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Tuesday, April 19, 2016

जानिए इमली के फ़ायदे,इमली के औषधीय गुण,Health Benefits of Tamarind in Hindi,

इमली के औषधीय गुण,Health Benefits of Tamarind in Hindi,

इमली का फल कच्चा हरा, पकने के बाद लाल रंग का हो जाता है। पकी इमली का स्वाद खट्टा-मीठा होता है इसे खाने के बाद दांत तक खट्टे होने लगते हैं। एक इमली के फल में तीन से लेकर दस बीज निकलते हैं। यह बीज काले, चमकदार व बहुत कड़े होते हैं पकी इमली का प्रयोग खट्टी सब्जी के लिए करते हैं। इसकी चटनी भी बनाते हैं। इससे सब्जी स्वादिष्ट बन जाती है। एक साल पुरानी इमली के गुण अधिक होते हैं। कच्ची तथा नई पकी इमली कम गुणकारी होती है। कच्ची इमली खट्टी, भारी व वायुनाशक होती है।
पकी इमली एसीडिटी कम करने वाली, कब्ज दूर करने वाली, गर्म तासीर वाली, कफ तथा वायु नाशक प्रकृति की होती है। सूखी इमली हृदय के लिए हितकारी तथा हल्की तासीर की मानी जाती है इससे थकान, भ्रम-ग्लानि दूर हो जाती है। इमली पित्तनाशक है, इमली के पत्ते सूजन दूर करने वाले गुणों से भरपूर होते हैं। इमली की तासीर ठंडी होती है इसे कम मात्र में ही सेवन करने का फायदा होता है। एक नजर डालते हैं इमली के औषधीय गुणों पर
  • वीर्य – पुष्टिकर योग : इमली के बीज दूध में कुछ देर पकाकर और उसका छिलका उतारकर सफ़ेद गिरी को बारीक पीस ले और घी में भून लें, इसके बाद सामान मात्रा में मिश्री मिलाकर रख लें | इसे प्रातः एवं शाम को ५-५ ग्राम दूध के साथ सेवन करने से वीर्य पुष्ट हो जाता है | बल और स्तम्भन शक्ति बढ़ती है तथा स्व-प्रमेह नष्ट हो जाता है |
  • शराब एवं भांग का नशा उतारने में : नशा समाप्त करने के लिए पकी इमली का गूदा जल में भिगोकर, मथकर, और छानकर उसमें थोड़ा गुड़ मिलाकर पिलाना चाहिए |
  • इमली के गूदे का पानी पीने से वमन, पीलिया, प्लेग, गर्मी के ज्वर में भी लाभ होता है |
  • ह्रदय की दाहकता या जलन को शान्त करने के लिये पकी हुई इमली के रस (गूदे मिले जल) में मिश्री मिलाकर पिलानी चाहियें |
  • लू-लगना : पकी हुई इमली के गूदे को हाथ और पैरों के तलओं पर मलने से लू का प्रभाव समाप्त हो जाता है  यदि इस गूदे का गाढ़ा धोल बालों से रहित सर पर लगा दें तो लू के प्रभाव से उत्पन्न बेहोसी दूर हो जाती है 
  • चोट – मोच लगना : इमली की ताजा पत्तियाँ उबालकर, मोच या टूटे अंग को उसी उबले पानी में सेंके या धीरे – धीरे उस स्थान को उँगलियों से हिलाएं ताकि एक जगह जमा हुआ रक्त फ़ैल जाए |
  • गले की सूजन : इमली १० ग्राम को १ किलो जल में अध्औटा कर (आधा जलाकर) छाने और उसमें थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर रोगी को गरारे या कुल्ला करायें तो गले की सूजन में आराम मिलता है |खांसी : टी.बी. या क्षय की खांसी हो (जब कफ़ थोड़ा रक्त आता हो) तब इमली के बीजों को तवे पर सेंक, ऊपर से छिलके निकाल कर कपड़े से छानकर चूर्ण रख ले| इसे ३ ग्राम तक घृत या मधु के साथ दिन में ३-४ बार चाटने से शीघ्र ही खांसी का वेग कम होने लगता है | कफ़ सरलता से निकालने लगता है और रक्तश्राव व् पीला कफ़ गिरना भी समाप्त हो जाता है |
