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Wednesday, March 1, 2017

जैतून के तेल के फायदे,Benefits of Olive Oil in Hindi,

जैतून के तेल के फायदे,Benefits of Olive Oil in Hindi,
जैतून का तेल ( Olive Oil) एक बेहद लाभकारी तेल है | इसे जैतून के फल से निकाला जाता है | इसके अनगिनत लाभ हैं | यह स्वास्थ्यवर्धक है, जैतून का तेल जिसे हम ऑलिव ऑयल भी कहते है। यह तेल हमारे शरीर को कई रोगों से राहत दिलवाता है। जैतून का तेल हमारी सुंदरता बढ़ाने के साथ-साथ हमें ओर भी कई समस्याओं जैसे बालों और त्वचा सम्बन्धी समस्याओं से राहत दिलवाता है। जैतून के तेल का प्रयोग खाना पकाने में, सौंदर्य सामग्री और दवाओं में तेल के रूप में प्रयोग किया जाता है।

जैतून के तेल के फायदे,Benefits of Olive Oil in Hindi,

  • जैतून ऑस्टेरोपिरोसिस में भी लाभकारी है। यह बोन मिनरल्स को इम्प्रूव करके उनमे कैल्शियम को स्टोर करता है।
  • डिप्रेशन के शिकार लोगों को भी ऑलिव का इस्तेमाल करना चाहिए। खाना बनाने में इसके तेल का इस्तेमाल करें। 
  • जैतून के तेल से चेहरे पर मसाज करने से चेहरे में चमक और झुर्रियों से भी राहत मिलती है।
  • जैतून के तेल का प्रयोग हम शरीर पर मालिश करने के लिए भी करते है ,यें त्वचा को कोमल बनाएं रखने में मदद करता है।
  • जैतून के तेल का प्रयोग पैरों के लिए भी लाभकारी होता है,पैरों को कोमल बनाएं रखने में मदद करता है।
  • जैतून के तेल से आंखों के आसपास मसाज करने से आंखों के काले घेरों से छुटकारा मिलता है।
  • जैतून के तेल का प्रयोग भोजन में करने से हड्डियां मजबूत बनती है।
  • जैतून के तेल का सेवन करने से हृदय संबधी रोगों से निजात मिलती है।
  • ऑलिव त्वचा के कैंसर से भी बचाता है। हेल्दी नेल्स- नेल्स को ऑलिव ऑयल में आधे घण्टे तक डुबोकर रखे। इससे नेल्स सॉफ्ट और चमकदार बनेगे।
  • हेल्दी लिप्स- फ़टे और रूखे लिप्स पर ऑलिव ऑयल से 5 मिंनट तक मसाज करे। इससे लिप्स सॉफ्ट और हेल्दी बनेगी।
  • ब्लैक हेड्स- नहाने के बाद एक चम्मच ऑलिव ऑयल को चेहरे पर लगाएं। ब्लैक हेड्स की प्रॉब्लम दूर होगी।
  • कैंसर- जैतून के तेल में एंटी-ऑक्सीडेंट की मात्रा भी काफी होती है। इसमें विटामिन ए, डी, ई, के और बी-कैरोटिन की मात्रा अधिक होती है। इससे कैंसर से लड़ने में आसानी होती है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में किए गए एक शोध के अनुसार जैतून का तेल आंत में होने वाले कैंसर से बचाव करने में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा यह रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद करता है। 
  • ऑस्टियोपोरोसिस- जैतून के तेल में कैल्शि‍यम की काफी मात्रा पाई जाती है, इसलिए भोजन में इसका उपयोग या अन्य तरीकों से इसे आहार में लेने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से निजात मिलती है। 
  • मोटापा- लंबे समय तक जैतून के तेल को आहार में शामिल करने पर यह शरीर में मौजूद वसा को खुद ब खुद कम करने लगता है। इससे आपका मोटापा कम होता है, वह भी हेल्दी तरीके से।
  • मेकअप रिमूवर- जैतून के तेल को मेकअप रिमूवर के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। इसके प्रयोग से त्वचा रूखी भी नहीं होती और त्वचा का रंग गोरा होता है। यह त्वचा को पोषण प्रदान करता है।
  • धूप से झुलसी त्वचा को ठीक करने के लिए जैतून का तेल बहुत प्रभावी है।
  • नहाने के बाद ऑलिव ऑयल लगाने से शरीर पर मौजूद काले धब्बे दूर हो जाते हैं और पूरे दिन आपके शरीर पर नमी बनी रहती है। Benefits of Olive Oil
  • जैतून का तेल चेहरे और गर्दन पर लगाएं। इससे चेहरे पर रौनक आ जाएगी और गर्दन का कालापन दूर हो जाएगा।
  • ऑलिव ऑयल में चीनी मिलाकर रोज स्क्रब करने से काली त्वचा की समस्या से काफी हद तक निजात मिलती है।
  • जैतून के तेल से सिर पर मालिश करने से बाल मुलायम हो जाते है। बालों की समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है।जैतून के तेल का सेवन करने से कब्ज से राहत मिलती है।
  • जैतून के तेल और चीनी का प्रयोग करके हम चेहरे पर स्क्रब भी कर सकते है।
  • जैतून के तेल का प्रयोग हम फेसपैक में भी कर सकते है।
  • जैतून का तेल त्वचा के अंदर गहराई से जा कर त्वचा को पोषण प्रदान करता है।
  • जैतून के तेल का प्रयोग खाना पकाने में,सौंदर्य सामग्री और दवाओं में तेल के रूप में किया जाता है।
  • सलाद को और भी पौष्टिक बनाने के लिए उसके ऊपर ऑलिव ऑयल डालकर खाना चाहिए।
  • कई तरह के कैंसर से बचाने में भी जैतून सहायक है।*. आँखों को स्वस्थ रखने में ऑलिव बेहद लाभकारी है।
  • ऑलिव के सेवन से खून में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा घटती है।ऑलिव ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है।
  • ऑलिव अल्जाइमर जैसी बीमारी के प्रभाव को कम करता है। Benefits of Olive Oil

