट और छाती में दर्द, गले में कुछ फंस जाने का आभास, शरीर को छूने मात्र से ही दर्द महसूस होता है। आलसी स्वभाव, मेहनत करने में बिल्कुल भी मन ना करना, रात में बिना बात के जागना, सुबह देर तक सोते रहना, भ्रम होना, पेट में गोला-सा उठकर गले तक जाना, दम घुटना, थकावट, गर्दन का अकड़ना, पेट में अफारा होना, डकारों का अधिक आना और हृदय की धड़कन बढ़ जाना, साथ ही लकवा और अंधापन हो जाना आदि
        • हिस्टीरिया के लक्षण हैं।इस रोग से पीड़ित स्त्री को प्रकाश की ओर देखने में परेशानी होने लगती है। जब स्त्री को इस रोग का दौरा पड़ता है तो उसका गला सूखने लगता है और वह बेहोश हो जाती है।

        हिस्टीरिया का उपचार 

        संवेदनात्मक व्यवहार, पारिवारिक समायोजन, शामक औषधियों का सेवन, सांत्वना, बहलाने, तथा पुन शिक्षण से किया जात है। समय समय पर पक्षाघातित अंगों के उपचार हेतु शामक ओषधियों तथा विद्युत्‌ उद्दीपनों की भी सहायता ली जाती है। रोग का पुनरावर्तन प्राय: होता रहता है।किसी स्त्री में हिस्टीरिया रोग के लक्षण नज़र आते ही उसे तुरन्त किसी मनोचिकित्सक से इस रोग का इलाज कराना चाहिए।हिस्टीरिया के रोगी को गुस्से में या किसी और कारण से मारना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे उसे और ज़्यादा मानसिक और शारीरिक कष्ट हो सकते हैं। एक बात का ख़ासतौर पर ध्यान रखना चाहिए कि हिस्टीरिया रोगी अपने
        आपको किसी तरह का नुकसान ना पहुंचा पाए। 
        • हिस्टीरिया के रोगी को गुस्से में या किसी और कारण से मारना नहीं चाहिए क्योंकि इससे उसे और ज़्यादा मानसिक और शारीरिक कष्ट हो सकते हैं।
        • एक बात का ख़ासतौर पर ध्यान रखना चाहिए कि हिस्टीरिया रोगी अपने आपको किसी तरह का नुकसान ना पहुंचा पाए।
        • इस रोग के रोगी की सबसे अच्छी चिकित्सा उसकी इच्छाओं को पूरा करना तथा उसे संतुष्टि देना है। इसके अलावा रोगी को शांत वातावरण में घूमना चाहिए। रोगी के सामने ऐसी कोई बात न करनी चाहिए जिससें उसे चिन्ता सतायें।
        • इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को जब दौरा पड़ता है तो उसके शरीर के सारे कपड़े ढीले कर देने चाहिए तथा उसे खुली जगह पर लिटाना चाहिए और उसके हाथ और तलवों को मसलना चाहिए।
        • जब इस रोग से पीड़ित रोगी बेहोश हो जाए तो उसके अंगूठे के नाखून में अपने नाखून को चुभोकर उसकी बेहोशी को दूर करना चाहिए और फिर उसके चेहरे पर ठंडे पानी के छींटे मारनी चाहिए। इससे रोगी स्त्री को होश आ जाता है और उसका बेहोशीपन दूर हो जाता है। जब रोगी स्त्री बेहोश हो जाती है तो हींग तथा प्याज को काटकर सुंघाने से लाभ मिलता है।
        • बेहोश होने वाली स्त्री को होश में लाने के लिए सबसे पहले रोगी की नाक में नमक मिला हुआ पानी डाल दें। इससे बेहोशी रोग ठीक हो जाएगा, लेकिन यह उपाय शीघ्र ही और कुछ ही समय के लिए है। इसका अच्छी तरह से इलाज तो अपने डाक्टर या अपने वैद्य से ही कराना चाहिए।
        • इस रोग से पीड़ित स्त्री का इलाज करने के लिए कुछ दिनों तक उसे फल तथा बिना पका हुए भोजन खिलाना चाहिए।
        • इस रोग से पीड़ित रोगी के लिए जामुन का सेवन बहुत ही लाभदायक होता है। इसलिए रोगी स्त्री को प्रतिदिन जामुन खिलाना चाहिए।
        • यदि इस रोग से पीड़ित स्त्री प्रतिदिन 1 चम्मच शहद को सुबह-दोपहर-शाम चाटे तो उसका यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
        • सर्वप्रथम एरंड तेल में भुनी हुई छोटी काली हरड़ का चूर्ण 5 ग्राम प्रतिदिन लगातार दे कर उसका उदर शोधन तथा वायु का शमन करें। 
        • सरसों, हींग, बालवच, करजबीज, देवदाख मंजीज, त्रिफला, श्वेत अपराजिता मालकंगुनी, दालचीनी, त्रिकटु, प्रियंगु शिरीष के बीज, हल्दी और दारु हल्दी को बराबर-बराबर ले कर, गाय या बकरी के मूत्र में पीस कर, गोलियां बना कर, छाया में सुखा लें। इसका उपयोग पीने, खाने, या लेप में किया जाता है। इसके सेवन से हिस्टीरिया रोग शांत होता है।
        • लहसुन को छील कर, चार गुना पानी और चार गुना दूध में मिला कर, धीमी आग पर पकाएं। आधा दूध रह जाने पर छान कर रोगी को थोड़ा-थोड़ा पिलाते रहें। ब्रह्मी, जटामांसी शंखपुष्पी, असगंध और बच को समान मात्रा में पीस कर, चूर्ण बना कर, एक छोटा चम्मच दिन में दो बार दूध के साथ सेवन करें। इसके साथ ही सारिस्वतारिष्ट दो चम्मच, दिन में दो बार, पानी मिला कर सेवन करें। 
        • ब्राह्मी वटी और अमर सुंदरी वटी की एक-एक गोली मिला कर सुबह तथा रात में सोते समय दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है। जो रोगी बालवच चूर्ण को शहद मिला कर लगातार सवा माह तक खाएं और भोजन में केवल दूध एवं शाश का सेवन करे, उसका हिस्टीरिया शांत हो जाता है। अगर रोगी कुंवारी लड़की है, तो उसकी जल्द शादी करवा देनी चाहिए। रोग अपने आप दूर हो जाएगा।
        • केसर, कज्जली, बहेड़ा, कस्तूरी, छोटी इलायची, जायफल और लौंग को बराबर मात्रा में मिलाकर 7 दिन तक सौंफ के काढ़े में मिलाकर और घोटकर तैयार कर लें। इसके बाद इस मिश्रण को तैयार करके इलायची के दाने के बराबर की गोलियां बना लें। 4-4 ग्राम मूसली सफेद तथा सौंफ के काढ़े से सुबह और शाम सेवन करना चाहिए। अगर मासिकस्राव के समय में कोई कमी हो तो सबसे पहले ऊपर बताई गई दवा से इलाज करें।
        • खुरासानी अजवासय 1 ग्राम, मीठी बच 1 ग्राम दोनों को पीसकर अनार के रस के साथ सेवन करें।
        • नीबू कर रस, सेंधा नमक, जीरा, पोदीना और भुनी हींग, सबको 3-3 ग्राम मात्रा में लेकर, थोडे़ से उष्ण जल में मिलाकर पीने से हिस्टीरिया का प्रकोप नष्ट होता है।
        • ग्वारपाठे का गूदा 10 ग्राम, मिसरी 10 ग्राम मिलाकर त्रिफला जल के साथ पीने से रोग का प्रकोप खत्म होता है।
        • अनार के 10 ग्राम पत्ते और गुलाब के 10 ग्राम फूलों को जल में उबालकर क्वाथ बनाएं। क्वाथ को छानकर, उनमें 10 ग्राम घी मिलाकर सुबह-शाम पीने से रोग नष्ट होता है।
        • मुनक्के के 6 दाने दूध में उबालकर मिसरी मिलाकर पीने से रोग का प्रकोप कम होता है।
        • हिस्टीरिया से बेहोश होने पर रोगी की नाक में लहसुन के रस की एक-एक बूंद डालें। बेहोशी जल्दी नष्ट होगी।
        • सेब, अनार, संतरा, मौसमी व अनन्नास का सेवन करें या रस पिएं।
        • आंवले, गाजर, सेब व हरड़ का मुरब्बा खाएं।
        • हिस्टीरिया से पीड़ित युवतियां सुबह-शाम गाय का दूध अवश्य पिएं