  • ह्रदय में जलन : पकी इमली का रस मिश्री के साथ पिलाने से ह्रदय में जलन कम हो जाती है |
  • नेत्रों में गुहेरी होना : इमली के बीजों की गिरी पत्थर पर घिसें और इसे गुहेरी पर लगाने से तत्काल ठण्डक पहुँचती है |
  • चर्मरोग : लगभग ३० ग्राम इमली (गूदे सहित) को १ गिलाश पानी में मथकर पीयें तो इससे घाव, फोड़े-फुंसी में लाभ होगा |
  • उल्टी होने पर पकी इमली को पाने में भिगोयें और इस इमली के रस को पिलाने से उल्टी आनी बंद हो जाती है |
  • भांग का नशा उतारने में : नशा उतारने के लिये शीतल जल में इमली को भिगोकर उसका रस निकालकर रोगी को पिलाने से उसका नशा उतर जाएगा |
  • खूनी बवासीर : इमली के पत्तों का रस निकालकर रोगी को सेवन कराने से रक्तार्श में लाभ होता है |
  • शीघ्रपतन : लगभग ५०० ग्राम इमली ४ दिन के लिए जल में भिगों दे | उसके बाद इमली के छिलके उतारकर छाया में सुखाकर पीस ले | फिर ५०० ग्राम के लगभग मिश्री मिलाकर एक चौथाई चाय की चम्मच चूर्ण (मिश्री और इमली मिला हुआ) दूध के साथ प्रतिदिन दो बार लगभग ५० दिनों तक लेने से लाभ होगा 
  • लगभग ५० ग्राम इमली, लगभग ५०० ग्राम पानी में दो घन्टे के लिए भिगोकर रख दें उसके बाद उसको मथकर मसल लें | इसे छानकर पी जाने से लू लगना, जी मिचलाना, बेचैनी, दस्त, शरीर में जलन आदि में लाभ होता है तथा शराब व् भांग का नशा उतर जाता है | हँ का जायेका ठीक होता है |
  • बहुमूत्र या महिलाओं का सोमरोग : इमली का गूदा ५ ग्राम रात को थोड़े जल में भिगो दे, दूसरे दिन प्रातः उसके छिलके निकालकर दूध के साथ पीसकर और छानकर रोगी को पिला दे | इससे स्त्री और पुरुष दोनों को लाभ होता है | मूत्र- धारण की शक्ति क्षीण हो गयी हो या मूत्र अधिक बनता हो या मूत्रविकार के कारण शरीर क्षीण होकर हड्डियाँ निकल आयी हो तो इसके प्रयोग से लाभ होगा |
  • अण्डकोशों में जल भरना : लगभग ३० ग्राम इमली की ताजा पत्तियाँ को गौमूत्र में औटाये | एकबार मूत्र जल जाने पर पुनः गौमूत्र डालकर पकायें | इसके बाद गरम – गरम पत्तियों को निकालकर किसी अन्डी या बड़े पत्ते पर रखकर सुहाता- सुहाता अंडकोष पर बाँध कपड़े की पट्टी और ऊपर से लगोंट कास दे | सारा पानी निकल जायेगा और अंडकोष पूर्ववत मुलायम हो जायेगें |
  • पीलिया या पांडु रोग : इमली के वृक्ष की जली हुई छाल की भष्म १० ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करने से पान्डु रोग ठीक हो जाता है |
  • आग से जल जाने पर : इमली के वृक्ष की जली हुई छाल की भष्म गाय के घी में मिलाकर लगाने से, जलने से पड़े छाले व् घाव ठीक हो जाते है |
  • पित्तज ज्वर : इमली २० ग्राम १०० ग्राम पाने में रात भर के लिए भिगो दे | उसके निथरे हुए जल को छानकर उसमे थोड़ा बूरा मिला दे | ४-५ ग्राम इसबगोल की फंकी लेकर ऊपर से इस जल को पीने से लाभ होता है |
  • सर्प , बिच्छू आदि का विष : इमली के बीजों को पत्थर पर थोड़े जल के साथ घिसकर रख ले | दंशित स्थान पर चाकू आदि से छत करके १ या २ बीज चिपका दे | वे चिपककर विष चूसने लगेंगे और जब गिर पड़े तो दूसरा बीज चिपका दें | विष रहने तक बीज बदलते रहे |

