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Wednesday, December 21, 2016

राजमा खाने के फायदे,,Health Benefits of Red Kidney Beans in Hindi,

राजमा (Red Kidney Beans) खाने में स्वादिष्ट लगने के साथ ही यह सेहत का भी खजाना है। दिल और दिमाग की सेहत बनी रहने के अलावा राजमा (Red Kidney Beans) के सेवन से शरीर में ऊर्जा भी बनी रहती है। मस्तिष्क के लिए असरदार : राजमा खाने से दिमाग को बहुत फायदा होता है. इसमें पर्याप्त मात्रा में विटामिन ‘के’ पाया जाता है. जोकि नर्वस सिस्टम को बूस्ट करने का काम करता है. साथ ही ये विटामिन ‘बी’ का भी अच्छा स्त्रोत है, जोकि मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए बहुत जरूरी है. ये दिमाग को पोषित करने का काम करता है।

Red Kidney Beans Benefits in Hindi,

    • ताकत का स्रोत : राजमा में उच्च मात्रा में आयरन मौजूद होता है, जिस वजह से ये ताकत देने का काम करता है। शरीर के मेटाबॉलिज्म और ऊर्जा के लिए आयरन की जरूरत होती है, जो राजमा खाने से पूरी हो जाती है. साथ ही ये शरीर में ऑक्सीजन के सर्कुलेशन को भी बढ़ाता है।
    • मधुमेह के लिए लाभप्रद : बीन्स का ‘ग्लाइसेमिक इन्डेक्स’ कम होता है इसका अभिप्राय यह है कि जिस तरह से अन्य भोज्य पदार्थों से रक्त में शक्कर का स्तर बढ़ जाता है, बीन्स खाने के बाद ऐसा नहीं होता। बीन्स में मौजूद फाइबर रक्त में शक्कर का स्तर बनाए रखने में मदद करते हैं। और बीन्स की इस ख़ासियत की वजह से मधुमेह के रोगियों को बीन्स खाने की सलाह देते हैं।
    • ऐसे उदाहरण भी हैं कि बीन्स का ज़ूस शरीर में इन्सुलिन के उत्पादन को बढ़ावा देता है। इस वजह से जिन्हें मधुमेह है या मधुमेह का खतरा है उनके लिये बीन्स खाना बहुत लाभदायक है। बीन्स का ज़ूस उत्तेजक ( स्टिम्युलेंट) होता है इसकी इसी प्रकृति के कारण यह उन लोगों को बहुत फ़ायदा करता है जो लंबी बीमारी से जूझ रहे हैं या जो बीमारी पश्चात पूर्ण स्वास्थ्य लाभ चाहते हैं। बीन्स का 150 मिली ज़ूस हर रोज़ पीना आपके इस उद्देश्य को भली-भाँति पूरा कर देगा।
    • फ्रेंच बीन्स किडनी से संबंधित बीमारियों में भी काफी फ़ायदेमंद है। किडनी में पथरी की समस्या हो तब आप यह नुस्खा अपनाएँ। आप 60 ग्राम बीन्स की पौध लेकर इसे चार लीटर पानी में चार घंटे तक उबाल लें। फिर इसके पानी को कपड़े से छान लें और छने हुए पानी को करीब आठ घंटे तक ठंडा होने के लिए रख दें। अब इसे फिर से छान लें पर ध्यान रखें कि इस बार इस पानी को बिना हिलाए छानना है। इसे दिन में दो-दो घंटे से पीयें, यह नियम एक हफ्ते तक दोहराएँ। इसके परिणाम आशानुरूप मिलेंगे।
    • पाचन क्रिया में सहायक : राजमा में उच्च मात्रा में फाइबर होते हैं. जो पाचन क्रिया को सही बनाए रखते हैं। साथ ही ये ब्लड शुगर के स्तर को भी नियंत्रित रखने में मददगार होता है।
    • माइग्रेन की प्रॉब्लम खत्म करता है : इसमें मौजूद फोलेट की मात्रा दिमाग के काम करने की क्षमता को बढ़ाने के साथ ही उसे दुरुस्त भी रखती है। मैग्नीशियम की मात्रा माइग्रेन जैसी गंभीर समस्या में राहत दिलाती है। हफ्ते में एक बार इसका सेवन बहुत ही फायदेमंद होता है।
    • कैंसर से बचाव : राजमा में मौजूद मैंगनीज़, एंटी-ऑक्सीडेंट का काम करता है। यह फ्री रैडिकल्स को डैमेज होने से रोकता है। इसके साथ इसमें मौजूद विटामिन के की मात्रा सेल्स को बाहरी नुकसानदायक चीजों से बचाती है जो कैंसर का मुख्य कारण होते हैं।
    • कैलोरी की प्राप्ति : राजमा में जिस मात्रा में कैलोरी मौजूद होती है वो हर आयु वर्ग के लिए सही होती है। आप चाहें तो इसे करी के अलावा सलाद और सूप के रूप में भी ले सकते हैं। ऐसे लोग जो अपने वजन को नियंत्रित करना चाहते हैं उनके लिए लंच में राजमा का सलाद और सूप लेना फायदेमंद रहेगा।
    • नर्वस सिस्टम के लिए अच्छा : विटामिन के की पर्याप्त मात्रा ब्रेन के साथ ही नर्वस सिस्टम के लिए भी बहुत ही फायदेमंद होती है। राजमा में मौजूद थियामिन की मात्रा दिमाग की क्षमता बढ़ाती है। इससे अल्जाइमर जैसी बीमारी दूर रहती है और याददाश्त भी बढ़ती है।
    • शरीर की सफाई : राजमा खाने से शरीर के अंदर मौजूद गंदगी बाहर निकलती है, क्योंकि इसमें मॉलिबडेनम पाया जाता है जिसका काम बॉडी को डिटॉक्सीफाई करना है। साथ ही कई प्रकार की एलर्जी को दूर करने के साथ ही सिरदर्द जैसी समस्या को भी कम करता है।
    • फाइबर की उचित मात्रा : राजमा में उच्च मात्रा में फाइबर होते हैं। जो पाचन क्रिया को सही बनाए रखते हैं। साथ ही ये ब्लड शुगर के स्तर को भी नियंत्रित रखने में मददगार होता है।
    • इम्यून सिस्टम मज़बूत बनाएं : राजमा में सिर्फ फाइबर और प्रोटीन ही नहीं होता बल्कि काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स इम्यून सिस्टम को बढ़ाते हैं और फ्री रेडिकल्स से इसे मुक्त रखते हैं। ऐसा माना जाता है कि एंटीऑक्सीडेंट्स में एंटी-एजिंग तत्व भी पाए जाते हैं।
    • ब्लड शुगर में कण्ट्रोल : राजमा में घुलनशील फाइबर पाए जाते हैं, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा को कम करते हैं। राजमा प्रोटीन का भी बहुत अच्छा स्रोत होता है। ये दोनों ही मिलकर ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करते हैं।
    • कोलेस्ट्रॉल नियंत्रण : राजमा में उच्च मात्रा में मैग्नीशियम पाया जाता है। साथ ही ये कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी नियंत्रित करने का काम करता है। मैग्नीशियम की मात्रा दिल से जुड़ी बीमारियों से लड़ने में भी सहायक होती है।
    • हाइपरटेंशन कम करने में सहायक : राजमा पोटाशियम और मैग्नीशियम का अच्छा स्रोत है। साथ ही इसमें फाइबर और प्रोटीन भी पाया जाता है। ये सभी दिल की सेहत के लिए बहुत जरूरी पोषक तत्व माने जाते हैं। पोटाशियम और मैग्नीशियम रक्त वाहिकाओं में घुल जाते हैं जिससे कि ब्लड फ्लो आसान हो जाता है।
    • एनर्जी : आयरन की भरपूर मात्रा लिए राजमा बॉडी को एनर्जी भी प्रदान करती है। इसके अलावा मैंगनीज़ की मौजूदगी भी मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करके एनर्जी बढ़ाने का काम करती है।
    • हड्डियों की मजबूती के लिए : कमजोर हड्डियां ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का कारण होती हैं। मजबूत हड्डियों के लिए कैल्शियम और मैंगनीज़ की सबसे ज्यादा आवश्यकता होती है जिसे राजमा खाकर पूरा किया जा सकता है। इसके साथ ही राजमा में फोलेट की मौजूदगी होमोसिस्टीन लेवल को कंट्रोल करती है, जो हड्डियों के टूटने की मुख्य वजह है।
    • वजन घटाने में सहायक : वजन घटाने के तमाम प्रयासों से हार मान चुके हैं, तो हरी सब्जी बीन्स का सहारा लें। बीन्स से बने उत्पादों का सेवन करके आप अपना मोटापा घटा सकते हैं। बीन्स का इस्तेमाल आप किसी भी तरह कर सकते हैं। वजन नियंत्रित करना-बीन्स में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है, प्रति कप में 10 ग्राम। मोटे या आवश्यकता से अधिक वजन वाले लोग जो कम कैलोरी, उच्च प्रोटीन, उच्च फाइबर युक्त आहार लेते हैं, उनका वजन उन लोगों की तुलना में कम होता है जो नियमित तौर पर नियंत्रित मात्रा में कैलोरी, उच्च कार्बोहाइड्रेट और कम फैट वाला आहार लेते हैं।पोषक तत्त्वों से भरपूर-फल तथा सब्जियों की तरह बीन्स भी पोषक तत्त्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ है इसका अर्थ यह है कि इसमें शरीर की प्रक्रिया के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्त्व उपस्थित होते हैं तथा साथ ही साथ इसमें कैलोरी भी कम होती है। साथ ही साथ कॉपर आयरन के साथ मिलकर लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। इसके अलावा कॉपर रक्तप्रवाह, प्रतिरक्षा प्रणाली, तथा हड्डियों को स्वस्थ तथा संतुलित रखता है।
    • फास्फोरस तथा मैग्नीशियम शक्तिशाली हड्डियों के लिए आवश्यक हैं तथा मैग्नीशियम के साथ पौटेशियम रक्त के दबाव के स्तर को नियंत्रित रखता है।आपके पेट को भरा रखता है-इसमें प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होता है, जिसके कारण यह एक ऐसा स्नैक है जो आपके पेट को भरा रखता है जिससे आप खाने की और आकर्षित नहीं होते।

      Friday, December 16, 2016

      कद्दू का जूस पीने के फायदे Pumpkin Juice Benefits in Hindi,

      कद्दू का जूस पीने के फायदे Pumpkin Juice Benefits in Hindi,
      कद्दू का उत्पादन बहुत बड़ी मात्रा में किया जाता है तथा इसमें प्रचुर मात्रा में एंटीऑक्सीडेन्ट्स और विटामिन होते हैं। आपके आँगन में होने वाली इस सब्जी में कैलोरीज़ बहुत कम होती हैं तथा प्रचुर मात्रा में विटामिन ए, फ्लावोनोइड पॉली-फेंलोइक एंटीऑक्सीडेन्ट्स जैसे ल्यूटिन, क्सान्थिन और कैरोटीन होते हैं।

      सब्जी व फलों का निचोड़ रस कहलाता है। जिसे हम जूस कहते हैं। कद्दू का रस भी हमारे शरीर के लिए बेहद पोषक होता है। इसके रस के बहुत फायदे होते हैं। साधारण सा दिखने वाला कद्दू बेहद असाधारण कार्य करता है। कद्दू की सब्जी से ज्यादा फायदा हमें इसका जूस देता है। नियमित रूप से यदि आप इसका सेवन करते हो तो कभी भी शरीर को जानलेवा बीमारियां नहीं लगेगीं। क्योंकि कद्दू का रस शरीर को अंदर से इतना मजबूत बना देता है जिससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है। 

      बहुत सारे ऐसे ज्यूस हैं जो आमतौर पर प्रचलन में नहीं है क्योंकि उनके विषय में लोगों को कम जानकारी है इसी वजह से ये ज्यूस बाजार में भी उपलब्ध नहीं होते। इन्हीं ज्यूस में से एक है कद्दू का ज्यूस। इसके यह बेहद अनमोल फायदे आपको जरूर पता होने चाहिए 

      कद्दू का रस कैसे बनायें

      कद्दू का जूस बहु उपयोगी जूस है जिसका उपयोग कच्चे रूप के अलावा कई व्यंजनों में किया जाता है। अच्छे जूस के लिए अच्छे रंग के और मीठे कद्दू का चुनाव करें
      यदि आप जूस के स्वाद को बढ़ाना चाहते हैं तो इसमें कुछ मसाले जैसे पिसा हुआ जायफल, पिसी हुई दालचीनी, अदरक या सेब का जूस या नीबू भी मिला सकते हैं। हम आपको सलाह देंगे कि इन मसालों की बहुत थोड़ी मात्रा ही मिलाएं ताकि जूस का असली स्वाद बना रहे। बर्फ़ के साथ दिए जाने पर इसका ठंडक और ताजगी देने वाला गुण बढ़ता है।