        क्या न खाएं

        • बेहोश युवती को जल व दूध पिलाने की कोशिश करें।
        • रोगी को अधिक मिर्च-मसालों व अम्लीय रसों से बने खाद्य पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए।
        • चाय, कॉफी व शराब का सेवन न करें।
        • रोगी युवती को अश्लील फिल्मों और अश्लील बातों से अलग रहना चाहिए।
        • हिस्टीरिया रोगी को मांस, मछली, अंडे व छोले-भठूरे, गोल-गप्पे, समोसे, कचौड़ी आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
        • दूषित, बासी व देर से बनाकर रखे खाद्य पदार्थो का सेवन न करें।
        • चाइनीज और फास्ट फूड न खाएं

        Friday, January 22, 2016

        गर्भधारण के उपाय, Preventive Measures for Pregnancy in Hindi,

        गर्भवती होने के लिए सिर्फ सेक्स जरूरी नहीं जरूरी है सही समय पर सेक्स गर्भवती होने के लिए सेक्स का कोई निर्धारित समय नहीं है। महिलाएं जब ओर्गास्म प्राप्त कर लेती है तो गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। गर्भवती होने के लिए सेक्स जितना जरूरी है उतना ही इस बात का ज्ञान होना कि सेक्स कब किया जाए। इस तथ्य को नजरअंदाज करने से कई बार गर्भधारण करने में परेशानी भी आती है। आइए जानें कि माह में किस समय सेक्स करने से गर्भधारण की संभावना काफी अधिक होती है।
        • पुरुष के शुक्राणु का साथी महिला के गर्भ में जाने से गर्भधारण होता है। महिला के अंडाणु से शुक्राणु का मेल होना और निषेचन की क्रिया का होना ही गर्भधारण है। यूं तो गर्भधारण न कर पानेके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। इन कारणों के पीछे अधिकतर ज्ञान और जानकारी का अभाव होता है। 
        • इन सबकारणों के अतिरिक्त एक अन्य कारण भी होता है जिसका असर महिलाओं की गर्भधारण की क्षमता पर पड़ता है, और वह कारण है सही समय पर सेक्स न करना। अधिकतर जोड़े इस बात से अंजान होते हैं कि गर्भधारण में सेक्स की 'टाइमिंग' बहत मायने रखती है। समय पर सहवास-गर्भवती होने के लिए सिर्फ सहवास करना जरूरी नहीं होता बल्कि सही समय पर सहवास करना भी मायने रखता है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि पुरुष के शुक्राणु हमेशा लगभग एक जैसे ही होते हैं, जो महिला को गर्भवती कर सकते हैं। लेकिन महिला का शरीर ऐसा नहीं होता जो कभी भी गर्भवती हो सके। उसका एक निश्चित समय होता है, एक छोटी सी अवधि होतीहै। 
        • यदि आप उस अवधि को पहचान कर उस समय सहवास करते हैं तो गर्भधारण की संभावना आश्चर्यजनक रूप से बढ़ जाती है। एक मत यह है कि 28 दिन के मासिक धर्म के साइकिल में 14वें दिन ओवुलेशन का है जो पीरियड शुरू होनेके बाद से गिना जाता है, इस दौरान 12 से 18 दिन के बीच में सेक्स करने से गर्भ ठहरता है।'प्रेग्नेंट होने के लिए सेक्स का कोई विशेष दिन नहीं होता, नियमित सेक्स लाइफ में भरोसा रखिए और बेबी प्लानिंग के तीन महीने पहले से फोलिक एसिड के टेबलेट जरूर खाती रहें।' 
        • ओवुलेशन साइकिल-ऋतुचक्र या पीरियड्स के सात दिन बाद ओवुलेशन साइकिल शुरू होती है, और यह माहवारी या पीरियड्स के शुरू होने से सात दिन पहले तक रहती है। ओवुलेशन पीरियड ही वह समय होता है, जिसमें कि महिला गर्भधारण कर सकती है और इस स्थिति को फर्टाइल स्टेज भी कहते हैं। गर्भधारण के लिए, जब भी सेक्स करें तो ओवुलेशन पीरियड में ही करें। 
        • अपनी ओवुलेशन साइकिल का पता लगायें। इसके लिए आप चिकित्सक से संपर्क भी कर सकते हैं। ओर्गास्म-पुरुष सिर्फ अपनी संतुष्टि का खयाल रखते हैं और अपनी पत्नी की कमोत्तेजना को तवज्जो नहीं देते। ऐसी स्त्रियों को गर्भधारण करने में मुश्किलें आती हैं। अगर स्त्री सहवास के वक्त ओर्गास्म प्राप्त कर लेती है तो गर्भधारण की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। क्योंकि तब पुरुष के शुक्राणु को सही जगह जाने का समय और माहौल मिलता है तथा शुक्राणु ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं।

