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Friday, January 6, 2017

कब्ज का इलाज,Kabz Ka-Elaj-Ke Upay Constipation Tips in Hindi

कब्ज आज के समय का एक साधारण रोग है। आज बहुत से लोग कब्ज रोग से परेशान रहते हैं। कब्ज रोग व्यक्ति के स्वयं के खान-पान में असावधानी रखने का ही परिणाम है। कब्ज उत्पन्न होने का मुख्य कारण अधिक मिर्च-मसाले वाला भोजन करना, कब्ज बनाने वाले पदार्थों का सेवन करना, भोजन करने के बाद अधिक देर तक बैठना, तेल व चिकनाई वाले पदार्थों का अधिक सेवन करना आदि है

कब्ज, पाचन तंत्र की उस स्थिति को कहते हैं जिसमें कोई व्यक्ति  का मल बहुत कड़ा हो जाता है तथा मलत्याग में कठिनाई होती है। कब्ज अमाशय की स्वाभाविक परिवर्तन की वह अवस्था है, जिसमें मल निष्कासन की मात्रा कम हो जाती है, मल कड़ा हो जाता है, उसकी आवृति घट जाती है या मल निष्कासन के समय अत्यधिक बल का प्रयोग करना पड़ता है। सामान्य आवृति और अमाशय की गति व्यक्ति विशेष पर निर्भर करती है। (एक सप्ताह में 3 से 12 बार मल निष्कासन की प्रक्रिया सामान्य मानी जाती है।

पेट में शुष्क मल का जमा होना ही कब्ज है। यदि कब्ज का शीघ्र ही उपचार नहीं किया जाये तो शरीर में अनेक विकार उत्पन्न हो जाते हैं। कब्जियत का मतलब ही प्रतिदिन पेट साफ न होने से है। एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में दो बार यानी सुबह और शाम को तो मल त्याग के लिये जाना ही चाहिये। दो बार नहीं तो कम से कम एक बार तो जाना आवश्यक है। नित्य कम से कम सुबह मल त्याग न कर पाना अस्वस्थता की निशानी है।

क़ब्ज़ होने का सबसे बड़ा कारण शरीर में पानी की कमी होना है। पानी की कमी होने पर आँतो में मल सूखने लगता है और मल त्याग करने में काफ़ी ज़ोर लगाना पड़ता है। क़ब्ज़ के उपचार के लिए रोगी को पानी अधिक मात्रा में पीना चाहिए और खाना खाते समय पानी नही पीना चाहिए।

कब्ज का प्रमुख कारण

  • कम रेशायुक्त भोजन का सेवन करना ; भोजन में फायबर (Fibers) का अभाव।
  • अल्पभोजन ग्रहण करना।
  • शरीर में पानी का कम होना
  • कम चलना या काम करना ; किसी तरह की शारीरिक मेहनत न करना; आलस्य करना; शारीरिक काम के बजाय दिमागी काम ज्यादा करना।
  • कुछ खास दवाओं का सेवन करना
  • बड़ी आंत में घाव या चोट के कारण (यानि बड़ी आंत में कैंसर)
  • थायरॉयड हार्मोन का कम बनना
  • कैल्सियम और पोटैशियम की कम मात्रा
  • मधुमेह के रोगियों में पाचन संबंधी समस्या
  • कंपवाद (पार्किंसन बीमारी)
  • चाय, कॉफी बहुत ज्यादा पीना। धूम्रपान करना व शराब पीना।
  • गरिष्ठ पदार्थों का अर्थात् देर से पचने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करना।
  • आँत, लिवर और तिल्ली की बीमारी।

कब्ज का लक्षण

  • रोगी को शौच साफ़ नहीं होता है, मल सूखा और कम मात्रा में निकलता है। मल कुंथन करने या घण्टों बैठे रहने पर निकलता है।
  • कब्ज रोग से पीड़ित रोगी को रोजाना मलत्याग नहीं होता है। कब्ज रोग से पीड़ित रोगी जब मल का त्याग करता है तो उसे बहुत अधिक परेशानी होती है। कभी-कभी मल में गांठे बनने लगती है। जब रोगी मलत्याग कर लेता है तो उसे थोड़ा हल्कापन महसूस होता है।
  • कब्ज रोग से पीड़ित रोगी के पेट में गैस अधिक बनती है। पीड़ित रोगी जब गैस छोड़ता है तो उसमें बहुत तेज बदबू आती है।
  • कब्ज रोग से पीड़ित रोगी की जीभ सफेद तथा मटमैली हो जाती है। जीभ मलावृत रहती है तथा मुँह का स्वाद ख़राब हो जाता है। कभी कभी मुँह से दुर्गन्ध आती है।
  • रोगी व्यक्ति के आंखों के नीचे कालापन हो जाता है तथा रोगी का जी मिचलता रहता है। रोगी की भूख मर जाती है, पेट भारी रहता है एवं मीठा मीठा दर्द बना रहता है, शरीर तथा सिर भारी रहता है।
  • लेपित जीब
  • बहती नाक
  • भूख में कमी
  • सरदर्द
  • चक्कर आना
  • जी मिचलाना
  • चहरे पर दाने
  • मुँह मे अल्सर
  • पेट में लगातार परिपूर्णता