Tuesday, March 8, 2016

मलेरिया के घरेलू उपचार ,Malaria Treatment in Hindi,Home remedies for malaria

जब मादा एनोफ़ीलीज मच्छर किसी मलेरिया रोग ग्रस्त  व्यक्ति को काटता है ,तो रोगी व्यक्ति के शरीर से मलेरिया संक्रमित खून खींच लेता है। इस खून में मलेरिया के  जीवाणु होते हैं।फ़िर जब यही मच्छर स्वस्थ्य व्यक्ति को काटता है तो मलेरिया के जीवाणु उसके शरीर में प्रविष्ट हो जाते हैं। मच्छर के काटने के प्राय:10 दिवस पश्चात मलेरिया ज्वर का आक्रमण हो जाता है| मलेरिया एक जानलेवा बुखार है जो कि गर्मी और बरसात के मौसम में बहुत तेजी से फैलता है। हर साल 25 अप्रैल को वर्ल्‍ड मलेरिया डे पूरे विश्‍व में मनाया जाता है

मलेरिया परजीवी विशेष रूप से लाल रक्त कणिकाओं (आरबीसी) को प्रभावित करता है जिससे शरीर में रक्त की कमी हो जाती है और मरीज कमजोर होता जाता है। यदि शुरुआत में ही ध्यान न दिया जाए तो इससे लीवर भी प्रभावित हो सकता है और रोगी पीलिया जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ सकता है। इस बुखार में रोगी के शरीर का तापमान 101 से 105 डिग्री तक बना रहता है। यह एक प्रकार का संक्रामक बुखार हैं

मलेरिया का लक्षण

  • रोगी को सर्दी लगने लगती है
  • शरीर कांपने लगता है। दूसरा लक्षण है सर्दी के साथ प्यास लगना, उल्टी होना, हाथ पैरों पर ठंड लगना और बेचैनी होना आदि। 
  • मलेरिया रोग में रोगी को कब्ज, घबराहट और बेचैनी आदि आने लगती है।  
  • खून की जांच बुखार किसी भी तरह का हो वो मलेरिया हो सकता है। 
  • एैसे में तुरंत खून की जांच करवानी जरूरी है। ताकि समय रहते उपचार मिल सके।
  • जी घबराना और पित्त की कड़वी उल्टी होना भी मलेरिया का प्रमुख लक्षण