        सुबह का समय,Morning time

        • गर्भधारण के लिए सेक्स का समय सुबह का होना चाहिए क्योंकि सुबह के समय आप तरोताजा़ रहते हैं।जिन महिलाओं में रेगुलर पीरियड हो वे प्रेगनेंट होने के लिए पीरियड के बाद दस दिन के अंतराल में सेक्स करें, इससे प्रेगनेंट होने की संभावना ज्यादा होती है औरजिनमें में अनियमित पीरियड हो वे प्रेगनेंसी के लिए पीरियड के साइकिल में नियमित अंतराल  पर सेक्स करें।

        पीरियडस के दौरान सेक्स

        जब आप गर्भधारण करने का सोच रहे है तो इस बात सावधानी बरतें कि कभी भी पीरियडस के दौरान सेक्स ना करें। गर्भ धारण करने या गर्भ की स्थापना के लिए यहाँ हम कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे
          • एक चम्मच असगंध का चूर्ण एक चम्मच देशी घी के साथ मिलाकर मिश्री मिले दूध के साथ मासिक धर्म के 6 ठे दिन से पूरे माह पीने से गर्भाशयके दोष दूर होकर स्त्री को गर्भ ठहर जाता है|
          • अशोक के फूल नियमित रूप से दही के साथ मासिक धर्म के 6 ठे दिन से 2 हफ्ते तक लेते रहने से स्त्री को गर्भ स्थापा हो जाता है|
          • अपामार्ग की जड़ का चूर्ण मासिक के बाद 21 दिन तक दूध के साथ लेते रहने से स्त्री के गर्भवती होने के चांस बढ़ जाते हैं|
          • पीपल के सूखे फलों का चूर्ण आधा चम्मच कच्चे दूध से मासिक धर्म शुरू होने के पांचवे दिन से दो हफ्ते तक सुबह शाम लेने से गर्भाधान के अवसर बढ़ते हैं| गर्भ न टिके तो आने वाले महीनों मे भी यही उपाय करें|
          • तीन ग्राम गोरोचन, १० ग्राम असगंध, १० ग्राम गजपीपरी तीनों को बारीक पीसकर चूर्णं बनाएं। फिर पीरिएड के चौथे दिन से निरंतर पांच दिनों तक इसे दूध के साथ पिएं।
          • महिलाओं को शतावरी चूर्णं घी – दूध में मिलाकर खिलाने से गर्भाशय की सारी विकृतियां दूर हो जाएंगीं और वे गर्भधारण के योग्‍य होगी।
          • 10g ग्राम पीपल की ताज़ी कोंपल जटा जौकुट करके ५०० मि.ली. दूध में पकाएं।जब वह मात्र २०० मि.ली. बचे तो उतारकर छान लें। फिर इसमें चीनी और शहद मिलाकर पीरिएड होने के ५वें या ६ठे दिन से खाना शुरू कर दें। यह बहुत अच्‍छी औषधि मानी जाती है।
            • सेमल की जड़ पीसकर ढाई सौ ग्राम पानी में पकाएं और फिर इसे छान लें। मासिक धर्म के बाद चार दिन तक इसका सेवन करें।
            • 50g ग्राम गुलकंद में 20g ग्राम सौंफ मिलाकर चबाकर खाएं और ऊपर से एक ग्‍लास दूध नियमित रूप से पिएं। इससे आपको बांझपन से मुक्ति मिल सकती है।
            • गुप्‍तांगों की साफ सफाई पर विशेष ध्‍यान दें। खाने में जौ, मूंग, घी, करेला,शालि चावल, परवल, मूली, तिल का तेल, सहिजन आदि जरूर शामिल करें।
            • पलाश का एक पत्‍ता गाय के दूध में औटाएं और उसे छानकर पिएं। मासिक धर्म के बाद से पीना शुरू करें और ७ दिनों तक प्रयोग करें।
            • पीपल के सूखे फलों का चूर्णं बनाकर रख लें। मासिक धर्म के बाद
            • 5-10 ग्राम चूर्णं खाकर ऊपर से कच्‍चा दूध पिएं। यह प्रयोग नियमित रूप से १४ दिन तक करें।
            • मासिक धर्म के बाद से एक सप्‍ताह तक २ ग्राम नागकेसर के चूर्णं को दूध के साथ सेवन करें। आपको फाएदा होगा।
            • 5g ग्राम त्रिफलाधृत सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय की शुद्धि होती है। जिससे महिला गर्भधारण करने के योग्‍य हो जाती है।
            • स्त्री को गर्भधारण कराने केलिए उसकी योनि के स्नायु स्वस्थ हो इसके लिए स्त्री का सही आहार, उचित श्रम एवं तनाव रहित होना जरूरी है तभी स्त्री गर्भवती हो सकती है|
            • स्त्री को गर्भधारण करने केलिए यह भी आवश्यक है लिए यह भी आवश्यक है कि योनिस्राव क्षारीय होना चाहिए इसलिए स्त्री का भोजन क्षारप्रधान होना चाहिए। इसलिए उसे अधिक मात्रा में अपक्वाहार तथा भिगोई हुई मेवा खानी चाहिए।
            • इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को अपने इस रोग का इलाज करने के लिए सबसे प हले का इलाज करने के लिए सबसे पहले अपने शरीर से विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालना चाहिए| इसके लिए स्त्री को उपवास रखना चाहिए। इसके बाद उसे 1-2 दिन के बाद कुछ अंतराल पर उपवास करते रहना चाहिए
            • इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को दूध की बजाए दही का इस्तेमाल करना चाहिए।
            • स्त्री को गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद एवं नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए।
            • बांझपन को दूर करने के लिए स्त्रियों को विटामिन `सी´तथा `ई´ की मात्रा वाली चीजें जैसे नींबू, संतरा, आंवला, अंकुरित, गेहूं आदि का भोजन में सेवन अधिक करना चाहिए।
            • स्त्रियों को सर्दियों में प्रतिदिन 5-6 कली लहसुन चबाकर दूध पीना चाहिए, इससे स्त्रियों का बांझपन जल्दी ही दूर हो जाता है।
            • जामुन के पत्तों का काढ़ा बनाकर फिर इसको शहद में मिलाकर प्रतिदिन पीने से स्त्रियों को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
            • बड़ (बरगद) के पेड़ की जड़ों को छाया में सुखाकर कूटकर छानकर पाउडर बना लें। फिर इसे स्त्रियों के माहवारी समाप्त होने के बाद तीन दिन लगातार रात को दूध के साथ लें। इस क्रिया को तब तक करते रहना चाहिए जब तक कि स्त्री गर्भवती न हो जाय |
            • स्त्री के बांझपन के रोगको ठीक करने के लिए 6 ग्राम सौंफ का चूर्ण घी के साथ तीन महीने तक लेते रहने से स्त्री गर्भधारण करने योग्य हो जाती है।
            • स्त्री के बांझपन के रोग को ठीक करने के लिए उसके पेड़ू पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा इसके बाद उसे कटिस्नान कराना चाहिए और कुछ दिनों तक उसे कटि लपेट देना चहिए। इसके बाद स्त्री को गर्म पानी का एनिमा देना चाहिए।