Thursday, February 23, 2017

अजवायन के लाभ,Health Benefit of Carom Seeds in Hindi,

अजवायन एक रसोई घर का बे मिसाल मसाला और एक असरकारक ओषधि है। यह पकवान का स्वाद बढ़ने के साथ साथ पेट सम्बंधी अनेक रोगों जैसे वायु विकार, कृमि, अपच, कब्ज आदि को ठीक करने में मदद करता है अजवायन स्वास्थ्य और सौंदर्य, के लिए बहूत ही उपयोगी है
अजवाइन का इस्तेमाल मसाले के रूप में हर रसोई में किया जाता है । दादी - नानी के नुस्ख़े में पेट दर्द होने पर अजवाइन की फक्की मार लेने की सलाह दी जाती है । यह खाने का स्वाद तो बढ़ाती ही है , साथ ही सेहत से जुड़ी कई परेशानियों को दूर करती है । इसका चुर्ण बनाकर खाने से पाचन क्रिया दुरूस्त रहती है । आइए जाने इसके लाजवाब फायदों के बारे में

अजवायन के लाभ,Health Benefit of Carom Seeds in Hindi,

  • अपच खाना खाने के बाद भारीपन होने पर 1 चम्मच अजवाइन को चुटकी भर अदरक पाउडर के साथ खाने से फ़ायदा मिलता है ।
  • कब्ज़ कई लोगों को पेट संबधी समस्याएँ रहती है जैसे कि कब्ज़ । इसके लिए रोज़ाना खाना खाने के बाद गुनगुने पानी के साथ आधा चम्मच अजवाइन का सेवन करें । इससे कब्ज़ की परेशानी दूर होगी ।
  • गुर्दे की पथरी के इलाज के लिए अजवाइन बहुत लाभकारी है । अजवाइन , शहद और सिरका का लगातार 15 दीनो तक सेवन करने से फ़ायदा मिलता है ।
  • अस्थमा के इलाज के लिए भी अजवाइन बहुत फायदेमंद मानी जाती है । रोज़ाना दिन में 2 बार अजवाइन के साथ गुड़ का सेवन करने से लाभ मिलता है ।
  • पेट दर्द से परेशान है तो अजवाइन और नमक का सेवन गुनगुने पानी के साथ करें ।
  • पीरियड्स में होने वाली दर्द से छुटकारा पाने के लिए अजवाइन का पानी बहुत लाभदायक है । रात को 1 गिलास पानी में 1 चम्मच अजवाइन भिगो कर रख दें । सुबह पानी को पी लें ।
  • गठिया यानी जोड़ो का दर्द । गठिए के रोगी को रोज़ाना अजवाइन के तेल के साथ जोड़ो की मालिश करनी चाहिए । इससे आराम मिलेगा ।
  • दस्त में अजवाइन सबसे बढ़िया घरेलू उपाय है । 1 गिलास पानी में 1 चम्मच अजवाइन डाल कर उबाल लें और इसे छान कर ठंडा कर लें । इस पानी को दिन में 2 - 3 बार पीने से दस्त ठीक हो जाते है ।
  • मुंहासे के निशान-एक छोटा चम्मच अजवाइन का पाउडर और एक बड़ा चम्मच दही को अच्छे से मिक्स करके पेस्ट बना लें । इसे रात को सोने से पहले चेहरे पर आधे घंटे के लिए लगाएं । इसके बाद इसे गुगगुने पानी से धो लें । इसके इस्तेमाल से चेहरे पर मुहासो के निशान हल्के हो जाएगें ।
  • सर्दी और जुकाम-मौसम में बदलाव के कारण सर्दी और जुकाम हो जाता है । ऐसे में पिसी हुई अजवाइन को सुंघने से राहत मिलती है । 
  • यह माइग्रेन नें भी फायदेमंद है ।घाव, दाद, खुजली, फुंसियाँ आदि चर्मरोग भी नष्ट होते हैं। पाचन दरुस्त करता है, पाचन क्रिया के शिथिल पड़ने पर अजवायन का सेवन काफी फायदेमंद है । 
  • इसका  मसाले  बीज, फूल, पत्ते, तेल और अर्क के रूप में प्रयोग  किया जाता है। इसको चूर्ण, काढ़ा, क्वाथ और अर्क के रूप में भी काम में लाया जाता है। 
  • अजवायन की पत्ती का दिलकश स्वाद होता है । इसी कारण इसका ( पत्ती) इतालवी व्यंजनों में,जेसे पिज्जा पास्ता आदि। अजवायन की पत्ती में एंटी बैक्टीरियल गुण है जो कि संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। अजवायन की ताजा पत्ती में प्रचुर मात्रा में पोषक तत्व और विटामिन है. विटामिन सी, विटामिन ए, लोहा, मैंगनीज और कैल्शियम और साथ ही युक्त ओमेगा -3 फैटी एसिड का एक अच्छा स्रोत है। अजवायन से कैलशियम, फासफोरस, लोहा सोडियम व पोटेशियम जैसे तत्व मिलते हैं। 
  • यह एक उत्कृष्ट एंटीऑक्सिडेंट है, अजवायन मोटापे को कम करने में भी मदद करती है। सर्दियों के मौसम में सर्द से बचने के लिए अजवायन एक सफल औषधि है। 
  • जंगली अजवायन की पत्ती का तेल श्रेष्ट माना गया है प्रतिरक्षा प्रणाली को दृढ़ करता है,श्वसन किर्या को दरुस्त करता है जोड़ों और मांसपेशियों का लचीलापन बढाता है और त्वचा को संक्रमण से बचाता है ।