आयुवेर्दिक उपचार-Ayurvedic Treatment for Malaria Fever,

  • सुबह-सुबह खाली पेट तुलसी के 4 से 5 पत्तों को अच्छि तरह से चबाकर खाएं। थोड़े ही दिनों में मलेरिया का बुखार उतर जाएगा। मलेरिया को जल्द ठीक करने के लिए 10 ग्राम पानी उबालें और उसमें 2 ग्राम हींग डालकर उसका लेप बनाएं। अब इस लेप को हाथ और पैरों के नाखूनों पर लगाएं। 4 दिनों तक एैसा करने से रोगी जल्दी ठीक हो जाता है।
  • बार-बार मलेरिया के बुखार आने पर नियमित छांछ का सेवन करते रहें।
  • मलेरिया का बुखार आने पर खाने वाले नमक की 5 चम्मच को तवे पर तब तक सेकें जब तक उसका रंग भूरा न हो जाए। फिर उस भूरे नमक की 1 चम्मच को एक गिलास पानी में मिलाकर पीने से मलेरिया का बुखार खत्म हो जाता है।
  • मलेरिया होने पर सेब का सेवन अधिक से अधिक करें। सेब खाने से बुखार जल्द ही उतर जाता है।
  • सौंठ और पिसा धनिया को बराबर मात्रा में मिला कर चूर्ण बनाएं और इसे पानी के साथ दिन में 3 बारी लें।
  • नींबू का पानी या नींबू की शिकंजी का सेवन करने से मलेरिया का बुखार उतर जाता है।
  • पिसी हुई काली मिर्च और नमक को नींबू में लगाकर मलेरिया के रोगी को चूसने को दें। एैसा करने स बुखार की गर्मी उतर जाती है। दिन में 2 बार इसका सेवन करें। यह मलेरिया के रोग को जल्द ठीक करता है।
  • 5 काली मिर्च और 50 ग्राम नीम की पत्तियों को बारीक पीस लें और इसे एक कप में छानकर थोड़ा-थोड़ा रोगी को दें। एैसा करने से मलेरिया जड़ से खत्म हो जाता है।
  • अमरूद का ज्यादा से ज्यादा सेवन करने से भी मलेरिया की बीमारी दूर होती है।
  • एक गिलास पानी में एक चम्मच शहद, आधा चम्मच काली मिर्च और एक चम्मच दालचीनी का पाउडर मिलाकर उबालें और उसे ठंडा होने पर पीयें। यह बुखार से राहत देती है।
  • मलेरिया के बुखार होने पर प्याज का रस बेहद फायदेमंद होता है। 4 काली मिर्च का पाउडर, 4 मिली प्याज का रस मिलाकर दिन में 3 बारी पीएं।
  • लहसुन की 4 कलियों को छीलकर घी में मिला लें और इसका सेवन करें। एैसा करने से मलेरिया की ठंड उतर जाती है।
  • प्याज के रस में एक चुटकी कालीमिर्च का चूर्ण मिलाकर सुबह-शाम पीते रहने से भी मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
  • 1 चम्मच लहसुन के रस में 1 चम्मच तिल का तेल को मिलाकर हाथ पैरों के नाखूनों पर लगाएं।
  • मलेरिया रोग में इन आयुवेर्दिक उपायों को करने से लाभ मिलता है। लेकिन सबसे ज्यादा ध्यान इस बात पर देना जरूरी है कि बारिश के पानी को अपने आस-पास जमा न होने दें। मलेरिया के अलावा और भी कई बीमारियां इस जमे पानी से हो सकती हैं। इसलिए साफ सफाई का ध्यान जरूर देना चाहिए।
  • ढाक : ढाक के बीजों की गिरी (10 ग्राम) और करंजवा के बीजों के गिरी (10 ग्राम) को पानी में घिसकर छोटी-छोटी गोलियां बनाकर सुखा लें। बुखार आने के 4 घण्टे पहले यह 1 गोली पानी के साथ लेने से मलेरिया के बुखार में आराम मिलता है।
  • हरड़ : हरड़ का चूर्ण (10 ग्राम) को 100 मिलीलीटर पानी में पकाकर काढ़ा बना ले। यह काढ़ा दिन में 3 बार पीने से मलेरिया रोग में फायदा होता है।
  • चिरायता -चिरायते के रस लगभग 10 ग्राम को 10 मिलीलीटर संतरे के रस में मिलाकर मलेरिया रोग से पीड़ित रोगी को दिन में 3 बार पिलाने से लाभ होता है। चिरायते का काढ़ा 1 कप दिन में 3 बार कुछ दिनों तक नियमित पीने से मलेरिया रोग के सारे कष्टों में शीघ्र आराम मिलता है।
  • भांग : शुद्ध भांग का चूर्ण 1 ग्राम, गुड़ 2 ग्राम, दोनों को मिलाकर 4 गोलियां बना लेते हैं। जाड़े का बुखार दूर करने के लिए 1-2 गोली 2-2 घंटे के अन्तर से दें या शुद्ध भांग की 1 ग्राम गोली बुखार में 1 घंटा पहले देने से बुखार का वेग कम हो जाता है। 