              Wednesday, January 20, 2016

              स्तन बढाने के उपाए-How to Increase Breast Size in Hindi,

                सुडौल व उन्नत वक्ष आपके सौन्दर्य में चार-चाँद लगा सकते है. इस बात में कोई दोराय नहीं है की सुन्दर एवम् सुडौल वक्ष प्रक्रति की देन है परन्तु फिर भी उनकी उचित देखभाल से इन्हें सुडौल व गठित बनाया जा सकता है. इससे आपके व्यक्तित्व में भी निखार आ जाता है.
                अधिकतर महिलाये अपने छोटे ब्रैस्ट को विकसित करना चाहती है उनके लिए दिए गये घरेलु नुस्खे काफी कारगर सिद्ध होंगे. अविकसित वक्ष न तो स्त्री को ही पसंद होते है न ही उनके पुरुष साथी को वक्षों का आकार सही न रहने के पीछे अनेक कारण हो सकते है. किसी लम्बी बीमारी से ग्रसित होने के कारण भी वक्ष बेडौल हो सकते है,

                  how to increase your breast naturally

                  • इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान तथा प्रसव के बाद भी स्तनों का बेडौल हो जाना एक आम बात है. ऐसी अवस्था में स्त्रियों के लिए उचित मात्रा में पौष्टिक व संतुलित आहार लेना अति आवश्यक हो जाता है. उनके भोजन में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, विटामिन्स, मिनरल्स तथा लौह तत्व भरपूर मात्रा में होने चाहिए.
                  • इसके साथ साथ ऐसी स्त्रियों को अपने स्तनों पर जैतुन का लगाकर मालिश करनी चाहिये. ऐसा करने से स्तनों में कसाव आ जाता है. मालिश करने की दिशा निचे से उपर की ओर होने चाहिए मालिश करने के बाद ठन्डे व ताज़े पानी से नहाना उचित रहेगा. ऐसा करने से न केवल वक्ष विकसित व सुडौल होने लगेंगे इसके अलावा आपके रक्त संचार की गति में भी तीव्रता आयगी.

                  वक्ष सौन्दर्य के लिए व्यायाम,Chest exercises,

                  • सबसे पहले घुटनों के बल बैठ जाए और दोनों हाथों को सामने लाकर हथेलियों को आपस में मिलाकर पुरे बल से आपस में दबाएँ जिससे स्तनों की मांसपेशियों में खिंचाव होगा. फिर इसके बाद धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए अपनी हथेलियों को ढीला कर दें. इस प्रक्रिया को नियमित रूप से १० से १५ बार करे. ( वक्षों को नहीं दबाना है )
                  • इसके अलावा दोनों हाथों को सामने की ओर फैलाते हुए हथेलियों को दिवार से सटाकर पांच मिनट तक दीवारे पर दबाव डालें. ऐसा करने से वक्ष की मांसपेशियों में खिचांव होगा, जिससे वक्ष पुष्ट हो जायंगे.
                  • घुटनों के बल चौपाया बन जाए, फिर दोनों कोहनियों को थोडा-सा मोड़ते हुए शारीर के उपरी भाग को निचे की ओर झुकाएं.अपने शरीर का पूरा भार निचे की ओर डाले. तथा पुनः प्रथम अवस्था में आ जाए. इस व्यायाम को 6 से 8 बार दोहराएँ.
                  • आप व्यायाम के अलावा एक नुस्खे को अपनाकर भी ढीले पड़े स्तनों में कसावट लाई जा सकती है. इसके लिए अनार के छिलकों को छाया में सुखा लें. फिर इन सूखे हुए छिलको का महीन (बारीक़) चूर्ण बना लें, अब इस चूर्ण को नीम के तेल में मिलाकर कुछ देर के लिए पका लें. फिर इसे कुछ देर ठंडा होने के लिए छोड़ दें,
                  • 1-अनार के पंचांग(फ़ल,फ़ूल,पत्तियं,छाल और जड ) से बने तैल से नियमित स्तनों की मालिश करने से स्तनों की मांसपेशियां पुष्ट होकर कसावट आती है। सरसों के तैल में अनार के पंचाग डालकर आंच पर पकाने से पंचाग तैल बन जाता है। दिन में दो बार मालिश नीचे से ऊपर की और करना कर्तव्य है। इससे स्तनों की कौशिकाओं में रक्त संचार बडी तेजी के साथ होने लगता है। स्तनों की मांसपेशियों में तंतुओं की तादाद बढने लगती है,स्तन कठोर,मजबूत और सुडौल होने लगते है।इस उपचार के कोई आनुषंगिक दुष्प्रभाव नहीं होते हैं। दो तीन महीने के उपचार से आशानुकूल परिणाम आते हैं।
                  • असगंध और शतावरी बराबर की मात्रा में लेकर भली प्रकार पीसकर चूर्ण बनाएं। इस चूर्ण को गाय के घी में अच्छी तरह मिलाकर सुरक्षित रख लें। १० ग्राम चूर्ण शहद से मीठे किये गये दूध के साथ सेवन करें। स्तनों के आकार में वृद्धि होकर सुडौल और आकर्षक दिखेंगे।
                  • असगंध,गजपीपल और बच बराबर मात्रा मे लेकर महीन चूर्ण बनाएं । इसे मक्खन के साथ भली प्रकार मिलाकर स्तनों पर लगाएं। स्तन उन्नत उभारवाले और सुडौल बनाने का उत्तम उपचार है।
                  • एक आयुर्वेदिक लेप के नियमित उपयोग से स्तन सुडौल और उत्तेजक बनाये जा सकते हैं। लेप निर्माण विधि नोट करलें
                  • माजूफ़ल,शतावर,छोटी ईलायची ,कमलगट्टे की मिंगी का पावडर,अनार का पंचांग और लसोड की पत्तियों का सत्व ये सभी चीजें लेकर लेप तैयार कर स्तनों पर भली प्रकार लेप करें| इस लेप से स्तनों की मांसपेशियों की ताकत बढती है ,स्तनों का आकार बढता है और सुडौल बनते हैं। एक दो माह का उपचार जरूरी है।