 कब्ज का घरेलू इलाज

  • क़ब्ज़ दूर करने के लिए रोगी को फलो में पपीता और अमरूद ज़रूर खाना चाहिए।
  • पेट में जमे हुए मल को बाहर निकालने के लिए 1 कप गुनगुने पानी में 1 नींबू निचोड़ कर पिए।
  • 1 ग्लास गरम दूध रात को सोने से पहले पिए। अगर मल आँतो में चिपक रहा हो तो दूध में 1 से 2 चम्मच अरंडी का तेल मिला कर पिए।
  • इसबगोल की भूसी क़ब्ज़ के इलाज में रामबाण का काम करती है। 125 ग्राम दही मे 10 ग्राम इसबगोल की भूसी घोल कर सुबह शाम खाने से qabz में आराम मिलता है।
  • बेकिंग सोडा जिसे हम मीठा सोडा से भी जानते है क़ब्ज़ खोलने में काफ़ी फयदेमंद है। एक चौथाई कप गरम पानी में 1 चम्मच मीठा सोडा मिला कर पिए.
  • नमक – छोटी हरड और काल नमक समान मात्रा में मि‍लाकर पीस लें। नि‍त्‍य रात को इसकी दो चाय की चम्‍मच गर्म पानी से लेने से दस्‍त साफ आता हैं।
  • ईसबगोल – दो चाय चम्‍मच ईसबगोल 6 घण्‍टे पानी में भि‍गोकर इतनी ही मि‍श्री मि‍लाकर जल से लेने से दस्‍त साफ आता हैं। केवल मि‍श्री और ईसबगोल मि‍ला कर बि‍ना भि‍गोये भी ले सकते हैं।
  • चना – कब्‍ज वालों के लि‍ए चना उपकारी है। इसे भि‍गो कर खाना श्रेष्‍ठ है। यदि‍ भीगा हुआ चना न पचे तो चने उबालकर नमक अदरक मि‍लाकर खाना चाहि‍ए। चेने के आटे की रोटी खाने से कब्‍ज दूर होती है। यह पौष्‍ि‍टक भी है। केवल चने के आटे की रोटी अच्‍छी नहीं लगे तो गेहूं और चने मि‍लाकर रोटी बनाकर खाना भी लाभदायक हैं। एक या दो मुटठी चने रात को भि‍गो दें।
  • प्रात: जीरा और सौंठ पीसकर चनों पर डालकर खायें। घण्‍टे भर बाद चने भि‍गोये गये पानी को भी पी लें। इससे कब्‍ज दूर होगी।
  • पेट की बीमारियो से बचने और उनके उपचार के लिए पेट में अच्छे बॅक्टीरिया होना ज़रूरी है। दही खाने से शरीर में अच्छे बॅक्टीरिया की मात्रा बढ़ेगी। 2 से 3 कप दही का सेवन ज़रूर करे।
  • आधा ग्लास पत्ता गोभी का जूस पीने से क़ब्ज़ के रोग से निजात मिलती है। पालक का जूस भी kabz kholne में काफ़ी असरदार है।
  • 1 ग्लास गरम दूध में आधा चम्मच हल्दी पाउडर और एक चम्मच घी मिला कर घोल ले और रात को सोने से पहले पिए।
  • एक ग्लास दूध में थोड़ी अंजीर उबाल ले और सोने से पहले पिए।
  • सुबह खाली पेट एक ग्लास गरम पानी में दो चम्मच्च शहद मिला कर पीने से क़ब्ज़ दूर होती है।
  • बेल – पका हुआ बेल का गूदा पानी में मसल कर मि‍लाकर शर्बत बनाकर पीना कब्‍ज के लि‍ए बहुत लाभदायक हैं। यह आँतों का सारा मल बाहर नि‍काल देता है।
  • नीबू – नीम्‍बू का रस गर्म पानी के साथ रात्रि‍ में लेने से दस्‍त खुलकर आता हैं। नीम्‍बू का रस और शक्‍कर प्रत्‍येक 12 ग्राम एक गि‍लास पानी में मि‍लाकर रात को पीने से कुछ ही दि‍नों में पुरानी से पुरानी कब्‍ज दूर हो जाती है।
  • नारंगी – सुबह नाश्‍ते में नारंगी का रस कई दि‍न तक पीते रहने से मल प्राकृति‍क रूप से आने लगता है। यह पाचन शक्‍ति‍ बढ़ाती हैं।
  • मेथी – के पत्‍तों की सब्‍जी खाने से कब्‍ज दूर हो जाती है।
  • गेहूँ के पौधों (गेहूँ के जवारे) का रस लेने से कब्‍ज नहीं रहती है।
  • धनिया – सोते समय आधा चम्‍मच पि‍सी हुई सौंफ की फंकी गर्म पानी से लेने से कब्‍ज दूर होती है।
  • दालचीनी – सोंठ, इलायची जरा सी मि‍ला कर खाते रहने से लाभ होता है।
  • टमाटर कब्‍जी दूर करने के लि‍ए अचूक दवा का काम करता है। अमाश्‍य आँतों में जमा मल पदार्थ नि‍कालने में और अंगों को चेतनता प्रदान करने में बडी मदद करता है। शरीर के अन्‍दरूनी अवयवों को स्‍फूर्ति‍ देता है।