Friday, January 6, 2017

गोखरू के गुण,Gokhru-Health-Benefits,

किड्नी के लिए राम बाण  औषधि है गोखरू | बंद किड्नी को चालू करता है| किड्नी मे स्टोन को टुकड़े टुकड़े करके पेशाब के रास्ते बाहर निकल देता है| क्रिएटिन ,यूरिया को तेजी  से  नीचे लाता है ,पेशाब मे जलन हो पेशाब ना होती है ,इसके लिए भी यह काम करता है इसके बारे मे आयुर्वेद के जनक आचार्य श्रुशूत ने भी लिखा इसके अलावा कई विद्वानो ने इसके बारे मे लिखा है इसका प्रयोग हर्बल दवाओं मे भी होता है आयुर्वेद की दवाओं मे भी होता है यह स्त्रियो के बंध्यत्व  मे तथा पुरुषों के नपुंसकता मे भी बहुत उपयोगी होता है इस दवा का सेवन कई लोगो ने किया है जिनका क्रिएटिन 10 पाईंट से भी अधिक था उन्हे भी 15 दिनो मे  संतोषप्रद  लाभ हुआ |आत: जिन लोगो को किडनी की प्राब्लम है वो इसका सेवन करे तो लाभ होना निश्चित है
गोखरू की दो जातियां होती हैं बड़ा गोखरू और छोटा गोखरू। औषधि के रूप में छोटा गोखरू प्रयोग होता है। औषधि के रूप में पौधे की जड़ और फल का प्रयोग होता है।