                  सफेद पानी से परेशानी और उसके घरेलू उपचार-,How to stop white Discharge Naturally,


                  http://www.bprrhometips.com/


                  स्त्रिओं का एक रोग है श्वेत प्रदर या सफेद पानी का योनी मार्ग से निकलना Leukorrhea कहलाता है| जो की श्वेत प्रदर की बीमारी का सूचक होता हैं. रक्त प्रदर का रोग अधिकतर मासिक धर्म के दिनों में होता हैं. इन दिनों में ऋतुस्त्राव के समय में अधिक रक्तस्त्राव होता हैं. जिसका प्रभाव महिला के शरीर व स्वास्थ्य पर अधिक पड़ता हैं.

                  घरेलू उपचार 

                  आंवला : आंवले को सुखाकर अच्छी तरह से पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इसी बने चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा को लगभग 1 महीने तक रोज सुबह-शाम को पीने से स्त्रियों को होने वाला श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) नष्ट हो जाता है।
                  सफेद मूसली का चुर्ण और ईसबगोल का सेवन करके भी श्वेत प्रदर के रोग से निजात पाई जा सकती हैं. श्वेत प्रदर के रोग से मुक्ति पाने के लिए मूसली का चुर्ण लें और ईसबगोल लें. अब इन दोनों का सेवन एक साथ करें. ईसबगोल और मूसली के चुर्ण का सेवन करने से यह रोग जल्दी ही ठीक हगो जायेगा

                  झरबेरी : झरबेरी के बेरों को सुखाकर रख लें। इस बारीक चूर्ण बनाकर लगभग 3 से 4 ग्राम की मात्रा में चीनी (शक्कर) और शहद के साथ प्रतिदिन सुबह-शाम को प्रयोग करने से श्वेतप्रदर यानी ल्यूकोरिया का आना समाप्त हो जाता है।

                  नागकेशर : नागकेशर को 3 ग्राम की मात्रा में छाछ के साथ पीने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) की बीमारी से छुटकारा मिल जाता है।

                  रोहितक : रोहितक की जड़ को पीसकर पानी के साथ लेने से श्वेतप्रदर के रोग में लाभ मिलता है।

                  गाजर : गाजर, पालक, गोभी और चुकन्दर के रस को पीने से स्त्रियों के गर्भाशय की सूजन समाप्त हो जाती है और श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) रोग भी ठीक हो जाता है।

                  मेथी : 
                  मेथी के चूर्ण के पानी में भीगे हुए कपड़े को योनि में रखने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) नष्ट होता है।
                  रात को 4 चम्मच पिसी हुई दाना मेथी को सफेद और साफ भीगे हुए पतले कपड़े में बांधकर पोटली बनाकर अन्दर जननेन्द्रिय में रखकर सोयें। पोटली को साफ और मजबूत लम्बे धागे से बांधे जिससे वह योनि से
                  बाहर निकाली जा सके। लगभग 4 घंटे बाद या जब भी किसी तरह का कष्ट हो, पोटली बाहर निकाल लें। इससे श्वेतप्रदर ठीक हो जाता है और आराम मिलता है।

                  मेथी-पाक या मेथी-लड्डू खाने से श्वेतप्रदर से छुटकारा मिल जाता है, शरीर हष्ट-पुष्ट बना रहता है। इससे गर्भाशय की गन्दगी को बाहर निकलने में सहायता मिलती है।

                  गर्भाशय कमजोर होने पर योनि से पानी की तरह पतला स्राव होता है। गुड़ व मेथी का चूर्ण 1-1 चम्मच मिलाकर कुछ दिनों तक खाने से प्रदर बंद हो जाता है।

                  ईसबगोल : ईसबगोल को दूध में देर तक उबालकर, उसमें मिश्री मिलाकर खाने से श्वेत प्रदर में बहुत लाभ होता है।

                  सफेद पेठा :
                  औरतों के श्वेत प्रदर (जरायु से पीले, मटमैले या सफेद पानी जैसा तरल या गाढ़े स्राव के बहने को) रोग (ल्यूकोरिया), अधिक मासिक का स्राव (बहना), खून की कमी आदि रोगों में पेठे का साग घी में भूनकर खाने या उसके रस में चीनी को मिलाकर सुबह-शाम आधा-आधा गिलास पीने से आराम मिलता है।
                  गूलर :

                  रोजाना दिन में 3-4 बार गूलर के पके हुए फल 1-1 करके सेवन करने से लाभ श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) के रोग में मिलता है
                  मासिक-धर्म में खून ज्यादा जाने और गर्भाशय में पांच पके हुए गूलरों पर चीनी डालकर रोजाना खाने से लाभ मिलता है।
                  गूलर का रस 5 से 10 ग्राम मिश्री के साथ मिलाकर महिलाओं को नाभि के निचले हिस्से में पूरे पेट पर लेप करने से महिलाओं के श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) के रोग में आराम आता है

                  1 किलो कच्चे गूलर लेकर इसके 3 भाग कर लें। एक भाग कच्चे गूलर उबाल लें। उनको पीसकर एक चम्मच सरसों के तेल में फ्राई कर लें तथा उसकी रोटी बना लें।रात को सोते समय रोटी को नाभि के ऊपर रखकर कपड़ा बांध लें। इस प्रकार शेष 2 भाग दो दिन तक और बांधने से श्वेत प्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है।

                  गुलाब: श्वेतप्रदर, पेशाब में जलन हो तो गुलाब के ताजे फूल और 50 ग्राम मिश्री दोनों को पीसकर, आधा गिलास पानी में मिलाकर रोजाना 10 दिनों तक पीने से लाभ मिलता है।

