Pages

Showing posts with label Health Tips. Show all posts
Showing posts with label Health Tips. Show all posts

Thursday, March 2, 2017

स्वस्थ रहने के आयुर्वेदिक उपाय,Tips for Healthy Life in Hindi,

स्वस्थ शरीर ही मनुष्य का सबसे बड़ा खजाना होता है । एक सुखी स्वस्थ जीवन के लिए तन और मन दोनों का स्वस्थ होना जरुरी है । अगर हम शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ रहेगे , तभी हम अपने आप को सार्वजनिक एवं निजी जीवन में सफल देख पाएंगे । इसके विपरीत एक अस्वथ इन्सान हमेशा तनाव ग्रस्त हताश और परेशान दिखता है । इसीलिए अगर हमे अपने जीवन का पूरा आनंद उठाना है , तो हमे अपनी सेहत का ख्याल रखना अत्यंत ही आवश्यक है । अगर आप अपनी दिनचर्या में ये  चीजें शामिल कर लें तो दुनिया का कोई भी रोग आपको छू भी नहीं पायेगा।हृदय रोग, शुगर (मधुमेह), जोड़ों के दर्द, कैंसर, किडनी, लीवर आदि के रोग आपसे कोसों दूर रहेंगे! ऐसे ग़ज़ब हैं ये,आइये जानते हैं इनके बारे में
  • दालचीनी और शहद-सर्दियों में चुटकी भर दालचीनी की फंकी चाहे अकेले ही चाहे शहद के साथ दिन में दो बार लेने से अनेक रोगों से बचाव होता है।
  • सुबह जगने के बाद बिना कुल्ला करे 2 से 3 गिलास पानी सुखआसन मे बैठकर पानी घूटं-घूटं करके पिये यानी उषा पान करे ।
  • खाने के साथ भी कभी पानी न पिये। जरुरत पड़े तो सुबह ताजा फल का रस, दोपहर मे छाछ और रात्रि मे गर्म दूध का उपयोग कर सकते हैं।
  • भोजन हमेशा सुखआसन मे बैठकर करे और ध्यान खाने पर ही रहे, मतलब टेलीविजन देखते, गाने सुनते हुए, पढ़ते हुए, बातचीत करते हुए कभी भी भोजन न करे।
  • नाक में तेल-रात को सोते समय नित्य सरसों का तेल नाक में लगाये। और 5 – 5 बूंदे बादाम रोगन की या सरसों के तेल की या गाय के देसी घी की हर रोज़ डालें.
  • कानो में तेल-सर्दियों में हल्का गर्म और गर्मियों में ठंडा सरसों का तेल तीन बूँद दोनों कान में कभी कभी डालते रहे। इस से कान स्वस्थ रहेंगे।
  • लहसुन की कली-दो कली लहसुन रात को भोजन के साथ लेने से यूरिक एसिड, हृदय रोग, जोड़ों के दर्द, कैंसर आदि भयंकर रोग दूर रहते हैं।
  • तुलसी और काली मिर्च-प्रात: दस तुलसी के पत्ते और पांच काली मिर्च नित्य चबाये। सर्दी, बुखार, श्वांस रोग, अस्थमा नहीं होगा। नाक स्वस्थ रहेगी।
  • आंवला-किसी भी रूप में थोड़ा सा आंवला हर रोज़ खाते रहे, जीवन भर उच्च रक्तचाप और हार्ट फेल नहीं होगा, इसके साथ चेहरा तेजोमय बाल स्वस्थ और सौ बरस तक भी जवान महसूस करेंगे।
  • मेथी-मेथीदाना पीसकर रख ले। एक चम्मच एक गिलास पानी में उबाल कर नित्य पिए। मीठा, नमक कुछ भी नहीं डाले इस पानी में। इस से आंव नहीं बनेगी, शुगर कंट्रोल रहेगी जोड़ो के दर्द नहीं होंगे और पेट ठीक रहेगा।
  • छाछ-तेज और ओज बढ़ने के लिए छाछ का निरंतर सेवन बहुत हितकर हैं। सुबह और दोपहर के भोजन में नित्य छाछ का सेवन करे। भोजन में पानी के स्थान पर छाछ का उपयोग बहुत हितकर हैं।
  • हरड़-हर रोज़ एक छोटी हरड़ भोजन के बाद दाँतो तले रखे और इसका रस धीरे धीरे पेट में जाने दे। जब काफी देर बाद ये हरड़ बिलकुल नरम पड़ जाए तो चबा चबा कर निगल ले। इस से आपके बाल कभी सफ़ेद नहीं होंगे, दांत 100 वर्ष तक निरोगी रहेंगे और पेट के रोग नहीं होंगे, कहते हैं एक सभी रोग पेट से ही जन्म लेते हैं तो पेट पूर्ण स्वस्थ रहेगा।
  • सौंठ-सामान्य बुखार, फ्लू, जुकाम और कफ से बचने के लिए पीसी हुयी आधा चम्मच सौंठ और ज़रा सा गुड एक गिलास पानी में इतना उबाले के आधा पानी रह जाए। रात क सोने से पहले यह पिए। बदलते मौसम, सर्दी व् वर्षा के आरम्भ में यह पीना रोगो से बचाता हैं। सौंठ नहीं हो तो अदरक का इस्तेमाल कीजिये।Tips for Healthy Life
  • हमेशा पानी को घूट-घूट करके चबाते हुए पिये और खाने को इतना चबाये की पानी बन जाये। किसी ऋषि ने कहा है कि "खाने को पियो और पीने को खाओ"
  • खाने के 40 मिनट पहले और 60-90 मिनट के बाद पानी पिये और फ्रीज का ठंडा पानी, बर्फ डाला हुआ पानी जीवन मे कभी भी नही पिये। गुनगुना या मिट्टी के घडे का पानी ही पिये । Tips for Healthy Life

Friday, January 27, 2017

खाना खाने के नियम,The Best Times to Eat in Hindi


खाना खाने के नियम,The Best Times to Eat in Hindi,

खाना खाते समय अपनाएं ये नियम, कभी नहीं पड़ेंगे बीमार आयुर्वेद में आहार और भोजन के संबंध में कई नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने पर बीमारियों से तो बचाव होता ही है, हेल्थ भी अच्छी रहती है और लंबी उम्र मिलती है। इन नियमों में खाने के समय से लेकर मात्रा और प्रकार के बारे में भी बताया गया है। जानिए ऐसे ही नियमों के बारे में

खाना खाने के नियम,The Best Times to Eat in Hindi,

  • सुबह का नाश्ता हैवी ले, लंच उससे 30% कम और डिनर लंच से 30% कम ले।
  • विपरीत गुण वाले फूड को एक साथ न खाए जैसे दूध के साथ दही, इससे नुकशान हो सकता है।
  • खाना हमेसा बैठकर ही खाए खड़े होकर या चलते चलते खाने से कई तरह की बीमारियाँ हो सकती है।
  • बगैर भूख के भोजन न करे. इससे खाना डाइजेस्टनहीं होता ओर गैस,बदहजमी जैसी प्रॉब्लम हो सकतीहै
  • पहले खाया हुआ पचने के बाद ही दूसरी बार खाए. खाने के बीच 4-5 घंटे का अंतर होना चाहिए
  • जल्दी जल्दी न खाए, खाना अच्छे से चबाकर खाए. इससे लार अच्छी बनती है ओर खाना जल्दी पचता है
  • खाते समय हँसना, बात करना नुकसानदायक हो सकता है. खाना गले या साँस की नली में फंस सकता है
  • भूख से थोडा कम खाए. पेट में 20% जगह खाली रखे।
  • खाने के समय नेगेटिव इमोशन्स न रखे. शांत और प्रसन्न मन से भोजन करे।
  • हमेशा गर्म ओर ताजा खाना ही खाए. इससे खाना अच्छे से डाइजेस्ट होता है
  • खाने में ठोस (सॉलिड) और तरल (लिक्विड) का अनुपात 70:30 का रखे
  • लंच के बाद 10-15 मिनट रेस्ट करे (सोए नहीं). डिनर के कुछ देर बाद 10-15 मिनट जरुर टहलें।
  • डिनर के 3-4 घंटे बाद ही सोएं. इससे पहले सोने से खाना अच्छे से डाइजेस्ट नहीं होता।
  • खाना खाने के करीब 1 घंटे तक पानी न पिएं. इससे डाइजेशन अच्छा होता है।
  • खाने में चिकनाई की मात्रा प्रर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए ताकि वह आंतों में अच्छी तरह सरक सके।
  • खाना खाने वाली जगह साफ़ सुथरी और शांत होना चाहिए. गंदगी ओर शोर शराबे वाली जगह में ना खाए
  • आयु ओर प्रकृति के अनुसार ही भोजन करना चाहिए. 40-45 की उम्र के बाद हल्का खाना ही खाएं।
  • खाने में कार्बोहाईड्रेटस, प्रोटीन ओर फाइबर का बैलेंस होना चाहिए. साबुत अनाज, सब्जियां, दाले फलियां फ्रूट्स, घी, दही वगेरह शामिल हो।
  • नहाने के तुरंत बाद ना खाए ओर न ही खाने के तुरंत बाद नहाए।
  • खाना खाने से पहले अच्छी तरह हाथ पैर धो लें. गंदे हाथो से, गंदे बर्तन में या गंदगी में बना हुआ खाना न खाए।

Wednesday, January 18, 2017

पपीते के पत्ते का रस,Health-Benefits-of-Papaya-Leaf-Juice-in-Hindi

वरदान है पपीते के पत्ते का रस क्योंकि इसमे है 5 विटामिन का भरपूर मिश्रण | पपीते के पत्ते खाने में कड़वे लगते हैं लेकिन उनमें कमाल के गुण छुपे हुए होते हैं. पपीते के पत्तों में विटामिन ''ए',''बी',''सी',''डी' और ''ई' पाया जाता है साथ ही इसमें कैल्शियम भी पाया जाता है.

पपीता एक ऐसा फल है जिसको बहुत से लोग पसंद करते हैं और स्वास्थ्य में भी यह फल बहुत ज्यादा योगदान देता है पर क्या आप जानते हैं कि पपीते के पत्ते में भी बहुत से रोगों का निदान छुपा हुआ हैं, पपीते के पत्तों से कई प्रकार के रोगों का निदान संभव है जो की अपने में काफी घटक होते हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें की डेंगू के इलाज के लिए भी पपीते के पत्तों का उपयोग बहुत ज्यादा लाभकारी रहता हैं यही कारण है की डेंगू के दौरान पपीते के पत्तो की मांग काफी बढ़ जाती है। साथ ही इसके पत्तों का रस पेट के कब्ज में भी बहुत ज्यादा लाभकारी होता है। ऐसे भी बहुत से फायदे पपीते के पत्तों के होते हैं जिनके बारे में आज हम आपको बता रहें हैं।