गोखरू के आयुर्वेदिक गुण 

  • आचार्य चरक ने गोक्षुर को मूत्र विरेचन द्रव्यों में प्रधान मानते हुए लिखा है-गोक्षुर को मूत्रकृच्छानिलहराणाम् अर्थात् यह मूत्र कृच्छ (डिसयूरिया) विसर्जन के समय होने वाले कष्ट में उपयोगी एक महत्त्वपूर्ण औषधि है । आचार्य सुश्रुत ने लघुपंचकमूल, कण्टक पंचमूल गणों में गोखरू का उल्लेख किया है । अश्मरी भेदन (पथरी को तोड़ना, मूत्र मार्ग से ही बाहर निकाल देना) हेतु भी इसे उपयोगी माना है ।
  • श्री भाव मिश्र गोक्षुर को मूत्राशय का शोधन करने वाला, अश्मरी भेदक बताते हैं व लिखते हैं कि पेट के समस्त रोगों की गोखरू सर्वश्रेष्ठ दवा है । वनौषधि चन्द्रोदय के विद्वान् लेखक के अनुसार गोक्षरू मूत्र पिण्ड को उत्तेजना देता है, वेदना नाशक और बलदायक है ।
  • पथरी रोग :- पथरी रोग में गोक्षुर के फलों का चूर्ण शहद के साथ 3 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम दिया जाता है । महर्षि सुश्रुत के अनुसार सात दिन तक गौदुग्ध के साथ गोक्षुर पंचांग का सेवन कराने में पथरी टूट-टूट कर शरीर से बाहर चली जाती है । मूत्र के साथ यदि रक्त स्राव भी हो तो गोक्षुर चूर्ण को दूध में उबाल कर मिश्री के साथ पिलाते हैं ।पथरी की चिकित्सा में सबसे महत्वपूर्ण औषधी है 
  • गोखरू :- पथरी के रोगी को इसके बीजो का चूर्ण दिया जाता है तथा पत्तों का पानी बना के पिलाया जाता है | इसके पत्तों को पानी में कुछ देर के लिए भिगो देते है | उसके बाद पतो को १५ बीस बार उसी पानी में डुबोते है और निकालते है इस प्रक्रिया में पानी चिकना गाढा लार युक्त हो जाता है | यह पानी रोगी को पिलाया जाता है स्वाद हेतु इसमे चीनी या नमक थोड़ी मात्रा में मिलाया जा सकता है | 
  • यह पानी स्त्रीयों में श्वेत प्रदर ,रक्त प्रदर पेशाब में जलन आदि रोगों की राम बाण औषधी है | यह मूत्राशय में पडी हुयी पथरी को टुकड़ों में बाट कर पेशाब के रास्ते से बाहर निकाल देता है |
  • सुजाक रोग :- सुजाक रोग (गनोरिया) में गोक्षुर को घंटे पानी में भिगोकर और उसे अच्छी तरह छानकर दिन में चार बार 5-5 ग्राम की मात्रा में देते हैं । किसी भी कारण से यदि पेशाब की जलन हो तो गोखरु के फल और पत्तों का रस 20 से 50 मिलीलीटर दिन में दो-तीन बार पिलाने से वह तुरंत मिटती है । प्रमेह शुक्रमेह में गोखरू चूर्ण को 5 से 6 ग्राम मिश्री के साथ दो बार देते हैं । तुरंत लाभ मिलता है ।
  • प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने में :- मूत्र रोग संबंधी सभी शिकायतों यथा प्रोस्टेट ग्रंथि बढ़ने से पेशाब का रुक-रुक कर आना, पेशाब का अपने आप निकलना (युरीनरी इनकाण्टीनेन्स), नपुंसकता, मूत्राशय की पुरानी सूजन आदि में गोखरू 10 ग्राम, जल 150 ग्राम, दूध 250 ग्राम को पकाकर आधा रह जाने पर छानकर नित्य पिलाने से मूत्र मार्ग की सारी विकृतियाँ दूर होती हैं ।
  • प्रदर में, अतिरिक्त स्राव में, स्री जनन अंगों के सामान्य संक्रमणों में गोखरू एक प्रति संक्रामक का काम करता है । स्री रोगों के लिए 15 ग्राम चूर्ण नित्य घी व मिश्री के साथ देते हैं ।
  • गोक्षुर चूर्ण प्रोस्टेट बढ़ने से मूत्र मार्ग में आए अवरोध को मिटाता है, उस स्थान विशेष में रक्त संचय को रोकती तथा यूरेथ्रा के द्वारों को उत्तेजित कर मूत्र को निकाल बाहर करता है । बहुसंख्य व्यक्तियों में गोक्षुर के प्रयोग के बाद ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं रह जाती । इसे योग के रूप न देकर अकेले अनुपान भेद के माध्यम से ही दिया जाए, यही उचित है, ऐसा वैज्ञानिकों का व सारे अध्ययनों का अभिमत है ।
  • नपुंसकता impotence arising from bad practice में, बराबर मात्रा में गोखरू के बीज का चूर्ण और तिल के बीज sesame seeds powder के चूर्ण, को बकरी के दूध और शहद के साथ दिया जाता है।
  • धातु की कमजोरी में इसके ताजे फल का रस 7-14 मिलीलीटर या 14-28 मिलीलीटर सूखे फल के काढ़े, को दिन में दो बार दूध के साथ लें।
  • मूत्रकृच्छ painful urination में 5g गोखरू चूर्ण को दूध में उबाल कर पीने से आराम मिलता है। यह मूत्र की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है और सूजन कम करता है।
  • मूत्रघात urinary retention में 3-6 ग्राम फल का पाउडर, पानी के साथ दिन में दो बार लें।
  • रक्तपित्त में गोखरू के फल को 100-200 मिलीलीटर दूध में उबाल कर दिन में दो बार लें।
  • धातुस्राव, स्वप्नदोष nocturnal fall, प्रमेह, कमजोरी weakness, और यौन विकारों sexual disorders में 5 ग्राम गोखरू चूर्ण को बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करें।
  • यौन शक्ति को बढ़ाने के लिए, गोखरू, शतावर, नागबला, खिरैटी, असगंध, को बराबर मात्रा में कूट कर, कपड़चन कर लें और रोज़ १ छोटा चम्मच दूध के साथ ले। इसको ४० दिन तक लगातार लें।
  • अश्मरी urinary stones में 5 ग्राम गोखरू चूर्ण (फल का पाउडर) शहद के साथ दिन में दो बार, पीछे से गाय का दूध लें।

Friday, December 16, 2016

ईसबगोल के फायदे,Health Benefits of Plantago Ovata in Hindi,

ईसबगोल प्रायः उष्ण कटिबन्धीय स्थानो में पाया जाता है । यह भारत में पंजाब , मैसूर , बंगाल एवं भारत के उत्तर - पश्चिम क्षेत्र में बहुतायत मात्र में पाया जाता है । इसे संस्कृत में अश्वकर्णबीज , वश्वगल ।बंगाली में इसबगुल , गुजराती में - ऊधमी जीरु । हिंदी में - ईसबगोल एवं लैटिन में प्लैन्टेगो ओवेटा कहते है 

इसका पौधा डंठल रहित , छोटा रोमयुक्त तथा 2 से 3 फुट लम्बा होता है ।इसकी पत्तियां लगभग आधा इंच चौड़ा एवं 4 से 6 इंच तक लम्बा होता है । इसकी टहनियों से गेहूं के बाल की बाली जैसी फूलो की लम्बी फर निकलते है ।इसके फलो की मंजरियाँ गुच्छेदार होती है और इसमें झिल्लियुक्त , चिकने , पिलाभ भूरे बिज होते है । इन बीजो को कूटकर इसके ऊपर के झिल्ली से अलग कर ईसबगोल की भूसी तैयार की जाती है

ईसबगोल की भूसी के अनेको फायदे है ।यह ग्राही , मूत्रल , शीतलता , वायु - कारक , कब्ज नाशक , मधुर एवं पौष्टिक होता है ।यह दाह , कब्ज , आंत रोगों तथा घाव आदि रोगों का नाशक होता है ।आमाशय और आंतो को बल देता है । शरीर में शीतलता प्रदान करता है । पर इसका ज्यादा दिनों तक सेवन से शरीर में दर्द मासपेशियों में दुर्बलता आदि विकार पैदा होती है । इसलिये इसका ज्यादा दिनों तक सेवन नही करनी चाहिए ।