       Pumpkin Juice Benefits in Hindi,

      • कद्दू का ज्यूस में किसी भी ज्यूस की तरह से बहुत सारी खूबियां होती है पर इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह विटामिन D का बढ़िया स्त्रोत है, जो आपको किसी अन्य जूस से नहीं मिलता। तो इसका मतलब यह हुआ कि आप बिना धूप में जाए भी अपने शरीर में विटामिन D की पूर्ति कर सकते हैं कद्दू का ज्यूस अपनाकर। कद्दू में विटामिन D के अलावा कापर, आयरन और फास्फोरस होते हैं। 
      • कद्दू के ज्यूस में विटामिन B1, B2, B6,C, E और बीटा केरोटिन भी भरपूर मात्रा में होते हैं। कार्बोहाइड्रेड्स और प्रोटीन भी कद्दू के ज्यूस में पाए जाते हैं। हर दिन करीब आधा कप कद्दू के ज्यूस की सलाह दी जाती है। 
      • कद्दू का ज्यूस लिवर और किडनी के लिए बहुत लाभकारी है। ऐसे लोग जिन्हें किडनी में पथरी की समस्या है उन्हें कद्दू का ज्यूस रोजाना दिन में तीन बार जरुर पीना चाहिए। 
      • कद्दू के ज्यूस में धमनियों को साफ रखने का गुण होता है जिससे दिल की बीमारियों और दिल का दौरा पड़ने का खतरा बहुत कम हो जाता है। कद्दू के ज्यूस में एंटी आक्सीडेंट्स काफी ज्यादा होते हैं जो शरीर को ऐरटेरी ओस्लेरोसिस बीमारी यानी धमनियों को कड़क होने से रोकने में बहुत कारगर है। 
      • कद्दू के ज्यूस का एक और चमत्कारी गुण है पाचन तंत्र के विषय में। यह न सिर्फ कब्ज को दुरुस्त करता है बल्कि दस्त होने पर भी बहुत लाभकारी है।
      • कद्दू का ज्यूस अल्सर और गैस को भी ठीक करता है। इसमें किडनी और युरिनरी सिस्टम को व्यवस्थित रखने का गुण होता है। 
      •  कद्दू के ज्यूस में एक खास किस्म का गुण होता है दिमाग को शांति देना। इसका यह गुण इनसोम्निया यानी नींद न आने की बीमारी में लाभ पहुंचाता है। इनसोम्निया के रोगियों को इसे शहद के साथ पीने की सलाह दी जाती है। 
      • कद्दू का ज्यूस हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करता है। इसमें पेक्टिन नाम का एक तत्व होता है जिसमें कोलेस्ट्रोल को कम करने का गुण होता है।
      • कद्दू के ज्यूस को शहद के साथ मिला कर पीने से शरीर को ठंडक का अहसास होता है और इस प्रकार यह शरीर के तापमान को कम करने में भी मदद करता है। 
      • कद्दू के ज्यूस में प्रेग्नेंट महिलाओं में होने वाली सुबह के समय की समस्याओं यानी मॉर्निंग सिक्नेस से छुटकारा दिलाने का भी गुण होता है। 
      • कद्दू के ज्यूस में विटामिन C और अन्य कई सारे मिनरल्स पाए जाते हैं जो शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने का काम करते हैं और इस तरह से शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाए रखते हैं। 
      • कद्दू के ज्यूस में बालों को फिर से उगाने का गुण होता है। इसमें विटामिन A की मात्रा काफी होती है जो सिर की त्वचा को बहुत फायदा पहुंचाती है। इसके अलावा इसमें पोटेशियम भी पाया जाता है जिससे नए बाल उग आते हैं।
      • जलने, चोट या सूजन के उपचार में सहायक: कद्दू के जूस में ठंडक प्रदान करने का गुण होता है जो जलने, फोड़े और सूजन तथा कीड़ों के काटने से होने वाली जलन से राहत दिलाता है। इसमें कई एंटीऑक्सीडेंट्स जैसे विटामिन ए, सी और ई तथा जिंक होते हैं जो इसे एक अच्छा हीलिंग एजेंट बनाते हैं।

      लौकी खाने के फायदे, Health Benefits Bottle Gourd in Hindi,

      कई जगहों पर लौकी को घीया के नाम से भी जाना जाता है. लौकी की सबसे अच्छी बात ये है कि ये बेहद आसानी से मिल जाती है. इसके अलावा लौकी में कई ऐसे गुण होते हैं जो कुछ गंभीर बीमारियों में औषधि की तरह काम करते हैं.

      आमतौर पर लोग लौकी खाने से बचते हैं. कुछ को इसका स्वाद पसंद नहीं होता है तो कुछ को ये पता ही नहीं होता है कि ये कितनी फायदे चीज है. अगर आपको भी ये लगता है कि लौकी खाने से कोई फायदा नहीं है तो आपको बता दें कि ऐसा नहीं है. लौकी एक बेहद फायदेमंद सब्जी है, जिसके इस्तेमाल से आप कई तरह की बीमारियों से राहत पा सकते हैं.
      • लंबी तथा गोल दोनों प्रकार की लौकी वीर्यवर्ध्‍दक, पित्‍त तथा कफनाशक और धातु को पुष्‍ट करने वाली होती है।
      • हैजा होने पर 25 एमएल लौकी के रस में आधा नींबू का रस मिलाकर धीरे-धीरे पिएं। इससे मूत्र बहुत आता है।
      • खांसी, टीबी, सीने में जलन आदि में भी लौकी बहुत उपयोगी होती है। - हृदय रोग में, विशेषकर भोजन के पश्‍चात एक कप लौकी के रस में थोडी सी काली मिर्च और पुदीना डालकर पीने से हृदय रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
      • लौकी में श्रेष्‍ठ किस्‍म का पोटेशियम प्रचुर मात्रा में मिलता है, जिसकी वजह से यह गुर्दे के रोगों में बहुत उपयोगी है और इससे पेशाब खुलकर आता है।
      • लौकी श्‍लेषमा रहित आहार है। इसमें खनिज लवण अच्‍छी मात्रा में मिलती है।
      • लौकी के बीज का तेल कोलेस्‍ट्रॉल को कम करते है तथा हृदय को शक्‍ति देते है। यह रक्‍त की नाडि़यों को भी स्‍वस्‍थ बनाते है।
      • वजन कम करने में मददगार -कुछ ही लोगों को ये पता होगा कि लौकी खाने से वजन कम होता है. आपको शायद इस बात पर यकीन न हो लेकिन किसी भी दूसरी चीज की तुलना में लौकी ज्यादा तेजी से वजन कम करती है. आप चाहें तो लौकी का जूस नियमित रूप से पी सकते हैं. इसके अलावा आप चाहें तो इसे उबालकर, नमक डालकर भी इस्तेमाल में ला सकते हैं.
      • नेचुरल ग्लो के लिए -लौकी में नेचुरल वॉटर होता है. ऐसे में इसके नियमित इस्तेमाल से प्राकृ‍तिक रूप से चेहरे की रंगत निखरती है. आप चाहें तो इसके जूस का सेवन कर सकते हैं या फिर उसकी कुछ मात्रा हथेली में लेकर चेहरे पर मसाज कर सकते हैं. इसके अलावा लौकी की एक स्लाइस को काटकर चेहरे पर मसाज करने से भी चेहरे पर निखार आता है.
      • मधुमेह रोगियों के लिए-मधुमेह के रोगियों के लिए लौकी किसी वरदान से कम नहीं है. प्रतिदिन सुबह उठकर खाली पेट लौकी का जूस पीना मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत फायदेमंद होता है.
      • लौकी का उपयोग आंतों की कमजोरी, कब्‍ज, पीलिया, उच्‍च रक्‍तचाप, हृदय रोग, मधुमेह, शरीर में जलन या मानसिक उत्‍तेजना आदि में बहुत उपयोगी है।
      • अल्सर होने पर कुछ दिन सिर्फ लौकी खाने से यह ठीक हो जाता है.
      • लौकी के रस को सीसम के तेल के साथ मिलाकर तलवों पर हल्की मालिश सुखपूर्वक नींद लाती है।
      • लौकी का रस मिर्गी और अन्य तंत्रिका तंत्र से सम्बंधित बीमारियों में भी फायदेमंद है।
      • अगर आप एसिडीटी,पेट क़ी बीमारियों एवं अल्सर से हों परेशान, तो न घबराएं बस लौकी का रस है इसका समाधान।
      • केवल पर्याप्त मात्रा में लौकी क़ी सब्जी का सेवन पुराने से पुराने कब्ज को भी दूर कर देता है।
      • लौकी मस्तिष्क की गर्मी को दूर करती है।लौकी का रायता दस्तों में लाभप्रद है।
      • यकृत की बीमारी और पीलिया के लिये लौकी लाभकारी है।
      • लौकी के पत्तों को पीसकर लेप करने से कुछ ही दिनों में बवासीर नष्ट हो जाते हैं।
      • लौकी के छिलके से चेहरा साफ करने से चेहरे की गंदगी दूर होती है। त्वचा के रोम छिद्र खुल जाते हैं। चेहरे पर मुंहासे हों तो, इन मुहांसों पर लौकी और नींबू के रस का मिश्रण लगाएं। इससे आपको जरूर लाभ मिलेगा।
      • गर्मियों में लौकी को पीसकर पैर के तलवों पर मलें इससे पैरों की जलन शांत होती है।
      • लौकी के बीजों को पीसकर होठों पर लगाने से जीभ और होठों के छाले ठीक हो जाते हैं।
      • दमा या अस्थमा के लिए ताजी लौकी पर गीला आटा लेप लें, फिर उसे साफ कपडे़ में लपेटकर, भूभल (गर्म राख या रेत) में दबायें। आधे घंटे बाद कपड़ा और आटा उतारकर उस भुरते का रस निकालकर सेवन करें। लगभग 40 दिनों में इस रोग से छुटकारा मिल जाएगा।
      • बिच्छू के काटे हुए स्थान पर लौकी पीसकर लेप करें और इसका रस निकालकर पिलाएं। इससे बिच्छू का जहर उतर जाता है।
      • कच्चे लौकी को काटकर उसकी लुगदी बनाकर घुटनों पर रखकर कपड़े से बांध लेना चाहिए। इससे घुटने का दर्द दूर हो जायेगा।
      • सिर्फ एक सावधानी बरते की लौकी कडवी होने पर उसका उपयोग ना करें

      Tuesday, November 15, 2016

      पालक के फायदे,Health Benefits of Spinach in Hindi,

      पालक एक गुणों से भरपूर सब्जी है। पालक के नियमित सेवन से शरीर स्वस्थ रहता है। इसे सूप बनाकर, उबालकर, सब्जी, भुजिया आदि बनाकर खाया जाता है। कुछ लोग इसे कच्चा भी खाते हैं। यह एंटीऑक्सीडेंट और कई पोषक तत्वों से भरपूर है। पालक में विटामिन सी और आयरन भी अच्छी मात्रा में पाया जाता है।

      यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित रखता है। इसमें ढ़ेर सारे विटामिन, मिनरल्स भी पाए जाते हैं। अमीनो एसिड, पोटैशियम भी उपस्थित रहता है। इसके अलावा पालक में विटामिन ए, के, सी और बी पाया जाता है। साथ ही, अल्केमाइन मिनरल्स भी होते हैं जो शरीर में पीएच बैलेंस को बनाए रखते हैं। पालक का जूस पीने से स्किन प्रॉब्लम्स खत्म होती हैं। चलिए आज जानते हैं पालक के सेवन से होने वाले कुछ खास फायदों के बारे में.

      पालक में जो गुण पाए जाते हैं, वे सामान्यतः अन्य शाक-भाजी में नहीं होते। यही कारण है कि पालक स्वास्थ्य की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है, सर्वसुलभ एवं सस्ता है। यह भारत के प्रायः सभी प्रांतों में बहुलता से सहज प्राप्य है। इसका पौधा लगभग एक से डेढ़ फुट ऊँचा होता है। इसके पत्ते चिकने, मांसल व मोटे होते हैं। यह साधारणतः शीत ऋतु में अधिक पैदा होता है, कहीं-कहीं अन्य ऋतुओं में भी इसकी खेती होती है।
        इसमें पाए जाने वाले तत्वों में मुख्य रूप से कैल्शियम, सोडियम, क्लोरीन, फास्फोरस, लोहा, खनिज लवण, प्रोटीन, श्वेतसार, विटामिन 'ए' एवं 'सी' आदि उल्लेखनीय हैं। इन तत्वों में भी लोहा विशेष रूप से पाया जाता है।
        • चेहरे के मुहांसे, झुर्रियों को दूर करने के लिए और त्वचा में निखार के लिए पालक के रस में गाजर और टमाटर का रस मिलाकर रोजाना सुबह शाम सेवन करना चाहिए। इससे रक्त शुद्ध होता है और इन समस्याओं से निजात मिलती है।
        • थायराइड की समस्या होने पर सौ ग्राम पालक के रस में शहद और थोड़ा-सा जीरे का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से बहुत लाभ होता है।
        • पालक में आयरन और विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में होता है। रतौंधी की समस्या होने पर सौ ग्राम गाजर के रस में पचास ग्राम पालक का रस मिलाकर सुबह-शाम पिलाने से बहुत लाभ होता है।
        • सर्दी में आवाज बैठ जाए या गले में दर्द हो तो पालक के पत्तों को पानी में उबालकर, उस पानी को छानकर गरारे करने से गले में आराम मिलता है।
        • पालक के बीजों को मट्ठे के साथ पीसकर त्वचा पर लेप करने से दाद और खुजली की समस्या भी दूर होती है
        • लौह तत्व मानव शरीर के लिए उपयोगी, महत्वपूर्ण, अनिवार्य होता है। लोहे के कारण ही शरीर के रक्त में स्थित रक्ताणुओं में रोग निरोधक क्षमता तथा रक्त में रक्तिमा (लालपन) आती है। लोहे की कमी के कारण ही रक्त में रक्ताणुओं की कमी होकर प्रायः पाण्डु रोग उत्पन्न हो जाता है।
        • लौह तत्व की कमी से जो रक्ताल्पता अथवा रक्त में स्थित रक्तकणों की न्यूनता होती है, उसका तात्कालिक प्रभाव मुख पर विशेषतः ओष्ठ, नासिका, कपोल, कर्ण एवं नेत्र पर पड़ता है, जिससे मुख की रक्तिमा एवं कांति विलुप्त हो जाती है। कालान्तर में संपूर्ण शरीर भी इस विकृति से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता।
        • लोहे की कमी से शक्ति ह्रास, शरीर निस्तेज होना, उत्साहहीनता, स्फूर्ति का अभाव, आलस्य, दुर्बलता, जठराग्नि की मंदता, अरुचि, यकृत आदि परेशानियाँ होती हैं।
        • पालक की शाक वायुकारक, शीतल, कफ बढ़ाने वाली, मल का भेदन करने वाली, गुरु (भारी) विष्टम्भी (मलावरोध करने वाली) मद, श्वास,पित्त, रक्त विकार एवं ज्वर को दूर करने वाली होती है।
        • आयुर्वेद के अनुसार पालक की भाजी सामान्यतः रुचिकर और शीघ्र पचने वाली होती है। इसके बीज मृदु, विरेचक एवं शीतल होते हैं। ये कठिनाई से आने वाली श्वास, यकृत की सूजन और पाण्डु रोग की निवृत्ति हेतु उपयोग में लाए जाते हैं।
        • गर्मी का नजला, सीने और फेफड़े की जलन में भी यह लाभप्रद है। यह पित्त की तेजी को शांत करती है, गर्मी की वजह से होने वाले पीलिया और खाँसी में यह बहुत लाभदायक है।
        • रासायनिक विश्लेषण पालक की शाक में एक तरह का क्षार पाया जाता है, जो शोरे के समान होता है, इसके अतिरिक्त इसमें मांसल पदार्थ 3.5 प्रतिशत, चर्बी व मांस तत्वरहित पदार्थ 5.5 प्रतिशत पाए जाते हैं। 
        • पालक में लोहा काफी मात्रा में पाया जाता है। इसके अतिरिक्त इसमें पाए जाने वाले तत्वों में कैल्शियम, सोडियम, क्लोरीन, फास्फोरस, खनिज लवण, प्रोटीन, श्वेतसोर आदि मुख्य हैं।
        • स्त्रियों के लिए लाभकारी स्त्रियों के लिए पालक का शाक अत्यंत उपयोगी है। महिलाएँ यदि अपने मुख का नैसर्गिक सौंदर्य एवं रक्तिमा (लालिमा) बढ़ाना चाहती हैं, तो उन्हें नियमित रूप से पालक के रस का सेवन करना चाहिए।
        • प्रयोग से देखा गया है कि पालक के निरंतर सेवन से रंग में निखार आता है। इसे भाजी (सब्जी) बनाकर खाने की अपेक्षा यदि कच्चा ही खाया जाए, तो अधिक लाभप्रद एवं गुणकारी है। पालक से रक्त शुद्धि एवं शक्ति का संचार होता है।
        • अगर आपको खांसी और श्वास फूलने की समस्या है तो पालक के रस में शहद और काली मिर्च पाउडर मिलाकर दिन में कई बार थोड़ा-थोड़ा पिएं।
        • पालक के सौ ग्राम रस में गाजर का सौ ग्राम रस मिलाकर पीने से शरीर में तेजी से खून की वृद्धि होती है। गर्भवती महिलाओं के लिए ये बेहद फायदेमंद है। 
        • पालक के पत्तों को अजवायन के साथ पीसकर, पानी में घोलकर पीने से कुछ ही दिनों में पेट के कीड़े दूर होते हैं और मल के साथ निकल जाते हैं। ये समस्या बच्चों में अकेसर देकने को मिलती है।
        • शारीरिक रूप से दुर्बल व्यक्ति को पचीस ग्राम पालक के रस में पचीस ग्राम टमाटर का रस मिलाकर सेवन करने से वजन तेजी से बढ़ता है। Health Benefits of Spinach in Hindi,
        • मूत्र संबंधी समस्याओं में पचास ग्राम पालक के रस में पचास ग्राम कुल्थी का रस मिलाकर, थोड़ा सा नींबू का रस डालकर, सुबह शाम सेवन करना चाहिए। ये उपाय गुर्दे की पथरी के रोगी को बहुत लाभकारी है, इससे पथरी गलने लगती है।