Saturday, March 5, 2016

मुंह में छाले-Home Remedies for Mouth Ulcer in Hindi,

Home Remedies for lip Blisters,

भोजन में तीखे मसाले, घी, तेल, मांस, खटाई आदि अधिक मात्रा में खाने से पेट की पाचनक्रिया खराब हो जाती है जिससे मुंह व जीभ पर छाले पड़ जाते हैं। पेट में कब्ज होने से या गर्म पदार्थ खाने से गर्मी के कारण मुंह में छाले, घाव व दाने निकल आते हैं। ये छाले लाल व सफेद रंग के होते हैं। मुंह में छाले हो जाने पर मुंह में बार-बार लार आता रहता है। कभी-कभी मुंह के छालों से पीब भी निकलने लगती हैं। मुंह को ढकने वाली झिल्ली लाल, फूली और दर्द या जख्म से भरी होती है। इसमें जीभ लाल, फूली हुई और दांत के मसूढ़े फूले हुए होते हैं। तालुमूल में जलन होती रहती है। इस रोग में भोजन चबाने पर छाले व दानों पर लगने से दर्द होता है।

मुंह में छाले -लक्षण,

  • लक्षण इस रोग मे जीभ, तालु व होठों के भीतर छोटी-छोटी फुंसियां या छाले निकल आते हैं। ये दाने लाल व सफेद रंगों के होते हैं। इस रोग में मुंह में लार बार-बार आती है।
  • पानी पीने व जीभ तालू में लगने से तेज दर्द होता है। परिचय जब पेट के अंदर गर्मी का प्रकोप बढ़ जाता है तो जीभ की ऊपरी परत पर छाले उभर आते हैं। ऐसा उस दशा में होता है जब हम खाद्य पदार्थों का सेवन अधिक करते हैं। गर्म पदार्थों में आलू, चाट, पकौड़े, अदरक, खट्टी मीठी चीजें, अरहर या मसूर की दाल, बाजरे का आटा आते हैं। कभी-कभी शरीर भोजन को ठीक से नहीं पचा पाता है। तब आंतों में अपच का प्रदाह
  • उत्पन्न हो जाता है। यदि हम किसी कारणवश मल-मूत्र को रोके रहते हैं तो तब मल दुबारा पचने लगता है और आंतों में सड़न क्रिया आरम्भ हो जाती है। इन सभी कारणों से जीभ पर छाले पड़ जाते हैं। इन छालों में असहनीय दर्द होता है लगता है जैसे कांटे चुभ रहे हों।
  • मिर्च-मसालेदार चीजें खाने पर इनमें असहनीय दर्द होने लगता है तथा भोजन करना मुश्किल हो जाता है। साधारण भाषा में इसे मुंह का आना कहते हैं। इसके लिए धनिये का मिश्रण बहुत ही लाभकारी इलाज होता है। कारण मुंह में छाले अपचन व कब्ज के कारण होता है।
  • पेट की पाचनक्रिया खराब होने का कारण घी, तेल, मिर्च, खटाई, मांस तथा अधिक मसालेदार व अम्ल रस से बने खाद्य-पदार्थ आदि अधिक सेवन करना है, जिससे पेट में कब्ज बनने के कारण पाचनक्रिया खराब होकर मुंह में छाले, घाव, दाने आदि उत्पन्न हो जाते हैं।
  • मुंह में छाले होने पर मुंह से बदबू आने लगती है, छालों में जलन होती है तथा सुई चुभने की तरह दर्द होता है। मुंह में छाले होने पर भोजन करने में कठिनाई होती है।
  • बच्चों के मुंह में छाले होने पर लाल छाले, जीभ लाल व होठ के भीतरी भाग में लाल-लाल दाने निकल आते हैं।