पपीते के पत्ते के रस के फायदे,Health-Benefits-of-Papaya-Leaf-Juice-in-Hindi

  • मुंहासे दूर करे : अगर चेहरे पर मुंहासे हैं तो सूखी पपीते की पत्ती लेकर उसे थोड़े से पानी के साथ मिक्स कर के पेस्ट बना लें. फिर इस पेस्ट को चेहरे पर लगा कर सुखा लें और फिर पानी से धो लें।
  • कैंसर होने से रोके : इसमें कैंसर विरोधी गुण होते हैं जो कि इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं और सवाईकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, अग्नाशय, जिगर और फेफड़ों के कैंसर को होने से रोकते हैं।
  • बैक्टीरिया की ग्रोथ रोके : पपीते की पत्तियों में 50 एक्टिव सामग्रियां होती हैं जो कि सूक्ष्मजीवों जैसे फंगस, कीड़े, परजीवी और कैंसर कोशिकाओं के विभिन्न अन्य रूपों को बढ़ने से रोकती हैं।
  • इम्यूनिटी बढ़ाए : इन पत्तियों में सर्दी और जुखाम जैसे रोगों से लड़ने की शक्ति होती है. यह खून में व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स को विकास बढ़ा देती है।
  • एंटी मलेरिया गुण : यह मलेरिया से लड़ने में प्रभावकारी है. पपीते की पत्तियों का रस मलेरिया के लक्षणों को बढ़ने से रोकता है।
  • डेंगू में रामबाण : डेंगू से लड़ने के लिए पपीते की पत्तियां काफी लाभकारी है. यह गिरते हुए प्लेटलेट को बढ़ाने, खून के थक्के जमने तथा जिगर की क्षति को रोकती है, जो कि डेंगू वायरस के कारण हो जाता है।
  • माहवारी के दर्द से छुटकारा : दर्द को दूर करने के लिए एक काढ़ा बनाइए जिसमें एक पपीते की पत्ती को इमली, नमक और एक गिलास पानी के साथ मिक्स कीजिए. फिर इसे उबालिए और जब काढ़ा बन कर ठंडा हो जाए तब इसे पी लीजिए, इससे आपको आराम मिलेगा।
  • पपीते की पत्तियों का जूस अन्य फलों के जूस के साथ मिला कर भी रोगी को दे सकते हैं
  • पपीता का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है। पका पपीता पाचन शक्ति को बढ़ाता है, भूख को बढ़ाता है, मोटापे को नियंत्रित करता है और अगर आपको खट्टी डकारें आती हैं तो पपीते का रस उसे भी बंद कर देगा। पके या कच्चे पपीते की सब्जी बना कर खाना पेट के लिए लाभकारी होता है।
  • पपीते के पत्तों के उपयोग से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है और हृदय की धड़कन ठीक रहती है। यह पौरुष को बढ़ाता है, पागलपन को दूर करता है एवं वात दोषों को नष्ट करता है।
  • अगर आप पपीता खाते रहते हैं तो आपको किसी कारण से होने वाला जख्म भी जल्द भरता है।
  • लगभग हर मौसम में सस्ते में ही मिल जाने वाला पपीता आपकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है। कच्चे पपीते का दूध त्वचा रोग के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है।
  • पपीते का प्रयोग लोग फेस पैक में भी करते हैं। त्वचा को ठंडक पहुंचाने वाला पपीता आंखों के नीचे के काले घेरे को दूर करता है। अगर आप कील-मुंहासों से परेशान हैं तो कच्चे पपीते के गूदे को शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाएं और जब वह सूख जाए तो गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। उसके बाद मूंगफली के तेल से हल्के हाथ से चेहरे पर मालिश करें।
  • एक महीने तक नियमित रूप से ऐसा करने से आपको काफी लाभ होगा।पपीता कफ के साथ आने वाले खून को रोकता है और खूनी बवासीर को भी ठीक करता है। हृदय रोगियों के लिए भी पपीता काफी लाभदाक होता है। पपीते के दस बीज पानी में पीस कर चौथाई कप पानी में मिला कर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। इसका एक हफ्ते तक नियमित रूप से प्रयोग करना चाहिए।
  • बच्चा मां के दूध पर निर्भर रहता है, लेकिन कई बार ऐसा देखने में आता है कि मां को पर्याप्त दूध नहीं होता, जिससे बच्चा भूखा रह जाता है। कच्चे पपीते की सब्जी खाने से मां के दूध में वृद्धि होती है।
  • पीले रंग का फल पपीते का गुदा पेट की परेशानी जैसे कब्ज , अपच को दूर करता है । अगर किसी व्यक्ति को पीलिया होता है तो पपीता बहुत ही फायदेमंद होता है ।
  • पपीते मे पपेन नमक पदार्थ होता है जो भोजन को पचाने मे सहायक होता है ।चेहरे को सुंदर बनाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है । पपीते को चेहरे पर लगाने से चेहरे पर मुहासे नही होते तथा यह चेहरे की झाइयो को भी कम करता है ।
  • पपीते का उपयोग कई लोग प्रकृतिक ब्लीच के रूप मे भी करते है । पपीता आख के लिए भी हितकारी होता है इसमे विटामिन A प्रचुर मात्रा मे होता है जिससे रातोंधी नमक रोग नही होता साथ ही साथ आखो की रोशनी भी बढती है ।
  • पपीता दातों के लिए भी फायदेमंद होता है अगर दातों मे से खून आता है तो पपीता उसमे भी लाभकारी है
  • आज के दौर में ऐसे खाने से मुंह मोड़ना जो आपके पाचन तंत्र के लिए बुरा हो, लगभग असंभव है। कई बार हम ऐसा भोजन करने को मजबूर होते हैं जो या तो जंक फ़ूड की श्रेणी में आता है या अधिक तेल में पका होता है। रोज़ एक पपीते का सेवन कभी-कभार खाए ऐसे भोजन के साइड-इफेक्ट को दूर रखता है क्योंकि इसमें फाइबर के साथ-साथ पपैन नामक एक एंजाइम होता है जो आपकी पाचन शक्ति को दुरुस्त रखता है।
  • पपीता बवासीर रोग मे भी फायदेमंद है पपीता खाने से कब्ज नही होती तो बवासीर रोग मे भी लाभ होता है ।
  • पपीता मधुमेह रोगियों के लिए आहार के रूप में एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि स्वाद में मीठा होने के बावजूद इसमें शुगर नाम मात्र का होता है। साथ ही, वे लोग जो मधुमेह के मरीज़ नहीं हैं, इसे खाकर मधुमेह होने के खतरों को दूर कर सकते हैं।
  • डाइटिंग कर रहे व्यक्तियों के लिए तो पपीता राम बाण है । कई लोग जो डाइटिंग कर रहे है वह पपीते को अपने खाने मे शामिल करते है ।
  • पपीता साल मे 12 महीने मिलता है यह फल तथा सब्जी दोनों के रूप मे उपयोगी है । पपीते का उपयोग जेम तथा जेली बनाने मे भी किया जाता है ।
  • पपीते में फाइबर, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता है जो आपकी रक्त-शिराओं में कोलेस्ट्रोल के थक्के नहीं बनने देता। कोलेस्ट्रोल के थक्के दिल का दौरा पड़ने और उच्च रक्तचाप समेत कई अन्य ह्रदय रोगों का कारण बन सकते हैं।
  • आपका प्रतिरोधक तंत्र आपको बीमार कर देने वाले कई संक्रमणों के विरुद्ध ढाल का काम करता है। केवल एक पपीते में इतना विटामिन सी होता है जो आपके प्रतिदिन की विटामिन सी की आवश्यकता का 200 प्रतिशत होता है। ज़ाहिर तौर पर ये आपके प्रतिरोधक तंत्र को मज़बूत करता है।
  • जिन लोगों का लक्ष्य अपना वज़न कम करना है उन्हें अपने आहार में पपीते को ज़रूर शामिल करना चाहिए क्योंकि इसमें कैलोरी बहुत कम होती है। पपीते में मौजूद फायबर एक और जहां आपको तारो-ताज़ा महसूस करवाता है वहीं आपकी आँत की मूवमेंट को ठीक रखता है जिसके फलस्वरूप वज़न घटाना आसान हो जाता है।
  • पपीते में विटामिन ए भी प्रचुर मात्रा में होता है जो आपके आँखों की रोशनी को कम होने से बचाता है। कोई भी व्यक्ति उम्र बढ़ने की वजह से आँखों की रोशनी से मरहूम नहीं होना चाहता, और पपीते को अपने आहार में शामिल करके आप ऐसी मुसीबत से बाख सकते हैं।
  • गठिया वास्तव में एक ऐसी बीमारी है जो शरीर को बेहद दुर्बल तो करती ही है जीवनशैली को बुरी तरह प्रभावित भी करती है। पपीते खाना आपकी हड्डियों के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है, इनमें विटामिन-सी के साथ-साथ सूजन-रोधी गुण होते हैं जो गठिया के कई रूपों से शरीर को दूर रखता है। एक अध्ययन के अनुसार विटामिन-सी युक्त भोजन न लेने वाले लोगों में गठिया का खतरा विटामिन-सी का सेवन करने वालों के मुकाबले तीन गुना होता है।

Thursday, January 5, 2017

दही के फायदे,Health Benefits of Curd in Hindi,Health Benefits of Dahi,

दही स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ पाए जाते हैं जो दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाते हैं। दूध की अपेक्षा दही में प्रोटीन, लैक्टोज, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस आदि कई विटामिन्स होते हैं इसलिए दही को अधिक पोषक माना जाता है। जिन लोगों को दूध न भाता हो उनके लिए दही एक बेहतर विकल्प है।

अमेरिका में हुए एक शोध के दौरान आहार विशेषज्ञों ने पाया कि दही को प्रतिदिन खाने से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती तथा बहुत से विटामिन बनने लगते हैं। इससे जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टोज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं।

दही के फायदे,Health Benefits of Curd in Hindi,Health Benefits of Dahi,

  • दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती, तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं। दही में जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टेज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं।
  • यदि आपको मोटापा है तो मोटापा कम करने के लिए दही एक प्रभावशाली उपाय है।
  • दही में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अद्भुत क्षमता होती है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढ़ने से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न कर पाता और हार्टबीट सही बनी रहती है।
  • दही में कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर में हड्डियों का विकास करती है और उन्हें मजबूती प्रदान करती है। दांतों एवं नाखूनों की मजबूती एवं मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में भी दही सहायक होती है।
  • यदि पेट में गड़बड़ हो, पतले दस्त हों तो दही के साथ ईसबगोल की भूसी लेने से आराम मिलता है। दही के साथ चावल खाना भी लाभप्रद होता है।
  • बवासीर के रोगियों को चाहिए कि दोपहर में भोजन के बाद एक गिलास छाछ में अजवायन डालकर पीएं।
  • पेट के रोगियों को चाहिए कि ज्वार की रोटी के साथ दही लें। दही का सेवन भुने हुए जीरे व सेंधा नमक के साथ करें।
  • दही में शहद मिलाकर चटाने से छोटे बच्चों के दांत आसानी से निकलते हैं।
  • मुंह के छालों में दही कम करने के लिए दिन में कई बार दही की मलाई लगाएं। इसके अलावा शहद व दही की समान मात्रा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से मुंह के छाले भी दूर हो जाते हैं।
  • गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। इसे पीकर बाहर निकलें तो लू लगने का डर भी नहीं रहता है।
  • दुबले व्यक्तियों को चाहिए कि दही में किशमिश, बादाम, छुहारा आदि मिलाकर पीएं। इससे वजन बढ़ता है।
  • दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गर्दन, कोहनी, एड़ी, हाथों पर लगाएं। कुछ देर बाद कुनकुने पानी से धो डालें।
  • अगर गर्दन के पिछले भाग में कालापन जमा हो गया है नहाते समय गर्दन पर खट्टी दही से मालिश करें और धो लें। एक-दो सप्ताह के नियमित प्रयोग से कालापन कम हो जायेगा।
  • बालों को सुंदर, स्वस्थ व नीरोग रखने के लिए बालों को धोने के लिए दही या छाछ का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि दही में वे सब तत्व मौजूद रहते हैं, जिनकी बालों को आवश्यकता रहती है। स्नान से पूर्व दही को बालों में डालकर अच्छी तरह मालिश करें ताकि बालों की जड़ों तक दही पहुंच जाए। कुछ समय बाद बालों को धो दें। दही के प्रयोग से खुश्की, रूसी (ईखर) व फियास समाप्त हो जाती है।
  • दही को जीरे व हींग का छौंक लगाकर खाने से जोड़ों के दर्द में लाभ पहुंचता है। यह स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है।
  • गर्मी के दिनों में पसीना काफी निकलता है। पसीने की बदबू दूर करने के लिए दही और बेसन मिलाकर शरीर पर मालिश करें तथा कुछ देर बाद स्नान करें, इससे पसीने की बदबू दूर हो जाती है।
  • वे लोग जो नींद न आने से परेशान रहते हैं उन्हें दही व छाछ का नियमित सेवन करना चाहिए।
  • दही का सेवन कुछ आयुर्वेदिक औषधियों में सहपान के साथ कराने का भी विधान है, जिससे दवा का प्रभाव बढ़ जाता है।

दही का प्रयोग करते समय बरतें कुछ सावधानियां

  • दही हमेशा ताजी ही प्रयोग करनी चाहिए।
  • रात्रि में दही का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
  • मांसाहार के साथ दही के सेवन को शास्त्रों में निषिद्ध माना गया है।
  • दही दस्त या अतिसार के रोगियों में मल को बांधने वाली होती है, पर सामान्य अवस्था में कब्ज कर सकती है।
  • मधुमेह से पीड़ित रोगियों में दही का सेवन थोड़ा सोच-समझकर करना चाहिए।
  • जब खांसी, ज़ुकाम, टांसिल्स या सांस की तकलीफ हो तब दही का सेवन न करें तो अच्छा रहता है।
  • दही सदैव ताज़ी एवं शुद्ध एवं घर में किसी मिटटी के बर्तन क़ी बनी हो तो अत्यंत गुणकारी होती है।
  • त्वचा सम्बन्धी रोगों में दही का सेवन सावधानी पूर्वक चिकित्सक के निर्देशन में करना चाहिए।
  • मात्रा से अधिक दही के सेवन से बचना चाहिए।

Friday, December 16, 2016

लौकी के जूस के फायदे,Health Benefits of Bottle Gourd Juice in Hindi

लौकी के जूस के फायदे,Health Benefits of Bottle Gourd Juice in Hindi

जाने-माने योगाचार्य बाबा रामदेव ने लोगों को लौकी के जूस का अधिकाधिक सेवन करने की सलाह देते हुए कहा कि इसे सदियों से स्वास्थ्यवर्धक माना जाता रहा है। लापरवाही से अगर कोई कड़वी लौकी का प्रयोग कर ले तो उसके प्रथम उपचार में तुरंत वमन करें और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सामान्य लौकी का जूसलें।  