Monday, April 18, 2016

पेट की गैस दूर करने के घरेलू उपाय,पेट की गैस का रामबाण इलाज,acid reflux remedies,treatment for acid reflux,

अनियमित खान-पान और लाइफस्टाइल कब्ज का प्रमुख कारण है। अनियमित दिनचर्या और खान-पान के
कारण कब्ज और पेट गैस की समस्या आम बीमारी की तरह हो गई है। कब्ज रोगियों में पेट फूलने की शिकायत भी देखने को मिलती है। लोग कहीं भी और कुछ भी खा लेते हैं। खाने के बाद बैठे रहना, डिनर के बाद तुरंत सो जाना ऐसी आदतें हैं जिनके कारण कब्ज की शिकायत शुरू होती है। पेट में गैस बनने की बीमारी ज्यादातर बुजुर्गों में देखी जाती है मानसिक तनाव, अशांति, भय, चिंता, क्रोध के कारण पाचन अंगों के आवश्यक पाचक रसों का स्राव कम हो जाता है, जिससे अज्रीर्ण(Indigestion) की तकलीफ हो जाती है और अज्रीर्ण का विकृत रूप गैस कि बिमारी पैदा कर देता है। ।

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  • भोजन खूब चबा चबा कर आराम से करना चाहिए! बीच बीच में अधिक पानी ना पिएं!
  • नींबू आदि का सेवन अधिक करना चाहिए
  • भोजन के दो घंटे के बाद 1 से 2 गिलास पानी पिएं। दोनों समय के भोजन के बीच हल्का नाश्ता फल आदि अवश्य खाएं।
  • तेल गरिष्ठ भोजन से परहेज करें! भोजन सादा, सात्त्विक और प्राक्रतिक अवस्था में सेवन करने कि कोशिश करें।
  • दिन भर में 8 से 10 गिलास पानी का सेवन अवश्य करें।
  • प्रतिदिन कोई न कोई व्यायाम करने कि आदत जरुर बनाएं! शाम को घूमने जाएं! पेट के आसन से व्यायाम का पूरा लाभ मिलता है। प्राणयाम करने से भी पेट की गैस की तकलीफ दूर हो जाती है।
  • शराब, चाय, कॉफी, तम्बाकू, गुटखा, जैसे व्यसन से बचें।
  • प्राक्रतिक वेगों को रोके रखने कि आदत को छोड़ें जैसे मूत्र या मल।
  • दिन में सोना छोड़ दें और रात को मानसिक परिश्रम से बचें|
  • एक चम्मच अजवाइन के साथ चुटकी भर काला नमक भोजन के बाद चबाकर खाने से पेट कि गैस शीर्घ ही निकल जाती है|
  • अदरक और नींबू का रस एक एक चम्मच कि मात्रा में लेकर थोड़ा सा नमक मिलकर भोजन के बाद दोनों समय सेवन करने से गैस कि सारी तकलीफें दूर हो जाती हैं , और भोजन भो हजम हो जाता है!
  • भोजन करते समय बीच बीच में लहसुन, हिंग, थोड़ी थोड़ी मात्रा में खाते रहने से गैस कि तकलीफ नहीं होती|
  • हरड, सोंठ का चूर्ण आधा आधा चम्मच कि मात्रा में लेकर उसमे थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर भोजन के बाद पानी से सेवन करने से पाचन ठीक प्रकार से होता है और गैस नहीं बनती!
  • नींबू का रस लेने से गैस कि तकलीफ नहीं होती और पाचन क्रिया सुधरती है!
  • सुबह उठने के बाद नींबू के रस को काला नमक मिलाकर पानी के साथ सेवन कीजिए। इससे पेट साफ होगा। 
  • 20 ग्राम त्रिफला रात को लिटर पानी में भिगोकर रख दीजिए। सुबह उठने के बाद त्रिफला को छानकर उस पानी को पी लीजिए। इससे कुछ ही दिनों में कब्ज की शिकायत दूर हो जाएगी।
  • कब्ज के लिए शहद बहुत फायदेमंद है। रात को सोने से पहले एक चम्मच शहद को एक गिलास पानी के साथ मिलाकर नियमित रूप से पीने से कब्ज दूर हो जाता है। 
  • सुबह उठने के बाद बिना कुछ खाए हुए, 4-5 दाने काजू के और 4-5 दाने मुनक्का के साथ खाइए, इससे कब्ज की शिकायत समाप्त होगी। हर रोज रात में हर्रई को पीसकर बारीक चूर्ण बना लीजिए, इस चूर्ण को कुनकुने पानी के साथ पीजिए। कब्ज दूर होगा और पेट में गैस बनना बंद हो जाएगा। 