मुंह में छाले-घरेलू उपचार,Ulcer Treatment,mouth ulcer treatment,treatment for ulcers in mouth,

  • सौंफ को मुंह में रखकर चबाने से मुंह के छाले, पीब और दाने आदि खत्म हो जाते हैं। भोजन करने के बाद थोड़ी सौंफ खाने से मुंह में नए छाले नहीं होते हैं। सौंफ का चूर्ण बनाकर छालों पर लगाने से मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं।
  • जिन लोगों के मुंह में छाले अक्सर होते रहते हैं वे खाने के पश्चात थोड़ी सौंफ खाया करें तो उनके मुंह में छाले नही होते हैं।
  • छोटी हरड़ को बारीक पीसकर छालों पर दिन में दो तीन बार लगाने से मुंह तथा जबान दोनों के छाले ठीक हो जाते हैं।
  • तुलसी की चार पांच पत्तियां रोजना सुबह और शाम को चबाकर ऊपर से थोड़ा पानी पी लें( ऐसा चार पांच दिनों तक करें) ।
  • करीब दो ग्राम सुहागे का पावडर बनाकर थोड़ी सी ग्लिसरीन में मिलाकर छालों पर दिन में दो तीन बार लगाएं छालों में जल्दी फायदा होगा। ऐसा करें दांतों में गंदगी से भी मुंह में छाले पैदा हो जाते हैं अत: दिन में 2 से 3 बार दांत साफ करना जरूरी है। भोजन में लालमरसा का साग खायें।
  • मुंह के छाले होने पर 2 केले रोजाना सुबह दही के साथ खायें। छाले होने पर टमाटर अधिक खाने चाहिए। ठण्डी फल व सब्जियां खायें। पेट की कब्ज खत्म करने के लियें सुबह 1 गिलास पानी शौच जाने से पहले पीने से लाभ होता है।
  • शहद में मुलहठी का चूर्ण मिलाकर इसका लेप मुंह के छालों पर करें और लार को मुंह से बाहर टपकने दें। 
  • मुंह में छाले होने पर अडूसा के 2-3 पत्तों को चबाकर उनका रस चूसना चाहिए। 
  • छाले होने पर कत्था और मुलहठी का चूर्ण और शहद मिलाकर मुंह के छालों परलगाने चाहिए
  • अमलतास की फली मज्जा को धनिये के साथ पीसकर थोड़ा कत्था मिलाकर मुंह में रखिए। या केवल अमलतास के गूदे को मुंहमें रखने से मुंह के छाले दूर हो जाते हैं।
  • अमरूद के मुलायम पत्तों में कत्था मिलाकर पान की तरह चबाने से मुंह के छाले से राहत मिलती है और छाले ठीक हो जाते हैं
 ऐसा न करें भोजन में अधिक तेल, मिर्च, मांस, तेज मसाले व गर्म पदार्थ न खायें। पेट में कब्ज होने पर छाले बनते हैं। पेट में कब्ज को बनाने वाले कोई भी पदार्थ न खाएं। अधिक गरिष्ठ भोजन न करें।चाय, शराब, बीड़ी-सिगरेट या किसी भी नशीली चीज का सेवन न करें।