हर घरों में लौकी सब्जी के रूप में बनाई जाती है जिससे अधिकतर लोग खाना पसंद करते है, तो कुछ लोग नही… पर इसमें पाये जाने वाले पौष्टिक गुणों के कारण लौकी का उपयोग अब हर घरों में किया जाने लगा है। लौकी में महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की मात्रा पाई जाती है जो शरीर को कई खतरनाक बीमारियों से बचाती है। इसमें फाइबर और पानी की मात्रा अधिक होने से लोग गर्मियों के समय में इसका सेवन अधिक करते है। यह शरीर में ठंडाहट देने के साथ स्वास्थ्य एंव सौंदर्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। आइये आज जानते है कि लौकी हमारे लिये कितना उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

लौकी के जूस के फायदे,Health Benefits of Bottle Gourd Juice in Hindi

    • वजन कम करने में सहायक - बेहद कम लोग इस बात को जानते हैं कि घीयावजन को कम करती है। ये और दूसरी चीजों के मुकाबले तेजी से वजन कम करने में सहायक होती है। घीया को उबालकर नमक के साथ खाने से वजन जल्दी ही कुछ ही दिनों में घट जाता है। घीया में फाइबर की अच्छी मात्रा से जल्द भूख नहीं लगती और पेट भी भरा-भरा सा लगता है।
    • चेहरे में लाए प्राकृतिक निखार- चेहरे को अंदर और बाहर से प्राकृतिक सुंदरता और निखार लाने के लिए प्रतिदिन घीया का सेवन करना चाहिए। घीया चेहरे को सुंदर और आकर्षक बनाती है। घीया का जूस पेट की अंदरूनी सफाई करता है जिससे चेहरे पर धूल, धूप, और प्रदूषण से होने वाले मुहांसों से छुटकारा मिलता है। साथ ही त्वचा खूबसूरत और मुलायम बनी रहती है।
    • डाइबिटीज – घीया डाइबिटीज के मरीजों को बेहद फायदा पहुंचाती है। खाली पेट घीया का जूस का सेवन डाइबिटीज के मरीजों को सुबह-सुबह करना चाहिए।
    • वर्कआउट के बाद पीना फायदेमंद – आप वर्कआउट के बाद जिस प्रोटीन शेक को पीते हैं, उसकी जगह घीया के जूस को पीकर देखिये। लौकी के जूस में मौजूद नैचुरल शुगर न सिर्फ ग्लाइकोजीन (glycogen) स्तर को बनाए रखती है बल्कि वर्कआउट के दौरान शरीर में कार्बोहाइड्रेट की जो कमी पैदा होती है उसे भी पूरा करती है। इसमें प्रोटीन काफी मात्रा में होता है इसलिए ये मांसपेशियों की क्षमता भी बढ़ाता है।
    • यूटीआई से निपटने में मदद करे – अगर आपको यूरीन के दौरान जलन या दर्द महसूस होता है तो आपको ज़रूरत है हर सुबह घीया का जूस पीने की। क्योंकि ऐसा यूरीन में एसिड की मात्रा बढ़ने पर होता है और लौकी के जूस से मिलने वाली ठंडक एसिड के असर को कम कर देती है।
    • पाचन – जिन लोगों को पाचन संबंधी परेशानियां हों वे घीया का सेवन करें। घीया पेट में गैस की समस्या को दूर करती है। इसलिए इसे अपने भोजन में जरूर इस्तेमाल करना चाहिए।
    • अनिद्रा से राहत – अनिद्रा की समस्या से पीड़ित लोग लौकी के रस के साथ तिल का तेल मिलाकर पी सकते हैं ।
    • सनटैन से छुटकारा दिलाए – अगर आप चाहते हैं कि आप सनटैन से बचे रहें, तो भी लौकी का जूस आपके काम आ सकता है। इसके नेचुरल ब्लीचिंग तत्व टैन त्वचा को लाइट करते हैं। साथ ही ये अच्छा मॉश्चराइज़र भी है। दिन में 3-4 बार टैनिंग वाले स्थान पर लौकी का जूस लगाने से लाभ मिलता है।
    • पेट होगा साफ – लौकी का जूस पेट की अंदरूनी सफाई करता है जिससे चेहरे पर धूल, धूप, और प्रदूषण से होने वाले मुहांसों से छुटकारा मिलता है। साथ ही त्वचा खूबसूरत और मुलायम बनी रहती है।
    • स्वस्थ ह्रदय – आजकल लोगों में दिल की कई समस्याओं के बारे में सुना जाता है जो हल्के और गंभीर दिल के दौरे को जन्म दे सकती हैं । कुछ लोगों को यह तकलीफ अनुवांशिक होती है और कुछ लोगों की जीवनशैली और अनुचित आहार इसका कारण होती है | अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए घीया का रस पी सकते हैं। यह रक्तचाप को नियंत्रित करके दिल का प्रभावी ढंग से विकास करके उसे स्वस्थ रखेगा ।
    • विटामिन और प्रोटीन -घीया में सभी तरह के प्रोटीन और विटामिन पाए जाते हैं। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी3, बी6, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम और जिंक पाया जाता है। जो शरीर को कई बीमारियों से बचाता है।
    • कोलेस्ट्राल से बचाए – अपने खाने में घीया का इस्तेमाल करें यह दिल संबंधी बीमारियों से आपको बचाता है। घीया खाने से हानिकारक कोलेस्ट्राल कम होने लगता है और हार्ट अटैक जैसी बीमारी से इंसान बच जाता है। इसलिए घीया का जूस बेहद फायदेमंद होता है।

      सावधानिया 

      योग गुरु बाबा रामदेव भले ही लौकी के जूस को अन्य सब्जियों के जूस में मिलाकर पीने की सलाह देते हों, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बनी विशेषज्ञ समिति ने ऐसा न करने की हिदायत दी है। उसका यह भी कहना है कि जूस निकालने से पहले लौकी का एक छोटा टुकड़ा काटकर उसे चख लेना चाहिए। अगर वह कड़वा हो तो लौकी का किसी भी रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 

      कुछ महीने पहले लौकी का जूस पीने के तुरंत बाद दिल्ली में 59 साल के सुशील कुमार सक्सेना की मृत्यु हो गई थी और उनकी पत्नी की हालत बिगड़ गई थी। इन्होंने लौकी के जूस में करेले का जूस मिलाकर पीया था। इस घटना के बाद सरकार ने एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. एस. के. शर्मा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति ने अपने अध्ययन के बाद की गई सिफारिशों में कहा है कि कड़वी लौकी के जूस को किसी भी स्थिति में नहीं पीना चाहिए और न ही ऐसी लौकी का किसी भी रूप में प्रयोग करना चाहिए। 

      समिति का यह भी कहना है कि सामान्य लौकी के जूस को भी किसी भी सब्जी या फल के जूस में मिलाकर नहीं पीना चाहिए। उसने सलाह दी है कि लौकी का जूस पीने के बाद यदि किसी व्यक्ति को बेचैनी, चक्कर या उल्टी-दस्त की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में ले जाना चाहिए।

      Friday, October 21, 2016

      अंडा खाने के नुकसान Egg side effect


      अंडे दो तरह के होते है, एक वे जिसमें से चूजे निकल सकते है तथा दूसरे वे जिनसे बच्चे नहीं निकलते।निषेचित और अनिषेचित। मुर्गे के संसर्ग से मुर्गी अंडे दे सकती है किन्तु बिना संसर्ग के अंडा मात्र मुर्गी के रज-स्राव से बनता है, मासिक-धर्म की भांति ही यह अंडा मुर्गी की आन्तरिक अपशिष्ट का परिणाम होता है

       अंडो से कई बीमारियाँ

      हाल ही में हुआ बर्ड फ्ल्यू और साल्मानोला बीमारी ने समस्त विश्व को स्तम्भित कर दिया है कि मुर्गियों को होने वाली कई बीमारियों के कारण अन्डो से यह बीमारियाँ, मनुष्य में भी प्रवेश करती है। अंडा भोजियों को यह भी नहीं मालूम कि इसमें हानिकारक कोलेस्ट्राल की बहुत अधिक मात्रा होती है। अंडो के सेवन से आंतो में सड़न और तपेदिक की सम्भावनाएँ बहुत ही बढ़ जाती है। अंडे की सफ़ेद जर्दी से पेप्सीन इन्जाइम के विरुद्ध, विपरित प्रतिक्रिया होती है।
        • अंडो के अधिक से अधिक उत्पादन के लिए निषेधित ड्रग ओक्सिटोसिन(oxytocin) का इंजेक्शन लगाया जा रहा है जिससे के मुर्गियाँ लगातार अनिषेचित (unfertilized) अण्डे देती है इनको खाने से पुरुषों और स्त्रियों में हार्मोन (estrogen) असंतुलन की वजह से कई समस्या उत्पन्न होने का डर बना रहता है जैसे के वीर्य में शुक्राणुओ की कमी (oligozoospermia, azoospermia) , नपुंसकता और स्तनों का आवश्यकता से ज्यादा विकास (gynecomastia), डिप्रेशन आदि …
        • वहीँ स्त्रियों में अनियमित मासिक, बन्ध्यत्व , (PCO poly cystic oveary) गर्भाशय कैंसर आदि रोग होने का भय होता है
        • आजकल पॉलिटरी फार्मो में अंडा का उत्पादन बढ़ाने के एक विशेष प्रकार के हार्मोन्स का प्रयोग किया जाता हैं जिसमे स्टील बेस्टेरोल नामक दवा महत्त्वपूर्ण है। इससे जनित मुर्गी के अंडे खाने से हाई ब्लडप्रैशर, कैंसर, खासकर स्त्रियों को स्तन का कैंसर पीलिया जैसे रोग होने की सम्भावना रहती है।
        • साल्मोनेला एक बैक्टीरिया है जो कि मुर्गियों की आंतों में पाया जाता है। यह अंडे के बाहरी आवरण और उसके अंदर भी पाये जाते हैं । जिससे फूड प्वांजनिंग , सूजन, उल्टी व पेट की अन्य समस्या हो सकती है।
        • नियमित रूप से अंडे के ऊपर का सफ़ेद हिस्सा खाने से शरीर में बायोटीन की कमी होती है । बायोटीन की कमी से मांसपेशियों में दर्द, जकरन ,शरीर में तालमेल की कमी ,त्वचा संबंधी बीमारी जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा होना का खतरा बढ़ जाता है ।
        • नियमित रूप से अंडे का पीला वाला हिस्सा खाने से शरीर में कोलोस्ट्रोल की मात्रा बढ़ सकती है जो की हाई ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज़ व हृदय संबंधी रोगियो के लिए जानलेवा साबित हो सकता है ।
        • जिन लोगों का ग्लोमरगुलर फिल्टरेशन रेट (फ़्लो रेट जो किडनी फिल्टर कर पाती है) कम है उन्हें खास तौर पर अंडे के प्रोटीन से खतरा है।
        • अन्डो को खाना धर्म और शास्त्रों के विरुद्ध , अप्राकृतिक माना जाता है क्योंकी जीव हत्या करना हमारे सभ्यता और संस्कृति के खिलाफ है ।

          Wednesday, May 18, 2016

          आंखों की देखभाल कैसे करें,Eye Care Tips in Hindi,Aankhon Ki Dekhbhal,

          आंखें भगवान की दी नेमत हैं। लेकिन इनकी समुचित देखभाल की ज़िम्मेदारी हमारी अपनी है। बिना आंखों के हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते हैं। आंखों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए आँखों की देखभाल उन लोगो के लिए भी जरूरी होती है जिनकी ऑंखें या तो कमजोर है या फिर उन्हें सही तरीके से देखने व पढने के लिए चश्मा लगाने पड़ता है

          आंखों की देखभाल करना बहुत जरूरी है। यदि आंखों की ठीक प्रकार से देखभाल न की जाए तो आंखों में विकार पैदा हो सकते हैं।