        Tuesday, November 8, 2016

        सिंघाड़े के फायदे,Health Henefits of Trapa Bispinosa in Hindi

        सिंघाडे (Water caltrop) को वैज्ञानिक नाम  Trapa Bispinosa/Natans भी कहा जाता है। यह त्रिकोने आकार का फल होता है। शरीर को मैगनीज तत्व की भी जरूरत होती है. आप चाहे जितने टानिक पी लीजिये, ताकत की दवाएं खा लीजिये लेकिन जब तक शरीर में इन तत्वों को पूर्ण रूप से पचाने की क्षमता नहीं होगी ,दवाए कोई असर नहीं दिखाएंगी. अकेला सिघाड़ा एक ऐसा फल है जो शरीर में मैगनीज एब्जार्ब करने की क्षमता बढ़ा देता है. और बुढापे में होने वाली अधिकाश बीमारियाँ सिर्फ मैगनीज की कमी के कारण होती हैं।

        गले के रोग व टांसिल में सिघाड़े का उपयोग लाभदायक होता है। सिंघाड़ा शरीर को शक्ति प्रदान करता है और खून बढाता है। सिंघाड़े में प्रोटीन, वसा, कार्बोहाईड्रेट, फास्फोरस, लोहा, खनिज तत्व, विटामिन `ए´ स्टार्च और मैंग्नीज जैसे महत्वपूर्ण तत्व पाए जाते है। चलिए आज जानते हैं आदिवासी किस तरह से सिंघाडे को अपने हर्बल नुस्खों में उपयोग में लाते हैं।

        जिन महिलाओ का गर्भकाल कभी पूरा न होता हो या गर्भ के दौरान गर्भ गिरने का डर लगा रहता हो उन्हें खूब ज्यादा सिघाड़े खाने चाहिए. ये भ्रूण को तो मजबूती देता ही है। गर्भवती महिला की भी रक्षा करता है. ये पुरुषों के लिए शुक्रवर्धक औषधि का काम करता है।

        सिघाड़े में टैनिन, सिट्रिक एसिड, एमिलोज, एमिलोपैक्तीं, कर्बोहाईड्रेट, बीटा-एमिलेज, प्रोटीन, फैट, निकोटेनिक एसिड, फास्फोराइलेज, रीबोफ्लेविन, थायमाइन, विटामिन्स-ए, सी तथा मैगनीज आदि तत्व मौजूद हैं. यह जल में पैदा होने वाला फल है, तिकोने पत्ते और सफ़ेद फूलों वाले इस पौधे में फल भी तिकोने ही लगते हैं. छोटे छोटे ताल-तलैयों में आपको इस मौसम में भी इसके पत्ते पानी में फैले हुए मिल जायेंगे।

        सिंघाड़े के फायदे

          • एक या दो महीने तक ज्यादा से ज्यादा सिंघाड़े के सेवन से मासिक धर्म सामान्य हो जाता है।
          • सिघाड़े के तने का रस निकाल कर एक-एक बूंद आँख में डालने से किसी भी प्रकार की आँखों की बीमारी दूर हो जाती है।
          • जिस व्यक्ति को ज़रा सी खरोंच लग जाए और खून बहुत ज्यादा निकलता हो उसे तो खूब सिघाड़े खाने चाहिए ताकि उसकी ये बीमारी दूर हो जाए. सिघाड़े में रक्त स्तंभक का गुण भी पाया जाता है।
          • गर्भवती महिलाओं को दूध के साथ सिघाड़ा खाना चाहिए, गर्भ के सातवें महीने में तो अनिवार्य रूप से इसका प्रयोग करना चाहिए।
          • पेशाब में रुकावट महसूस हो रही है तो सिघाड़े का काढा बनाकर दिन में दो बार ले लीजिये।
          • सिघाड़ा ल्यूकोरिया, दस्त, खून में खराबी जैसी बीमारियों को भी ठीक करता है।
          • जो लोग अस्थमा के रोगी हैं उनके लिए सिंघाड़ा वरदान से कम नहीं है। अस्थमा के रोगीयों को 1 चम्मच सिंघाड़े के आटे को ठंडे पानी में मिलाकर सेवन करना चाहिए। एैसा नियमित करने से अस्थमा रोग में लाभ मिलता है।
          • बवासीर के रोग में सिंघाड़े के सेवन से लाभ मिलता है। यदि सूखे या खूनी बवासीर हो तो आप नियमित सिंघाड़े का सेवन करें। जल्द ही बवासीर में कमी आयेगी और रक्त आना बंद हो जाएगा।
          • वे महिलाएं जिनका गर्भाशय कमजोर हो वे सिंघाड़े का या सिंघाडे़ का हल्वे का सेवन नियमित करती रहें। लाभ मिलेगा।
          • सिंघाड़े की बेल को पीसकर उसका पेस्ट, शरीर में जलन वाले स्थान पर लगाने से जलन कम हो जाती है। और लाभ मिलता है।
          • यदि मांसपेशियां कमजोर हैं या शरीर में दुर्बलता हो तो आप नियमित सिंघाड़े का सेवन करें एैसा करने से शरीर की दुर्बलता और कमजोरी दूर होती है।
          • जिन महिलाओं को मूत्र संबंधी रोग है वें सिंघाड़े का आटा ठंडे पानी में लें।
          • सिंघाड़ा पित्त और कफ को खत्म करता है। इसलिए सिंघाड़े का नियमित सेवन करना चाहिए।
          • गले से सबंधी बीमारियों के लिए सिंघाड़ा बहुत ही लाभदायक है। गला खराब होने पर या गला बैठने पर आप सिंघाड़े के आटे में दूध मिलाकर पीयें इससे जल्दी ही लाभ मिलेगा। गले में टांसिल होने पर सिंघाड़ा का सेवन करना न भूलें।
          • सिंघाडे़ में आयोडीन की प्रर्याप्त मात्रा होने की वजह से यह घेघां रोग में फायदा करता है।
          • आखों की रोशनी को बढ़ाने में भी सिंघाडा फायदा करता है क्योंकि इसमें विटामिन ए सही मात्रा में पाया जाता है।
          • नाक से नकसीर यानी खून बहने पर सिघाड़े के सेवन से फायदा होता है। यह नाक से बहने वाले नकसीर को बंद कर देता है।
          • प्रसव होने के बाद महिलाओं में कमजोरी आ जाती है। इस कमजोरी को दूर करने के लिए महिलाओं को सिंघाड़े का हलवा खाना चाहिए यह शरीर में होने वाली कमजोरी को दूर करता है।
          • कैल्शियम की सही मात्रा की वजह से सिंघाड़ा हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है।
          • सिंघाड़े के इस्तेमाल से पुरूषों के वीर्य में बढ़ोत्तरी होती है। साथ यह काम की क्षमता को भी बढ़ता है। इसका प्रयोग आप सिंघाड़े के हलवे के रूप में भी कर सकते हैं। अथवा दूध में दो चम्मच सिंघाड़े का आटा मिलाकर भी प्रयोग कर सकते हैं।
          • नीबू के रस में सूखे सिंघाड़े को घिसकर दाद पर प्रतिदिन लगाया जाए तो दाद में आराम मिलता है हलांकि ऐसा करने से दाद वाली जगह पर पहले जलन होती है और फिर ठंडक महसूस होती है।
          • सिंघाड़े के आटे में बबूल गोंद, देशी घी और मिश्री मिलाकर लगभग 30 ग्राम प्रतिदिन दूध के साथ लेने से वीर्य की दुर्बलता दूर होती है।
          • शक्कर और पिसा हुआ सूखा सिंघाड़ा की समान मात्रा (50-50 ग्राम) लेकर मिला लें। इस चूर्ण को चुटकी भर मात्रा में पानी के साथ सुबह शाम देने से बच्चे बिस्तर में पेशाब करना बंद कर देते है।
          • गले में टांसिल्स होने पर सिंघाड़े को पानी में उबालकर इस पानी से प्रतिदिन कुल्ला किया जाए तो टांसिल्स की सूजन दूर होती है।
          • कच्चे सिंघाड़े को कुचलकर शक्कर और नारियल के साथ चबाने से शरीर को जबरदस्त ऊर्जा मिलती है, माना जाता है कि यह नुस्खा शारीरिक स्फूर्ति प्राप्त करने के लिए अचूक है।
          • पीलिया के मरीज इसे कच्चा या जूस बनाकर ले सकते हैं। यह शरीर से जहरीले पदार्थों को बाहर निकालने में काफी मददगार होता है।
          • मैग्नीज और आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होने के कारण यह थायरॉइड ग्रंथि की कार्यशैली को सुचारू रखने में भी मदद करता है।
          • सिंघाड़ा सूजन और दर्द में मरहम का काम करता है। शरीर के किसी भी अंग में सूजन होने पर सिंघाड़े के छिलके को पीस कर लगाने से आराम मिलता है।
          • एड़ियां फटने की समस्या शरीर में मैग्नीज की कमी के कारण होती है। सिंघाड़ा ऐसा फल है, जिसमें पोषक तत्वों से मैग्नीज ग्रहण करने की क्षमता होती है
          • इसके नियमित सेवन से शरीर मोटा और शक्तिशाली बनता है।
          • बुखार व घबराहट में फायदेमंद रोज 10-20 ग्राम सिंघाड़े के रस का सेवन करने से आराम मिलता है।
          • पेशाब में जलन, रुक-रुक कर पेशाब आना जैसी बीमारियों में सिंघाड़े का सेवन लाभदायक है।
          • जिन लोगों की नाक से खून आता है, उन्हें बरसात के मौसम के बाद कच्चे सिंघाड़े खाना फायदेमंद है।

            Saturday, November 5, 2016

            अंजीर खाने के फायदे,Anjeer Benefits in Hindi,Health Benefits of Common Fig in Hindi,

            अंजीर खाने के फायदे,Anjeer Benefits in Hindi,Health Benefits of Common Fig in Hindi,
            अंजीर एक ऐसा फल है जो जितना मीठा है। उतना ही लाभदायक भी है।अंजीर के सूखे फल बहुत गुणकारी होते हैं।  अंजीर अपने खट्टे-मीठे स्वाद के लिए प्रसिद्ध अंजीर एक स्वादिष्ट, स्वास्थ्यवर्धक और बहु उपयोगी फल है।अंजीर कई प्रकार का होता है जिसमें से कुछ इस प्रकार के हैं।वैज्ञानिकों के अनुसार अंजीर कि इसके सूखे फल में कार्बोहाइड्रेट (शर्करा) 63 प्रतिशत, प्रोटीन 5.5 प्रतिशत, सेल्यूलोज 7.3 प्रतिशत, चिकनाई एक प्रतिशत, खनिज लवण 3 प्रतिशत, अम्ल 1.2 प्रतिशत, राख 2.3 प्रतिशत और जल 20.8 प्रतिशत होता है। इसके अलावा प्रति 100 ग्राम अंजीर में लगभग 1 ग्राम का चौथा भाग लोहा, विटामिन,थोड़ी मात्रा में चूना, पोटैशियम, सोडियम, गंधक, फास्फोरिक एसिड और गोंद भी पाया जाता है।

