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Friday, January 22, 2016

गर्भधारण के उपाय, Preventive Measures for Pregnancy in Hindi,

गर्भवती होने के लिए सिर्फ सेक्स जरूरी नहीं जरूरी है सही समय पर सेक्स गर्भवती होने के लिए सेक्स का कोई निर्धारित समय नहीं है। महिलाएं जब ओर्गास्म प्राप्त कर लेती है तो गर्भधारण की संभावना बढ़ जाती है। गर्भवती होने के लिए सेक्स जितना जरूरी है उतना ही इस बात का ज्ञान होना कि सेक्स कब किया जाए। इस तथ्य को नजरअंदाज करने से कई बार गर्भधारण करने में परेशानी भी आती है। आइए जानें कि माह में किस समय सेक्स करने से गर्भधारण की संभावना काफी अधिक होती है।
  • पुरुष के शुक्राणु का साथी महिला के गर्भ में जाने से गर्भधारण होता है। महिला के अंडाणु से शुक्राणु का मेल होना और निषेचन की क्रिया का होना ही गर्भधारण है। यूं तो गर्भधारण न कर पानेके पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के कारण हो सकते हैं। इन कारणों के पीछे अधिकतर ज्ञान और जानकारी का अभाव होता है। 
  • इन सबकारणों के अतिरिक्त एक अन्य कारण भी होता है जिसका असर महिलाओं की गर्भधारण की क्षमता पर पड़ता है, और वह कारण है सही समय पर सेक्स न करना। अधिकतर जोड़े इस बात से अंजान होते हैं कि गर्भधारण में सेक्स की 'टाइमिंग' बहत मायने रखती है। समय पर सहवास-गर्भवती होने के लिए सिर्फ सहवास करना जरूरी नहीं होता बल्कि सही समय पर सहवास करना भी मायने रखता है। यह बात ध्यान देने योग्य है कि पुरुष के शुक्राणु हमेशा लगभग एक जैसे ही होते हैं, जो महिला को गर्भवती कर सकते हैं। लेकिन महिला का शरीर ऐसा नहीं होता जो कभी भी गर्भवती हो सके। उसका एक निश्चित समय होता है, एक छोटी सी अवधि होतीहै। 
  • यदि आप उस अवधि को पहचान कर उस समय सहवास करते हैं तो गर्भधारण की संभावना आश्चर्यजनक रूप से बढ़ जाती है। एक मत यह है कि 28 दिन के मासिक धर्म के साइकिल में 14वें दिन ओवुलेशन का है जो पीरियड शुरू होनेके बाद से गिना जाता है, इस दौरान 12 से 18 दिन के बीच में सेक्स करने से गर्भ ठहरता है।'प्रेग्नेंट होने के लिए सेक्स का कोई विशेष दिन नहीं होता, नियमित सेक्स लाइफ में भरोसा रखिए और बेबी प्लानिंग के तीन महीने पहले से फोलिक एसिड के टेबलेट जरूर खाती रहें।' 
  • ओवुलेशन साइकिल-ऋतुचक्र या पीरियड्स के सात दिन बाद ओवुलेशन साइकिल शुरू होती है, और यह माहवारी या पीरियड्स के शुरू होने से सात दिन पहले तक रहती है। ओवुलेशन पीरियड ही वह समय होता है, जिसमें कि महिला गर्भधारण कर सकती है और इस स्थिति को फर्टाइल स्टेज भी कहते हैं। गर्भधारण के लिए, जब भी सेक्स करें तो ओवुलेशन पीरियड में ही करें। 
  • अपनी ओवुलेशन साइकिल का पता लगायें। इसके लिए आप चिकित्सक से संपर्क भी कर सकते हैं। ओर्गास्म-पुरुष सिर्फ अपनी संतुष्टि का खयाल रखते हैं और अपनी पत्नी की कमोत्तेजना को तवज्जो नहीं देते। ऐसी स्त्रियों को गर्भधारण करने में मुश्किलें आती हैं। अगर स्त्री सहवास के वक्त ओर्गास्म प्राप्त कर लेती है तो गर्भधारण की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। क्योंकि तब पुरुष के शुक्राणु को सही जगह जाने का समय और माहौल मिलता है तथा शुक्राणु ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं।