  • रात को सोते वक्त अरंडी के तेल को हल्के गरम दूध में मिलाकर पीजिए। इससे पेट साफ होगा। 
  • इसाबेल की भूसी कब्ज के लिए रामबाण दवा है। दूध या पानी के साथ रात में सोते वक्त इसाबेल की भूसी लेने से कब्ज समाप्त होता है। 
  • अमरूद और पपीता कब्ज के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं। अमरूद और पपीता को किसी भी समय खाया जा सकता है।
  • पालक का रस पीने से कब्ज की शिकायत दूर होती है, खाने में भी पालक की सब्जी का प्रयोग करना चाहिए।छाछ भी गैस की समस्या से निपटने का एक तरीका हैं इसमें लैक्टिक एसिड होता हैं। दूध से ज्यादा इसमें पचाने की क्षमता ज्यादा होती हैं । छाछ को गैस की समस्या होने पर जरूर पीना चाहिए 
  • गर्म पानी और नींबू का रस मिक्स करके पीने से मतली ,उल्टी या डकार से राहत मिलती हैं । यह रक्त शोधक के रूप में काम करता हैं । सुबह उठकर ताज़ा नींबू पानी पीने से पाचन से जुडी समस्याएं दूर हो जाती हैं ।
  • अदरक पेट की गैस के लिए एक कारगर उपाय हैं । अगर आपका खाना नही पच रहा हैं तो आप तो अदरक चबाएं इससे आपके खाना पचने में मदद मिलेगी, नहीं तो आप सेंधा नमक,अदरक पाउडर और चुटकी भर हींग को मिलाकर आप उसे पानी के साथ खा सकते हैं । खाने में भी आप अदरक डाल सकते हैं या अदरक की चाय भी पी सकते हैं । यह पाचन शक्ति को बढ़ाता हैं और एसिडिटी होने से रोकता हैं ।
  • पेट में गैस के लिए एक और सबसे अच्छा इलाज हैं आलू का रस, खाना खाने से पहले आप आधा कप आलू का रस पी लो । दिन में कम से कम इसे तीन बार पीयें और परिणाम देखें ।
  • लहसुन भी गैस की समस्या से बड़ी राहत प्रदान करता हैं । लहसुन की तीखी गंध और हीटिंग गुणवत्ता उचित पाचन में मदद करती है और गैस से राहत प्रदान करता है जो आमाशय में जलन भी नहीं होने देता । आप गैस से पीड़ित हैं, बेहतर परिणाम के लिए ताजा लहसुन का प्रयोग करें।लहसुन का सूप भी पी सकते हैं । 3 लहसुन, लौंग उन्हें आग पर भुन लें और यह छीलने के बाद इसे खा लें । बेहतर परिणाम के लिए रोज़ाना कम से कम दो या तीन बार इस लहसुन की विधि को अपनाएं ।

Tuesday, March 22, 2016

भिन्डी के फायदे,Health Benefits of Lady finger in Hindi

हरी सब्जियों में भिंडी का भी अहम स्थान है। यह सेहत के ल‌िए खासी फायदेमंद है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व और प्रोटीन मौजूद होते हैं। भिंडी में प्रोटीन, वसा, रेशा, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, फॉस्फोरस, लौह मैग्नीशियम, पोटेशियम और सोडियम मौजूद होता है।

मधुमेह रोगियों के लिए उपयोगी -भिंडी में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो मधुमेह को नियंत्रित करने में उपयोगी साबित होता है। भिंडी खून में पहले से मौजूद शुगर के अंश को सोख लेती है और ब्लड शुगर के स्तर को सामान्य बनाने में मदद करती है। मैक्स की वरिष्ठ आहार विशेषज्ञ डॉ. सुनिता रॉय चौधरी के मुताबिक शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बनाए रखने में भी भिंडी मददगार होती है। इससे शुगर का स्तर ठीक रहता है या फिर आप शुगर की आशंका से दूर रहते हैं।