इसबगोल अनेका अनेक बीमारियो की एक औषिधि यह कब्ज, दस्त, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, बवासीर, गाल ब्लैडर की पत्थरी, अल्सर, एल. डी. एल. कोलेस्ट्रोल, वजन नियंत्रण में, डाईवेर्टिकुलर डिसीज़ के लिए रामबाण औषिधि हैं

ईसबगोल के फायदे,Health Benefits of Plantago Ovata in Hindi,

  • इसबगोल एक स्वादिष्ट एवं महक रहित आयुर्वेदीय औषिधि हैं। प्लेनटेगो आवेटा तथा प्लेंटेगो सिलियम नामक पौधे के लाल भूरे एवं काले बीजो से इसबगोल प्राप्त होता हैं। इसबगोल का बीज तथा बीज का छिलका (भूसी या हस्क) औषिधीय कार्यो में बेहद उपयोगी हैं
  • इसबगोल पाचन संस्थानों के विकारो के लिए महान औषिधि हैं। यह बवासीर में होने वाले दर्द को कम करती हैं। इसकी तासीर ठंडी होने के कारण यह शरीर में होने वाली जलन को भी शांत कर देती हैं। यह कब्ज को दूर करती हैं, 
  • गाल ब्लैडर की पत्थरी बनने से रोकती हैं। इसबगोल में जो चिकनाई पायी जाती हैं, उसके कारण ये अन्न नलिका की रुक्षता दूर करती हैं। 
  • इसमें पाये जाने वाले लुआब के कारण यह आंतो की गति को बढाकर, मल को बाहर निकालने में सहायक होती हैं। इसके अलावा यह जीवाणुओ की वृद्धि को रोकती हैं, जीवाणुओ से पैदा हुए विषो का अवशोषण करती हैं
  • अल्सर में लाभदायक आंतो में जब अल्सर पैदा हो जाते हैं तो उस अवस्था में जब इसका सेवन किया जाता हैं तो यह अल्सर के ऊपर एक आवरण बना देती हैं, जिसके कारण अल्सर पर सेवन किये गए मिर्च मसालों का बुरा असर नहीं पड़ पाता। इसबगोल का भुना बीज दस्तो को रोकता हैं।
  • इसबगोल फाइबर का सस्ता स्त्रोत हैं। इसके नियमित सेवन से कोलेस्ट्रोल कम हो जाता हैं। इसबगोल पाचन संस्थान में कोलेस्ट्रोल बहुल बाइल अर्थात पित्त को काफी हद तक सोखने की क्षमता रखता हैं। अर्थात एल डी एल कोलेस्ट्रोल को भी कंट्रोल करता हैं।
  • वजन नियंत्रण में  यह वजन नियंत्रण करने का भी कार्य करता हैं। जब यह पेट में पहुँचता हैं तो जल का अवशोषण करते हुए पेट को भर देती हैं, 
  • जिससे व्यक्ति को भूख ना लगने का सुखद अहसास होता हैं। एक ब्रिटिश अनुसंधान के अनुसार भोजन के तीन घंटो पूर्व जिन महिलाओ ने इसबगोल का सेवन किया उनके शरीर ने आहार से वसा का कम अवशोषण किया।
  • डाईवेर्टिकुलर डिसीज़, कब्ज, दस्त, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, पाइल्स। डाईवेर्टिकुलर डिसीज़, जिसमे आंतो में बनी हुयी छोटी छोटी पॉकेट्स में मल इकट्ठा होता रहता हैं, फल स्वरुप संक्रमण होने की आशंकाए पैदा हो जाती हैं, ऐसी विकट परिस्थिति में इसबगोल आंतो से मल को बाहर कर देता हैं। विविध मल त्याग सम्बन्धी विकार जैसे कब्ज, दस्त, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम, पाइल्स के लिए तो यह रामबाण औषिधि हैं। 
  • इन परिस्थितियों में तो सबसे पहले यह जल का अवशोषण करती हैं। मल को बांधती हैं तथा सुगमता पूर्वक मल त्याग कराती हैं। ढीले मल से जलीयांश को अवशोषित करने की विशिष्ट क्षमता के कारण ही ये दस्तो के उपचार में प्रभावी हैं।
  • ईसबगोल के इस्तेमाल का तरीका - ईसबगोल की भूसी का असर होने में 10-12 घंटे लग जाते हैं, इसलिए शाम को छह बजे के करीब लेंगे तो सुबह समय से मोशन हो सकेगा। जब कब्ज ठीक हो जाए, तो यह प्रयोग बंद कर दें। 
  • आधे ग्लास पानी में एक चम्मच 5 मिनट तक भिगो कर पी लें और इस के बाद एक ग्लास पानी और पी लें। इसे खाने के 1 घंटे बाद लेना बेहतर है। वजन घटाने के लिए दिन में 3 बार खाने से आधा घंटा पहले लेना उचित है। दमा की शिकायत में सुबह-शाम दो-दो चम्मच ईसबगोल की भूसी गर्म पानी के साथ लेने से यह शिकायत दूर हो जाती है। 
  • ईसबगोल के बीजों को लेना हो तो इन्हें पीसना नहीं चाहिए। ईसबगोल के बीज शांतिदायक और शीतल होते हैं। इनसे पेट की अनावश्यक गर्मी दूर होती है।
  • अनैच्छिक वीर्यपात :- दिन में दो बार दो चम्मच ईसबगोल की भूसी शिंदे पानी से ले इसे अनैच्छिक वीर्यपतन की शिकायत दूर हो जाती है । 
  • स्त्रियों में रक्तस्राव :- मट्ठे के या ठंडा पानी के साथ दो चम्मच ईसबगोल की भूसी से स्त्रियों में रक्त प्रदर मूत्राशय से खून आना धीरे धीरे समाप्त हो जाता है । इसे प्रतिदिन सुबह शाम ले 