सुबह का समय,Morning time

  • गर्भधारण के लिए सेक्स का समय सुबह का होना चाहिए क्योंकि सुबह के समय आप तरोताजा़ रहते हैं।जिन महिलाओं में रेगुलर पीरियड हो वे प्रेगनेंट होने के लिए पीरियड के बाद दस दिन के अंतराल में सेक्स करें, इससे प्रेगनेंट होने की संभावना ज्यादा होती है औरजिनमें में अनियमित पीरियड हो वे प्रेगनेंसी के लिए पीरियड के साइकिल में नियमित अंतराल  पर सेक्स करें।

पीरियडस के दौरान सेक्स

जब आप गर्भधारण करने का सोच रहे है तो इस बात सावधानी बरतें कि कभी भी पीरियडस के दौरान सेक्स ना करें। गर्भ धारण करने या गर्भ की स्थापना के लिए यहाँ हम कुछ आयुर्वेदिक नुस्खे
    • एक चम्मच असगंध का चूर्ण एक चम्मच देशी घी के साथ मिलाकर मिश्री मिले दूध के साथ मासिक धर्म के 6 ठे दिन से पूरे माह पीने से गर्भाशयके दोष दूर होकर स्त्री को गर्भ ठहर जाता है|
    • अशोक के फूल नियमित रूप से दही के साथ मासिक धर्म के 6 ठे दिन से 2 हफ्ते तक लेते रहने से स्त्री को गर्भ स्थापा हो जाता है|
    • अपामार्ग की जड़ का चूर्ण मासिक के बाद 21 दिन तक दूध के साथ लेते रहने से स्त्री के गर्भवती होने के चांस बढ़ जाते हैं|
    • पीपल के सूखे फलों का चूर्ण आधा चम्मच कच्चे दूध से मासिक धर्म शुरू होने के पांचवे दिन से दो हफ्ते तक सुबह शाम लेने से गर्भाधान के अवसर बढ़ते हैं| गर्भ न टिके तो आने वाले महीनों मे भी यही उपाय करें|
    • तीन ग्राम गोरोचन, १० ग्राम असगंध, १० ग्राम गजपीपरी तीनों को बारीक पीसकर चूर्णं बनाएं। फिर पीरिएड के चौथे दिन से निरंतर पांच दिनों तक इसे दूध के साथ पिएं।
    • महिलाओं को शतावरी चूर्णं घी – दूध में मिलाकर खिलाने से गर्भाशय की सारी विकृतियां दूर हो जाएंगीं और वे गर्भधारण के योग्‍य होगी।
    • 10g ग्राम पीपल की ताज़ी कोंपल जटा जौकुट करके ५०० मि.ली. दूध में पकाएं।जब वह मात्र २०० मि.ली. बचे तो उतारकर छान लें। फिर इसमें चीनी और शहद मिलाकर पीरिएड होने के ५वें या ६ठे दिन से खाना शुरू कर दें। यह बहुत अच्‍छी औषधि मानी जाती है।
      • सेमल की जड़ पीसकर ढाई सौ ग्राम पानी में पकाएं और फिर इसे छान लें। मासिक धर्म के बाद चार दिन तक इसका सेवन करें।
      • 50g ग्राम गुलकंद में 20g ग्राम सौंफ मिलाकर चबाकर खाएं और ऊपर से एक ग्‍लास दूध नियमित रूप से पिएं। इससे आपको बांझपन से मुक्ति मिल सकती है।
      • गुप्‍तांगों की साफ सफाई पर विशेष ध्‍यान दें। खाने में जौ, मूंग, घी, करेला,शालि चावल, परवल, मूली, तिल का तेल, सहिजन आदि जरूर शामिल करें।
      • पलाश का एक पत्‍ता गाय के दूध में औटाएं और उसे छानकर पिएं। मासिक धर्म के बाद से पीना शुरू करें और ७ दिनों तक प्रयोग करें।
      • पीपल के सूखे फलों का चूर्णं बनाकर रख लें। मासिक धर्म के बाद
      • 5-10 ग्राम चूर्णं खाकर ऊपर से कच्‍चा दूध पिएं। यह प्रयोग नियमित रूप से १४ दिन तक करें।
      • मासिक धर्म के बाद से एक सप्‍ताह तक २ ग्राम नागकेसर के चूर्णं को दूध के साथ सेवन करें। आपको फाएदा होगा।
      • 5g ग्राम त्रिफलाधृत सुबह शाम सेवन करने से गर्भाशय की शुद्धि होती है। जिससे महिला गर्भधारण करने के योग्‍य हो जाती है।
      • स्त्री को गर्भधारण कराने केलिए उसकी योनि के स्नायु स्वस्थ हो इसके लिए स्त्री का सही आहार, उचित श्रम एवं तनाव रहित होना जरूरी है तभी स्त्री गर्भवती हो सकती है|
      • स्त्री को गर्भधारण करने केलिए यह भी आवश्यक है लिए यह भी आवश्यक है कि योनिस्राव क्षारीय होना चाहिए इसलिए स्त्री का भोजन क्षारप्रधान होना चाहिए। इसलिए उसे अधिक मात्रा में अपक्वाहार तथा भिगोई हुई मेवा खानी चाहिए।
      • इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को अपने इस रोग का इलाज करने के लिए सबसे प हले का इलाज करने के लिए सबसे पहले अपने शरीर से विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालना चाहिए| इसके लिए स्त्री को उपवास रखना चाहिए। इसके बाद उसे 1-2 दिन के बाद कुछ अंतराल पर उपवास करते रहना चाहिए
      • इस रोग से पीड़ित स्त्रियों को दूध की बजाए दही का इस्तेमाल करना चाहिए।
      • स्त्री को गुनगुने पानी में एक चम्मच शहद एवं नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए।
      • बांझपन को दूर करने के लिए स्त्रियों को विटामिन `सी´तथा `ई´ की मात्रा वाली चीजें जैसे नींबू, संतरा, आंवला, अंकुरित, गेहूं आदि का भोजन में सेवन अधिक करना चाहिए।
      • स्त्रियों को सर्दियों में प्रतिदिन 5-6 कली लहसुन चबाकर दूध पीना चाहिए, इससे स्त्रियों का बांझपन जल्दी ही दूर हो जाता है।
      • जामुन के पत्तों का काढ़ा बनाकर फिर इसको शहद में मिलाकर प्रतिदिन पीने से स्त्रियों को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
      • बड़ (बरगद) के पेड़ की जड़ों को छाया में सुखाकर कूटकर छानकर पाउडर बना लें। फिर इसे स्त्रियों के माहवारी समाप्त होने के बाद तीन दिन लगातार रात को दूध के साथ लें। इस क्रिया को तब तक करते रहना चाहिए जब तक कि स्त्री गर्भवती न हो जाय |
      • स्त्री के बांझपन के रोगको ठीक करने के लिए 6 ग्राम सौंफ का चूर्ण घी के साथ तीन महीने तक लेते रहने से स्त्री गर्भधारण करने योग्य हो जाती है।
      • स्त्री के बांझपन के रोग को ठीक करने के लिए उसके पेड़ू पर मिट्टी की गीली पट्टी करनी चाहिए तथा इसके बाद उसे कटिस्नान कराना चाहिए और कुछ दिनों तक उसे कटि लपेट देना चहिए। इसके बाद स्त्री को गर्म पानी का एनिमा देना चाहिए।