                  कुलथी: श्वेतप्रदर (ल्युकोरिया) में 100 ग्राम कुलथी 1 किलो पानी में उबालकर बचे पानी छानकर पीने से लाभ मिलेगा

                  केला : 2 पके हुए केले को चीनी के साथ कुछ दिनों तक रोज खाने से स्त्रियों को होने वाला प्रदर (ल्यूकोरिया) में आराम मिलता है।
                  गुलाब : गुलाब के फूलों को छाया में अच्छी तरह से सुखा लें, फिर इसे बारीक पीसकर बने पाउडर को लगभग 3 से 5 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह और शाम दूध के साथ लेने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) से छुटकारा मिलता है।

                  मुलहठी : मुलहठी को पीसकर चूर्ण बना लें, फिर इसी चूर्ण को 1 ग्राम की मात्रा में लेकर पानी के साथ सुबह-शाम पीने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) की बीमारी नष्ट हो जाती है।

                  शिरीश : शिरीश की छाल का चूर्ण 1 ग्राम को देशी घी में मिलाकर सुबह-शाम पीने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ मिलता है।
                  बला : बला की जड़ को पीसकर चूर्ण बनाकर शहद के साथ 3 ग्राम की मात्रा में दूध में मिलाकर सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ प्राप्त होता है।
                    बड़ी इलायची : बड़ी इलायची और माजूफल को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह पीसकर समान मात्रा में मिश्री को मिलाकर चूर्ण बना लें, फिर इसी चूर्ण को 2-2 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन सुबह-शाम को लेने से स्त्रियों को होने वाले श्वेत प्रदर की बीमारी से छुटकारा मिलता है।

                    ककड़ी : ककड़ी के बीज, कमल, ककड़ी, जीरा और चीनी (शक्कर) को बराबर मात्रा में लेकर 2 ग्राम की मात्रा में रोजाना सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है।
                    जीरा : जीरा और मिश्री को बराबर मात्रा में पीसकर चूर्ण बनाकर रख लें, फिर इस चूर्ण को चावल के धोवन के साथ प्रयोग करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ मिलता है।

                    चना : सेंके हुए चने पीसकर उसमें खांड मिलाकर खाएं। ऊपर से दूध में देशी घी मिलाकर पीयें, इससे श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) गिरना बंद हो जाता है।

                    जामुन : छाया में सुखाई जामुन की छाल का चूर्ण 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ कुछ दिन तक रोज खाने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ होता है।

                    धाय : स्त्रियों के श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में धातकी (धाय) के फूलों का चूर्ण 2 चम्मच लगभग 3 ग्राम शहद के साथ सुबह खाली पेट व सायंकाल भोजन से एक घंटा पहले सेवन करने से लाभ होता है।

                    धातकी के फूलों का चूर्ण और मिश्री 1-1 चम्मच की मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम नियमित रूप से दूध या जल के साथ कुछ समय तक सेवन करने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) में लाभ मिलता है।

                    दूधी: 2 ग्राम दूधी की जड़ को पीसकर और छानकर दिन में 3 बार पिलाने से श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) और रक्तप्रदर नष्ट होता है।
                    फिटकरी : चौथाई चम्मच पिसी हुई फिटकरी पानी से रोजाना 3 बार फंकी लेने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग ठीक हो जाते हैं। फिटकरी पानी में मिलाकर योनि को गहराई तक सुबह-शाम धोएं और पिचकारी की सहायता से साफ करें।
                    ककड़ी : ककड़ी के बीजों का गर्भ 10 ग्राम और सफेद कमल की कलियां 10 ग्राम पीसकर उसमें जीरा और शक्कर मिलाकर 7 दिनों तक सेवन करने से स्त्रियों का श्वेतप्रदर (ल्यूकोरिया) रोग मिटता है।

                    सेवन विधि और मात्रा Dosage of Manmath Ras

                    • 1 गोली, दिन में दो बार, सुबह और शाम लें। इसे गाढ़े किये हुए दूध के साथ लें। इसे भोजन करने के बाद लें।
                    मन्मथ रस का उपयोग से स्त्रियों द्वारा इसका सेवन श्वेत प्रदर को दूर करता है। इसके सेवन से गर्भाशय मज़बूत हो जाता है तथा ओवरी की कमजोरी, शिथिलता भी दूर हो जाती है। यह स्त्रियों की गर्भधारण की शक्ति को बढ़ाता है।

                    Saturday, January 16, 2016

                    गर्भावस्था की पहचान-Pregnancy Identify in Hindi

                    गर्भावस्था की पहचान-Pregnancy Identify in Hindi

                    गर्भावस्था की पहचान-Pregnancy Identify in Hindi

                    गर्भधारण हो जाने के बाद औरतों में कुछ खास लक्षण प्रकट होते हैं जिसके आधार पर आसानी से गर्भावस्था की पहचान हो जाती है।

                    गर्भावस्था के लक्षण

                    • सर्वप्रथम यह लक्षण है कि नियमित रूप से आने वाला ऋतुस्राव बंद हो जाता है। यद्यपि यह पूर्ण भरोसे का लक्षण नहीं है क्योंकि गर्भाशय और डिम्बकोष सम्बन्धी अन्य दोषों के कारण भी कभी-कभी मासिक-धर्म का आना बंद हो जाता है।
                    • मिचली (जी का मिचलाना) और वमन (उल्टी) के लक्षण प्रकट हो, साथ ही ऋतुस्राव भी बंद हो तो यह लक्षण गर्भ के स्थापित होने का लक्षण माना जा सकता है क्योंकि प्रथम, दूसरे और तीसरे महीने में मिचली आना एक प्रमुख लक्षण माना जाता है।
                    • गर्भस्थापित होने पर मानसिक रूप से कुछ परिवर्तन प्रकट होते हैं। उत्तेजित स्वभाव की महिला थोड़ा मृदु (कोमल) स्वभाव की हो जाती है और मृदु (कोमल) स्वभाव की महिला थोड़ा उत्तेजित स्वभाव की हो जाती है चेहरे पर दिव्यपन और स्तन की घुण्डी तथा उसके चारों ओर त्वचा का रंग अपेक्षाकृत काला होने लगता है।गर्भ के स्थापित होने पर योनि और भगोष्ठ के रंग में अपेक्षाकृत गाढ़ापन प्रतीत होने लगता है। 
                    • गर्भ के स्थापित होने पर पेट धीरे-धीरे बढ़ने लगता है जोकि चौथे महीने से स्पष्ट प्रतीत होने लगता है। गर्भ के स्थापित होने पर स्तनों के आकार में वृद्धि होने लगती है।
                    • गर्भावस्था के पांचवे महीने से गर्भाशय में भू्रण का हिलना डुलना जच्चा को महसूस होने लगता है। इस महीने या इसके बाद से स्टेथोस्कोप के सहारे भू्रण के दृष्टिपिण्ड की गति की धड़कन महसूस की जा सकती है जोकि प्राय: 130 से 150 प्रति मिनट तक हो जाती है।