            Anjeer Benefits in Hindi

              • कब्ज : 3 से 4 पके अंजीर दूध में उबालकर रात्रि में सोने से पूर्व खाएं और ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे कब्ज और बवासीर में लाभ होता है।
              • माजून अंजीर 10 ग्राम को सोने से पहले लेने से कब्ज़ में लाभ होता है।
              • अंजीर 5 से 6 पीस को 250 मिलीलीटर पानी में उबाल लें, पानी को छानकर पीने से कब्ज (कोष्ठबद्धता) में राहत मिलती है।
              • अंजीर को रात को पानी में भिगोकर सुबह चबाकर खाकर ऊपर से पानी पीने पेट साफ हो जाता है।
              • अंजीर के 4 दाने रात को सोते समय पानी में डालकर रख दें। सुबह उन दानों को थोड़ा सा मसलकर जल पीने से अस्थमा में बहुत लाभ मिलता है तथा इससे कब्ज भी नष्ट हो जाती है।
              • दमा : दमा जिसमें कफ (बलगम) निकलता हो उसमें अंजीर खाना लाभकारी है। इससे कफ बाहर आ जाता है तथा रोगी को शीघ्र ही आराम भी मिलता है।
              • प्रतिदिन थोड़े-थोड़े अंजीर खाने से पुरानी कब्जियत में मल साफ और नियमित आता है। 2 से 4 सूखे अंजीर सुबह-शाम दूध में गर्म करके खाने से कफ की मात्रा घटती है, शरीर में नई शक्ति आती है और दमा (अस्थमा) रोग मिटता है।
              • प्यास की अधिकता : बार-बार प्यास लगने पर अंजीर का सेवन करें।
              • मुंह के छाले : अंजीर का रस मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है।
              • प्रदर रोग : अंजीर का रस 2 चम्मच शहद के साथ प्रतिदिन सेवन करने से दोनों प्रकार के प्रदर रोग नष्ट हो जाते हैं।
              • दांतों का दर्द : अंजीर का दूध रुई में भिगोकर दुखते दांत पर रखकर दबाएं।
              • अंजीर के पौधे से दूध निकालकर उस दूध में रुई भिगोकर सड़ने वाले दांतों के नीचे रखने से दांतों के कीड़े नष्ट होते हैं तथा दांतों का दर्द मिट जाता है।"
              • पेशाब का अधिक आना : 3-4 अंजीर खाकर, 10 ग्राम काले तिल चबाने से यह कष्ट दूर होता है।
              • त्वचा के विभिन्न रोग : कच्चे अंजीर का दूध समस्त त्वचा सम्बंधी रोगों में लगाना लाभदायक होता है।
              • अंजीर का दूध लगाने से दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और दाद मिट जाते हैं। बादाम और छुहारे के साथ अंजीर को खाने से दाद, दिनाय (खुजली युक्त फुंसी) और चमड़ी के सारे रोग ठीक हो जाते है।"
              • दुर्बलता (कमजोरी) : पके अंजीर को बराबर की मात्रा में सौंफ के साथ चबा-चबाकर सेवन करें। इसका सेवन 40 दिनों तक नियमित करने से शारीरिक दुर्बलता दूर हो जाती है।
              • अंजीर को दूध में उबालकर-उबाला हुआ अंजीर खाकर वही दूध पीने से शक्ति में वृद्धि होती है तथा खून भी बढ़ता है।"
              • रक्तवृद्धि और शुद्धि हेतु : 10 मुनक्के और 5 अंजीर 200 मिलीलीटर दूध में उबालकर खा लें। फिर ऊपर से उसी दूध का सेवन करें। इससे रक्तविकार दूर हो जाता है।
              • पेचिश और दस्त : अंजीर का काढ़ा 3 बार पिलाएं।
              • ताकत को बढ़ाने वाला : सूखे अंजीर के टुकड़े और छिली हुई बादाम गर्म पानी में उबालें। इसे सुखाकर इसमें दानेदार शक्कर, पिसी इलायची, केसर, चिरौंजी, पिस्ता और बादाम बराबर मात्रा में मिलाकर 8दिन तक गाय के घी में पड़ा रहने दें। बाद में रोजाना सुबह 20 ग्राम तक सेवन करें। छोटे बालकों की शक्तिक्षीण के लिए यह औषधि बड़ी हितकारी है।
              • जीभ की सूजन : सूखे अंजीर का काढ़ा बनाकर उसका लेप करने से गले और जीभ की सूजन पर लाभ होता है।
              • पुल्टिश : ताजे अंजीर कूटकर, फोड़े आदि पर बांधने से शीघ्र आराम होता है।
              • दस्त साफ लाने के लिए : दो सूखे अंजीर सोने से पहले खाकर ऊपर से पानी पीना चाहिए। इससे सुबह साफ दस्त होता है।
              • क्षय यानी टी.बी के रोग : इस रोग में अंजीर खाना चाहिए। अंजीर से शरीर में खून बढ़ता है। अंजीर की जड़ और डालियों की छाल का उपयोग औषधि के रूप में होता है। खाने के लिए 2 से 4 अंजीर का प्रयोग कर सकते हैं।
              • फोड़े-फुंसी : अंजीर की पुल्टिस बनाकर फोड़ों पर बांधने से यह फोड़ों को पकाती है।
              • गिल्टी : अंजीर को चटनी की तरह पीसकर गर्म करके पुल्टिस बनाएं। 2-2 घंटे के अन्तराल से इस प्रकार नई पुल्टिश बनाकर बांधने से `बद´ की वेदना भी शांत होती है एवं गिल्टी जल्दी पक जाती है।
              • सफेद कुष्ठ (सफेद दाग) : अंजीर के पेड़ की छाल को पानी के साथ पीस लें, फिर उसमें 4 गुना घी डालकर गर्म करें। इसे हरताल की भस्म के साथ सेवन करने से श्वेत कुष्ठ मिटता है।

                Wednesday, June 8, 2016

                सीताफल खाने के फायदे ,Custard Apple Health Benefits in Hindi

                सीताफल एक लाजवाब, स्वादिष्ट और मीठा फल होने के साथ-साथ अपने मेंअनगिनत औषधीय गुणों को शामिल किए हुए है। सीताफल (शरीफा ) एकमीठा फल है इसमें काफी मात्र में कैलोरी होती है जो और अल्सर व अम्ल पित्तके रोग में ज्यादा लाभकारी होता है । पूरे शरीर को स्वस्थ और बीमारियों से दूररखने का यह एक बहुत ही आसान उपाय है। सीताफल में वजन बढ़ाने कीक्षमता भरपूर होती है आपको बस सीताफल को अपनी डाइट का हिस्सा बनानाहै और आपका मनचाहा फिगर आप पा सकेंगे बहुत ही जल्दी। सीताफल मेंप्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट विटामिन सी बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। विटामिनसी में शरीर की रोगों से लड़ने वाली शक्ति यानी इम्युन सिस्टम को बढ़ाने की क्षमता होती है जो बीमारियों को दूर भगाइए ।
                • सीताफल बहुत ही अच्छा एनर्जी का स्रोत होता है और इसके सेवन से थकावटऔर मांसपेशियों की कमजोरी आपको बिलकुल भी महसूस नहीं होगी।विटामिन बी कॉम्प्लेक्स से भरा हुआ सीताफल दिमाग को शीतलता देने काभी काम करता है। 
                • यह आपको चिड़चिड़ेपन से बचाकर निराशा को दूर रखताहै। सीताफल आपके दांतों के स्वास्थ्य के लिए भी बहुत उत्तम है। इसकोनियमित खाकर आप दांतों और मसूड़ों में होने वाले दर्द से छुटकारा पा सकतेहैं। खून की कमी यानी एनीमिया से बचना अब बिलकुल आसान है। 
                • सीताफलका हर दिन इस्तेमाल खून की अल्पता को खत्म कर देता है और उल्टियों केप्रभाव को भी कम करता है। सीताफल आंखों की देखने की क्षमता बढ़ाता है,क्योंकि इसमें विटामिन सी और रिबोफ्लॉविन काफी ज्यादा होता है। 
                • सीताफल में मौजूद मैग्नीशियम शरीर में पानी को संतुलित करता है और इसतरह से जोड़ों में होने वाले अम्ल को हटा देता है। यह अम्ल गठिया रोग कामुख्य कारण होता है और इस तरह से सीताफल गठिया रोग से सुरक्षा करताहै। सीताफल में सोडियम और पोटेशियम संतुलित मात्रा में होते हैं जिससे खूनका बहाव यानी ब्लड प्रेशर में अचानक होने वाले बदलाव नियंत्रित हो जाते हैं।दोनों प्रकार की शुगर को संतुलित रखना सीताफल के उपयोग के साथ बहुत हीआसान है। 
                • इसमें शरीर में होने वाली शुगर को सोख लेने का गुण होता है औरइस तरह से यह शुगर का शरीर में स्तर सामान्य बनाए रखता है। सीताफलताँबा और फाइबर प्रचुर मात्रा में होता है जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है।साथ ही फाइबर मल को नरम करके कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है।
                • गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छा होता है- यह फल गर्भावस्था के समय होनेवाले मूड स्विंग, मॉर्निंग सिकनेस और अकड़न से राहत दिलाने में मदद करता है।
                • सीताफल के बीज रोगों से लड़ने की क्षमता बढ़ाते हैं। इसके सेवन से कैंसर औरडायबिटीज को नियंत्रित किया जा सकता है। सीताफल के बीजों में प्राकृतिकएंटी ऑक्सीडेंट हैं साथ ही विटामिन-सी बहुत अधिक मात्रा में है। विटामिन-सीसे शरीर में इम्यून सिस्टम को मजबूती मिलती है और यह ऊर्जा का अच्छास्रोत होता है। 
                • सीताफल के बीजों में विटामिन-बी होता है। सीताफल का बीजखून की कमी यानी एनीमिया से बचाता है। कई रोगों में रामबाणफोड़ार शरीफा के पत्तों को पीस कर फोड़ों पर लगाने से फोड़े ठीक हो जाते हैं. 
                • शरीर की जलन शरीफा सेवन करने या इसके गूदे से बने शरबत शरीर कीजलन को ठीक करता है. बालों के रोग रू शरीफा के बीजों को बकरी के दूध केसाथ पीस कर बालों में लगाने से सिर के उड़े हुए बाल फिर से उग आते हैं.जूओं का पड़ना रू शरीफा के बीजों को बारीक पीस कर रात को सिर में लगा लेंऔर किसी मोटे कपड़े से सिर को अच्छी तरह बांध कर सो जाएं. इससे जुएं मरजाती हैं । व्रत के दिनों में फलाहार के रूप में इसे खाते हैं. पूरक आहार के रूपमें इसका सेवन किया जाता है.
                • सीताफल में विटामिन बी-1, ए, बी-2 और सी पाया जाता है। इसका फल गोलाकार, छोटी-छोटी गोल कृतिवाली, बाहर से उभरी हुई पेशियों के कारण मनोहर कलाकृति के समान लगता है। 
                • यह अत्यन्त ठंडा होता है। अधिक खाने पर जुकाम हो जाता है। इनके फल में अनेक बीज काले और चिकने होते हैं। बीजों के आसपास सफेद मीठी गिरी होती है। इसे ही खाया जाता है।
                • पित्त में पके सीताफल को खुली जगह ओस में रख दें। सवेरे खाने से पित्त का दाह शांत होता है।
                • शरीर की जलन : शरीफा सेवन करने या इसके गूदे से बने शर्बत शरीर की जलन को ठीक करता है।
                • बालों के रोग : शरीफा के बीजों को बकरी के दूध के साथ पीसकर बालों में लगाने से सिर के उड़े हुए बाल फिर से उग आते हैं।
                • मिर्गी हिस्टीरिया : इसके पत्तों को पीसकर उसका पानी रोगी/रोगिणी की दोनों नासाओं (नाक के दोनों ओर) में दो-दो बूंद डालने से होश आ जाएगा। 
                • गांठ का इलाज : पके हुए सीताफल का गूदा कूटकर पोटली बांधने पर सांघातिक गांठ फूट जाते हैं।
                • घाव में कृमि : सीताफल के पत्तों को कूटकर उसमें सेंधा नमक मिला, घाव वाले स्थान पर रख पट्टी में बांध दें। इससे फोड़े या घाव में पीव तथा कीड़े, कृमि पड़ गये हो तो वे नष्ट हो जाएंगे।
                • घाव में कीटाणु : सीताफल के पत्ते पर तम्बाकू का चूर्ण, बुझा हुआ चूना को शहद में मिलाकर इसे घाव पर बांध दें। तीन दिन भीतर घाव के कीटाणु मर जायेंगे।

                Sunday, June 5, 2016

                किवी फल के फायदे,Health Benefits Of Kiwi Fruits In Hindi,

                किवी फल के फायदे,Health Benefits Of Kiwi Fruits In Hindi,
                डेंगू के दौरान गिलोय का पौधा और कीवी फल आपके अपनों की जिंदगी बचा सकते हैं। दरअसल डेंगू होने पर आदमी की बॉडी के ब्लड प्लेटलेट्स को गिरने से रोकने और फिर प्लेटलेट्स बनाने में गिलोय का पौधा काफी फायदेमंद माना जाता है किवी के कई औषधीय फायदे हैं। किवी फल विटामिन-सी से भरपूर होता है, डेंगू बुखार सहित अन्य बीमारियों से निपटने के लिए डॉक्टर रोगियों को किवी खाने की सलाह देते है। किवी में भारी मात्रा में विटामिन सी होती है