        Saturday, January 16, 2016

        गर्भावस्था की पहचान-Pregnancy Identify in Hindi

        गर्भावस्था की पहचान-Pregnancy Identify in Hindi

        गर्भावस्था की पहचान-Pregnancy Identify in Hindi

        गर्भधारण हो जाने के बाद औरतों में कुछ खास लक्षण प्रकट होते हैं जिसके आधार पर आसानी से गर्भावस्था की पहचान हो जाती है।

        गर्भावस्था के लक्षण

        • सर्वप्रथम यह लक्षण है कि नियमित रूप से आने वाला ऋतुस्राव बंद हो जाता है। यद्यपि यह पूर्ण भरोसे का लक्षण नहीं है क्योंकि गर्भाशय और डिम्बकोष सम्बन्धी अन्य दोषों के कारण भी कभी-कभी मासिक-धर्म का आना बंद हो जाता है।
        • मिचली (जी का मिचलाना) और वमन (उल्टी) के लक्षण प्रकट हो, साथ ही ऋतुस्राव भी बंद हो तो यह लक्षण गर्भ के स्थापित होने का लक्षण माना जा सकता है क्योंकि प्रथम, दूसरे और तीसरे महीने में मिचली आना एक प्रमुख लक्षण माना जाता है।
        • गर्भस्थापित होने पर मानसिक रूप से कुछ परिवर्तन प्रकट होते हैं। उत्तेजित स्वभाव की महिला थोड़ा मृदु (कोमल) स्वभाव की हो जाती है और मृदु (कोमल) स्वभाव की महिला थोड़ा उत्तेजित स्वभाव की हो जाती है चेहरे पर दिव्यपन और स्तन की घुण्डी तथा उसके चारों ओर त्वचा का रंग अपेक्षाकृत काला होने लगता है।गर्भ के स्थापित होने पर योनि और भगोष्ठ के रंग में अपेक्षाकृत गाढ़ापन प्रतीत होने लगता है। 
        • गर्भ के स्थापित होने पर पेट धीरे-धीरे बढ़ने लगता है जोकि चौथे महीने से स्पष्ट प्रतीत होने लगता है। गर्भ के स्थापित होने पर स्तनों के आकार में वृद्धि होने लगती है।
        • गर्भावस्था के पांचवे महीने से गर्भाशय में भू्रण का हिलना डुलना जच्चा को महसूस होने लगता है। इस महीने या इसके बाद से स्टेथोस्कोप के सहारे भू्रण के दृष्टिपिण्ड की गति की धड़कन महसूस की जा सकती है जोकि प्राय: 130 से 150 प्रति मिनट तक हो जाती है।