पेट के लिए उपयोगी -भिंडी हमारी आंतों के लिए फिल्टर का काम करती है। यह पेट के पित्त, अम्ल और कोलेस्ट्रॉल को बांध देती है, जिससे आंत को नुकसान नहीं पहुंचता। भिंडी आंतों की खराश को भी दूर करती है। इसलिए पेचिश या गैस की समस्या में भी भिंडी काम आती है। भिंडी शरीर में एसिड को भी बेअसर बनाती है और पाचनतंत्र के कवच के रूप में सुरक्षा करती है। भिंडी हमारे शरीर में पाए जाने वाले अच्छे बैक्टीरिया को मजबूत करती है। इसके साथ-साथ भिंडी शरीर में प्रोबायोटिक्स के विकास में भी मदद करती है, जिससे हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और पाचन तंत्र बेहतर होता है।

मूत्र की जलन के लिए उपयोगी -भिंडी पेशाब की जलन को दूर करती है। इसे खाने से पेशाब खुलकर और साफ आता है। इसलिए पेशाब की जलन होने पर भिंडी का सेवन करना चाहिए।

कमजोरी या थकावट में भी कारगर -कमजोरी, थकावट महसूस करने वालों के लिए भिंडी ऊर्जावर्धक दवा की तरह काम करती है। डॉक्टरों के मुताबिक भिंडी डिप्रेशन के शिकार लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित होती है।

जोड़ों का दर्द के लिए उपयोगी -भिंडी में पाया जाने वाला लसलसा पदार्थ हमारी हड्डियों के लिए उपयोगी होता है। इसके अलावा भिंडी में कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो हड्डियों के लिए लाभकारी होता है। यह जोडमें को लचीला बनाती है।

अस्थमा के रोगियों के लिए उपयोगी -भिंडी अस्थमा के रोगियों के लिए भी काफी लाभकारी साबित होती है। भिंडी में पाया जाने वाला विटामिन सी अस्थमा के लक्षण को पनपने से रोकता है। इसके अलावा भिंडी फेफडमें में सूजन और गले में खराश को ठीक करती है।

आंखें के लिए उपयोगी -भिंडी में विटामिन ‘ए’ की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो आंखों के लिए उपयोगी होता है। जिन लोगों की आंखें कमजोर होती हैं, उन्हें भिंडी खाने की सलाह दी जाती है। खाने में यदि भिंडी शामिल कर लिया जाए तो आंखों की रोशनी तो दुरुस्त होगी ही, आंखों से संबंधित कई अन्य समस्याएं भी ठीक होती हैं। कुछ रिपोर्ट के मुताबिक भिंडी मोतियाबिंद के जोखिम को भी कम करती है, हालांकि भारत में अभी इस पर शोध जारी है।  
त्वचा के लिए उपयोगी -भिंडी में विटामिन सी की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इस लिहाज से यह हमारी त्वचा के लिए भी वरदान है। त्वचा को पिंपल फ्री बनाना हो या चेहरे को चिकना और चमकदार बनाना हो, भिंडी हमेशा असरदार साबित होती है।

बालों के लिए उपयोगी -बेजान और रूखे बालों में बाउंस लाने के लिए भी आप भिंडी का इस्तेमाल कर सकते हैं। भिंडी को तब तक उबालें, जब तक कि वह एकदम पतली न हो जाए। फिर उस पानी में नींबू निचोड़कर बालों में लगाएं। इससे बालों की अच्छी कंडीशनिंग होगी और बालों में जान लौट आएगी।
 अनीमिया से बचाये - भिंडी में मौजूद आयरन तत्‍व हमारे शरीर के लिए काफी लाभकारी होते हैं। यह रक्‍त में हीमोग्‍लोबिन का निर्माण करते हैं, जिससे आप अनीमिया से बचे रहते हैं। इसके साथ ही भिंडी में मौजूद विटामिन के रक्‍त स्राव को रोकने में मदद करता है, जिससे किसी विकट परिस्थिति में शरीर से रक्‍तस्राव बहुत कम होता है।
वजन रखे काबू - जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए भिंडी में मौजूद फाइबर से अच्‍छा और कोई उपाय नहीं है। भिंडी में कैलोरी की मात्रा बिलकुल भी नहीं होती , इसलिए यह वजन कम करने का अच्‍छा उपाय माना जाता है।
दिल के लिए लाभकारी - भिंडी में मौजूद घुलनशील फाइबर रक्‍त में कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा को कम करने में मदद करता है। इससे हार्ट अटैक का खतरा काफी कम हो जाता है। भिंडी उच्‍च कोलेस्‍ट्रॉल को काबू करने का कारगर उपाय है। इसमें मौजूद पैक्‍टिन उच्‍च कोलेस्‍ट्रोल को काबू करने में मदद करता है।