          • आखों के लिए स्वस्थ भोजन और अच्छी नींद दोनों ही बेहद आवश्यक हैं। खाने में हरी सब्जियां ज्यादा खाएं।
          • दिन में कम से कम दो लीटर पानी पीएं, ताकि आपके शरीर की गंदगी बाहर निकले और नमी बनी रहे, जो आखों के लिए भी जरूरी है।
          • आखों में चिकित्सक द्वारा सुझाई गई ऐसी दवाएं डालें जो आखों को शुष्क होने से रोके और संक्रमण न पैदा होने दें। इस मौसम में कंजेक्टिवाइटिस के साथ ही अन्य संक्रमण की आशंकाएं भी अधिक होती हैं
          • शुद्धकमल को जलाकर उसका काजल बनाकर प्रतिदिन रात को सोते समय आंखों में लगाने से आंखों की रोशनी तेज होती है तथा आंखों के विभिन्न प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं।
          • चांदनी रात में चन्द्रमा की तरफ कुछ समय के लिए प्रतिदिन देखने से आंखों की दृष्टि ठीक हो जाती है।
          • यदि किसी रोगी व्यक्ति की देखने की शक्ति कमजोर हो गई है तो उसे प्रतिदिन दिन में 2 बार कम से कम 6 मिनट तक आंखों को मूंदकर बैठना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को बहुत लाभ मिल
          • आंखों के रोगों से पीड़ित रोगी को प्रतिदिन सुबह के समय में उठकर अपनी आंखों को बंद करके सूर्य के सामने मुंह करके कम से कम दस मिनट तक बैठ जाना चाहिए। इससे रोगी व्यक्ति को बहुत अधिक लाभ मिलता है।
          • सोया मिल्क भी आंखों के लिए बहुत लाभकारी है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। साथ ही, इससे विटामिन, फैटी एसिड्स और विटामिन ई भी मिलते हैं,जो कि आंखों की कमजोर को तुरंत दूर कर देते हैं।
          • आंखों के रोग से पीड़ित रोगी को कोई भी ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिससे आंखों से देखने के लिए जोर लगाना पड़े जैसे- अधिक छोटे अक्षर को पढ़ना, अधिक देर तक टी.वी. देखना आदि।
          • आंखों के रोग से पीड़ित रोगी को पानी पीकर सप्ताह में एक दिन उपवास रखना चाहिए। यदि कब्ज की शिकायत हो तो उसे दूर करने के लिए एनिमा क्रिया कीजिए। इससे रोगी व्यक्ति की आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं।
          • सुबह के समय में उठकर व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 12 मिनट से लेकर 30 मिनट तक सूर्य की ओर मुंह करके आंखों को बंद करके बैठना चाहिए। इस प्रकार बैठने से पहले रोगी को अपने सिर को ठंडे पानी से धोना चाहिए। इस क्रिया को करने के बाद आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारकर आंखों को धोना चाहिए। इसके बाद कम से कम पांच मिनट तक पामिंग करना चाहिए। इसके फलस्वरूप आंखों के रोग ठीक हो जाते हैं तथा चश्मे का नम्बर कम होने लगता है।
          • सुबह के समय में मुंह धोने के बाद एक गिलास पानी में कागजी नींबू का रस मिलाकर पीना चाहिए। इसके बाद दोपहर के समय में भोजन करने तक और कुछ भी नहीं खाना चाहिए। दोपहर में चोकर युक्त आटे की रोटी खानी चाहिए। उबली हुई शाक-सब्जियां खानी चहिए। शाम के समय में फलों का रस पीना चाहिए। इस प्रकार से प्रतिदिन उपचार करने से चश्मा हट सकता है तथा आंखों के कई प्रकार के रोग भी ठीक हो जाते हैं।
          • आम, पपीते जैसे फलों में करोटिन पाया जाता है। इनके सेवन से आंखों के नीचे के काले घेरे दूर हो जाते हैं। आंखें हमेशा स्वस्थ रहती हैं।
          • सुबह के समय में प्रतिदिन हरे केले के पत्तों को अपनी आंखों के सामने रखकर कुछ मिनटों तक सूर्य के प्रकाश को देखने तथा इसके बाद पामिंग करने और फिर इसके बाद उदरस्नान या मेहनस्नान करने से आंखों पर से चश्मा हट सकता है तथा कई प्रकार के रोग जो आंखों से संबन्धित होते हैं, ठीक हो जाते हैं।
          • प्रतिदिन रात को सोते समय आंखों पर गीली मिट्टी की पट्टी लगाने तथा कमर पर कपड़े की गीली पट्टी करने और अपने पेड़ू पर गीली मिट्टी की पट्टी लगाने से रोगी व्यक्ति की आंखों पर से चश्मा हट सकता है लेकिन इसके साथ-साथ रोगी व्यक्ति को प्रतिदिन एनिमा क्रिया भी करनी चाहिए तथा सप्ताह में एक बार उपवास रखना चाहिए।
          • सौंफ कई गुणों से भरपूर होती है। इसमें मौजूद औषधीय गुण आंखों के लिए लाभदायक होते हैं। सौंफ और मिश्री को बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इसकी एक चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ लें। इससे आंखों की कमजोरी दूर होती है और नेत्र ज्योति बढ़ती है।
          • मछली में ओमेगा 3 फैटी एसिड्स होता है। एक ताजा शोध में ये बात सामने आई है कि मछली खाने से आंखों की रोशनी बढ़ती है।

          Wednesday, May 11, 2016

          ग्रीन टी पीने के फायदे,Health Benefits of Green Tea in Hindi

          ग्रीन टी के फायदे,Health Benefits of Green Tea in Hindi

          आज यह दुनिया भर में एक बहुत लोकप्रिय पेय बन गया है. आइए हम यह जानने की कोशिश करते हैं कि आखिर Green Tea के क्या क्या फायदे हैं
          • ग्रीन टी और हृदय रोग: Green Tea कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करके हृदय रोग और स्ट्रोक को रोकने में मदद करता है. यहां तक कि दिल का दौरा पड़ने के बाद यह कोशिका की मृत्यु को रोकता है और हृदय कोशिकाओं के पुनः बनने की गति को बढाता है.
          • एक नींबू और थोड़ी से अदरक डालने से इसके फायदे और बड़ जाते हे
          • इसे सुबह ,दोपहर और शाम की सामन्य चाय की जगह ग्रीन टी का इस्तेमाल करे
          • सामान्य चाय का इस्तेमाल न करे इसका ज्यादा इस्तेमाल हानिकारक हे,आप इसकी जगह ग्रीन टी या ब्लैक टी लेकर स्वस्थ रहे
          • सुबह खाली पेट नीबू और शहद को एक गिलास गरम पानी में डालकर पिए
          • ग्रीन चाय और त्वचा: Green Tea में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट free radicals से skin की रक्षा करता है . ये free radicals त्वचा में wrinkling और skin aging जैसे समस्या को जन्म देते हैं. Green Tea त्वचा कैंसर के खिलाफ लड़ाई में भी मदद करता है.
          • ग्रीन टी और जरा निषेध (anti aging ) : Green Tea में polyphenols के रूप में एक एंटीऑक्सीडेंट होता है जो free radicals के खिलाफ लड़ता है. अर्थात यह aging के खिलाफ लड़ता है और दीर्घायु को बढ़ावा देता है.
          • ग्रीन टी और कैंसर: Green Tea कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद करता है. Green Tea में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट Vitamin C से 100 गुना और Vitamin E से 24 गुना अधिक प्रभावी होता है. यह कैंसर से शरीर की कोशिकाओं की रक्षा करने के में मदद करता है.
          • ग्रीन टी और वजन घटाना ( weight loss ) : Green Tea में के साथ मदद करता है. Green Tea वसा को जलाता है और स्वाभाविक रूप से Metabolism (उपापचय ) दर को बढ़ा देता है. यह सिर्फ एक दिन में 70 कैलोरी को जला देता है. यह एक वर्ष में लगभग 3-4 किलोग्राम के करीब वजन घटने के बराबर हो जाता है.
          • ग्रीन चाय और त्वचा: Green Tea में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट free radicals से skin की रक्षा करता है . ये free radicals त्वचा में wrinkling और skin aging जैसे समस्या को जन्म देते हैं. Green Tea त्वचा कैंसर के खिलाफ लड़ाई में भी मदद करता है.
          • ग्रीन टी और गठिया: Green tea संधिशोथ ( arthritis) के जोखिम को रोकने और कम करने में मदद करता है. यह cartilage (उपास्थि) को नष्ट कर देनेवाले एंजाइम को अवरुद्ध करके उपास्थि की रक्षा करता है.
          • ग्रीन टी और हड्डियां: Green tea में उच्च फ्लोराइड नामक केमिकल पाया जाता है. यह हड्डियों को मजबूत रखने में मदद करता है. यदि आप रोज Green tea पीते हैं तो यह आपके Bone density (अस्थि घनत्व) को बनाए रखने में मदद करता है.
          • ग्रीन टी और कोलेस्ट्रॉल: Green tea कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद करता है. यह खराब कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करता है और अच्छे कोलेस्ट्रॉल के अनुपात में सुधार लाता है .
          • ग्रीन टी और मोटापा: Green tea वसा कोशिकाओं में ग्लूकोज की आवाजाही को रोक मोटापे से बचाता है. यदि आप स्वस्थ आहार लेते हैं, नियमित रूप से व्यायाम करते हैं और Green tea पीते हैं, तो आप मोटापे से कभी भी ग्रस्त नहीं होगें.
          • ग्रीन टी और मधुमेह: Green Tea जाहिर तौर पर खाने के बाद रक्त में शर्करा की वृद्धि को धीमा कर ग्लूकोज के स्तर को नियमित करता है. साथ ही यह metabolism rate को संतुलित करता है.
          • ग्रीन टी और अल्जाइमर: Green Tea स्मृति को बढ़ावा देने में मदद करता है. अल्जाइमर लाइलाज है और ग्रीन टी मस्तिष्क में acetylcholine की प्रक्रिया को कम कर इसके खतरे को घटाता है. चूहों पर किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि हरी चाय क्षतिग्रस्त मस्तिष्क कोशिकाओं मरने से न सिर्फ बचाता है बल्कि क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को restore भी करता है.
          • ग्रीन टी और पार्किंसंस: Green Tea में मौजूद Antioxidants मस्तिष्क में कोशिका क्षति को रोकने में मदद करता है अन्यथा यह पार्किंसंस का कारण बन सकता है. हरी चाय पीने वाले लोगों में पार्किंसंस की संभावना कम रहती है.
          • ग्रीन टी और यकृत रोग: Green Tea जिगर की विफलता (liver failure) के साथ लोगों में प्रत्यारोपण की विफलता को रोकने में मदद करता है. हरी चाय fatty livers में हानिकारक मुक्त कण (free radicals ) को नष्ट कर देता है.
          • ग्रीन टी और उच्च रक्तचाप: Green tea उच्च रक्तचाप को रोकने में मदद करता है. हरी चाय पीने से एंजियोटेनसिन को repress ( दमन) कर रक्तचाप को कम रखने में मदद मिलता है.
          • ग्रीन टी और भोजन की विषाक्तता: Green tea में Catechin पाया जाता है जो भोजन को विषाक्त बनानेवाले बैक्टीरिया को मार देता है और हमें Food poisoning से बचाता है.
          • ग्रीन चाय और रक्त शर्करा: उम्र के साथ रक्त में शर्करा कीमात्रा बढ़ती जाती है. लेकिन हरी चाय में polyphenols और polysaccharides रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद करते हैं.
          • ग्रीन टी और प्रतिरोधक क्षमता: Green tea में पाया जानेवाला Polyphenols और flavonoids संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में हमारी मदद करते हैं. स्वास्थ्य प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाते हैं.
          • ग्रीन टी और कोल्ड और फ्लू: Green tea सर्दी या फ्लू होने से रोकता है. Green tea में पाया जानेवाला विटामिन सी फ्लू और सर्दी के इलाज में मदद करता है.

          Tuesday, April 26, 2016

          हाई बीपी को काबू करने के प्रभावशाली घरेलू उपाय,Monitoring Blood,best blood pressure remonitor,

          ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए घरेलू उपाय,Monitoring Blood,best blood pressure re monitor, Blood Pressure Treatment