Sunday, February 21, 2016

नीम के फायदे-Health Benefits of Neem in Hindi

नीम में इतने गुण हैं कि ये कई तरह के रोगों के इलाज में काम आता है। यहाँ तक कि इसको भारत में ‘गांव का दवाखाना’ कहा जाता है। यह अपने औषधीय गुणों की वजह से आयुर्वेदिक मेडिसिन में पिछले चार हजार सालों से भी ज्यादा समय से इस्तेमाल हो रहा है। नीम को संस्कृत में ‘अरिष्ट’ भी कहा जाता है, जिसका मतलब होता है, ‘श्रेष्ठ, पूर्ण और कभी खराब न होने वाला।
  • नीम की लकड़ी को पानी में घिसकर एक इंच मोटा लेप फोड़े पर लगायें। इससे फोड़ा समाप्त हो जाता है। 
  • नकसीर (नाक में से खून का आना) :नीम की पत्तियों और अजवायन को बराबरमात्रा में पीसकर कनपटियों पर लेप करने से नकसीर का चलना बन्द हो जाता है।
  • बालों का असमय में सफेद होना (पालित्य रोग) : नीम के बीजों के तेल को 2-2 बूंद नाक से लेने से और केवल गाय के दूध का सेवन करने से पालित्य रोग में लाभ होता है। 
  • नीम के तेल को सूंघने से बाल काले हो जाते हैं। नीम के बीजों को भांगरा और विजयसार के रस की कई भावनाएं देकर बीजों का तेल निकाल लें, फिर इसकी 2-2 बूंदों को नाक से लेने से तथा आहार में केवल दूध और भात खाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं। 
  • बुखार या मलेरिया होने पर नीम का काढ़ा दिया जा सकता है। इस काढ़े को बनाने के लिए एक गिलास पानी में नीम के पत्ते, निम्बोली, काली मिर्च, तुलसी, सोंठ, चिरायता बराबर मात्रा में डालकर उबालें। इस मिश्रण को इतनी देर उबालें जिससे कि आधा पानी वाष्प बनकर उड़ जाए। बाद में इस मिश्रण को छानकर रोगी को दिन में तीन बार एक−दो चम्मच पिलाएं। नीम के पत्तों और उसकी अंतर छाल का चूर्ण भी विषम ज्वर में फायदा पहुंचाता है। मलेरिया में नीम की पत्तियों को फिटकरी तथा पानी के साथ मिलाकर गोली के रूप में बुखार के एक घंटा पहले तथा एक घंटा बाद में दें। इससे भी मलेरिया ठीक हो जाता है। 
  • बालों की रूसी : एक मुट्टी नीम के पत्तों का काढ़ा बनाकर नहाने से 1 घंटे पहले सिर पर मलने से रूसी मिट जाती है। 
  • नीम की निबौलियों को सुखाकर अरीठा के साथ मिलाकर बारीक पीसकर रख लें। इसे 2 चम्मच भर एक गिलास गर्म पानी में घोलकर सिर को धो लेने से सिर की जूंएं, लीखें, सिर की दुर्गन्ध खत्म हो जाती है तथा बाल काले और मुलायम होते हैं। नीम के फायदे
  • नीम के पत्तों को पीसकर पानी में उबालकर ठंड़ा होने दें। इसके बाद इसे छानकर इससे सिर को धो लें और बालों को सही तरह से मालिश करें। बालों के सूख जाने पर स्वच्छ एरण्ड का तेल और नारियल का तेल बराबर मात्रा में लेकर इसे मिला लें और इससे सिर की अच्छी तरह से मालिश करें। इससे सिर की रूसी मिट जाएगी। 
  • खसरा : खसरा के मरीज के बिस्तर पर रोजाना नीम की पत्तियां रखने से अन्दर की गर्मी शान्त हो जाती है। नीम के ताजे और मुलायम पत्तों को पानी में उबालकर छान लें, फिर उसमें साफ कपड़े की पट्टी को भिगोकर खसरे के रोगी की आंखों पर रखने से आंखों का लाल होना दूर हो जाता है। रोगी को नीम के पानी से नहलाने से खसरे के रोग में जलन दूर होती है। 