                Health Benefits Of Kiwi Fruits In Hindi

                • इसमें विटामिन ई और एंटीआक्सीडेंट्स की बड़ी मात्रा पायी जाती है और यह त्वचा की कोशिकाओं को लंबे समय तक ठीक रखता है औरप्रतिरोधी क्षमता बढ़ाता है।
                • किवी को यदि पोषक तत्वों का समूह कहा जाए तो ग़लत न होगा। इसमें 27 से अधिक पोषक तत्व मौजूद हैं। यह फ़ाइबर, विटामिन सी और ई, कैरोटेनाइड्स, एंटीआक्सीडेंट्स और कई प्रकार के मिनिरल्स से भरपूर हैं लंबे समय तक जवां रखता है
                • इसमें विटामिन ई और एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में होते हैं। ये त्वचा की कोशिकाओं को लंबे समय तक ठीक रखते हैं और प्रतिरोधी क्षमता बढ़ाते हैं।
                • शरीर को रिपेयर करता है-इसमें विटामिन सी सबसे अधिक मात्रा में होता है जो संतरे की अपेक्षा दोगुनी मात्रा में होता है। यह शरीर में आयरन को सोखने में मदद करता है। खासतौर पर अनीमिया के उपचार में इसका सेवन बहुत अधिक फायदेमंद है।
                • डायबिटीज पर नियंत्रण-इसमें ग्लाइकेमिक इंडेक्स कम मात्रा में होता है जिससे रक्त में गलूकोज नहीं बढ़ता। इस वजह से यह डायबिटीज, दिल के रोग और वेट लॉस में बहुत फायदेमंद है।
                • ओस्टियोपोरोसिस में आराम-इसमें केले जितना ही पोटैशियन पाया जाता है जो ओस्टियोपोरोसिस के रोगियों के लिए फायदेमंद है। यह हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करता है।
                • इसमें विटामिन सी सबसे अधिक मात्रा में पाया जाता है जो संतरेकी अपेक्षा दोगुनी मात्रा में होता है। यह शरीर में आयरन सोखने में सहायता प्रदानकरता है विशेषकर अनीमिया के उपचार मेंइसका सेवन बहुत लाभदायक है।
                • इसमें ग्लाइकेमिक इंडेक्स कम मात्रा मेंहोता है जिससे रक्त में ग्लूकोज़ नहीं बढ़ता।इस कारण यह डायबिटीज़, हृदय रोग और वज़न कम करने में बहुत लाभकारी है।
                • गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन 400से 600 माइक्रोग्राम फ़ोलिक एसिडकी आवश्यकता होती है। यह फ़ोलिक एसिड का एक बेहतरीन स्रोत है। गर्भ में बच्चे के मस्तिष्क के विकास में इसकी बहुत बड़ी भूमिका होती है।
                • किवी में मौजूद फ़ाइबर शरीर का पाचन तंत्र ठीक रखने में सहायता प्रदान करता है विशेष कर क़ब्ज़ की समस्या में इसका सेवन बहुत लाभदायक है।
                • इसमें केले जितना ही पोटैशियम पाया जाता है जो ओस्टियोपोरोसिस के रोगियों के लिए लाभदायक होता है और हड्डियों और मांसपेशियों को मज़बूत करने में सहायता प्रदान करता है।

                Saturday, May 21, 2016

                गेहूँ के ज्वारे का रस,Benefits of Wheatgrass Juice,Wheat Grass Juice

                गेहूं के जवारों में रोग निरोधक व रोग निवारक शक्ति पाई जाती है। कई आहार शास्त्री इसे रक्त बनाने वाला प्राकृतिक परमाणु कहते हैं। गेहूं के जवारों की प्रकृति क्षारीय होती है, इसीलिए ये पाचन संस्थान व रक्त द्वारा आसानी से अधिशोषित हो जाते हैं। यदि कोई रोगी व्यक्ति वर्तमान में चल रही चिकित्सा के साथ-साथ गेहूं के जवारों का प्रयोग करता है तो उसे रोग से मुक्ति में मदद मिलती है और वह बरसों पुराने रोग से मुक्ति पा जाता है।  यदि किसी असाध्य रोग से पीड़ित व्यक्ति को गेहूं के जवारों का प्रयोग कराना है तो उसकी वर्तमान में चल रही चिकित्सा को बिना बंद किए भी गेहूं के जवारों का सेवन कराया जा सकता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि कोई चिकित्सा पद्धति गेहूं के जवारों के प्रयोग में आड़े नहीं आती है, क्योंकि गेहूं के जवारे औषधि ही नहीं वरन श्रेष्ठ आहार भी है।
                • गेहूँ के जवारों में अनेक अनमोल पोषक तत्व व रोग निवारक गुण पाए जाते हैं. यही कारण है कि इसे अमृततुल्य आहार का दर्जा दिया गया है.
                • गेहूँ के जवारों में सबसे प्रमुख तत्व क्लोरोफिल पाया जाता है, जिसकी संरचना, हूबहू, मानव रक्तकण में पाए जाने वाले हीमोग्लोबिन के सदृश्य होती है.
                • गेहूँ के जवारे रक्त व रक्त-संचार संबंधी रोगों, रक्त की कमी, उच्च-रक्तचाप, सर्दी, अस्थमा, ब्रोंकाईटिस, स्थायी सर्दी, साईनस, पाचन संबंधी रोग, पेट में छाले, कैंसर, आँतों की सूजन, दांत संबंधी समस्यायें जैसे दांतों का हिलना, मसूड़ों से खून आना, एक्जिमा आदि चर्मरोग, किडनी संबंधी रोग, यौन-संबंधी रोग, कान के रोग, थायराइड ग्रंथि के रोग व अनेक ऐसे रोग जिनसे रोगी निराश हो गया हो, उनके लिए गेहूँ के जवारे अनमोल औषधि सिद्ध होते हैं. 
                • इसलिए कोई भी रोग हो तथा उस रोग का किसी भी चिकित्सा पद्धति से ही उपचार क्यों न चल रहा हो साथ ही साथ गेहूँ के जवारे के रस का सेवन करके तीव्रगति से लाभ प्राप्त किया जा सकता है.
                • हीमोग्लोबिन रक्त में पाया जाने वाला एक प्रमुख घटक है. हीमोग्लोबिन में हेमिन नामक तत्व पाया जाता है. रासायनिक रूप से गेहूँ के जवारे के क्लोरोफिल व हीमोग्लोबिन के हेमिन में काफी समानता होती है. क्लोरोफिल व हेमिन दोनों में ही कार्बन, ऑक्सीजन, हाइड्रोजन व नाइट्रोजन के अणुओं की संख्या व संरचना करीब-करीब एक जैसी होती है. 
                • क्लोरोफिल एवं हेमिन की संरचना में केवल एक ही अंतर होता है वो यह कि क्लोरोफिल के परमाणु केंद्र में मैग्नेशियम होता है जबकि हेमिन के परमाणु केंद्र में लोहतत्व स्थित होता है. 
                • इस प्रकार हम देखते हैं कि हिमोग्लोबिन व क्लोरोफिल में काफी समानता होती है और इसीलिए गेहूँ के जवारों को हरा रक्त कहना कहा जाता है.
                • यह वजन नियन्त्रण करता है व पसीने की दुर्गन्ध समाप्त करता है।
                • यह मधुमेह में बहुत उपयोगी है।
                • यह ब्लड में शुगर को नियंत्रित करता है।
                • गेहूँ के ज्वारे का रस शरीर को ऑकसीज़न उपलब्ध कराता है।
                • यह कैंसर कोशिकाओं का नाश करता है।
                • यह स्वस्थ कोशिकाओं की श्वसन क्रिया को बढ़ाता है।
                • कृषि अनुसंधानकर्ता फ़ाईफ़र के अनुसार सुखा कर रखे गये, गेहूँ के पौधें मे प्रोटीन की मात्रा 47.4% होती है।
                • गेहूँ के पौधें मे गोमांस से तीन गुना अधिक प्रोटीन होता है।
                • गेहूँ के ज्वारे का रस डायबिटीज़ के लिये और बुढ़ापे के लिये बहुत अच्छा है।
                • इसका लगातार सेवन करने से बिमारियाँ दूर भाग जाती है।
                • गेहूँ के ज्वारे का रस सेक्स हार्मोन्स पर महत्वपूर्ण असर करता है।
                • दाँत मे दर्द या गले मे खराश हो तो गेहूँ के ज्वारे के रस के गरारें करे
                • गेहूँ के जवारों में रोग निरोधक व रोग निवारक शक्ति पाई जाती है. गेहूं के जवारों की प्रकृति क्षारीय होती है, इसीलिए ये पाचन-संस्थान व रक्त द्वारा आसानी से अधिशोषित हो जाते हैं.
                • रोगग्रस्त लोग अगर गेहूँ के जवारे के रस का सेवन करते हैं तो वे शरीर के किसी एक रोग से ही मुक्ति नहीं पाते हैं वरन शरीर के अंदर मौजूद अन्य सभी रोगों से भी मुक्ति पाते हैं. साथ ही यदि कोई स्वस्थ व्यक्ति इसका सेवन करता है तो उसकी जीवनीशक्ति में भी अपार वृद्धि होने लग जाती है.
                • गेहूँ के जवारे से रोगी तो स्वस्थ होता ही है किंतु सामान्य स्वास्थ्य वाला व्यक्ति भी अपार-शक्ति को प्राप्त करता है. इसका नियमित सेवन करने वाले व्यक्ति को शरीर में थकान तो कभी आती ही नहीं है.
                • इस प्रकार हम देखते हैं कि कोई भी चिकित्सा पद्धति गेहूँ के जवारों के प्रयोग में आड़े नहीं आती है, क्योंकि 'गेहूँ के जवारे' औषधि ही नहीं वरन श्रेष्ठ आहार भी हैं
                • गेहूँ के ज्वारे का रस सेक्स हार्मोन्स पर महत्वपूर्ण असर करता है।
                • दाँत मे दर्द या गले मे खराश हो तो गेहूँ के ज्वारे के रस के गरारें करे।
                • गेहूँ के ज्वारे का रस उच्च रक्तचाप को कम करता है। गेहूँ के ज्वारे के रस से शरीर के विष घटते है। गेहूँ के ज्वारे के रस से रक्त मे लोहा तत्व प्राप्त होकर रक्त संचालन बढ़ता है। चर्म रोग, स्किन सम्स्या व किसी भी प्रकार की एलर्जी में, इसके उपयोग से अच्छा लाभ मिलता है। गेहूँ के ज्वारे का रस बिमारी से लड्ने वाले कीटाणुओं की संख्या को बढ़ाता है। शरीर में विषाक्त धातुओं, जैसे- सीसा, कैडमियम, पारा, एल्यूमीनियम और अत्याधिक ताँबा (कॉपर) की मात्रा को थोड़ा सा गेहूँ के ज्वारे का रस लेकर सफ़लता पूर्वक कम किया जा सकता है। रस की मात्रा में धीरे-धीरे वृद्धि की जानी चाहिए।
                • गेहूँ के ज्वारे लेइट्राइल का उम्दा स्त्रोत है जो कि कैंसर कोशिकाओं को छांटकर नष्ट करता है व सामान्य कोशिकाओं पर उसका असर नगण्य होता है। यह कैंसर की रोकथाम भी करता है। गेहूँ के ज्वारे का रस बालों को सफ़ेद होने से रोकता है।

                Thursday, May 19, 2016

                जामुन खाने के फायदे,Health Benefits Of Jamun In Hindi, ( Eugenia Jambolana )

                प्रकृति की ओर से जामुन एक अनमोल तोहफा है । जामुन मीठा होता है लेकिन यह होता है स्वास्थय के लिए बेहद फायदेमंद । इसका नियमित सेवन करें तो आप अपने स्मरण शक्ति में इजाफा होता पायेंगें । जामुन स्वादिष्ट होने के साथ साथ अनेक रोगों की अचूक दवा भी है

                Health benefits of Eugenia jambolana

                • जामुन के रस का नियमित रूप से उपयोग आपकी स्मरण शक्ति बढ़ाता है ।
                • मधुमेही के रोगीयों के लिए जामुन के बीज का चूर्ण सर्वोत्तम है | 
                • वायु प्रकृति वाले जामुन के ऊपर नमक, जीरा पावडर और संतकृपा चूर्ण लगागे जामुन खाये |
                • मधुमेह के रोगी को नित्य जामुन खाने चाहिए | अच्छे पक्के जामुन सुखाकर बारीक कूटकर बनाया गया चूर्ण प्रतिदिन १ - १ चम्मच सुबह–शाम पानी के साथ सेवन करने से मधुमेह में लाभ होता है 
                • प्रदर रोग कुछ दिनों तक वृक्ष की छाल के काढ़े में शहद अर्थात मधु मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से स्त्रीयों में प्रदर रोग मिट जाता है |
                • जामुन के बीज को पानी में घिसकर मुँह पर लगाने पर मुहाँसे मिटते है |
                • जामुन की गुठलीयों को पीसकर शहद में मिलाकर गोलियाँ बना ले| २ - २ गोली नित्य चार बार चुसो| इससे बैठा गला खुल जाता है, आवाज का भारीपन ठीक हो जाता है |
                • जामुन की गुठली का ४ – ५ ग्राम चूर्ण सुबह-शाम पानी के साथ लेने से स्वप्नदोष ठीक होता है |
                • जामुन को मधुमेह के बेहतर उपचार के तौर पर जाना जाता है । डायबिटीज के लिए रामबाण औषधि है जामुन । 
                • पाचन शक्ति मजबूत करने में जामुन काफी लाभकारी होता है । जामुन का सिरका पीने से पेट के रोग ठीक हो जाते हैं ।
                • लीवर से जुड़ी बीमारियों के बचाव में जामुन रामबाण साबित होेता है । जामुन यकृत को शक्ति प्रदान करता है ।
                • अध्ययन दर्शाते हैं कि जामुन में एंटीकैंसर गुण होता है ।
                •  कीमोथेरेपी और रेडिएष्श्न में जामुन लाभकारी होता है ।
                • हृदय रोगों, डायबिटीज, उम्र बढ़ना और आर्थराइटिस में जामुन का उपोग फायदेमंद है ।
                • जामुन का फल मैं खून को साफ करने वाले कई गुण होते हैं एवं एनीमिया (खून की कमी) के रोगियों के लिए फायदेमंद होता है । जामुन कर रस, शहद और आंवले का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक दो महीने तक नियमित रूप से लेने से शरीर में रक्त की कमी दूर होती है ।
                • जामुन पथरी के रोगियों के लिए लाभदायक सिद्ध हुई है ।
                • जामुन के पेड़ की छाल और पत्तियां रक्तचाप को नियमित करने में कारगर होती है ।
                • जामुन पत्तों की भस्म को मंजन के रूप में उपयोग करने से दांत और मसूड़े मजबूत होते हैं ।
                • जामुन वायु, कफ और पित्त का नाश करता है ।
                • एक मान्यता के अनुसार जामुन का फल गर्भवती महिलाओं को खिलाने से उनके होने वाले बच्चे के हौंठ सुन्दर होते हैं ।
                • जामुन का रस, शहद, आंवले या गुलाब के फूल का रस बराबर मात्रा में मिलाकर एक दो माह तक प्रतिदिन सुबह के वक्त सेवन करने से रक्त की कमी एवं शरीरिक दुर्बलता दूर होती है । यौन तथा स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है ।
                • जामुन के रस पर शोध जारी है जिसमें विशेष औषधियों का निर्माण किया जा रहा है जिसमें माध्यम से सिर के सफेद बाल आना बंद हो जाऐंगें ।
                • जामुन का रस त्वचा का रंग बनाने वाली रंजक द्रव्य मेलानिन कोशिका को सक्रिय करता है, अतः यह रक्तहीनता तथा ल्यूकोडर्मा की उत्तम औषधि है ।
                • जामुन के कोमल पत्ते, आम के कोमल पत्ते और कैंथ कपास के फल को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसें और निचोड़कर रस निकालें । इसमें शहद मिलाकर कान में डालने से कान का बहना रूक जाता है ।