अन्य लाभ

  • इसके सेवन से त्वचा अच्छी दिखती है. भिन्डी को उबाल कर , मसल कर इसे त्वचा पर थोड़ी देर लगा कर रखे. धोने के बाद आप पायेंगे की त्वचा बहुत मुलायम और ताजगी भरी लग रही है.
  • इसका सेवन कालोन कैंसर से बचाता है. इसका विटामिन ए म्यूकस मेम्ब्रेन बनाने में मदद करता है , जिससे पाचन क्रिया बेहतर होती है.
  • इसके नियमित सेवन से किडनी की सेहत में सुधार होता है.
  • मोटापे को दूर करता है. कई बार शरीर में विटामिन्स की कमी से ज़्यादा खाने का मन करता है. इसलिए भिन्डी में मौजूद विटामिन्स उसकी कमी को दूर कर अनावश्यक भूक को मिटाते है.
  • इसका विटामिन के हड्डियों को मज़बूत बनाता है. यह रक्त की कमी को भी दूर करता है.
  • कोलेस्ट्रोल को कम करती है.
  • इसके विटामिन्स आँखों , बाल और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाते है.
  • यह गर्मी से बचाती है.

Wednesday, March 16, 2016

कद बढ़ाने के उपाय,Height Increase Tips in hindi,

लम्बाई बढाने के घरेलु उपाय,स्त्री हो या पुरुष, अच्छी हाइट दोनो की सुंदरता और व्यक्तित्व में निखार लाती है। क्योंकि लम्बाई जीन्स पर निर्भर करती है, इसलिए कुछ लोग सोचते हैं कि लम्बाई बढ़ा पाना मुमकिननहीं होता। लेकिन आपको यह जानकर खुशी होगी कि कुछ ऐसे प्रकृतिक तरीके हैं जिनको अपनाकर आप अपनी लम्बाई बढ़ा सकते हैं।

शरीर में पोषक तत्वों की कमी या हार्मोन की गड़बड़ी होने पर कुछ लोगों का कद बढ़ नहीं पाता है। दरअसल, हमारी लंबाई बढ़ाने में सबसे बड़ा योगदान ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन यानी एचजीएच का होता है। एचजीएच पिट्युटरी ग्लैंड से निकलता है। यही कारण है कि सही प्रोटीन और न्यूट्रिशन न मिलने पर शरीर का विकास रुक जाता है।

यदि आपके साथ भी यह समस्या है तो आज हम आपको बताने जा रहे हैं हाइट बढ़ाने और कर्वी फिगर पाने के कुछ खास नुस्खे

कद बढ़ाने के उपाय ,how to increase height,

1-अश्वगंधा और सूखी नागौरी दोनों को ही आयुर्वेद में शारीरिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।सामग्री – 20 ग्राम सूखी नागौरी। – 20 ग्राम अश्वगंधा। – 20 ग्राम चीनी
बनाने की विधि- सूखी नागौरी और अश्वगंधा की जड़ को बारीक पीस लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में चीनी मिला लें। यह मिश्रण कांच की बोतल में भर लें।

ऐसे करें सेवन- रात को सोते समय रोज दो चम्मच चूर्ण लें। फिर गाय का दूध पिएं। इससे हाइट बढ़ने के साथ ही हेल्थ भी बन जाती है। इस चूर्ण को लगातार 40 दिन तक लें। सर्दियों में यह चूर्ण अधिक फायदा करता है।

2-काले तिल और अश्वगंधा का यह योग नियमित रूप से सेवन करने पर हाइट बढ़ने लगती है।

सामग्री- 1.अश्वगंधा चूर्ण। 2. काले तिल। 3. खजूर। 4. गाय का घी

बनाने की विधि- 1 से 2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण और 1 से 2 ग्राम काले तिल को पीसकर चूर्ण बना लें।

ऐसे करें सेवन- इस चूर्ण को 3 से 5 खजूर में मिलाकर 5 से 20 ग्राम गाय के घी में एक महीने तक खाने से लाभ होता है।



3- केवल अश्वगंधा का पाउडर लेने से भी कद बढ़ने लगता है।

सामग्री- 1. अश्वगंधा की जड़ 2. चीनी 3. दूध


बनाने की विधि- थोड़ी सी मात्रा में अश्वगंधा की जड़ लेकर उसका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण में बराबर मात्रा में चीनी मिलाकर रख लें।
कैसे करें सेवन How use