Monday, November 21, 2016

बड़ी या काली इलायची, Health Benefits of Black Cardamom In Hindi,

बड़ी या काली इलायची खाने के बड़े ही फायदे हैं। भारत में हज़ारो सालो से इलायची का उपयोग मसालो के रूप में किया जा रहा हैं. इलायची 2 तरह की होती हैं बड़ी और छोटी. छोटी इलायची मीठे पकवानो का स्वाद बढ़ाने का काम करती हैं. वही बड़ी इलायची नमकीन पकवानो के स्वाद को दुगुना करती हैं। बड़ी इलायची को काली इलायची, भूरी इलायची, लाल इलायची , Black Cardamom, लाल इलायची, नेपाली इलायची या बंगाली इलायची भी कहते हैं, इस के बहुत ही ज़्यादा फायदे हैं. इसके बीजो से कपूर जैसी सुगंध आती हैं।

बड़ी इलायची का वनस्पतिक नाम "Amomum subulatum” और “Amomum costatum” हैं. आयुर्वेद और यूनानी उपचार में इसके बीजो के लगभग वे ही गुण बताए गये हैं, जो छोटी इलायची में होते हैं। बड़ी इलायची छोटी इलायची से थोड़ी कम स्वादिष्ट होती हैं। यह आमतौर पर नमकीनी पकवानो में उपयोग की जाती हैं। भारत में यह सबसे ज़्यादा पैदा होती हैं। बड़ी इलायची खास करके के साउथ इंडिया में केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु में ज़्यादा उगाई जाती हैं। भारत में पैदा की जाने वाली यह बड़ी इलायची सिर्फ़ एक मसाला भर नही हैं, बल्कि यह एक बढ़िया औषधि भी हैं। इसके इन्ही गुणों के कारण इसे मसालो की रानी भी कहा जाता हैं।