                Wednesday, May 18, 2016

                एवोकाडो के फायदे,Avocado Health Benefits in Hindi,

                एवोकैडो मूल रूप से अमेरिकी महाद्वीप से आया यह फल भारत में मखनफल के नाम से मिलता है । इस फल में विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है । एवोकैडो में एंटी-आॅक्सीडेंटस भी होते हैं जो त्वचा की सुरक्षा करती है । एवोकैडो आपकी स्किन की कोशिकाओं को दोबारा बनने में मदद करता है और इससे आपकी त्वचा को जवां और ताजा लुक मिलता है । एवोकैडो देवभूमि उत्तराखंड में बटरफ्रूट नाम से जाना जाता है । वास्तव में ये ऐसे वृक्ष हैं जिनके फल का गूदा मक्खन की तरह डबलरोटी में लगा कर खाया जाता है । यह पौधा वर्ष 1950 में मैक्सिको से लाया गया था जो कि बागेश्वर और जौलीकोट (नैनीताल) में लगाए गए । यह पौधा 3 से 6 हजार फीट की ऊंचाई पर लगता है और इसमें फल 5 से 6 साल में आते हैं । 

                आइए जानते है ऐवकाडो से होने वाले कुछ स्वास्थ्य लाभ के बारे में, Health Benefits of Avocados

                • मखनफल (एवोकैडो) मूल रूप से अमेरिकी महाद्वीप से आया यह फल भारत में मखनफल के नाम से मिलता है । इस फल में विटामिन ई भरपूर मात्रा में होता है एवोकैडो में एंटी-आॅक्सीडेंटस भी होते हैं जो त्वचा की सुरक्षा करती है । एवोकैडो आपकी त्वचा की कोशिकाओं को दोबारा बनने में मदद करता है और इससे आपकी त्वचा को जंवा और ताजा लुक मिलता है ।
                • बेजोड़ है एवोकैडो - इसमें कुदरती एंटी इन्लैमटरी तत्व होते हैं, जो जलन कम करते हैं । इसमें विटामिंस और पोषक तत्व भी होते है। 1-2 एवोकैडो को काटकर बीच वाला हिस्सा (गूदा) मसल लें । इसमें थोड़ा आॅलिव आॅयल और ऐलोवेरा जेल मिलाकर लगाएं । तब तक लगा रहने दें जब तक कि इसका रंग बदल न जाए । फिर त्वचा को गीला करके गीली रूई से हलके से साफ करें । अब ठंडे पानी से धो लें ।
                • एवोकैडो यानि रूचिरा नामक पहाड़ी फल के सेवन से कामेच्छा बढ़ाने में मदद मिलती है । 
                • इसमें फोलिक एसिड, प्रोटीन, विटामिन बी 6 और पोटैशियम अच्छी मात्रा में है जो सेक्स पावन बढ़ाने और ऊर्जा देने में मददगार है । इसका नियमित सेवन महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए भी फायदेमंद है ।
                • एवोकैडो यानि रूचिरा नामक पहाड़ी फल के सेवन से कामेच्छा बढ़ाने में मदद मिलती है इसमें फोलिक एसिड, प्रोटीन, विटामिन बी 6 और पोटैशियम अच्छी मात्रा में है जो सेक्स पावर बढ़ाने और ऊर्जा देने में मददगार है । इसका नियमित सेवन महिलाओं में फर्टिलिटी बढ़ाने के लिए भी फायदेमंद है 
                • डायबिटीज और रक्तचाप से पीड़ित मरीजों के लिए भी यह बेहद लाभदायक है 
                • रूचिरा या मक्खन फल या एवोकैडो कैरिबियाई क्षेत्र से संबंधित एक फल है । अगर स्त्री हते में एक बार एक एवोकैडो खाती है तो उसके हार्मोंस संतुलित रहते हैं, गर्भपात नहीं होता और सर्विक्स कैंसर का भी खतरा नहीं होता है । 
                • एक एवोकैडो में 14000 से भी अधिक फोटोलिटिक केमिकल होेते हैं । इतने पौष्टिक तत्वों से पूर्ण होने के कारण यह शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता को भी बढ़ाने में मदद करता है । एवोकैडो 10 या 12 मीटर के रूप में उच्च तक पहुँच जाता है जो एक बारहमासी पौधा है । 
                • एवोकैडो फल, अंडाकार गोलाकार या अंडाकार लम्बी एक डूररूप् मांसल, नाशपाती के आकार है इसका रंग हल्के या गहरे हरे , बैंगनी या काला हो सकता है । एवोकैडो विटामिन ई, ए, बी1, बी3, डी और जैसे लोहा, फास्फोरस और मैग्नीशियम के साथ ही फोलिक एसिड, नियासिन और बायोटिन के रूप में एक हद तक कम सी, खनिज के लिए होता है । 

                • एवोकैडो का औषधीय मूल्य है इसका तेल निष्कर्णण, शैम्पू, और सौंदर्य प्रसाधन, क्रीम और त्वचा कलीन्जर के कच्चे माल में उपयोग किया जाता है । एवोकैडो पेड़ ठंड के प्रति संवेदनशील होता है । पेड़ों में फूल दिसम्बर से मार्च और सबसे ज्यादा फूल अगस्त से अक्टूबर में लगते हैं । फल नियमित रूप से गोल या नाशपाती के आकार रहे हैं । 
                • घरेलू उपाय जो गंजेपन को दूर भगाये - एवोकैडो और नारियल के दूध के इस्तेमाल से बालों का झड़ना बंद होता है और नए बाल आने लगते हैं । इसके लिए एवोकैडो, नारियल के दूध और नीबू के रस को मिलाकर मिश्रण तैयार कर लें । अब इस मिश्रण को बालों की जड़ों में मालिश करंे और लगभग आधे घंटे के लिए छोड़ दें । एक हल्के शैम्पू का उपयोग कर अपने बालों को धो लें । फायदा होगा ।
                • नाशपाती के समान दिखने वाले रूचिरा या एवोकाडो को पहले सब्जी की प्रजाति का मानते थे पर यह एवोकाडो फल की श्रेणी में आता है और स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी फायदेमंद है । 
                • इस फल में प्रोटीन, रेशे, नियासिन, थाइमिन, राइबोफलेविन, फोलिक एसिड और जिंक जैसे तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं । ऐवोकाडो में कोलेस्टोल की मात्रा बिलकुल नहीं पाई जाती है इसलिए कहावत ‘‘ एवोकाडो ए डे ’’ कहें तो अतिश्योक्ति नहीं होगी । 
                • एवोकाडो को लम्बाई में काट कर बीच का गूदा चम्मच से निकाल कर उसे टमाटर, प्याज और लहसुन के साथ मिलाकर सेंडविच बनाकर खा सकते हैं । एवोकाडो में ऐसी वसा होती है जो शरीर के लिए आवश्यक होता है । 
                • इसका जूस पीने से आपका पेट पूरे दिन भरा रहेगा और आप ओवर ईटिंग नहीं करेंगें । एवोकाडो में काफी मात्रा में कैलोरी पाई जाती है, जो हृदय के रोगों से हमें बचाती है । इसमें कोलेस्टोल की मात्रा बिल्कुल नहीं पाई जाती । एवोकाडो इसमें अच्छी मात्रा में फैट पाया जाता है दिमाग तक ब्लड फ्लो को तेज करता है ।

                Thursday, May 12, 2016

                गुड खाने के फायदे,Health Benefits of Molasses in Hindi

                प्राकृतिक मिठाई के तौर पर पहचाना जाने वाला गुड़, स्वाद के साथ ही सेहत का भी खजाना है, अगर अप अब तक अनजान हैं इसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों से, तो अब जान जानि‍ए गुड़ खाने के  लाभ
                  • गुड़ के साथ पके चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल जाती है।
                  • गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा की परेशानी नहीं होती है।
                  • जुकाम जम गया हो, तो गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी बनाकर खिलाएं।
                  • गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
                  • भोजन के बाद गुड़ खा लेने से पेट में गैस नहीं बनती ।
                  • सर्दी के दिनों में गुड़,अदरक और तुलसी के पत्तों का काढ़ा बना कर गरमा गर्म पीना काफी अच्छा रहता है और यह काढ़ा हमें सर्दी-जुकाम से भी बचाता है।
                  • गुड़ उन लोगों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है जिनके शरीर में खून की कमी (एनीमिया) होती है, क्योंकि गुड आयरन का एक बहुत ही अच्छा स्रोत होता है और यह शरीर में हीमोग्लोबिन का लेवल बढाने में मदद करता है।
                  • गुड हमारी पाचन क्रिया के लिए भी काफी अच्छा होता है इसलिए गुड को थोड़ी मात्रा में खाना खाने के बाद जरूर खाना चाहिए।
                  • गुड का प्रयोग पीलिया रोग का उपचार करने के लिये भी किया जाता है।
                  • गुड का इस्तेमाल विभिन्न तरह की अलग अलग डिश बनाने में किया जाता है जैसे – तिल गुड की चिक्की, गुड की खीर, गुड का परांठा आदि। इन सभी डिश को आप सर्दियों में मौसम में बना सकते है।
                  • गुड में अधिक मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है जो ब्लड प्रेशर को कंट्रोल रखने में सहायता करता है
                  • अगर आप कब्ज की समस्या से परेशान है तो रात में खाना खाने के बाद एक टुकड़ा गुड खाने से आप कब्ज की समस्या से मुक्ति पा सकते है।
                  • पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
                  • गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढती है।
                  • पांच ग्राम गुड़ को इतने ही सरसों के तेल में मिलाकर खाने से श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।
                  • पाचन तंत्र को ठीक करता है गुड या प्राकर्तिक शक्कर खाने से खून साफ होता है रोज़ खाना खाने के बाद गुड खाने से पेट में ठंडक मिलती है और गैस नहीं बनती है । दूध के साथ गुड खाने से पाचन तंत्र हेल्थी रहता है ।
                  • मासिक धर्म में दर्द - जिन महिलाओ को मासिक धरम के दौरान दर्द रहता हो उन्हें गुड खाना चाहिए इससे पेट को आराम मिलता है और दर्द में राहत मिलती है ।
                  • लौह तत्व से भरपूर - गुड या प्राकर्तिक शक्कर में खून के लिए जरूरी लौह तत्व भरपूर मात्रा में होता है । अतः इसे अनीमिया के मरीजों को खाना चाहिए ।
                  • स्किन के लिए गुणकारी - गुड खाने से खून के बुरे तत्व साफ हो जाते है जिससे त्वचा में निखर आता है और कील मुहांसो की समस्या भी दूर रहती है ।
                  • सर्दी में उपयोग - सर्दी खांसी में या प्राकर्तिक शक्कर से राहत मिलती है और चाय में या लड्डू में भी इसका उपयोग किया जा सकता है ।
                  • ऊर्जा का स्त्रोत - गुड खाने से हमें ऊर्जा मिलती है जब भी थकन या कमजोरी लगे तो गुड खाने से तुरंत आराम मिलता है ।
                  • दमा के मरीज़ो को गुड या शक्कर का सेवन फायदेमंद रहता है क्यूंकि इसमें एलर्जी से लड़ने वाले तत्व होते है ।
                  • गुड़ खाने से नहीं होती गैस की दिक्कत पाचन क्रिया को सही रखता है
                  • गुड़ शरीर का रक्त साफ करता है और मेटाबॉल्जिम ठीक करता है। रोज एक गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन पेट को ठंडक देता है। इससे गैस की दिक्कत नहीं होती। जिन लोगों को गैस की परेशानी है, वो रोज़ लंच या डिनर के बाद थोड़ा गुड़ ज़रूर खाएं
                  • गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों के लिए बहुत फायदेमंद है। खासतौर पर महिलाओं के लिए इसका सेवन बहुत अधिक ज़रूर है
                  • त्वचा के लिए गुड़ ब्लड से खराब टॉक्सिन दूर करता है, जिससे त्वचा दमकती है और मुहांसे की समस्या नहीं होती है।
                  • गुड़ की तासीर गर्म है, इसलिए इसका सेवन जुकाम और कफ से आराम दिलाता है। जुकाम के दौरान अगर आप कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
                  • एनर्जी के लिए -- बुहत ज़्यादा थकान और कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन करने से आपका एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता। दिनभर काम करने के बाद जब भी आपको थकान हो, तुरंत गुड़ खाएं।
                  • गुड़ शरीर के टेंपरेचर को नियंत्रित रखता है। इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं, इसलिए दमा के मरीज़ों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है।
                  • जोड़ों के दर्द में आराम रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक का सेवन करें, इससे जोड़ों के दर्द की दिक्कत नहीं होगी।
                  • जोड़ो में ना होने दे दर्द-सर्दियां आते ही लोगों को जोड़ो के दर्द की शिकायत होने लगती है। गुड़ आपको इस दर्द से राहत दिलाता है। आप गुड़ को अदरक के साथ खा सकते हैं या चाहे तो एक ग्लास दूध के साथ भी आप इसे ले सकते हैं। ये हड्डियों को मजबूत बनाता है।
                  • त्वचा के लिए-गुड़ खाने से त्वचा संबंधी रोगों से निजात मिलती है। साथ ही मुंहासों की शिकायत भी नहीं रहती और त्वचा में निखार आता है