        गर्भावस्था में भोजन और देखा भाल,pregnancy care

        • नारंगी: गर्भवती स्त्री को प्रतिदिन दो नारंगी दोपहर में पूरे गर्भकाल में खिलाते रहने से होने वाला शिशु बहुत सुन्दर होता है।
        • मौसमी: मौसमी के फल में कैल्शियम अधिक मात्रा में मिलता है। गर्भवती स्त्रियों और गर्भाशय के बच्चे को शक्ति प्रदान करने के लिए इसका रस पौष्टिक होता है।
        • नारियल: नारियल और मिश्री खाने से प्रसव में दर्द नहीं होता है तथा उत्पन्न संतान स्वस्थ होती है।
        • शहद: गर्भावस्था में महिलाओं के शरीर में रक्त की कमी आ जाती है। गर्भावस्था के समय रक्त बढ़ाने वाली चीजों का अधिक सेवन करना चाहिए। महिलाओं को दो चम्मच शहद प्रतिदिन सेवन करने से रक्त की कमी नहीं होती है। इससे शारीरिक शक्ति बढ़ती है और बच्चा मोटा और ताजा होता है। गर्भवती महिला को गर्भधारण के शुरू से ही या अन्तिम तीन महीनों में दूध और शहद पिलाने से बच्चा स्वस्थ और मोटा ताजा होता है।
        • गाजर: आधा गिलास गाजर का रस, आधा गिलास दूध व स्वादानुसार शहद मिलाकर प्रतिदिन पीने से गर्भावस्था की कमजोरी दूर होती है

        प्रसव के लक्षण,pregnancy symptoms,

        • प्रसव से कुछ समय पहले ही स्तनों में दूध आना भी एक स्पष्ट लक्षण होता है।
        • गर्भावस्था में पेशाब की मात्रा भी अपेक्षाकृत बढ़ जाती है। आपेक्षिक गुरुत्व भी बढ़ जाता है।
        • गर्भधारण होने पर खून की मात्रा और रक्त के सफेद कणों की मात्रा बढ़ जाती है।
        • गर्भधारण होने पर स्तनों की घुण्डी अपेक्षाकृत काली हो जाती है, चेहरे में कुछ रौनक सी प्रतीत होने लगती है। 
        • स्तन और तालपेट की त्वचा कुछ फटी-फटी सी लगने लगती है जिसका कारण गर्भ के चलते गर्भ का प्रसारण होता है। भगोष्ठ काले हो जाते हैं तथा नाभि भी ऊपर की ओर चढ़ी होती है।
        • गर्भावस्था में जरायु (गर्भाशय) के आकार में वृद्धि होने से पेट भी बढ़ने लगता है। परन्तु यदि गर्भ के अन्य लक्षण प्रतीत न हो रहे हो तो मिथ्या गर्भ, फुंसी आदि के प्रति सावधान रहना चाहिए।
        • स्तनों का आकार बढ़ जाता है, शिराएं प्रतीत सी होने लगती हैं, स्तन के घुण्डी के चारों ओर काले रंग के दाग सा होना, दबाने से दूध जैसा पदार्थ निकल आना गर्भ के पूरक होने के लक्षण होते है

        Thursday, January 14, 2016

        गर्भावस्था में देखभाल, प्रेग्‍नेंसी केयर,Pregnancy Care in Hindi,

        गर्भावस्था में देखभाल, प्रेग्‍नेंसी केयर,Pregnancy Care -Pregnancy Care in Hindi,Pregnancy care and treatment in Hindi,