          वर्तमान समय में ब्लड प्रेशर के पेशेन्ट्स पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रहे हैं। दौड़ती - भागती जिंदगी, फॉस्ट फूड और अनियमित दिनचर्या के कारण यह बीमारी भारत में भी फैल रही है। ब्लड प्रेशर से दिल की बीमारी, स्ट्रोक और गुर्दे की बीमारी होने का भी खतरा रहता है। इस बीमारी के रोगी को रोज दवा खानी पड़ती है। यदि आपके साथ भी ये समस्या है तो पारंपरिक चीजों का उपयोग करें। आज हम आपको बता रहे हैं कुछ ऐसी ही सामान्य चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर हमेशा कंट्रोल में रहता है। Blood Pressure Treatment
          • लहसुन एक ऐसी औषधि है, जो ब्लड प्रेशर के रोगियों के लिए अमृत के समान है। लहसुन में एलिसीन होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को बढ़ाता है और मांसपेशियों को आराम पहुंचाता है। ब्लड प्रेशर के डायलोस्टिक और सिस्टोलिक सिस्टम में भी राहत देता है। यही कारण है कि ब्लड प्रेशर के मरीजों को रोजाना खाली पेट एक लहसुन की कली निगलने की सलाह दी जाती है। 
          • आंवला -रोजाना आंवला खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। आंवला में विटामिन सी होता है। यह ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करता है और कोलेस्ट्रॉल को भी कंट्रोल में रखता है। 
          • मूली-यह एक साधारण सब्जी है। इसे खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। इसे पकाकर या कच्चा खाने से बॉडी को मिनरल्स व सही मात्रा में पोटैशियम मिलता है। यह हाइ-सोडियम डाइट के कारण बढ़ने वाले ब्लड प्रेशर पर भी असर डालता है।
          • तिल का तेल और चावल की भूसी को एक साथ खाने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। यह हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए भी लाभदायक होता है। माना जाता है कि यह ब्लड प्रेशर कम करने वाली अन्य औषधियों से ज्यादा बेहतर होता है। Blood Pressure Treatment
          • अलसी में एल्फा लिनोनेलिक एसिड काफी मात्रा में पाया जाता है। यह एक प्रकार का महत्वपूर्ण ओमेगा - 3 फैटी एसिड है। कई अध्ययनों में भी पता चला है कि जिन लोगों को हाइपरटेंशन की शिकायत होती है, उन्हें अपने भोजन में अलसी का इस्तेमाल शुरू करना चाहिए। इसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है और इसके सेवन से ब्लड प्रेशर भी कम हो जाता है।
          • इलायची-एक रिसर्च के अनुसार इलायची के नियमित सेवन से ब्लड प्रेशर प्रभावी ढंग से कम होता है। इसे खाने से शरीर को एंटीऑक्सीडेंट मिलते हैं। साथ ही, ब्लड सर्कुलेशन भी सही रहता है।
          • प्याज के नियमित सेवन से कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में रहता है। इसमें क्योरसेटिन होता है। यह एक ऐसा ऑक्सीडेंट फ्लेवेनॉल है, जो दिल को बीमारियों से बचाता है।
          • दालचीनी के सेवन से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। ओहाई के अप्लाइड हेल्थ सेंटर में 22 लोगों पर अध्ययन किया गया। इनमें से आधे लोगों को 250 ग्राम पानी में दालचीनी दी गई, जबकि आधे लोगों को कुछ और दिया गया। बाद में यह पता चला कि जिन लोगों ने दालचीनी का घोल पिया था, उनके शरीर में एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा ज्यादा थी और ब्लड सर्कुलेशन भी सही था।
          • नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला प्रमुख कारक है। इसलिए यह बात सबसे महत्‍वपूर्ण है कि हाई बी पी वालों को नमक का प्रयोग कम कर देना चाहिए। 
          • उच्च रक्तचाप का एक प्रमुख कारण होता है रक्त का गाढा होना। रक्त गाढा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है। इससे धमनियों और शिराओं में दवाब बढ जाता है। लहसुन ब्लड प्रेशर ठीक करने में बहुत मददगार घरेलू उपाय है। यह रक्त का थक्का नहीं जमने देती है। धमनी की कठोरता में लाभदायक है। रक्त में ज्यादा कोलेस्ट्ररोल होने की स्थिति का समाधान करती है।
          • एक बडा चम्मच आंवले का रस और इतना ही शहद मिलाकर सुबह-शाम लेने से हाई ब्लड प्रेशर में लाभ होता है। 
          • जब ब्लड प्रेशर बढा हुआ हो तो आधा गिलास मामूली गर्म पानी में काली मिर्च पाउडर एक चम्मच घोलकर 2-2 घंटे के फ़ासले से पीते रहें। ब्लड प्रेशर सही करने का बढिया उपचार है।
          • तरबूज के बीज की गिरि तथा खसखस अलग-अलग पीसकर बराबर मात्रा में मिलाकर रख लें। एक चम्मच मात्रा में प्रतिदिन खाली पेट पानी के साथ लें। Blood Pressure Treatment
          • बढे हुए ब्लड प्रेशर को जल्दी कंट्रोल करने के लिये आधा गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़कर 2-2 घंटे के अंतर से पीते रहें। हितकारी उपचार है।
          • पांच तुलसी के पत्ते तथा दो नीम की पत्तियों को पीसकर 20 ग्राम पानी में घोलकर खाली पेट सुबह पिएं। 15 दिन में लाभ नजर आने लगेगा। हाई ब्लडप्रेशर के मरीजों के लिए पपीता भी बहुत लाभ करता है, इसे प्रतिदिन खाली पेट चबा-चबाकर खाएं।
          • नंगे पैर हरी घास पर 10-15 मिनट चलें। रोजाना चलने से ब्लड प्रेशर नार्मल हो जाता है।
          • सौंफ़, जीरा, शक्‍कर तीनों बराबर मात्रा में लेकर पाउडर बना लें। एक गिलास पानी में एक चम्मच मिश्रण घोलकर सुबह-शाम पीते रहें। पालक और गाजर का रस मिलाकर एक गिलास रस सुबह-शाम पीयें, लाभ होगा।
          • करेला और सहजन की फ़ली उच्च रक्त चाप-रोगी के लिये परम हितकारी हैं।
          • गेहूं व चने के आटे को बराबर मात्रा में लेकर बनाई गई रोटी खूब चबा-चबाकर खाएं, आटे से चोकर न निकालें। Blood Pressure Treatment
          • ब्राउन चावल उपयोग में लाए। इसमें नमक, कोलेस्टरोल और चर्बी नाम मात्र की होती है। यह उच्च रक्त चाप रोगी के लिये बहुत ही लाभदायक भोजन है।
          • प्याज और लहसुन की तरह अदरक भी काफी फायदेमंद होता है। बुरा कोलेस्ट्रोल धमनियों की दीवारों पर प्लेक यानी कि कैल्‍शियम युक्त मैल पैदा करता है जिससे रक्त के प्रवाह में अवरोध खड़ा हो जाता है और नतीजा उच्च रक्तचाप के रूप में सामने आता है। अदरक में बहुत हीं ताकतवर एंटीओक्सीडेट्स होते हैं जो कि बुरे कोलेस्ट्रोल को नीचे लाने में काफी असरदार होते हैं। अदरक से आपके रक्तसंचार में भी सुधार होता है, धमनियों के आसपास की मांसपेशियों को भी आराम मिलता है जिससे कि उच्च रक्तचाप नीचे आ जाता है।
          • तीन ग्राम मेथीदाना पावडर सुबह-शाम पानी के साथ लें। इसे पंद्रह दिनों तक लेने से लाभ मालूम होता है। 

          Monday, March 28, 2016

          तेजपात के फायदे-Health Benefits of bay leaf in Hindi,

          तेजपात को प्राचीन आयुर्वेद में एक औषधी के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। तेजपात खाने का स्वाद और महक दोनों को बढ़ाता है। क्या आप जानते हैं तेजपात के सेवन से कई तरह की बीमारियां ठीक हो सकती हैं। आयुर्वेद में तेजपात के उन रहस्यों को आपको बताया जाएगा जिससे आप आरोग्य और लंबी उम्र बनायेगा

          तेजपात के फायदे Health Benefits of bay leaf in Hindi,

          • तेजपात के 4-5 पत्तों को एक गिलास पानी में इतने उबालें की पानी आधा रह जाए . इस पानी से प्रतिदिन सिर की मालिश करने के बाद नहाएं . इससे सिर में जुएं नहीं होती हैं महिलाओं के लिए एक उत्तम जूं नाशक है . 
          • चाय-पत्ती की जगह तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से सर्दी-जुकाम,छींकें आना ,नाक बहना,जलन सिरदर्द आदि में शीघ्र लाभ मिलता है 
          • तेजपात के पत्तों का बारीक चूर्ण सुबह-शाम दांतों पर मलने से दांतों पर चमक आ जाती है . 
          • तेजपात के पत्रों को नियमित रूप से चूंसते रहने से हकलाहट में लाभ होता है 
          • जिन लोगों को हकलाने की आदत हो वे तेजपात के पत्तों को रोज चूसें। इससे हकलाने की समस्या ठीक होती है। 
          • खांसी की समस्या से निजात पाने के लिए शहद के साथ 1 चम्मच तेजपात के चूर्ण को मिलाकर पीने से खांसी से राहत मिलती है। 
          • सिर दर्द, छीकों का अधिक आना, सर्दी जुकाम और पेट में जलन होने पर तेजपात के चूर्ण की चाय पीने से ठीक हो जाते हैं। चाय की पत्ती की जगह तेजपात का चूर्ण डालें। 
          • दमा के रोगीयों के लिए तेजपात एक बेहतर दवाई है। मिश्री, अदरक, पीपल और तेजपात को बराबर की मात्रा में मिलाकर चटनी बना लें फिर डेली 1 चम्मच चटनी का सेवन करें। 
          • कमजोर आखों की कमजोरी को दूर करने के लिए और आंखों की सफाई के लिए तेजपात के चूर्ण का सुरमा लगा सकते हो। यह आंखों की दृष्टि को तेज भी बनाता है। 
          • पेट सबंधी बीमारियों को दूर करने के लिए आप तेजपात का काढ़ा बनाकर पीएं। इससे आंत और दस्त की परेशानी ठीक होती है 
          • उनी, रेशमी और सूती कपड़ों को कीड़ों से बचाने के लिए तेजपातों को कपड़ों के बीच में रख दें। 
          • जिन लोगों के पैर में बदबू की समस्या होती है वे तेजपात के चूर्ण को पैर के तलुवों पर मलें और फिर जुराबें पहनें 
          • तेजपात सेहत के लिए एक बेहतर औषधी है। तेजपात बीमारियों को दूर करने के साथ साथ खाने का स्वाद और महक को भी बढ़ाता 
          • दांतों की मजबूती और दांतो में कीड़े की समस्या से बचने के लिए सप्ताह में 3 से 4 दिन तेजपात के चूर्ण से दांतों का मंजन करें। 
          • यदि पेट में गैस की समस्या है तो 3 चुटकी तेजपात का चूर्ण को पानी के साथ सेवन करें। आपको राहत मिलेगी। साथ ही साथ यह पेट में जलन यानि एसीडिटी की दिक्कत को भी दूर करता है। 
          • मुंह की दुर्गन्ध को दूर करने के लिए तेजपात का टुकड़ा खाना खाने के बाद खाएं। यदि आपको हाथों के बगल में पसीना अधिक आता हो तो तेजपात के चूर्ण को पाउडर की तरह हाथों के बगलों में लगायें। 
          • नियमित अपने खाने में तेजपात का इस्तेमाल करने से आप कभी भी दिल की परेशानी से परेशान नहीं होगे। 
          • एक चम्मच तेजपात चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से खांसी में आराम मिलता है . 
          • तेजपात के पत्तों का क्वाथ (काढ़ा) बनाकर पीने से पेट का फूलना व अतिसार आदि में लाभ होता है 
          • इसके २-४ ग्राम चूर्ण का सेवन करने से उबकाई मिटती है . 
          • दमा में ....तेजपात ,पीपल,अदरक, मिश्री सभी को बराबर मात्र में लेकर चटनी पीस लीजिए।१-१ चम्मच चटनी रोज खाएं ४० दिनों तक। फायदा सुनिश्चित है। 
          • दांतों के लिए ...सप्ताह में तीन दिन तेजपात के बारीक चूर्ण से मंजन कीजिए। दांत मजबूत होंगे, दांतों में कीड़ा नहीं लगेगा ,ठंडा गरम पानी नहीं लगेगा , दांत मोतियों की तरह चमकेंगे। 
          • दांतों की प्राकृतिक चमक पाने के लिए तेजपात का चूर्ण दांतों पर सुबह शाम मलना चाहिए। 
          • कपड़ों के बीच में तेजपात के पत्ते रख दीजिए ,ऊनी,सूती,रेशमी कपडे कीड़ों से बचे रहेंगे। अनाजों के बीच में 4-5 पत्ते डाल दीजिए तो अनाज में भी कीड़े नहीं लगेंगे। उनमें एक दिव्य सुगंध जरूर बस जायेगी। 
          • अनेक लोगों के मोजों से दुर्गन्ध आती है ,वे लोग तेजपात का चूर्ण पैर के तलुवों में मल कर मोज़े पहना करें। पर इसका मतलब ये नहीं कि आप महीनों तक मोज़े धुलें ही न। वैसे भी अंदरूनी कपडे और मोज़े तो रोज धुलने चाहिए। मुंह से दुर्गन्ध आती है तो तेजपात का टुकड़ा चबाया करें। बगल के पसीने से दुर्गन्ध आती है तो तेजपात का चूर्ण पावडर की तरह बगलों में लगाया करें। 
          • अगर अचानक आँखों कि रोशनी कुछ कम होने लगी है तो तेजपात के बारीक चूर्ण को सुरमे की तरह आँखों में लगाएं। इससे आँखों की सफाई हो जायेगी और नसों में ताजगी आ जायेगी जिससे आपकी दृष्टि तेज हो जायेगी। इस प्रयोग को लगातार करने से चश्मा भी उतर सकता है। 
          • पेट में गैस की वजह से तकलीफ महसूस हो रही हो तो ३-४ चुटकी या ४ मिली ग्राम तेजपात का चूर्ण पानी से निगल लीजिए। एसीडिटी की तकलीफ में इसका लगातार सेवन बहुत फायदा करता है और पेट को आराम मिलता है। 
          • तेजपात का अपने भोजन में लगातार प्रयोग कीजिए ,आपका ह्रदय मजबूत बना रहेगा ,कभी हृदय रोग नहीं होंगे। 
          • पागलपन के लिए ...एक एक ग्राम तेजपात का चूर्ण सुबह शाम रोगी को पानी या शहद से खिलाएं।या तेजपात के चूर्ण का हलुआ बनाकर खिलाएं। सूजी के हलवे में एक चम्मच तेजपात का चूर्ण डाल दीजिए। बन गया हलवा। 
          • तेजपात के टुकड़ों को जीभ के नीचे रखा रहने दें ,चूसते रहे। एक माह में हकलाना खत्म हो जाएगा। 
          • दिन में चार बार चाय में तेजपत्ता उबाल कर पीजिए ,जुकाम-जनित सभी कष्टों में आराम मिलेगा। या चाय में चायपत्ती की जगह तेजपत्ता डालिए। खूब उबालिए ,फिर दूध और चीनी डालिए। 
          • पेट की किसी भी बीमारी में तेजपत्ते का काढा बनाकर पीजिए। दस्त, आँतों के घाव, भूख न लगना सभी में आराम मिलेगा। 
          • . तेजपात के 5 पत्तों को पानी में उबालें और उस पानी से सिर की मालिश और बादमे नहा लें एैसा करने से बाल मजबूत तो बनते हैं साथ ही सिर में जुएं भी नहीं होते