बड़ी इलायची के फायदे  Amazing Benefits of Black Cardamom

  • बड़ी इलायची खाने से आपको कभी सांस की बीमारी नहीं होगी। अगर आपको अस्थमा, लंग में कोई भी इंफेक्शन है तो बड़ी इलायची का सेवन करने से ठीक हो सकती है। सर्दी खासी में भी इसको खाने से आप फिट हमेशा रहेंगे।
  •  बड़ी इलायची को पीसकर शहद में मिलाकर छालों पर लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं।
  • यदि दांत में दर्द हो रहा हो तो बड़ी इलायची और लौंग के तेल को बराबर-बराबर मात्रा में लेकर पीड़ायुक्त दांत पर लगाएं ,दर्द में शांति मिलेगी।
  • यदि अधिक थूक या लार आती हो तो बड़ी इलायची और सुपारी को बराबर-बराबर पीसकर, 1-2 ग्राम की मात्रा में लेकर चूसते रहने से यह कष्ट दूर हो जाता है।
  • पांच से दस बूँद बड़ी इलायची तेल में मिश्री मिलाकर नियमित सेवन करने से दमा में लाभ होता है।
  • दो ग्राम सौंफ के साथ बड़ी इलायची के 8-10 बीजों का सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ती है।
  • एक ग्राम बड़ी इलायची बीज चूर्ण को दस ग्राम बेलगिरी के साथ मिलाकर प्रातः सायं सेवन करने से दस्तों में लाभ होता है।
  • पिसी हुई राई के साथ बड़ी इलायची चूर्ण मिलाकर 2-3 ग्राम की मात्रा में नियमित सेवन करने से लीवर सम्बंधित रोगों में लाभ होता है।
  • एक से दो बड़ी इलायची के चूर्ण को दिन में तीन बार नियमित सेवन करने से शरीर का दर्द ठीक होता है।
  • आपके बॉडी से खराब और जहरीली चीजों को निकाल बाहर करने में मदद करता है यह बड़ी इलायची। बॉडी में यूं तो कई बार कुछ पदार्थ जमा हो जाते हैं जिससे निकाल बाहर करना बहुत जरूरी हो जाता है। ऐसे में बड़ी इलायची बहुत उपयोगी होता है।
  • अक्सर कुछ लोगों के मुंह से बदबू आने की शिकायत रहती है। उन्हें इस समस्या में बड़ी इलायची को चबाना चहिए। यह ना सिर्फ मुंह के बदबू या यूं कहें गंदी स्मेल को दूर करने का काम करती है बल्कि मुंह के अंदर होने वाली कोई भी इनफेक्शन या घावो को ठीक भी करने का काम करती है।
  • क्या आपको हमेशा सिर में दर्द होने की शिकायत रहती है. तो ऐसे में आप बड़ी इलायची के ऑइल से अपने सिर का मसाज करिए और असर दिखेगा। आपके सिर का दर्द जल्दी ही ठीक हो जाएगा।
  • बड़ी इलायची से केंसर जैसी बड़ी बीमारियां भी दूर रहती है। बड़ी इलायची सिर्फ नाम में ही बड़ी नहीं बल्कि इसके गुण भी बड़े-बड़े हैं। बड़ी इलायची को खाना शुरू कर दें ताकि आप खमेशा हेल्दी और खुश रहें।
  • पाचन दुरुस्त करती हैं : बड़ी इलायची का सेवन Gastrointestinal system के लिए खास करके फायदेमंद होता हैं. इसका शरीर के हाज़मे पर बहुत ही अच्छा असर होता हैं. इसके सेवन से एसिडिटी की समस्या से छुटकारा मिलता हैं. इसके नियमित सेवन से गैस्ट्रिक अल्सर और दूसरी पाचन संबंधी बीमारियो का ख़तरा काफ़ी कम हो जाता हैं।
  • फेफड़े से रिलेटेड बीमारियो में लाभदायक : बड़ी इलायची दमा के रोगियो और साँस संबंधित बीमारियो से जूझ रहे लोगो के लिए खास करके के फायदेमंद हैं. इसके नियमित सेवन से अस्थमा, कुकुर खाँसी, फेफड़े का सिकूड़ना, फेफड़े की सूजन और तपेदिक (टीबी) आदि रोगो से छुटकारा पाया जा सकता हैं।
  • गुर्दे की बीमारी दूर करता हैं : बड़ी इलायची को यूरिनरी हेल्थ के लिए अच्छा माना जाता हैं. यह एक बेहतरीन डाइयुरेटिक भी हैं. इसके सेवन से ना सिर्फ़ यूरिनेशन सही रहता हैं, बल्कि किडनी से रिलेटेड बीमारिया भी दूर रहती हैं।
  • एंटी-ऑक्सिडेंट्स से भरपूर : बड़ी एलाईच एंटी-ऑक्सिडेंट्स से भरपूर होता हैं. इसमे दो तरह के एंटी-ऑक्सिडेंट्स होते हैं, लेकिन खास तौर पर एंटी-कैंसर एंटी-ऑक्सिडेंट्स पाए जाते हैं. यह ब्रेस्ट, कोलन और ओवेरियन कैंसर को रोकता हैं. इससे कैंसर सेल का निर्माण और विकास रुक जाता हैं।
  • बालों को मजबूत बनाता हैं : बड़ी इलायची के सेवन से बाल काले, घने और मजबूत बन जाते हैं. इसमे मौज़ूद तत्वो के कारण बालो को पोषण मिलता हैं. बड़ी इलायची बालो को मजबूत बनाती हैं।
  • ज़हरीले तत्वो को बाहर निकालता हैं : बड़ी इलायची एक बेहतरीन डेटोक्स का भी काम करती हैं. यह शरीर से विषैले (ज़हरीले) तत्वो को बाहर निकाल कर शरीर को सेहतमंद बनाती हैं।
  • स्किन को ग्लोयिंग बनाता हैं : बड़ी इलायची के नियमित सेवन से स्किन चमकने लगती हैं. स्किन एलर्जी की समस्या में बड़ी इलायची अपने एंटी-बैक्टीरियल गुणों के कारण नेचुरल रेमेडी की तरह काम करती हैं।
  • दर्द में रामबाण : बड़ी इलायची में दर्द को दूर करने की अनोखी क्षमता पाई जाती हैं. विशेषकर, सिरदर्द में तो यह रामबाण की तरह काम करती हैं. इससे तैयार किए जाने वाले खुसबूदार तेल का इस्तेमाल करने से सिरदर्द, टेंशन और थकान जैसी समस्याएँ दूर हो जाती हैं।
  • रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं : बड़ी इलायची में एंटी-सेपटिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. इसमे 14 तरह के बैक्टीरिया को ख़त्म करने की शक्ति होती हैं. इसे खाने से बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन से बचाव होता हैं।
  • ब्लड प्रेशर के रोगियो के लिए फायदेमंद : बड़ी इलायची दिल के मरीज़ो के लिए काफ़ी फायदेमंद हैं. इससे ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में रहता हैं. अगर आप नियमित रूप से बड़ी इलायची का सेवन करेंगे तो आपका दिल हेल्दी रहेगा. यह खून के जमने की संभावना को भी काफ़ी हद तक कम कर देता हैं।
  • खून के प्रवाह को बेहतर बनाता हैं : बड़ी इलायची में विटामिन सी और ज़रूरी खनीज़ भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. इसके नियमित सेवन से रक्त का प्रवाह बेहतर होता हैं और शरीर सेहतमंद बना रहता हैं।
  • दांतो की समस्या में रामबाण : बड़ी इलायची के सेवन से दांतो और मसूड़ो के इन्फेक्शन से छुटकारा पाया जा सकता हैं. साथ ही सांसो की बदबू भी दूर होती हैं।
  • बड़ी इलायची को पीसकर मस्तिष्क पर लेप करने से एवं बीजों को पीसकर सूंघने से सिर का दर्द ठीक हो जाता है।