        प्रेग्‍नेंसी के दौरान बहुत सी ऐसी समस्‍याएं हैं। जिनसे बहुत परेशानी होती है। जिनमें मुख्‍य है उल्‍टी का आना। यह दिखने में छोटी समस्‍या जरूर है, पर यह किसी भी महिला के हौसले को तोड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ती। इसी तरह बार बार पेशाब का आना, खाना अच्‍छा नहीं लगना, गैस, पैरों में सूजन, खून की कमी आदि भी बड़ी दिक्‍कतें पैदा करती हैं। इन्‍ही कुछ समस्‍याओं का निदान नीचे दिया गया है। आशा है कि आपके कुछ काम आ सकेगा।

        गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें ,

        • यदि बार बार पेशाब आ रही हो, तो अनार के छिलकों को सुखाकर उसका चूर्णं बना लें। फिर ५ ग्राम की मात्रा में इस चूर्णं को पानी के साथ लेने से बहुत लाभ होता है।
        • एक केले के साथ बिदारीकंद और शताबरी का एक-एक ग्राम चूर्णं मिलाकर दूध के साथ पीने से बार बार पेशाब जाने की समस्‍या कम हो जाती है।
        • दिन में दो तीन बार छुआरा खाएं और रात में छुआरा खाकर दूध पीने से आराम मिलता है।
        • पचास ग्राम भुने चने खाकर ऊपर से थोड़ा सा गुड़ खाएं। दस दिन सेवन करने से आराम मिलेगा।
        • तीन आंवलों का रस निकालकर उसमें पानी मिलाकर सुबह शाम पीने से लाभ होता है।
        प्रेग्‍नेंसी के दौरान उल्‍टी होने पर,गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें ,
        • एक कागज़ी नींबू को काटकर दो टुकड़े कर लें। दोनों भागों पर काली मिर्च का चूर्णं व नमक बुरक कर आग पर गर्म करके चूसें। आपको लाभ होगा।
        • सुबह उठकर मुंह धोकर हल्‍के कुनकुने पानी में एक नींबू का रस निचोड़कर खाली पेट कुछ दिनों तक पिएं। इससे उल्टियां आना बंद हो जाएंगी।
        • अनार के दानों का रस थोड़ा थोड़ा करके चूसने से भी उल्‍टी में बहुत लाभ होता है।
        • गर्मी का मौसम हो तो बर्फ के पानी का सेवन करने से भी लाभ होता है।
        • संतरे, मौसमी व पके आम का रस व नारियल पानी भी बहुत फाएदेमंद होता है।
        • गर्भवती स्‍त्री के पेट पर पानी की पटटी रखने से भी उल्टियों में आराम मिलता है।
        • गुलकंद और शक्‍कर बराबर मात्रा में मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से भी आराम मिलता है।

        खून की कमी,गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें ,

        • गाजर का रस और चुकंदर का रस मिलाकर पीना बहुत लाभकारी होता है।
        • रोजाना एक ग्‍लास टमाटर का रस पीने से भी खून की कमी दूर होती है।
        • रोज 5-10  खजूर खाकर ऊपर से एक कप गर्म दूध पीने से थोड़े ही दिन में नया खून बनना शुरू हो जाता है। जिससे शरीर में स्‍फूर्ति और ताकत बढ़ती है।
        • सुबह शाम दूध के साथ एक-एक नग आंवले का मुरब्‍बा खाने से खून की कमी दूर हो जाती है।
        • अंजीर को दूध में उबालें। फिर उसे खाकर दूध पी जाएं। इससे खून की कमी दूर होती है।
        • गन्‍ने के रस में आंवले का रस और शहद मिलाकर पीने से खून बढ़ता है।
        • रोजाना पपीते का सेवन करने से भी खून की कमी नहीं होती। इसमें लौह तत्‍व की अधिकता होती है। जो खून बनाने में सहायक होता है।
        • गाजर की सलाद या फिर गाजर का मुरब्‍बा भी लाभकारी होता है। गाजर के मुरब्‍बे के लिए अच्‍छी मोटी गाजर को छीलकर बीच का कड़ा भाग निकाल दें। गूदे को कांटे से गोद कर पानी में हल्‍का सा उबालकर कपड़े पर फैला दें। इसके बाद एक किलो शक्‍कर की एक तार वाली चाशनी बनाकर गाजर पकाएं। पकाते वक्‍त नींबू का रस भी डाल दें। ठंडा होने पर कांच के बर्तन में भरकर रख लें और रोज सुबह खाएं।
        • बथुआ के साग का सेवन भी बहुत फाएदेमंद होता है। इससे खून में हीमोग्‍लोबिन की मात्रा बढ़ती है।
        • ठंडे पानी में साफ किए गए चोकर को उसके वजन के छह गुना पानी में किसी बर्तन में ढंक कर आधे घंटे तक उबालें। स्‍वाद के लिए इसमें शहद व नींबू का रस मिला सकते हैं। एक-एक कप सुबह शाम पीने से खून की कमी दूर होती है।