          Monday, March 21, 2016

          पानी पीने के फायदे,Health Benefits Of Drinking Water in Hindi,

          स्वस्थ शरीर के लिए एक दिन में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए। जो लोग पानी कम पीते हैं उन्हें कई तरह की बीमारियां हो सकती है।इसलिए ध्यान रखें कि आपका आधा पेट भोजन से एक चौथाई भाग पानी से और शेष 25 फीसदी भाग हवा से भरा होना चाहिए।पानी हमारे जीवन और सही स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। इसलिए पानी पीते समय यदि राजीव जी के कुछ बातों को ध्यान रखें तो बीमारियां आपसे दूर ही रहेंगी।

          • विषैले तत्व करे बाहर 

          भरपूर मात्रा में पानी पीने से, शरीर में मौजूद हानिकारक एवं विषैले तत्व पसीने व मूत्र द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं। जिससे विषाणुओं से बचाव होता है, बीमारियां नहीं होती। सुबह के वक्त खाली पेट पानी पीने से शरीर की बेहतर सफाई होती है।

          • पेट संबंधी समस्या

          सुबह उठकर खाली पेट पानी पीने से पेट की सारी समस्याएं खत्म हो जाती हैं।इससे कब्ज में राहत मिलती है, आंतों में जमा मल निकलने में आसानी होती है, जिससे पेट पूरी तरह से साफ होता है, और भूख भी खुलती है।

          • तनाव से राहत

          सुबह खाली पेट एवं दिनभर पानी पीते रहने से तनाव नहीं होता, और मानसिक समस्याएं भी ठीक हो जाती हैं। जब आप सोकर उठते हैं, तो दिमाग शांत होता है। ऐसे समय पानी पीना दिमाग को ऑक्सीजन प्रदान कर, उसे तरोजाता बनाए रखता है, जिससे दिमाग सक्रिय रहता है।

          • वजन कम करे

          सुबह के वक्त एकदम ठंडा पानी पीने से आपका मेटाबॉलिज्म 24 प्रतिशत तक बढ़ता है, जिससे वजन आसानी से कम होता है, वहीं गरम पानी पीने से भी अतिरिक्त चर्बी कम होती है, और आपका वजन कम हो जाता है।

          • पेशाब संबंधी समस्याएं

          सुबह खाली पेट पिया जाने वाला पानी, रातभर शरीर में बने हानिकारक तत्वों को एक ही बार में पेशाब के जरिए निकालने का काम करता है, इसके साथ ही समय-समय पर भरपूर मात्र में पानी पीते रहने पर, पेशाब में जलन, यूरि‍न इंफेक्शन एवं अन्य समस्याएं समाप्त हो जाती है।

          • त्वचा बने स्वस्थ

           खाली पेट पानी पीने से कोशिकाओं को ऑक्सीजन मिलती है, और वे सक्रिय रहती हैं, जिससे त्वचा पर ताजगी बनी रहती है। इसके साथ ही पसीने द्वारा हानिकारक तत्व शरीर से बाहर निकलने पर, त्वचा अंदर से साफ होती है और उसमें नमी बनी रहती है, जिससे त्वचा स्वस्थ व चमकदार दिखाई देती है।

          • शरीर का तापमान

          खाली पेट पानी पीने से दिन की शुरूआत से ही आपके शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है, जिससे छोटी- छोटी बीमारियों से शरीर सुरक्षित रहता है।

          • रोग प्रतिरोधक क्षमता

          पानी शरीर में अवांछित तत्वों को रहने नहीं देता, और शरीर के सभी अंगों को स्वस्थ बनाए रखता है। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है

          • नई कोशि‍का

          पानी रक्त में हानिकारक तत्वों को घुलने नहीं देता, और उसके शुद्धि‍करण में सहायक होता है, जिससे नई कोशि‍काओं और मांसपेशि‍यों के बनने की प्रक्रिया बढ़ जाती है । नमी बनाए रखे- सुगमता से कार्य करने के लिए शरीर के अंगों में नमी को होना बेहद आवश्यक है, जिसे बनाए रखने का कार्य पानी करता है। इसलिए दिन की शुरूआत में ही खाली पेट पानी पीना बेहतर होता है, ताकि पूरा दिन शरीर के सभी अंग सुगमता से कार्य कर सकें

          • सुबह उठते ही पिएं 1 से 2 गिलास पानी

          सुबह उठते ही 1 से 2 गिलास पानी पिएं। इससे शरीर से सारी गंदगी बाहर निकल जाती है। त्वचा ओर पेट दोनों ही स्वस्थ बने रहते हैं।
          • खाना खाने के आधे घंटे पहले पिएं 1 गिलास पानी
          खाना खाने से पहले यदि आप पानी पिएंगे तो आप भूख से कम खाएंगे। जिससे मोटापा नहीं बढ़ेगा और साथ ही आपकी आंते भी ठीक से काम करेंगी।

          • खाना खाने के तुरंत बाद या पहले पानी ना पिएं

          खाना खाने के एक घंटे बाद ही पानी पिएं, क्याेंकि उससे पहले पानी पीने पर पेट में खाना पचाने वाला जूस अपना प्रभाव नहीं दिखा पता और पाचन संबंधित दिक्कते हाे जाती हैं। यदि आप खाना खाने के तुरंत पहले या बाद में पानी पिएंगे तो खाना जल्‍दी हजम नहीं होगा।

          • पानी की जगह दही, छाछ या रायता आदि का सेवन करें

          अगर आप को खाना खाते वक्‍त भूख लगे तो पानी की जगह दही या रायता लें। इससे आपके शरीर को ठंडक मिलेगी और खाना भी आराम से हजम होगा।

          • भूख लगने पर पानी पिएं

          यदि भूख लगे तो सबसे पहले पानी पिएं और फिर 10 मिनट का इंतजार करें। फिर भी अगर भूख ना मिटे तो कुछ खाएं। ऐसा करने से आप बेकार का स्‍नैक खाने से बचेंगे।

          • थकान लगने पर पानी पिएं

          हमारा दिमाग 75% पानी से भरा हुआ है। अगर आप थकान लगने पर पानी पिएंगे तो आपका दिमाग अच्‍छे से काम करेगा और आपका मन काम में भी पूरी तरह लगेगा।

          • दिन के शुरुआत में ढेर सारा पानी पिएं

          दिनभर ढेर सारा पानी पीना चाहिए और जैसे जैसे शाम होने लगे, पानी का सेवन कम कर देना चाहिए, जिससे रातभर बाथरूम की ओर ना भागना पडे़।

          • नहाने से पहले पानी पिएं

          नहाने से पहले पानी पीने से ब्‍लड प्रेशर कम करने में सहायता मिलती है। यदि गर्म पानी का शॉवर ले रहे हों तो नहाने से पहले ठंडा पानी पीने से बचें।

          • एक्‍सरसाइज के पहले और आखिर में पानी पिएं

          यह बहुत जरूरी है कि जब भी आप एक्‍सरसाइज करें तो उससे पहले पानी पी लें, जिससे आपकी मांसपेशियों को एनर्जी मिल सके। पानी पीने से थकान कम लगती है। यदि आप पानी नहीं पिएंगे तो आप जल्‍द ही थक जाएंगे।

          • बीमारी, प्रेगनेंसी या स्‍तनपान करते वक्‍त पानी पिएं

          यदि आप बीमार है तो पानी पीने से आपकी बॉडी जल्‍द ही रिपेयर हो जाएगी। प्रेगनेंट और स्‍तनपान करवाने वाली महिलाओं को आम दिनों के मुकाबले अधिक पानी की आवश्‍यकता होती है। इन्‍हें हर दिन 10 गिलास पानी पीने की सलाह दी जाती है।

          • खड़े होकर न पिएं पानी

          मान्यता है कि खड़े होकर पानी पीने से एक उम्र के बाद घुटनाें का दर्द परेशान करने लगता है। इसलिए ऐसे पानी पीने से बचना चाहिए।

          • बाहर के पानी से बचें

          बाहर का पानी पीने से यथा संभव बचें। अशुद्ध पानी से लीवर और गुर्दों के रोग हो सकते हैं।इन दोनों में इंफेक्शन हुआ तो इसका असर दिल पर भी पड़ता है।

          Tuesday, March 15, 2016

          लीवर की परेशानी का आयुर्वेदिक इलाज Liver Problems In Hindi,



          आज कल चारो और लीवर के मरीज हैं, किसी को पीलिया हैं, किसी का लीवर सूजा हुआ हैं, किसी का फैटी हैं, और डॉक्टर बस नियमित दवाओ पर चला देते हैं मरीज को, मगर आराम किसी को मुश्किल से ही आते देखा हैं लीवर हमारे शरीर का सबसे मुख्‍य अंग है, यदि आपका लीवर ठीक प्रकार से कार्य नहीं कर पा रहा है तो समझिये कि खतरे की घंटी बज चुकी है। लीवर की खराबी के लक्षणों को अनदेखा करना बड़ा ही मुश्‍किल है और फिर भी हम उसे जाने अंजाने अनदेखा कर ही देते हैं।

          लीवर खराब होने के मुख्य कारण,The main reason for liver failure

          लीवर की खराबी होने का कारण ज्‍यादा तेल खाना, ज्‍यादा शराब पीना और कई अन्‍य कारणों के बारे में तो हम जानते ही हैं। हालाकि लीवर की खराबी का कारण कई लोग जानते हैं पर लीवर जब खराब होना शुरु होता है

          तब हमारे शरीर में क्‍या क्‍या बदलाव पैदा होते हैं यानी की लक्षण क्‍या हैं, इसके बारे में कोई नहीं जानता। वे लोग जो सोचते हैं कि वे शराब नहीं पीते तो उनका लीवर कभी खराब नहीं हो सकता तो वे बिल्‍कुल गलत हैं।

          आप जानते हैं कि मुंह से गंदी बदबू आना भी लीवर की खराबी हो सकती है। हम आपको कुछ परीक्षण बताएंगे जिससे आप पता लगा सकते हैं कि क्‍या आपका लीवर वाकई में खराब है। कोई भी बीमारी कभी भी चेतावनी का संकेत दिये बगैर नहीं आती, इसलिये आप सावधान रहें।

          मुंह से बदबू यदि लीवर सही से कार्य नही कर रहा है तो आपके मुंह से गंदी बदबू आएगी। ऐसा इसलिये होता है क्‍योकि मुंह में अमोनिया ज्‍याद रिसता है। लीवर खराब होने का एक और संकेत है कि स्‍किन क्षतिग्रस्‍त होने लगेगी और उस पर थकान दिखाई पडने लगेगी। आंखों के नीचे की स्‍किन बहुत ही नाजुक होती है जिस पर आपकी हेल्‍थ का असर साफ दिखाई पड़ता है।

          पाचन तंत्र में खराबी यदि आपके लीवर पर वसा जमा हुआ है और या फिर वह बड़ा हो गया है, तो फिर आपको पानी भी नहीं हजम होगा। त्‍वचा पर सफेद धब्‍बे यदि आपकी त्‍वचा का रंग उड गया है और उस पर सफेद रंग के धब्‍बे पड़ने लगे हैं तो इसे हम लीवर स्‍पॉट के नाम से बुलाएंगे।

          यदि आपकी पेशाब या मल हर रोज़ गहरे रंग का आने लगे तो लीवर गड़बड़ है। यदि ऐसा केवल एक बार होता है तो यह केवल पानी की कमी की वजह से हो सकता है। यदि आपके आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगे और नाखून पीले दिखने लगे तो आपको जौन्‍डिस हो सकता है। इसका यह मतलब होता है कि आपका लीवर संक्रमित है।

          लीवर एक एंजाइम पैदा करता है जिसका नाम होता है बाइल जो कि स्‍वाद में बहुत खराब लगता है। यदि आपके मुंह में कडुआहर लगे तो इसका मतलब है कि आपके मुंह तब बाइल पहुंच रहा है। जब लीवर बड़ा हो जाता है तो पेट में सूजन आ जाती है, जिसको हम अक्‍सर मोटापा समझने की भूल कर बैठते हैं।