                    Tuesday, May 10, 2016

                    मधुमेह आहार चार्ट ,Diet Plan for Diabetes In Hindi

                    मधुमेह यानि डायबिटीज एक खतरनाक रोग अवश्य है लेकिन इसका मरीज कई तरीको से इस रोग को नियंत्रण में रख सकता है एवं इससे होने वाले अन्य कुप्रभाओं से बच सकता है। मधुमेह को नियंत्रण में रखने का पहला तरीका है नियमित रूप से व्यायाम करना और दूसरा तरीका है सही खाद्य पदार्थों का सेवन करना। आइये यहाँ हम इस बात की चर्चा करें कि मधुमेह रोगियों की आहार तालिका क्या होनी चाहिए।

                    Diet Plan for Diabetes

                    • बीन्स- बीन्स मधुमेह के मरीजों के लिए बहुत हीं उपयुक्त आहार होता है। मधुमेह के मरीजों को खान पान में बहुत हीं परहेज करनी पड़ती है जिसकी वजह से उनमें फाइबर की कमी हो जाती है जिससे कब्ज रहने लगता है एवं पाचन सम्बन्धी अन्य गड़बड़ियां उत्पन्न होने लगती है। चूँकि बीन्स फाइबर का बहुत हीं अच्छा स्रोत होता है इसलिए यह सब्जी मधुमेह के मरीजों को बहुत हीं लाभ पहुंचाता है। खाना खाने के बाद मधुमेह के मरीजों का शुगर लेवल अचानक बढ़ जाता है जिससे कई परेशानियां पैदा हो जाती हैं लेकिन बीन्स पाचन क्रिया को धीमा करती है और ब्लड शुगर लेवल के एकाएक बढ़ने पर नियंत्रण लगाती है। बीन्स का प्रभाव इतना शत्क्तिशाली होता है कि यह मधुमेह के मरीजों के समग्र रक्त शर्करा के स्तर को कम करता है। मधुमेह के मरीजों को प्रोटीन की आवश्यकता होती है। चूँकि बीन्स में प्रोटीन भी प्रचूर मात्रा में होता है इसलिए यह सब्जी उन मरीजों के लिए बहुत हीं लाभकारी है। मधुमेह के मरीजों को नियमित रूप से बीन्स का सेवन करना चाहिए
                    • करेले -प्राचीन काल से करेले मधुमेह के इलाज में रामबाण माना जाता रहा है। इसके कड़वे रस के सेवन से रक्‍त में शर्करा की मात्रा कम होती है। मधुमेह के रोगी को प्रतिदिन करेले के रस का सेवन करने की सलाह दी जाती है। इससे आश्चर्यजनक लाभ प्राप्‍त होता है। नवीन शोधों के अनुसार उबले करेले का पानी मधुमेह को शीघ्र और स्थाई रूप से खत्‍म करने की क्षमता रखता है।
                    • मछली: अगर आप मांसाहारी है तो मछली आपके लिए बहुत हीं उत्तम आहार है। मछली प्रोटीन का बहुत हीं अच्छा स्रोत होता है। इस तरह आपके शरीर में प्रोटीन की कमी नहीं होने पाती। यह उच्च वसा वाले मांस का भी एक बढ़िया विकल्प है अतः आपको मीट वगैरह खाने की जरुरत नहीं रहती। प्रोटीन के अलावा मछली ओमेगा 3 फैटी एसिड का सबसे अच्छा स्रोत होता है।
                    • ओमेगा 3 फैटी एसिड आपकी धमनियों को साफ एवं स्वस्थ रखने में अहम् भूमिका निभाता है। मधुमेह के रोगियों को अक्सर उच्च ट्राइग्लिसराइड्स और एचडीएल के कम स्तर की शिकायत रहती है। एचडीएल 'अच्छा कोलेस्ट्रॉल होता है जो ख़राब कोलेस्ट्रॉल के कुप्रभाव को कम करता है। ओमेगा -3 फैटी एसिड शुगर लेवल कम करने में विभिन्न तरीकों से मददगार सिद्ध होता है। ओमेगा-3 फैटी एसिड्स दिल एवं दिमाग के लिए भी टोनिक का काम करता है।
                    • ब्राउन राइस- सफेद चावल और मैदे में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा ज्‍यादा होती है। इसलिये आपको ब्राउन राइस और गेहूं का आटा ही खाना चाहिये। अच्‍छा होगा कि आप चावल की जगह पर रोटी ही खाएं। 
                    • भारतीय करी- भारतीय करी मसालेदार होती है, लेकिन अगर हाई ब्‍लड शुगर की बात आती है तो यह फादेमंद भी होती है। आपको सब्‍जी बनाते वक्‍त ज्‍यादा तेल का इस्‍तमाल करने से बचना चाहिये। मसाले तब तक सही होते हैं जब तक आपका पाचन तंत्र बिल्‍कुल ठीक है। 
                    • दाल- भारतीय भोजन में काफी अलग-अलग तरह की दालें पाई जाती हैं। दाल में प्रोटीन और फाइबर होता है जिसको खाने से खून में चीनी का लेवल नहीं बढता। प्रोटीन शक्‍ति देता है और थकान नहीं लगने देता
                    • सेब और अनार: फलों में मधुमेह के मरीजों को सेब एवं अनार खाने की सलाह दी जाती है। सेब में पेक्टिन होता है जो आपके शरीर की इंसुलिन की जरुरत को कम करता है। यह शरीर के विषैले तत्व को भी बाहर निकालता है। अतः सेब को मधुमेह के मरीजों के लिए एक उपयुक्त फल माना जाता है।
                    • अनार मध्य पूर्व के देशों में मधुमेह के मरीजों में बहुत लोकप्रिय हैं। इसका सबसे प्रमुख कारण यह है कि मीठा होते हुए भी यह मधुमेह के मरीजों के शरीर की रक्त शर्करा के स्तर को प्रभावित नहीं करता। शोधकर्ताओं ने पाया है कि अनार का रस पीने वाले मरीजों में अथेरोसेलोरोसिस होने का खतरा कम पाया जाता है।
                    • पालक एवं हरी सब्जियां: मधुमेह के मरीजों को हरी सब्जियों का सेवन भरपूर मात्रा में करनी चाहिए। हरी सब्जियां फाइबर से परिपूर्ण होती हैं जो किसी भी इंसान के लिए बहुत हीं फायदेमंद होता है। पालक में तरह तरह के बी विटामिन्स पाए जाते हैं जो दिमाग की बीमारियों को दूर रखते हैं एवं तंत्रिका तंत्र को मजबूत बनाते हैं।
                    • दालचीनी: दालचीनी घर घर में पाया जाने वाला एक मसाले के रूप में जाना जाता है। लेकिन यह न सिर्फ आपके खाने का जायका बढाता है बल्कि यह आपके शरीर में रक्त शर्करा को भी नियंत्रण में रखता है। जिन लोगों को मधुमेह नहीं है वे इसका सेवन करके मधुमेह से बच सकते हैं। और जो मधुमेह के मरीज हो चुके हैं वे इसके सेवन से ब्लड शुगर को कम कर सकते है। दालचीनी को पीसकर चाय में चुटकी भर मिलाकर दिन में दो तीन बार पीया करें। इसका ज्यादा सेवन करना उचित नहीं होता इसलिए रोजाना थोड़ा थोड़ा हीं सेवन करें।
                    • लहसुन: लहसुन भी ब्लड शुगर को कम करने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अतः अगर आप मधुमेह के मरीज हैं तो रोज सुबह लहसुन की दो तीन कलियों को चबाया करें या कुतरकर निगला करें। इससे आपको हाई ब्लड प्रेशर एवं दिल की बीमारियों में भी बहुत लाभ मिलेगा। मधुमेह से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है लेकिन लहसुन कैंसर को रोकने में बहुत हीं प्रभावशाली माना जाता है।
                    • ओटमील यानि जई का आटा: जई का आटा मधुमेह के लिए मरीजों के लिए बहुत हीं उपयुक्त आहार माना जाता है। आप इसका सेवन सुबह शाम नाश्ते के रूप में किया करें तो आपको बहुत लाभ पहुंचेगा।

                    मधुमेह नियंत्रण-Diabetes Control

                    • हर 2-3 घंटे के अंतराल में छोटे छोटे आहार लें।
                    • बेकरी पदार्थों जैसे केक, पेस्ट्री, पेटीज के स्थान पर साबुत पका अनाज लें जैसे उबली मूँग दाल, उबले चने की चाट आदि ।
                    • सोने के 2 घंटे पूर्व तक ही कार्बोहाइड्रेट का सेवन करें।
                    • फ़ल व सब्जियों का सेवन अधिक से अधिक मात्रा में करें।
                    • डिब्बाबंद पदार्थ जैसे पिज्जा, कंडेंस्ड दूध, टिन्ड फ़ल आदि का प्रयोग ना करें ।
                    • रोटी बनाने के लिये गेहुं का आटा, चने का आटा व जौ का आटा मिश्रित करके ही प्रयोग करें ।
                    • छिलके वाली दालों का प्रयोग अधिक करें ।
                    • दिन भर में 3-4 चम्मच रिफ़ाइन्ड तेल का ही प्रयोग करें ।
                    • भोजन करने से पहले सलाद अवश्य खायें ।
                    • अधिक कैलोरी वाले फ़ल जैसे केला, आम, चीकू, अंगूर का सेवन कम से कम करें ।
                    • जड वाली सब्जियों जैसे आलू, शकरकंदी, जिमीकंद का प्रयोग कम करें व रेशेदार पदार्थों का सेवन अधिक करें।

                    Sunday, May 8, 2016

                    देशी घी के फायदे,Health Benefits of Ghee in Hindi,

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                    आयुर्वेद में घी को स्वाद बढ़ाने वाला और ऊर्जा प्रदान करने वाला माना गया है। दरअसल घी में तीन ऐसी खूबियां हैं, जिनकी वजह से इसका इस्तेमाल जरूर करना चाहिए। पहली बात यह कि घी में शॉर्ट चेन फैटी एसिड होते हैं, जिसकी वजह से यह पचने में आसान होता है। ये हमारे हॉर्मोन के लिए भी फायदेमंद होते हैं, जबकि मक्खन में लांग चेन फैटी एसिड ज्यादा होते हैं, जो नुकसानदेह होते हैं। घी में केवल कैलोरी ही नहीं होती। इसमें विटामिन ए, डी और कैल्शियम, फॉस्फोरस, मिनरल्स, पोटैशियम जैसे कई पोषक तत्व भी होते हैं
                    • एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर,High in antioxidants- घी बनाते समय घी के तीन लेयर बन जाते हैं ,पहला लेयर पानी से युक्त होता है, जिसे बाहर निकाल लिया जाता है ,इसके बाद दूध के ठोस भाग को निकाला जाता है, जो अपने पीछे एक सुनहरी सेचुरेटेड चर्बी को छोड़ जाता है। जिसमें कंजुगेटेड लाईनोलीक एसिड पाया जाता है। यह कंजुगेटेड लाईनोलीक एसिड शरीर के संयोजी उतकों को लुब्रीकेट करने व वजन कम होने से रोकने में मददगार के रूप में जाना जाता है। यह भी एक सच है कि, घी एंटीआक्सीडेंट गुणों से भरपूर होता है।
                    • जोड़ो के दर्द में उपयोगी,Useful in joint pain-जोड़ों का दर्द हो, या हो त्वचा का रूखापन, या कराना हो पंचकर्म शोधन, आयुर्वेद में हर जगह घी का उपयोग निश्चित है। हम जानते हैं, कि हमारा शरीर अधिकतर पानी में घुलनशील हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालता है, लेकिन घी चर्बी में घुलनशील हानिकारक रसायनों को हमारे आहारनाल से बाहर निकालता है। घी को पचाना आसान होता है, साथ ही इसका शरीर में एल्कलाईन फार्म में होने वाला परिवर्तन बहुत ज्यादा एसिडिक खान-पान के कारण होने वाले पेट की सूजन (गेस्ट्राईटीस ) को भी कम करता है।
                    • आंखों के लिए फायदेमंद,Beneficial for the eyes-एक चम्मच गाय के घी में एक चौथाई चम्मच काली मिर्च मिलाकर सुबह खाली पेट व रात को सोते समय खाएं। इसके बाद एक गिलास गर्म दूध पिएं। आंखों की हर तरह की समस्या दूर हो जाएगी।
                    • युवावस्था बनाए रखता,Maintains youth-आयुर्वेदिक मान्यता है एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री मिलाकर पीने से शारीरिक, मानसिक व दिमागी कमजोरी दूर होती है। साथ ही, जवानी हमेशा बनी रहती है। काली गाय के घी से बूढ़े व्यक्ति भी युवा समान हो जाता है। प्रेग्नेंट महिला घी-का सेवन करे तो गर्भस्थ शिशु बलवान, पुष्ट और बुद्धिमान बनता है।
                    • कैंसर रोधी,Anti-cancer-गाय के घी में कैंसररोधी गुण पाए जाते हैं। इसके रोजाना सेवन से कैंसर होने की संभावना बहुत कम हो जाती है। विशेषकर यह स्तन व आंत के कैंसर में सबसे अच्छे तरीके से काम करता है।
                    • थकान दूर करता है,Removes fatigue-संभोग के बाद कमजोरी या थकान महसूस हो तो एक गिलास गुनगुने दूध में गाय का घी मिलाकर पी लेने से थकान व कमजोरी बहुत जल्दी दूर हो जाती है।
                    • स्त्रियों की समस्या में लाभदायक,The problem of women-स्त्रियों में प्रदर रोग की समस्या में गाय का घी रामबाण की तरह काम करता है। गाय का घी, काला चना व पिसी चीनी तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बनाकर खाली पेट सेवन करें।
                    •  इम्यून सिस्टम स्ट्रॉन्ग करने के लिए-देसी घी इम्यून सिस्टम को स्ट्रॉन्ग करने में मदद करता है, जिससे इन्फेक्शन से और बीमारियों से लड़ने की ताकत मिलती है
                    • देसी घी में सूक्ष्म जीवाणु, एंटी-कैंसर और एंटी-वायरल एजेंट होते हैं जो कई बीमारियों से लड़ने में मदद करते हैं।
                    • देशी घी शरीर में जमा फैट को गला कर विटामिन में बदलने का काम करता है। इसमें चेन फैट एसिड कम मात्रा में होता है, जिससे आपका खाना जल्दी डाइजेस्ट होता है और मेटाबॉल्जिम सही रहता है।
                    • खाने में देशी घी मिलाकर खाने से खाना जल्दी डाइजेस्ट होता है। यह मेटाबॉल्जिम प्रोसेस को बढाता है।
                    • अल्सर, कब्ज और पाचन क्रिया में किसी भी प्रकार की दिक्कत होने पर देशी घी बेहद कारगर होता है।
                    •  देशी घी में सीएलए (CLA) होता है जो मेटाबॉल्जिम को सही रखता है। इससे वजन कंट्रोल में रहता है। सीएलए इंसुलिन की मात्रा को कम रखता है, जिससे वजन बढ़ने और शुगर जैसी दिक्कतें होने का खतरा कम रहता है। 
                    • यह हाइड्रोजनीकरण से नहीं बनाया जाता है, इसलिए देशी घी खाने से शरीर में एक्स्ट्रा फैट बनने का सवाल ही नहीं पैदा होता।