ऐसे करें सेवन- इस मिश्रण को 2 चम्मच मात्रा में एक गिलास दूध में डालकर पिएं। रात को सोने से पहले 45 दिनों तक इस योग का सेवन करने से शरीर सुडौल बनता है और कद बढ़ जाता है

सावधानियां,Precautions

1-फास्ट फूड या जंक फूड का सेवन न करें। – खटाई न खाएं– ज्यादा मिर्च-मसाले से
परहेज करें। – इन दवाओं का सेवन गाय के दूध से करें तो बेहतर है।
मनुष्य को अपने हाथ तथा पैरों के बल झूलने तथा दौड़ने जैसी कसरतों के अलावा भोजन में प्रोटीन, कैल्शियम तथा विटामिनों की जरूरत बहुत आवश्यक है
2-पौष्टिक भोजन करने से लम्बाई बढ़ने में फायदा मिलता है।शरीर में लंबाई बढ़ाने का सबसे बड़ा योगदान होता है ह्यूमन ग्रोथ हॉरमोन का यानी की एचजीएच। एचजीएच पिटूइटेरी ग्लैंड से निकलता है जिससे हाइट बढ़ती है। सही प्रोटीन और न्यूटिशन न मिलने के कारण शरीर का विकास होना बंद या कम हो जाता है। और अगर आप शरीर का सही विकास करना चाहते हैं तो खान-पान का पूरा ध्यान रखना शुरु कर दें।

Saturday, March 12, 2016

गोंद के गुण, Health Benefits of Glue,Health Care,Glue,gond ke fayde,

किसी पेड़ के तने को चीरा लगाने पर उसमे से जो स्त्राव निकलता है वह सूखने पर भूरा और कडा हो जाता है उसे गोंद कहते है .यह शीतल और पौष्टिक होता है . उसमे उस पेड़ के ही औषधीय गुण भी होते है आयुर्वेदिक दवाइयों में गोली या वटी बनाने के लिए भी पावडर की बाइंडिंग के लिए गोंद का इस्तेमाल होता है

1-नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है।इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है . इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है - पलाश के गोंद से हड्डियां मज़बूत होती है .पलाश का से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है।

2-आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बह जाती है और आसानी से भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाता है।

Gum of Arabic ,Arabic Gum for kidney,

3-सेमल का गोंद मोचरस कहलाता है, यह पित्त का शमन करता है।अतिसार में मोचरस चूर्ण एक से तीन ग्राम को दही के साथ प्रयोग करते हैं। श्वेतप्रदर में इसका चूर्ण समान भाग चीनी मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी होता है। दंत मंजन में मोचरस का प्रयोग किया जाता है।
बारिश के मौसम के बाद कबीट के पेड़ से गोंद निकलती है जो गुणवत्ता में बबूल की गोंद के समकक्ष होती है

4-हिंग भी एक गोंद है जो फेरूला कुल (अम्बेलीफेरी, दूसरा नाम एपिएसी) के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित गोंद रेज़िननुमा होता है । फेरूला कुल में ही गाजर भी आती है हींग दो किस्म की होती है 

5-एक पानी में घुलनशील होती है जबकि दूसरी तेल में । किसान पौधे के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी मोटी गाजरनुमा जड़ के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगा देते हैं ।
कीकर या बबूल का गोंद पौष्टिक होता है .

6-नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है।इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है . इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है 

7-पलाश के गोंद से हड्डियां मज़बूत होती है .पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।यह गोंद गर्म पानी में घोलकर पीने से दस्त व संग्रहणी में आराम मिलता है।

8-आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बह जाती है और आसानी से भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाता है।

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9-सेमल का गोंद मोचरस कहलाता है, यह पित्त का शमन करता है।अतिसार में मोचरस चूर्ण एक से तीन ग्राम को दही के साथ प्रयोग करते हैं। श्वेतप्रदर में इसका चूर्ण समान भाग चीनी मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी होता है। दंत मंजन में मोचरस का प्रयोग किया जाता है।बारिश के मौसम के बाद कबीट के पेड़ से गोंद निकलती है जो गुणवत्ता में बबूल की गोंद के समकक्ष होती है।

10-हिंग भी एक गोंद है जो फेरूला कुल (अम्बेलीफेरी, दूसरा नाम एपिएसी) के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित गोंद रेज़िननुमा होता है । फेरूला कुल में ही गाजर भी आती है । हींग दो किस्म की होती है - एक पानी में घुलनशील होती है जबकि दूसरी तेल में । किसान पौधे के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी मोटी गाजरनुमा जड़ के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगा देते हैं । इस चीरे लगे स्थान से अगले करीब तीन महीनों तक एक दूधिया रेज़िन निकलता रहता है । इस अवधि में लगभग एक किलोग्राम रेज़िन निकलता है । हवा के संपर्क में आकर यह सख्त हो जाता है कत्थई पड़ने लगता है ।यदि सिंचाई की नाली में हींग की एक थैली रख दें, तो खेतों में सब्ज़ियों की वृद्धि अच्छी होती है और वे संक्रमण मुक्त रहती है । पानी में हींग मिलाने से इल्लियों का सफाया हो जाता है और इससे पौधों की वृद्धि बढ़िया होती