          मानव पाचन तंत्र में लीवर एक म‍हत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है। विभिन्‍न अंगों के कार्यों जिसमें भोजन चयापचय, ऊर्जा भंडारण, विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलना, डिटॉक्सीफिकेशन, प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन और रसायनों का उत्‍पादन शामिल हैं। लेकिन कई चीजें जैसे वायरस, दवाएं, आनुवांशिक रोग और शराब लिवर को नुकसान पहुंचाने लगती है। लेकिन यहां दिये उपायों को अपनाकर आप अपने लीवर को मजबूत और बीमारियों से दूर रख सकते हैं।

          लीवर की परेशानी ये घरेलू कुछ उपाय ,Home Remedies for liver problems

          ► हल्‍दी लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य में सुधार करने के लिए अत्‍यंत उपयोगी होती है। इसमें एंटीसेप्टिक गुण मौजूद होते है और एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करती है। हल्दी की रोगनिरोधन क्षमता हैपेटाइटिस बी व सी का कारण बनने वाले वायरस को बढ़ने से रोकती है। इसलिए हल्‍दी को अपने खाने में शामिल करें या रात को सोने से पहले एक गिलास दूध में थोड़ी सी हल्दी मिलाकर पिएं► सेब का सिरका लीवर में मौजूद विषैले पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। भोजन से पहले सेब के सिरके को पीने से शरीर की चर्बी घटती है। सेब के सिरके को आप कई तरीके से इस्‍तेमाल कर सकते हैं- एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका मिलाएं, या इस मिश्रण में एक चम्मच शहद मिलाएं। इस म‍िश्रण को दिन में दो से तीन बार लें।

          ►आंवला विटामिन सी के सबसे संपन्न स्रोतों में से एक है और इसका सेवन लीवर की कार्यशीलता को बनाये रखने में मदद करता है। अध्ययनों ने साबित किया है कि आंवला में लीवर को सुरक्षित रखने वाले सभी तत्व मौजूद हैं। लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य के लिए आपको दिन में 4-5 कच्चे आंवले खाने चाहिए.

          ► पपीता लीवर की बीमारियों के लिए सबसे सुरक्षित प्राकृतिक उपचार में से एक है, विशेष रूप से लीवर सिरोसिस के लिए। हर रोज दो चम्मच पपीता के रस में आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर पिएं। इस बीमारी से पूरी तरह निजात पाने के लिए इस मिश्रण का सेवन तीन से चार सप्ताहों के लिए करें.


          ►सिंहपर्णी जड़ की चाय लीवर
          Choudhary: सिंहपर्णी जड़ की चाय लीवर के स्‍वास्‍थ्‍य को बढ़ावा देने वाले उपचारों में से एक है। अधिक लाभ पाने के लिए इस चाय को दिन में दो बार पिएं। आप चाहें तो जड़ को पानी में उबाल कर, पानी को छान कर पी सकते हैं। सिंहपर्णी की जड़ का पाउडर बड़ी आसानी से मिल जाएगा।


          ►लीवर की बीमारियों के इलाज के लिए मुलेठी का इस्‍तेमाल कई आयुर्वेदिक औषधियों में किया जाता है। इसके इस्‍तेमाल के लिए मुलेठी की जड़ का पाउडर बनाकर इसे उबलते पानी में डालें। फिर ठंड़ा होने पर छान लें। इस चाय रुपी पानी को दिन में एक या दो बार पिएं।

          ►फीटकोंस्टीटूएंट्स की उपस्थिति के कारण, अलसी के बीज हार्मोंन को ब्‍लड में घूमने से रोकता है और लीवर के तनाव को कम करता है। टोस्‍ट पर, सलाद में या अनाज के साथ अलसी के बीज को पीसकर इस्‍तेमाल करने से लिवर के रोगों को दूर रखने में मदद करता है

          ►एवोकैडो और अखरोट को अपने आहार में शामिल कर आप लीवर की बीमारियों के आक्रमण से बच सकते हैं। एवोकैडो और अखरोट में मौजूद ग्लुटथायन, लिवर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर इसकी सफाई करता है।

          ► पालक और गाजर का रस का मिश्रण लीवर सिरोसिस के लिए काफी लाभदायक घरेलू उपाय है। पालक का रस और गाजर के रस को बराबर भाग में मिलाकर पिएं। लीवर की मरम्मत के लिए इस प्राकृतिक रस को रोजाना कम से कम एक बार जरूर पिएं

          ►सेब और पत्तेदार सब्जियों में मौजूद पेक्टिन पाचन तंत्र में उपस्थित विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर लीवर की रक्षा करता है। इसके अलावा, हरी सब्जियां पित्त के प्रवाह को बढ़ाती हैं।

          ►एक पौधा और है जो अपने आप उग आता है , जिसकी पत्तियां आंवले जैसी होती है. इन्ही पत्तियों के नीचे की ओर छोटे छोटे फुल आते है जो बाद में छोटे छोटे आंवलों में बदल जाते है . इसे भुई आंवला कहते है. इस पौधे को भूमि आंवला या भू- धात्री भी कहा जाता है .

          ►यह पौधा लीवर के लिए बहुत उपयोगी है.इसका सम्पूर्ण भाग , जड़ समेत इस्तेमाल किया जा सकता है.तथा कई बाज़ीगर भुई आंवला के पत्ते चबाकर लोहे के ब्लेड तक को चबा जाते हैं . ये यकृत ( लीवर ) की यह सबसे अधिक प्रमाणिक औषधि है

          Wednesday, March 2, 2016

          Dry Fruits के स्वास्थ्य लाभ,Healthy Eating Tips,Health Benefits of Dry Fruits

          Dry Fruits के स्वास्थ्य लाभ Health Benefits of Dry Fruits,Healthy Eating Tips,
          • अखरोट की रचना सिर की तरह होती है तथा उसके अंदर भरा हुआ गूदा मस्तिष्क की तरह होता है। यही गूदा पर्याप्त मात्रा में नियमित सेवन करने से सिर संबंधी समस्याओं पर कंट्रोल होता है तथा मस्तिष्क की कार्य क्षमता एवं क्रिया प्रणाली में पॉजीटिव प्रभाव नजर आने लगता है।
          • पिस्ता आँख की भाँति दिखाई देता है। पिस्ते के अंदर का खाया जाने वाला हरे रंग का हिस्सा आँख के लिए परम लाभदायक होता है, इसलिए नेत्रों के लिए परम लाभदायक होता है। नेत्र लाभ के लिए कुछ मात्रा में पिस्ते का सेवन हमें करना चाहिए या यूँ कहें कि नेत्र रोगों के इलाज में पिस्ता आपकी सहायता कर सकता है।
          • काजू में मैग्नीशियम पाया जाता हैं जो रक्तचाप कम करने में और दिल के दौरे को रोकने में मदद करता है।काजू एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत हैं जो हृदय रोग और कैंसर से बचाता हैं।काजू खाने से शरीर की हड्डियाँ मजबूत होती हैं काजू में कॉपर अधिक मात्रा में पाया जाता हैं जो शरीर के हड्डियों और जोड़ो को लचीला बनाने में मदद करता हैं और त्वचा और बालों को रंग प्रदान करता हैं। काजू में वसा अच्छी मात्रा में पाया जाता हैं। फिर भी ये वजन को नियंत्रित करने में मदद करते हैं|
          • किशमिश या अंगूर की रचना पित्ताशय (गाल ब्लैडर) से बहुत कुछ 'मैच' करती है, इसीलिए पित्ताशय को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए किशमिश या अंगूर का सेवन लाभदायक हो सकता है।
          • बादाम का आकार जहाँ एक ओर नेत्रों की तरह होता है, वहीं दूसरी ओर उसकी समानता मस्तिष्क से भी की जा सकती है। बादाम का नियमित सेवन नेत्र तथा मस्तिष्क दोनों ही के लिए परम प्रभावी होता है।
          • अनार के दानों का रंग रक्त के समान होने से अनारदानों का रस रक्त शोधक (खून की सफाई करने वाला) एवं रक्तर्द्धक (खून बढ़ाने वाला) होता है।
          • सेवफल का आकार और रंग भी बहुत कुछ हृदय के समान होता है, इसलिए सेवफल का नियमित सेवन हृदय के लिए विशेष लाभदायक होता है।
          •  गिलकी या घिया और तोरई आँत के एक भाग की तरह दिखाई देती है, इसलिए आँत की क्रिया प्रणाली को व्यवस्थित करने में इसका जवाब नहीं इनमें 'रफेज' की मात्रा भी बहुत है।
          • लम्बी-पतली ककड़ी तो मानो आँत ही हो। इसका सेवन कब्ज दूर करता है और आँत क्रिया प्रणाली को नियमित करता है। ऐसे अनेक प्राकृतिक संकेत या संदेश वनस्पतिज पदार्थों में छिपे हुए हैं, जिनको समझकर स्वास्थ्य लाभ उठाया जा सकता है।
          • छुहारा पुरुषों की कमजोरी दूर करता है अगर आप कमजोरी या नपुंसकता से परेशान हैं तो तीन महीने तक छुहारे का सेवन आपको समस्या से मुक्ति दिला देगा। इसे रोज सुबह खाली पेट खाएं। पहले सप्ताह एक छुहारा व दूसरे सप्ताह से दो सप्ताह तक दो छुआरा खूब चबा-चबाकर खाएं। तीसरे सप्ताह में तीन छुहारे खाएं और चौथे सप्ताह से 12वें सप्ताह तक चार-चार छुहारों का रोज सेवन करें। इस समस्या से मुक्ति मिल जाएगी।
          • छुहारे का नियमित सेवन करने से दिल से संबंधित रोग नहीं होते हैं। साथ ही इसे खाने से खून की कमी की समस्या दूर होती है।
          • छुहारे बहुत अल्प मात्रा में फेट व कोलेस्ट्रॉल से युक्त होने के कारण मोटे व्यक्तियों सहित रक्तचाप पीडि़त रोगियों के लिए भी सुरक्षित होते है। नियमित दो या चार छुहारे का सेवन कब्ज की समस्या को दूर करता है।
          • सर्दियों में छुहारे का सेवन बहुत लाभदायक होता है। इसके नियमित सेवन से आमाशय को बल मिलता है।

          Sunday, February 21, 2016

          पेशाब में जलन का उपाय,Home Remedies Dysuria Treatment in Hindi,

          पेशाब में जलन का घरेलू उपचार-Urine Problem Treatment in Hindi,urinary tract infection remedies,Urine Infection Treatment in Ayurveda


          मूत्राषय में रोग-जीवाणुओं का संक्रमण होने से मूत्राषय प्रदाह रोग उत्पन्न होता है। निम्न मूत्र पथ के अन्य अंगों किडनी, यूरेटर और प्रोस्टेट ग्रंथि और योनि में भी संक्रमण का असर देखने में आता है। इस रोग के कई कष्टदायी लक्छण होते हैं जैसे-तीव्र गंध वाला पेशाब होना,पेशाब का रंग बदल जाना, मूत्र त्यागने में जलन और दर्द अनुभव होना, कमजोरी मेहसूस होना,पेट में पीडा और शरीर में बुखार की हरारत रहना। हर समय

          मूत्र त्यागने की ईच्छा बनी रहती है। मूत्र पथ में जलन बनी रहती है। मूत्राषय में सूजन आ जाती है। यह रोग पुरुषों की तुलना में स्त्रियों में ज्यादा देखने में आता है। इसका कारण यह है कि स्त्रियों की पेशाब नली (दो इंच) के बजाय पुरुषों की मूत्र नलिका ७ इंच लंबाई की होती है। छोटी नलिका से होकर संक्रमण सरलता से मूत्राषय को आक्रांत कर लेता है। गर्भवती स्त्रियां और सेक्स-सक्रिय औरतों में मूत्राषय प्रदाह रोग अधिक

          पाया जाता है। रितु निवृत्त महिलाओं में भी यह रोग अधिक होता है। इस रोग में मूत्र खुलकर नहीं होता है और जलन की वजह से रोगी पूरा पेशाब नहीं कर पाता है और मूत्राषय में पेशाब बाकी रह जाता है। इस शेष

          रहे मूत्र में जीवाणुओं का संचार होकर रोगी की स्थिति ज्यादा खराब हो सकती है। आधुनिक चिकित्सक एन्टीबायोटिक दवाओं से इस रोग को काबू में करते हैं लेकिन कुदरती पदार्थॊं के उपचार भी इस रोग में हितकारी साबित होते है।

          पेशाब में जलन का उपाय,Treatment For Burning Urine.Urine Infection Treatment in Ayurveda