                    Wednesday, March 23, 2016

                    हल्दी दूध पीने के फायदे,Health Benefits of Turmeric Milk in Hindi,

                    हल्दी दूध पीने के फायदे,Health Benefits of Turmeric Milk in Hindi
                    दमा से लेकर ब्रोंकाइट‌िस जैसे रोग हल्दी एंटी माइक्रोबियल है इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा, ब्रोंकाइटिस, फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम हो सकता है। यह बैक्टीरियर और वायरल संक्रमणों से लड़ने में मददगार है।
                      • वजन घटाने में फायदेमंद-गर्म दूध के साथ हल्दी के सेवन से शरीर में जमा फैट्स घटता है। इसमें मौजूद कैल्शियम और मिनिरल्स सेहतमंद तरीके से वेट लॉस में मददगार हैं।
                      • दर्द से आराम-हल्दी वाले दूध के सेवन से गठिया से लेकर कान दर्द जैसी कई समस्याओं में आराम मिलता है। इससे शरीर का रक्त संचार बढ़ जाता है जिससे दर्द में तेजी से आराम होता है
                      • खून और लिवर की सफाई-आयुर्वेद में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल शोधन क्रिया में किया जाता है। यह खून से टॉक्सिन्स दूर करता है और लिवर को साफ करता है। पेट से जुड़ी समस्याओं में आराम के लिए इसका सेवन फायदेमंद है।
                      • मजबूत हड्डियां-दूध में कैल्शियम अच्छी मात्रा में होता है और हल्दी में एंटीऑक्सीडेट्स भरपूर होते हैं इसलिए इनका सेवन हड्डियों को मजबूत करता है
                      • गुमचोट के इलाज में सहायक-एक गिलास गर्म दूध में एक टी-स्पून हल्दी मिलाकर पीने से चोट के दर्द और सूजन में राहत मिलती है। चोट पर हल्दी और पानी का लेप लगाने से आराम मिलता है। आधा लीटर गर्म पानी, आधा चम्मच सेंधा नमक और एक चम्मच हल्दी डाल कर अच्छी तरह मिलाएं। इस पानी में एक कपड़ा डाल कर निचोड़ लें और चोट वाली जगह पर इससे सिंकाई करें।
                      • हड्डियों को मजबूत बनाए-रात को सोते समय हल्दी की एक इंच लंबी कच्ची गांठ को एक गिलास दूध में उबालें। थोड़ा ठंडा होने पर इसे पी लें। ऑस्टियोपोरोसिस जैसे रोगों का खतरा कम होता है।
                      • गठिया का इलाज-हल्दी इन रोगों के इलाज के लिए अनूठा घरेलू प्राकृतिक उपाय है। सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म दूध में एम चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से गठिया के दर्द में राहत मिलती है।
                      • एनीमिया के उपचार में प्रभावी-लोहे से समृद्ध हल्दी एनीमिया के इलाज के प्राकृतिक उपायों में एक है। कच्ची हल्दी से निकाला गया आधा चम्मच रस एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर पीना फायदेमंद है।
                      • -रात को सोते समय देशी गाय के गर्म दूध में एक चम्मच देशी गाय का घी और चुटकी भर हल्दी डालें . चम्मच से खूब मिलाकर कर खड़े खड़े पियें. इससे त्रिदोष शांत होते है
                      • संधिवात यानी अर्थ्राईटिस में बहुत लाभकारी है.किसी भी प्रकार के ज्वर की स्थिति में , सर्दी खांसी में लाभकारी है
                      • हल्दी एंटी माइक्रोबियल है इसलिए इसे गर्म दूध के साथ लेने से दमा,ब्रोंकाइटिस,फेफड़ों में कफ और साइनस जैसी समस्याओं में आराम होता है यह बैक्टीरियल और वायरल संक्रमणों से लड़ने में मदद करती है
                      • वजन घटाने में फायदेमंद गर्म दूध के साथ हल्दी के सेवन से शरीर में जमा चर्बी घटती है. इसमें मौजूद कैल्शियम और मिनिरल्स सेहतमंद तरीके से वजन घटाने में सहायक हैं
                      • अच्छी नींद के लिए हल्दी में अमीनो एसिड है इसलिए दूध के साथ इसके सेवन के बाद नींद गहरी आती है.
                      • अनिद्रा की दिक्कत हो तो सोने से आधे घंटे पहले गर्म दूध के साथ हल्दी का सेवन करें.
                      • दर्द से आराम हल्दी वाले दूध के सेवन से गठिया से लेकर कान दर्द जैसी कई समस्याओं में आराम मिलता है. इससे शरीर का रक्त संचार बढ़ जाता है जिससे दर्द में तेजी से आराम होता है.
                      • खून और लिवर की सफाई आयुर्वेद में हल्दी वाले दूध का इस्तेमाल शोधन क्रिया में किया जाता है। यह खून से टॉक्सिन्स दूर करता है और लिवर को साफ करता है. पेट से जुड़ी समस्याओं में आराम के लिए इसका सेवन फायदेमंद है.
                      • पीरियड्स में आराम हल्दी वाले दूध के सेवन से पीरियड्स में पड़ने वाले क्रैंप्स से बचाव होता है और यह मांसपेशियों के दर्द से छुटकारा दिलाता है
                      • मजबूत हड्डियां दूध में कैल्शियम अच्छी मात्रा में होता है और हल्दी में एंटीऑक्सीडेट्स भरपूर होते हैं

                        Sunday, March 20, 2016

                        अनार खाने के फायदे-Health Benefits of Eating Pomegranate,Healthy Eating Tips

                        हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसके साथ सबसे अच्छी बात यह है कि यह पूरे साल उपलब्ध रहता है। हालांकि कई लोग पौष्टिक फल की श्रेणी में इस शानदार फल को कम आंकते हैं। लेकिन आज हम आप को बताते हैं कि अनार किस तरह हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है। अनार के कई बडे़ फायदे हैं, जैसे अगर आपके घर में कोई गर्भवती महिला है तो आप उसे रोज अनार का जूस पिलाएं। इससे उसका बच्चा स्वस्थ पैदा होगा है और उसके बच्चे को कम वजन जैसी बीमारी का सामना नहीं करना पड़ेगा
                        • गर्भवती  महिला को अनार का जूस पीने से उसका बच्चा उसका स्वस्थ पैदा होता है उसके होने वाले बच्चे को कम वजन जैसी बीमारी का सामना नहीं करना पड़ता
                        • बुढापा आने से बचाए-बहुत कम लोग ही इस तथ्य से परिचित हैं कि अनार एंटीऑक्सीडेंट का बहुत ही अच्छा स्रोत है। इसलिए यह शरीर की कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाता है, जिससे आप वक्त से पहले बूढ़े नहीं दिखते। फ्री रेडिकल्स का निर्माण सूर्य की रोशनी और वातावरण में मौजूद विषैले तत्व से होता है।
                        • प्राकृतिक ब्लड थीनर-खून दो तरह से जमते हैं। पहला तो कटने या जलने की स्थिति में खून जमता है, जिससे खून का बहाव रुक जाता है। वहीं दूसरे तरह का खून आंतरिक रूप से जमता है, जो बहुत ही खतरनाक होता है। मसलन हृदय या धमनी में खून जम जाने से इसका परिणाम प्राणघातक भी हो सकता है। अनार में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण खून के लिए वही काम करता है, जो पेट के लिए थीनर करता है। यह शरीर में खून को जमने या थक्का बनने से रोकता है।
                        • एथेरॉसक्लेरॉसिस से रोकता है-बढ़ती उम्र और गलत खानपान से रक्तवाहिनी की दीवार कोलेस्ट्रोल व अन्य चीजों से कठोर हो जाती है, जिससे रक्त के बहाव में अवरोध पैदा होता है। अनार का एंटीऑक्सीडेंट गुण कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन और कोलेस्ट्रोल को ऑक्सीडाइजिंग से रोकता है। यानी अनार रक्तवाहिनी की दीवार को अतिरिक्त वसा से कठोर होने से बचाता है।
                        • ऑक्सीजन मास्क की तरह काम-साधारण शब्दों में कहें तो अनार का जूस खून में ऑक्सीजन के स्तर को बढ़ाता है। इसका एंटीऑक्सीडेंट कोलेस्ट्रोल को कम करता है, फ्री रेडिकल्स से बचाता है और खून का थक्का बनने से रोकता है। यानी अनार शरीर में खून की प्रवाह को बेहतर बनाता है, जिससे खून में ऑक्सीजन का स्तर भी सुधरता है।
                        • गठिया रोग से रोकथाम-अनार गठिया रोग से पीड़ित व्यक्ति के कार्टिलेग को नुकसान पहुंचने से बचाता है। यह फल कार्टिलेग को नष्ट करने वाले एंजाइम से लड़ता है और जलन और सूजन से भी सुरक्षा प्रदान कराता है।
                        • इरेक्टाइल डिसफंक्शन से बचाता है-आप माने या न माने, अनार लज्जनजक स्थिति निर्मित होने से भी बचाता है। पर ध्यान रहे, यह कोई आश्चर्यजनक दवा नहीं है। अनार इलेक्टाइल डिसफंक्शन को सामान्य रूप से ही सुधारता है। हालांकि इस विषय को लेकर शोध कार्य जारी है, फिर भी इस फायदे के पक्ष में कई लोग हैं।
                        • प्रोस्ट्रेट कैंसर और दिल की बीमारी से सुरक्षा-इस विषय को लेकर भी शोध जारी है, लेकिन दो अलग-अलग अध्ययन कहती है कि अनार का जूस प्रोस्ट्रेट कैंसर से लड़ने में मदद करता है। एक प्रयोगशाला परीक्षण में पाया गया कि अनार का जूस कैंसर सेल के विकास को धीमा कर उसे मार देता है। एक अन्य प्रयोग में यह तथ्य सामने आया कि अनार खून की स्थिति को सुधारता है, जिससे हृदय से संबंधित बीमारी से ग्रसित रोगी को स्वास्थ्य लाभ मिलता है।
                        • दस्त-दस्त से राहत अगर आप दस्त से जूझ रहे हैं तो अनार खाना अच्छा रहता है। इसका जूस मिचली पैदा होने से भी बचाता है। वजन नहीं बढाता अनार से वजन नहीं बढ़ता है, क्योंकि यह बिना कैलोरी वाला फल है। हड्डी बने मजबूत कार्टिलेग को विकृत होने से बचाता है- इस फल से हड्डी को मजबूती मिलती है और कार्टिलेग को विकृत होने से बचाता है। ब्लड प्रेशर को कम करता है ब्लड प्रेशर कम करने के लिए भी अनार काफी अच्छा माना जाता है।
                        • अल्जाइमर-अल्जाइमर रोग को घटाता है अल्जाइमर रोग जैसी याददाश्त से संबंधित बीमारी से निजात दिलाने में भी अनार काफी उपयोगी होता है अनार के बहुत सारे स्वास्थ्य लाभ है| स्वास्थ्यवर्धक होने के अलावा ये बहुत स्वादिष्ट भी होता है| ये विटामिन्स का बहुत अच्छा स्त्रोत है, इसमें विटामीन A ,C और E और फोलिक एसिड भी होता है| इसमें एंटी आक्सीडेंट, एंटी वाइरल की विशेषता पाई जाती है| इसको हम स्वास्थ्य का खजाना कह सकते हैं| नीचे इसकी बहुत सी विशेषता लिखी गयीं हैं!
                        • अनार खाने से शरीर में खून का प्रवाह ठीक तरह से होता है इसके साथ साथ ये हर्ट अटेक और हर्ट स्ट्रोक को भी ठीक कर देता है|
                        • अनार में एंटी आक्सीडेंट विशेषता होने के कारण ये खराब केलोस्ट्रोल को शुरुवाती अवस्था में ही रोक देता है इस प्रकार दिल की आर्ट्रिस में खून के थक्के नहीं बनते| अनार का जूस खून को पतला बनाने की विशेषता रखता है जिससे खून के थक्के नहीं बनते|
                        • जो लोग प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर से परेशान हैं अगर वो अनार का जूस रोज़ पियें तो उनका कैंसर बढने से रुक सकता है

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