Friday, November 11, 2016

बरगद के औषधीय गुण,बरगद के फायदे,Health Benefits of Banyan Tree Fruit in Hindi,


प्रकृति का एक वरदान है 'बरगद' ये कभी नष्ट नहीं होता है बरगद का वृक्ष घना एवं फैला हुआ होता है इसकी शाखाओं से जड़ें निकलकर हवा में लटकती हैं तथा बढ़ते हुए जमीन के अंदर घुस जाती हैं एवं स्तंभ बन जाती हैंबरगद को अक्षय वट भी कहा जाता है-बरगद(Banyan) के वृक्ष की शाखाएं और जड़ें एक बड़े हिस्से में एक नए पेड़ के समान लगने लगती हैं
  • यदि आप नियमित सूर्योदय से पहले बरगद़ के पत्ते तोड़कर टपकने वाले दूध को एक बताशे में 3-4 बूंद टपकाकर खा लें-एक बार में ऐसा प्रयोग 2-3 बताशे खाकर पूरा करें- हर हफ्ते 2-2 बूंद की मात्रा बढ़ाते हुए 5-6 हफ्ते तक यह प्रयोग जारी रखें- इसके नियमित सेवन से शीघ्रपतन, वीर्य का पतलापन, स्वप्नदोष, प्रमेह, खूनी बवासीर, रक्त प्रदर आदि रोग ठीक हो जाते हैं और यह प्रयोग बलवीर्य वृद्धि के लिए भी बहुत लाभकारी है
  • बताशे में बरगद के दूध की 5-10 बूंदे डालकर रोजाना सुबह-शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है- बरगद के पके फल को छाया में सुखाकर पीसकर चूर्ण बना लें- इस चूर्ण को बराबर मात्रा की मिश्री के साथ मिलाकर पीस लें- इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह खाली पेट और सोने से पहले एक कप दूध से नियमित रूप से सेवन करते रहने से कुछ हफ्तों में यौन शक्ति में बहुत लाभ मिलता है
  • 3-3 ग्राम बरगद के पेड़ की कोंपले (मुलायम पत्तियां) और गूलर के पेड़ की छाल और 6 ग्राम मिश्री को पीसकर लुगदी सी बना लें फिर इसे तीन बार मुंह में रखकर चबा लें और ऊपर से 250 ग्राम दूध पी लें- 40 दिन तक खाने से वीर्य बढ़ता है और संभोग से खत्म हुई शक्ति लौट आती है
  • बरगद के दूध की पहले दिन 1 बूंद 1 बतासे डालकर खायें, दूसरे दिन 2 बतासों पर 2 बूंदे, तीसरे दिन 3 बतासों पर 3 बूंद ऐसे 21 दिनों तक बढ़ाते हुए इसी तरह घटाना शुरू करें- इससे प्रमेह और स्वप्न दोष दूर होकर वीर्य बढ़ने लगता है
  • बरगद के फल छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें- गाय के दूध के साथ यह 1 चम्मच चूर्ण खाने से वीर्य गाढ़ा व बलवान बनता है
  • 25 ग्राम बरगद की कोपलें (मुलायम पत्तियां) लेकर 250 मिलीलीटर पानी में पकायें- जब एक चौथाई पानी बचे तो इसे छानकर आधा किलो दूध में डालकर पकायें- इसमें 6 ग्राम ईसबगोल की भूसी और 6 ग्राम चीनी मिलाकर सिर्फ 7 दिन तक पीने से वीर्य गाढ़ा हो जाता है
  • बरगद के दूध की 5-7 बूंदे बताशे में भरकर खाने से वीर्य के शुक्राणु बढ़ते है
  • बरगद की जटा के साथ अर्जुन की छाल, हरड़, लोध्र व हल्दी को समान मात्रा में लेकर पानी में पीसकर लेप लगाने से उपदंश के घाव भर जाते हैं
  • बरगद का दूध उपदंश के फोड़े पर लगा देने से वह बैठ जाती है- बड़ के पत्तों की भस्म (राख) को पान में डालकर खाने से उपदंश रोग में लाभ होता है
  • बरगद के पत्तों से बना काढ़ा 50 मिलीलीटर की मात्रा में 2-3 बार सेवन करने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है- यह काढ़ा सिर के भारीपन, नजला, जुकाम आदि में भी फायदा करता है
  • बरगद की जटाओं के बारीक रेशों को पीसकर बने लेप को रोजाना सोते समय स्तनों पर मालिश करके लगाते रहने से कुछ हफ्तों में स्तनों का ढीलापन दूर हो जाता है
  • बरगद की जटा के बारीक अग्रभाग के पीले व लाल तन्तुओं को पीसकर लेप करने से स्तनों के ढीलेपन में फायदा होता है
  • 4 ग्राम बरगद की छाया में सुखाई हुई छाल के चूर्ण को दूध की लस्सी के साथ खाने से गर्भपात नहीं होता है
  • बरगद की छाल के काढ़े में 3 से 5 ग्राम लोध्र की लुगदी और थोड़ा सा शहद मिलाकर दिन में 2 बार सेवन करने से गर्भपात में जल्द ही लाभ होता है
  • योनि से रक्त का स्राव यदि अधिक हो तो बरगद की छाल के काढ़ा में छोटे कपड़े को भिगोकर योनि में रखें- इन दोनों प्रयोग से श्वेत प्रदर में भी फायदा होता है
  • बरगद की कोपलों के रस में फोया भिगोकर योनि में रोज 1 से 15 दिन तक रखने से योनि का ढीलापन दूर होकर योनि टाईट हो जाती है
  •  पुष्य नक्षत्र और शुक्ल पक्ष में लाये हुए बरगद की कोपलों का चूर्ण 6 ग्राम की मात्रा में मासिक-स्राव काल में प्रात: पानी के साथ 4-6 दिन खाने से स्त्री अवश्य गर्भधारण करती है या बरगद की कोंपलों को पीसकर बेर के जितनी 21 गोलियां बनाकर 3 गोली रोज घी के साथ खाने से भी गर्भधारण करने में आसानी होती है

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