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11-गुग्गुल एक बहुवर्षी झाड़ीनुमा वृक्ष है जिसके तने व शाखाओं से गोंद निकलता है, जो सगंध, गाढ़ा तथा अनेक वर्ण वाला होता है. यह जोड़ों के दर्द के निवारण और धुप अगरबत्ती आदि में इस्तेमाल होता है .

12-प्रपोलीश- यह पौधों द्धारा श्रावित गोंद है जो मधुमक्खियॉं पौधों से इकट्ठा करती है इसका उपयोग डेन्डानसैम्बू बनाने में तथा पराबैंगनी किरणों से बचने के रूप में किया जाता है।

13-ग्वार फली के बीज में ग्लैक्टोमेनन नामक गोंद होता है .ग्वार से प्राप्त गम का उपयोग दूध से बने पदार्थों जैसे आइसक्रीम , पनीर आदि में किया जाता है। इसके साथ ही अन्य कई व्यंजनों में भी इसका प्रयोग किया जाता है.ग्वार के बीजों से बनाया जाने वाला पेस्ट भोजन, औषधीय उपयोग के साथ ही अनेक उद्योगों में भी काम आता है।

14-इस चीरे लगे स्थान से अगले करीब तीन महीनों तक एक दूधिया रेज़िन निकलता रहता है । इस अवधि में लगभग एक किलोग्राम रेज़िन निकलता है हवा के संपर्क में आकर यह सख्त हो जाता है कत्थई पड़ने लगता है ।यदि सिंचाई की नाली में हींग की एक थैली रख दें, तो खेतों में सब्ज़ियों की वृद्धि अच्छी होती है और वे संक्रमण मुक्त रहती है । पानी में हींग मिलाने से इल्लियों का सफाया हो जाता है और इससे पौधों की वृद्धि बढ़िया होती
15-इसके अलावा सहजन , बेर , पीपल , अर्जुन आदि पेड़ों के गोंद में उसके औषधीय गुण मौजूद होते है

Wednesday, February 24, 2016

गेंदा फूल के औषधीय गुण Health Benefits of Marigold Flowers in Hindi

Health Benefits of Marigold Flowers in Hindi
  • स्पर्मेटोमिया में है रामबाण आदिवासियों का मानना है कि जिन पुरुषों को स्पर्मेटोरिया (पेशाब और मल करते समय वीर्य जाने की शिकायत) हो उन्हे गेंदा के फूलों का रस पीना चाहिए। 
  • कान का दर्द दूर करता है गेंदा के पत्तों का रस कान में डाला जाए तो यह कान दर्द को खत्म कर देता है। आदिवासी इसकी पत्तियों को कुचलकर रस तैयार करते हैं और इस रस की 2 बूंद कान मे डालते हैं। 
  • पुरुषों को शक्ति प्रदान करता है यदि गेंदा के फूलों को सुखा लिया जाए और इसके बीजों को एकत्र कर मिश्री के दानों के साथ समान मात्रा (5 ग्राम प्रत्येक) का सेवन कुछ दिनों तक दिन में दो बार किया जाए तो यह पुरुषों को शक्ति प्रदान करता है। 
  • दमा और खांसी में है अचूक औषधि 
  • डांग- गुजरात के आदिवासी सूखे हुए गेंदे के फूल को मिश्री के साथ खाने की सलाह उन रोगियों को देते है जिन्हें दमा और खाँसी की शिकायत है 
  • बिवाई में राहत देता है गेंदा के पत्तों को मोम में गर्म करके ठंडा होने पर पैरों की बिवाई पर लगाने से आराम मिल जाता है। पैरो के तलवे भी चिकने हो जाते हैं 
  • बवासीर में लाभदायक है बवासीर के रोगी को यदि गेंदा की पत्तियों के रस में काली मिर्च और नमक डालकर पिलाया जाए तो आराम मिल जाता है। 
  • सूजन कम कर देता है गेंदे के फूल की पंखुडियों को एकत्र कर पीस लिया जाए और शरीर के सूजन वाले हिस्सों में लगाया जाए तो सूजन मिट जाती है 
  • घाव को जल्दी भर देता है जिन्हें सिर में फोड़े,फुन्सियां और घाव हो जाए उन्हे मैदा के साथ गेंदा की पत्तियों और फूलों के रस को मिलाकर सप्ताह में दो बार सिर पर लगाना चाहिए

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