                    गर्भावस्था में भोजन और देखा भाल,pregnancy care

                    • नारंगी: गर्भवती स्त्री को प्रतिदिन दो नारंगी दोपहर में पूरे गर्भकाल में खिलाते रहने से होने वाला शिशु बहुत सुन्दर होता है।
                    • मौसमी: मौसमी के फल में कैल्शियम अधिक मात्रा में मिलता है। गर्भवती स्त्रियों और गर्भाशय के बच्चे को शक्ति प्रदान करने के लिए इसका रस पौष्टिक होता है।
                    • नारियल: नारियल और मिश्री खाने से प्रसव में दर्द नहीं होता है तथा उत्पन्न संतान स्वस्थ होती है।
                    • शहद: गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में रक्त की कमी आ जाती है। गर्भावस्था के समय रक्त बढ़ाने वाली चीजों का अधिक सेवन करना चाहिए। महिलाओं को दो चम्मच शहद प्रतिदिन सेवन करने से रक्त की कमी नहीं होती है। इससे शारीरिक शक्ति बढ़ती है और बच्चा मोटा और ताजा होता है। गर्भवती महिला को गर्भधारण के शुरू से ही या अन्तिम तीन महीनों में दूध और शहद पिलाने से बच्चा स्वस्थ और मोटा ताजा होता है।
                    • गाजर: आधा गिलास गाजर का रस, आधा गिलास दूध व स्वादानुसार शहद मिलाकर प्रतिदिन पीने से गर्भावस्था की कमजोरी दूर होती है

                    प्रसव के लक्षण,pregnancy symptoms,

                    • प्रसव से कुछ समय पहले ही स्तनों में दूध आना भी एक स्पष्ट लक्षण होता है।
                    • गर्भावस्था में पेशाब की मात्रा भी अपेक्षाकृत बढ़ जाती है। आपेक्षिक गुरुत्व भी बढ़ जाता है।
                    • गर्भधारण होने पर खून की मात्रा और रक्त के सफेद कणों की मात्रा बढ़ जाती है।
                    • गर्भधारण होने पर स्तनों की घुण्डी अपेक्षाकृत काली हो जाती है, चेहरे में कुछ रौनक सी प्रतीत होने लगती है। 
                    • स्तन और तालपेट की त्वचा कुछ फटी-फटी सी लगने लगती है जिसका कारण गर्भ के चलते गर्भ का प्रसारण होता है। भगोष्ठ काले हो जाते हैं तथा नाभि भी ऊपर की ओर चढ़ी होती है।
                    • गर्भावस्था में जरायु (गर्भाशय) के आकार में वृद्धि होने से पेट भी बढ़ने लगता है। परन्तु यदि गर्भ के अन्य लक्षण प्रतीत न हो रहे हो तो मिथ्या गर्भ, फुंसी आदि के प्रति सावधान रहना चाहिए।
                    • स्तनों का आकार बढ़ जाता है, शिराएं प्रतीत सी होने लगती हैं, स्तन के घुण्डी के चारों ओर काले रंग के दाग सा होना, दबाने से दूध जैसा पदार्थ निकल आना गर्भ के पूरक होने के लक्षण होते है

                    Thursday, January 14, 2016

                    गर्भावस्था में देखभाल, प्रेग्‍नेंसी केयर,Pregnancy Care in Hindi,

                    गर्भावस्था में देखभाल, प्रेग्‍नेंसी केयर,Pregnancy Care -Pregnancy Care in Hindi,Pregnancy care and treatment in Hindi,

                    प्रेग्‍नेंसी के दौरान बहुत सी ऐसी समस्‍याएं हैं। जिनसे बहुत परेशानी होती है। जिनमें मुख्‍य है उल्‍टी का आना। यह दिखने में छोटी समस्‍या जरूर है, पर यह किसी भी महिला के हौसले को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ती। इसी तरह बार बार पेशाब का आना, खाना अच्‍छा नहीं लगना, गैस, पैरों में सूजन, खून की कमी आदि भी बड़ी दिक्‍कतें पैदा करती हैं। इन्‍ही कुछ समस्‍याओं का निदान नीचे दिया गया है। आशा है कि आपके कुछ काम आ सकेगा।

                    गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें ,

                    • यदि बार बार पेशाब आ रही हो, तो अनार के छिलकों को सुखाकर उसका चूर्णं बना लें। फिर ५ ग्राम की मात्रा में इस चूर्णं को पानी के साथ लेने से बहुत लाभ होता है।
                    • एक केले के साथ बिदारीकंद और शताबरी का एक-एक ग्राम चूर्णं मिलाकर दूध के साथ पीने से बार बार पेशाब जाने की समस्‍या कम हो जाती है।
                    • दिन में दो तीन बार छुआरा खाएं और रात में छुआरा खाकर दूध पीने से आराम मिलता है।
                    • पचास ग्राम भुने चने खाकर ऊपर से थोड़ा सा गुड़ खाएं। दस दिन सेवन करने से आराम मिलेगा।
                    • तीन आंवलों का रस निकालकर उसमें पानी मिलाकर सुबह शाम पीने से लाभ होता है।
                    प्रेग्‍नेंसी के दौरान उल्‍टी होने पर,गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें ,
                    • एक कागज़ी नींबू को काटकर दो टुकड़े कर लें। दोनों भागों पर काली मिर्च का चूर्णं व नमक बुरक कर आग पर गर्म करके चूसें। आपको लाभ होगा।
                    • सुबह उठकर मुंह धोकर हल्‍के कुनकुने पानी में एक नींबू का रस निचोड़कर खाली पेट कुछ दिनों तक पिएं। इससे उल्टियां आना बंद हो जाएंगी।
                    • अनार के दानों का रस थोड़ा थोड़ा करके चूसने से भी उल्‍टी में बहुत लाभ होता है।
                    • गर्मी का मौसम हो तो बर्फ के पानी का सेवन करने से भी लाभ होता है।
                    • संतरे, मौसमी व पके आम का रस व नारियल पानी भी बहुत फाएदेमंद होता है।
                    • गर्भवती स्‍त्री के पेट पर पानी की पटटी रखने से भी उल्टियों में आराम मिलता है।
                    • गुलकंद और शक्‍कर बराबर मात्रा में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से भी आराम मिलता है।