        यदि खाने के प्रति अरूचि हो तो.गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें ,

        • हरी धनिया, टमाटर काग़जी़ नींबू, हरी मिर्च, काला नमक, अदरक का सलाद या चटनी बनाकर खाएं। इससे भोजन के प्रति रूचि उत्‍पन्‍न होगी।
        • सभी प्रकार के खटटे फलों या उनके रस का पानी में मिलाकर पीने से शरीर में दूषित पदार्थों की कमी होती है और रक्‍त क्षारीय होकर खाने के प्रति रूचि पैदा करता है।
        • रोज नाश्‍ते में पपीते का सेवन करें। इससे भूख खुलकर लगती है।
        • तरबूज के दस ग्राम बीज पीसकर आधे कप पानी में घोलकर, उसमें ५ ग्राम मिश्री और आधा नींबू का रस मिलाकर भोजन से १५ – २० मिनट पहले लेने से बहुत फाएदा होता है।
        • धनिया, काला जीरा, सोंठ और सेंधा नमक को बराबर मात्रा में लेकर बारीक चूर्णं बना लें। फिर २ – २ ग्राम चूर्णं दिन में तीन चार बार लेने से भोजन के प्रति रूचि पैदा होती है।

        गर्भावस्‍था में गैस हो तो...गर्भावस्था में देखभाल कैसे करें ,

        • ककड़ी, गाजर, टमाटर, मूली, पालक के सलाद में अदरक के बारीक टुकड़े काटकर उस पर नींबू निचोड़कर रोजाना सेवन करने से गर्भवती स्‍त्री को गैस की शिकायत नहीं होगी। साथ ही कब्‍ज भी दूर हो जाएगा।
        • दो सौ ग्राम फालसे के रस में थोड़ी मिश्री, काला नमक व नींबू मिलाकर खाने से भी गैस की समस्‍या से छुटकारा मिलता है।
        • बीस ग्राम सेंधा नमक और ५० ग्राम चीनी को एक साथ पीस कर किसी चीज में रख लें। फिर खाना खाने के बाद रोजाना आधा चम्‍मच खाने से गैस की शिकायत दूर हो जाएगी।
        • गैस की शिकायत होने पर एक कप पानी में आधा नीबू का रस निचोड़कर उसमें थोड़ी सी सौंफ का चूर्णं व काला नमक मिलाकर कुछ दिनों तक रोजाना सेवन करें। इससे लाभ होगा।
        • एक-एक नग आंवले का मुरब्‍बा सुबह शाम खाकर दूध पीने से भी गैस और अम्‍लपित्‍त की शिकायत दूर हो जाती है।
        • भोजन से १५ मिनट पहले अजवायन का आधा चम्‍मच चूर्णं थोड़ा सा काला नमक मिलाकर सेवन करें और भोजन के १५ मिनट बाद भी यही प्रयोग करें। आपको आराम मिलेगा। 
        • बरगद के पत्‍तों को घी में चुपड़कर उनको गर्म करके पैरों पर बांधने से गर्भवती स्‍त्री के पैरों की सूजन दूर हो जाती है।
        • गर्भावस्‍था में पैरों की सूजन में काले जीरे के काढ़े से पैरों को धोने से भी बहुत आराम मिलता है।
        • अजवायन का बारीक चूर्णं पैरों में धीरे धीरे मलें। आपको बहुत लाभ होगा।
        • अनन्‍नास को छीलकर उसको गोल गोल टुकड़ों में काट लें। फिर उस पर काली मिर्च का चूर्णं और काला नमक बुरक कर खाने से बहुत फाएदा होता है। इससे मूत्र में वृद्धि होती है, जिससे सूजन कम हो जाती है।

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