          • खीरा ककडी का रस इस रोग में अति लाभदायक है। २०० मिलि ककडी के रस में एक बडा चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच शहद मिलाकर हर तीन घंटे के फ़ासले से पीते रहें। 
          • पानी और अन्य तरल पदार्थ प्रचुर मात्रा में प्रयोग करें। प्रत्येक १० -१५ मिनिट के अंतर पर एक गिलास पानी या फ़लों का रस पीयें। सिस्टाइटिज नियंत्रण का यह रामबाण उपचार है। 
          • मूली के पत्तों का रस लाभदायक है। १०० मिलि रस दिन में ३ बार प्रयोग करें। 
          • नींबू का रस इस रोग में उपयोगी है। वैसे तो नींबू स्वाद में खट्टा होता है लेकिन गुण क्षारीय हैं। नींबू का रस मूत्राषय में उपस्थित जीवाणुओं को नष्ट करने में सहायक होता है। मूत्र में रक्त आने की स्थिति में भी लाभ होता है। 
          • पालक रस १२५ मिलि में नारियल का पानी मिलाकर पीयें। तुरंत फ़ायदा होगा। पेशाब में जलन मिटेगी। 
          • पानी में मीठा सोडा यानी सोडा बाईकार्ब मिलाकर पीने से तुरंत लाभ प्रतीत होता है लेकिन इससे रोग नष्ट नहीं होता। लगातार लेने से स्थिति ज्यादा बिगड सकती है। 
          • गरम पानी से स्नान करना चाहिये। पेट और नीचे के हिस्से में गरम पानी की बोतल से सेक करना चाहिये। गरम पानी के टब में बैठना लाभदायक है। 
          • मूत्राषय प्रदाह रोग की शुरुआत में तमाम गाढे भोजन बंद कर देना चाहिये।दो दिवस का उपवास करें। उपवास के दौरान पर्याप्त मात्रा में तरल,पानी,दूध लेते रहें। 
          • विटामिन सी (एस्कार्बिक एसिड) ५०० एम जी दिन में ३ बार लेते रहें। मूत्राषय प्रदाह निवारण में उपयोगी है। 
          • ताजा भिंडी लें। बारीक काटॆं। दो गुने जल में उबालें। छानकर यह काढा दिन में दो बार पीने से मूत्राषय प्रदाह की वजह से होने वाले पेट दर्द में राहत मिल जाती है। 
          • आधा गिलास मट्ठा में आधा गिलास जौ का मांड मिलाएं इसमें नींबू का रस ५ मिलि मिलाएं और पी जाएं। इससे मूत्र-पथ के रोग नष्ट होते है। 
          • आधा गिलास गाजर का रस में इतना ही पानी मिलाकर पीने से मूत्र की जलन दूर होती है। दिन में दो बार प्रयोग कर सकते हैं।
          • Treatment for Burning Urine,

          Saturday, February 20, 2016

          इलायची के फायदे-Health Benefits of Cardamom in Hindi,

          मरीज का लीवर और किडनी स्वच्छ हो तो उसका स्वास्थ भी उत्तम होता है। छोटी इलायची के बड़े फायदे.घर में आम तौर पर ऐसी कई सारी चीजें होती है जिन्हें हम रोजाना मुखवास या मसालों के रूप में उपयोग करते हैं, लेकिन वे मसाले अन्य कई तरह से हमारे लिए उपयोगी एवं लाभकारी होते हैं,

          जिनकी हमें जानकारी ही नहीं होती .... ऐसी ही एक बेशकीमती चीज है इलायची ... जी हां आमतौर पर हम लोग इलायची को केवल मुखवास या मसालों की तरह उपयोग में लाते हैं, लेकिन इसके अलावा भी इलायची के कुछ फायदे हैं... जिस तरह से तुलसी को जडी बूटियों और औषधि‍यों में सबसे श्रेष्ठ माना गया है, उसी तरह इलायची को मसालों में सर्वोपरि माना जाता है ...लेकिन आखि‍र कौन से गुणों के कारण इसे मसालों की रानी कहा जाता है

          आइए जानते हैं- इलायची में प्राक़तिक रूप से वाष्पशील तेल मौजूद होता है, जो रोगाणु विरोधी होता है और दर्द के निवारण में सहायक होता है इलायची, एनोरेक्सिया और अस्थमा जैसी सांस से संबंधि‍त अन्य समस्याओं के लिए काफी फायदेमंद है। इलायची, पाचन तंत्र को उत्तेजित करती है, जिससे अम्ल बढ़ने के कारण पेट फूलने जैसी समस्याओं में लाभ होता है, और इलायची पाचन तंत्र की समस्त गतिविाधि‍यों को मजबूत करती है, जिससे भूख भी बढ़ती है।

          1- सीने में जलन के लिए उपयोगी 

          सीने में जलन होने एवं गैस से संबंधित समस्याएं होने पर भी इलायची बेहद लाभदायक होती है। इलायची में पाए जाने वाले अनुत्तेजक तत्व, शरीर के विभिन्न अंगों एवं जोड़ों में अकड़न की समस्या को भी दूर करते हैं। इसके अलावा प्रतिदिन इलायची का सेवन, कई तरह की बीमारियों से शरीर की रक्षा करने में सहायक होता है। नपुंसकता दूर भगाए रोज इलायची खाएं...

          हमारे देश की जैव विविधता दुनिया के किसी भी दूसरे देश से कहीं ज्यादा है। देश में जितनी किस्म की जड़ी बूटियां और मसाले पैदा होते हैं उतने कहीं और नहीं होते। भारतीय भोजन शैली में मसालों को चटपटेपन के लिए नहीं बल्कि उनके चिकित्सकीय फायदों के कारण डाला जाता है।

          कई मसाले ऐसे हैं जिनके फायदे तो हम भूल चुके है लेकिन उनका इस्तेमाल हो रहा है। अमृत जड़ी बूटी सीरीज में पढ़िए ऐसे ही मसालों से जुड़ी रोचक एवं ज्ञानवर्धक जानकारी- हरी इलायची को हम केवल मुंह साफ करने वाले मसाले के तौर पर जानते हैं। हमारी रसोई में यह हमेशा विद्यमान रहती है। इसके कुछ फायदों के बारे में भले ही हमें जानकारी हो लेकिन क्या हम जानते हैं कि दूध और इलायची के संयोग से एक सशक्त वाजीकरण नुस्खा तैयार होता है।

            2- मुंह की बदबू के लिए उपयोगी

           मुंह की बदबू होती है दूर : सभी जानते हैं कि इलायची खाने से मुंह की बदबू दूर होती है लेकिन क्या यह सोचा है कि मुंह से बदबू क्यों आती है। दरअसल पेट खराब होने के कारण मुंह से बदबू आने लगती है। हरी इलायची खाने से पेट का हाजमा ठीक होता है साथ ही इसमें मौजूद एक ताकतवर एंटीबैक्टेरियल रसायन की वजह से मुंह की बदबू भी खत्म होतीहै

           यह समस्या को जड़ से निकालने में मदद करती है। इसका नियमित सेवन करने के लिए कोई टिप की आवश्यकता नहीं है, हर बार भोजन के बाद इलायची खाना शुरु कर दें। इसके अलावा सुबह उठते ही केवल इलायची की चाय यानी इलायची को पानी में उबालकर एक कप पिएं। इससे आपका हाजमा ठीक हो जाएगा। सेक्स लाइफ को बढ़ाती है

          3- नपुंसकता की समस्या के लिए उपयोगी

          इलायची : इलायची को वाजीकरण नुस्खे के तौर पर भी जाना जाता है। इलायची एक ऐसे टॉनिक के रूप में भी काम करती है जिससे सेक्स लाइफ में इजाफा होता है। यह शऱीर को ताकत प्रदान करने के साथ-साथ असमय स्खलित होने और नपुंसकता की समस्या से भी निजात दिलाने में सक्षम है।

           दूध में इलायची डालकर उबालें। खूब अच्छे से उबल जाए तो इसमे शहद मिलाएं और नियमित रूप से रात को सोते समय इसे पी लें। आप देखेंगे कि आपकी सेक्स लाइफ में आनंद के साथ दीर्घता भी शामिल हो गई है। हाजमा की प्रक्रिया दुरुस्त होती है : कभी यह सोचा है कि भोजन के बाद इलायची को सौंफ के साथ ही क्यों खाया जाता है?

          दरअसल इलायची में मौजूद तत्व हाजमें की प्रक्रिया को गति को तेज करने में सहायक होते हैं। इलायची पेट की अंदरूनी लाइनिंग की जलन को शांत करती है हृदयशोथ और उबकाइयां आने के एहसास को दबाती है। यह म्यूकस मैंब्रेन की दाह को शांत करने तथा उसे ठीक से काम करने के लिए प्रेरित करने के लिए जानी जाती है।

          4-ऐसिडिटी के लिए उपयोगी

          यह ऐसिडिटी के लक्षणों को भी कम करती है। आयुर्वेद में तो यह पेट के पानी और वहां मौजूद वायु को ठीक करने वाली मानी गई है। बदहजमी, पेट फूलना, गैसेस जैसी समस्या से निपटने के लिए हरी इलायची, खड़ा धनिया, लौंग,सुखी अदरक को मिलाकर पीस लें और गर्म पानी के साथ एक चम्मच लें।

           बदहजमी के कारण उठे सिरदर्द में हरी इलायची की चाय फायदा करती है। एसिडिटी से छुटकारा : क्या आप जानते हैं कि इलायची में तैल भी मौजूद होता है। इलायची में मौजूद इसेंशियल ऑयल पेट की अंदरुनी लाइनिंग को मजबूत करने में सहायक होता है।

           एसिडिटी में पेट में एसिड्स जमा हो जाते हैं। उससे पेट की लाइनिंग क्षतिग्रस्त हो सकती है। इलायची मुंह में लेते ही लार अधिक मात्रा में बनने लगती है इससे एसिडिटी का प्रभाव कम हो जाता है और इससे छुटकारा मिलता है। हर बार भोजन के बाद इलायची जरूर खाएं। भोजन करने के तत्काल बाद बैठने की बजाए इलायची मुंह में दबाकर सौ कदम चलें।

          5-अन्य उपयोग

          • आयुर्वेद में इसे शतपादवली चिकित्सा भी कहा जाता है। फेफड़ों की समस्या का निदान : हरी इलायची से फेफड़ों में रक्तसंचार तेज गति होने लगता है, इससे सांस लेने की समस्या जैसे अस्थमा, तेज जुकाम और खांसी जैसे रोगों के लक्षणों में कमी आती है।
          • आयुर्वेद में इलायची को गर्म तासीर का माना गया है जो शरीर को अंदर से गर्म करती है। इससे बलगम और कफ बाहर निकालकर छाती की जकड़न को कम करने में मदद मिलती है। यदि छाती में जुकाम की वजह से जकड़न हो गई हो और सांस लेना दूभर हो रहा हो तो इलायची का तेल की चंद बूंदें उबलते हुए पानी में डाल दें और इस पानी की भाप लें। भाप 15 मिनट से कम नहीं लेना चाहिए। बीच बीच में चेहरे से पानी पोंछते रहें लेकिन इस प्रक्रिया को अधबीच में ना छोड़ें। रक्तअल्पता को कम करती है
          • इलायची : इलायची में मौजूद है एक महत्वपूर्ण धातु यानी तांबा। इसके अलावा इसमें लौहांश, आवश्यक विटामिन्स जैसे राइबोफ्लाविन, विटामिन सी, और नियासिन भी मौजूद रहते हैं। इन सभी तत्वों को लाल रक्तकणों को उत्पन्न करने एवं बढ़ाने में महत्वपूर्ण माना जाता है। 
          • शरीर में रक्त की कमी के कारण पैदा हुए लक्षणों को कम करने में इलायची महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। रक्तअल्पता दूर करने के लिए इलायची पावडर को हल्दी के साथ गर्म दूध में डालकर लेना चाहिए। चाहें तो मिश्री अथवा गुड़ से मीठा भी कर सकते हैं। 
          • गुड़ में अधिक मात्रा में लोहा होता है जिससे रक्तअल्पता का ठीक तरह से मुकाबला किया जा सकता है। विषैले तत्वों को दूर करती है
          • इलायची : शरीर से विषैले तत्वों का निष्काषन करने में इलायची मदद करती है। यह फ्री रेडिकल्स का भी मुकाबला करती है। इलायची मैंगनीज नामक खनिज का भी एक बड़ा स्रोत है। मैंगनीज से ऐसे एंजाइम्स उत्पन्न होते हैं जो फ्री रेडिकल्स को खत्म करके खा जाते हैं।
          • इसमे विषैले तत्वों को शरीर से बाहर निकाल फेंकने की ताकत होती है जिससे शरीर कैंसर जैसे महारोगों से भी मुकाबला करने के लिए सक्षम हो जाता है। दिल की धड़कने की गति सुधरती है :
          • इलायची में पोटेशियम, कैल्शियम, मैग्नेशियम जैसे खनिज पदार्थ मौजूद हैं। साथ ही यह आवश्यक नमक की भी खान समझी जाती है। किसी भी इंसान के रक्त, शरीर में मौजूद तरल और ऊतकों का प्रमुख तत्व है पोटेशियम। इलायची के जरिए इसकी खूब आपूर्ति होती है। इसी से इंसान का रक्तचाप नियंत्रण में रहता है

          Pages