                    खून की कमी,गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें ,

                    • गाजर का रस और चुकंदर का रस मिलाकर पीना बहुत लाभकारी होता है।
                    • रोजाना एक ग्‍लास टमाटर का रस पीने से भी खून की कमी दूर होती है।
                    • रोज 5-10  खजूर खाकर ऊपर से एक कप गर्म दूध पीने से थोड़े ही दिन में नया खून बनना शुरू हो जाता है। जिससे शरीर में स्‍फूर्ति और ताकत बढ़ती है।
                    • सुबह शाम दूध के साथ एक-एक नग आंवले का मुरब्‍बा खाने से खून की कमी दूर हो जाती है।
                    • अंजीर को दूध में उबालें। फिर उसे खाकर दूध पी जाएं। इससे खून की कमी दूर होती है।
                    • गन्‍ने के रस में आंवले का रस और शहद मिलाकर पीने से खून बढ़ता है।
                    • रोजाना पपीते का सेवन करने से भी खून की कमी नहीं होती। इसमें लौह तत्‍व की अधिकता होती है। जो खून बनाने में सहायक होता है।
                    • गाजर की सलाद या फिर गाजर का मुरब्‍बा भी लाभकारी होता है। गाजर के मुरब्‍बे के लिए अच्‍छी मोटी गाजर को छीलकर बीच का कड़ा भाग निकाल दें। गूदे को कांटे से गोद कर पानी में हल्‍का सा उबालकर कपड़े पर फैला दें। इसके बाद एक किलो शक्‍कर की एक तार वाली चाशनी बनाकर गाजर पकाएं। पकाते वक्‍त नींबू का रस भी डाल दें। ठंडा होने पर कांच के बर्तन में भरकर रख लें और रोज सुबह खाएं।
                    • बथुआ के साग का सेवन भी बहुत फाएदेमंद होता है। इससे खून में हीमोग्‍लोबिन की मात्रा बढ़ती है।
                    • ठंडे पानी में साफ किए गए चोकर को उसके वजन के छह गुना पानी में किसी बर्तन में ढंक कर आधे घंटे तक उबालें। स्‍वाद के लिए इसमें शहद व नींबू का रस मिला सकते हैं। एक-एक कप सुबह शाम पीने से खून की कमी दूर होती है।

                    यदि खाने के प्रति अरूचि हो तो.गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें ,

                    • हरी धनिया, टमाटर काग़जी़ नींबू, हरी मिर्च, काला नमक, अदरक का सलाद या चटनी बनाकर खाएं। इससे भोजन के प्रति रूचि उत्‍पन्‍न होगी।
                    • सभी प्रकार के खटटे फलों या उनके रस का पानी में मिलाकर पीने से शरीर में दूषित पदार्थों की कमी होती है और रक्‍त क्षारीय होकर खाने के प्रति रूचि पैदा करता है।
                    • रोज नाश्‍ते में पपीते का सेवन करें। इससे भूख खुलकर लगती है।
                    • तरबूज के दस ग्राम बीज पीसकर आधे कप पानी में घोलकर, उसमें ५ ग्राम मिश्री और आधा नींबू का रस मिलाकर भोजन से १५ – २० मिनट पहले लेने से बहुत फाएदा होता है।
                    • धनिया, काला जीरा, सोंठ और सेंधा नमक को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्णं बना लें। फिर २ – २ ग्राम चूर्णं दिन में तीन चार बार लेने से भोजन के प्रति रूचि पैदा होती है।

                    गर्भावस्‍था में गैस हो तो...गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें ,

                    • ककड़ी, गाजर, टमाटर, मूली, पालक के सलाद में अदरक के बारीक टुकड़े काटकर उस पर नींबू निचोड़कर रोजाना सेवन करने से गर्भवती स्‍त्री को गैस की शिकायत नहीं होगी। साथ ही कब्‍ज भी दूर हो जाएगा।
                    • दो सौ ग्राम फालसे के रस में थोड़ी मिश्री, काला नमक व नींबू मिलाकर खाने से भी गैस की समस्‍या से छुटकारा मिलता है।
                    • बीस ग्राम सेंधा नमक और ५० ग्राम चीनी को एक साथ पीस कर किसी चीज में रख लें। फिर खाना खाने के बाद रोजाना आधा चम्‍मच खाने से गैस की शिकायत दूर हो जाएगी।
                    • गैस की शिकायत होने पर एक कप पानी में आधा नीबू का रस निचोड़कर उसमें थोड़ी सी सौंफ का चूर्णं व काला नमक मिलाकर कुछ दिनों तक रोजाना सेवन करें। इससे लाभ होगा।
                    • एक-एक नग आंवले का मुरब्‍बा सुबह शाम खाकर दूध पीने से भी गैस और अम्‍लपित्‍त की शिकायत दूर हो जाती है।
                    • भोजन से १५ मिनट पहले अजवायन का आधा चम्‍मच चूर्णं थोड़ा सा काला नमक मिलाकर सेवन करें और भोजन के १५ मिनट बाद भी यही प्रयोग करें। आपको आराम मिलेगा। 
                    • बरगद के पत्‍तों को घी में चुपड़कर उनको गर्म करके पैरों पर बांधने से गर्भवती स्‍त्री के पैरों की सूजन दूर हो जाती है।
                    • गर्भावस्‍था में पैरों की सूजन में काले जीरे के काढ़े से पैरों को धोने से भी बहुत आराम मिलता है।
                    • अजवायन का बारीक चूर्णं पैरों में धीरे धीरे मलें। आपको बहुत लाभ होगा।
                    • अनन्‍नास को छीलकर उसको गोल गोल टुकड़ों में काट लें। फिर उस पर काली मिर्च का चूर्णं और काला नमक बुरक कर खाने से बहुत फाएदा होता है। इससे मूत्र में वृद्धि होती है, जिससे सूजन कम हो जाती है।

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