  • शरीर के आधे अंग में लकवा (अर्धांगवात) : नीम के तेल की 3 सप्ताह तक मालिश करने से लाभ होता है। 
  • गंजापन और बालों की वृद्धि : नीम के पत्ते 10 ग्राम, बेर के पत्ते 10 ग्राम दोनों को अच्छी तरह पीसकर इसका उबटन (लेप) बना लें। इस लेप को गंजे सिर पर मालिश करके 1 से 2 घंटे बाद धोने से बाल उग आते हैं। इसका प्रयोग 1 महीने तक करने से लाभ होता है। नीम का तेल 2-3 महीने रोजाना बालों के उड़कर बने हुए चकते पर लगाने से बाल उग आते हैं। 100 ग्राम नीम के पत्तों को 1 लीटर पानी में उबालने के बाद बालों को धोकर नीम का तेल लगाएं। इससे बाल उगने लगते हैं। नीम के तेल को सूंघने से गंजेपन का रोग दूर हो जाता है। 
  • बालों को मजबूत बनाना और गिरने से रोकना : नीम के पत्तों को पानी में खूब उबालें। इसके बाद इसे उतारकर ठंड़ा कर लें। इस पानी से सिर को धोते रहने से बाल मजबूत, काले होते हैं और बालों का गिरना या झड़ना बन्द हो जाता है। 
  • नीम का तेल रात को सोने से पहले बालों में लगा लें और सुबह नीम वाले साबुन से सिर को धो लें। कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन करने से सिर की जुंए और लीख दूर होती हैं। इसके साथ बाल मजबूत होते हैं। नीम का तेल लगाने से बाल फिर से जम जाते हैं। 
  • नीम और बेर के पत्तों को पानी में उबालकर बालों को धोकर बालों को सुखा लें। अब नीम के तेल को बालों की जड़ों में लगाकर मसलने से बालों का गिरना बन्द हो जाता है। 
  • सिर के बाल गिरने की शुरूआत ही हुई हो तो इसके लिए आप को नीम और बेर के पत्तों को पानी में उबाल लेना चाहिए। इससे बालों को धोने से बालों का झड़ना कम हो जाता है। इस तरह बाल काले भी होगें और लंबे भी। इसके प्रयोग से जुएं भी मर जाते हैं। सिर धोते समय इस बात का ध्यान रखें कि यह पानी आंखों में प्रवेश हो। इसके लिए आंखों को बन्द रखें। 
  • सिर में खुजली होने पर : नीम के पत्तों का काढ़ा बनाकर सिर को धो लें। सिर को धोने के बाद नीम के तेल को लगाने से सिर की जूएं और लीखों के कारण होने वाली खुजली बन्द हो जाती है। नीम के बीजों को पीसकर लगाने से भी लाभ होता है। 
  • कील-मुंहासे : नीम के पत्ते, अनार का छिलका, लोध्र और हरड़ को बराबर लेकर दूध के साथ पीसकर लेप तैयार कर लें। इस लेप को रोजाना मुंह पर लगाने से मुंह और चेहरा निखर उठता है। नीम की छाल के बिना नीम की लकड़ी को पानी के साथ चंदन की तरह घिसकर मुंहासों पर 7 दिनों तक लगातार लगाने से मुंहासे पूरी तरह से समाप्त हो जाते हैं। नीम की जड़ को पानी में घिसकर लगाने से कील-मुंहासे मिट जाते हैं और चेहरा सुंदर बन जाता है। 
  • दॉतों के रोग : नीम की दातुन करने से दांतों के रोगों में लाभ मिलता है। नीम के फूलों से बने काढ़े से दिन में 3 बार गरारे करें और पतली टहनी को दांतों से चबा-चबाकर सुबह-शाम दातुन करते रहने से दांतों और मसूढ़ों के रोगों से छुटकारा मिलता है। 
  • लगातार नीम के फूलो का रस ७ दिन पिने से कभी बुखार नहीं आयेगा और आँखों की रौशनी अच्छी रहती है | 
  • नीम के तेल से दीपक जला कर उसका बना काजल आँखोंमें डालने से ज्योति बढती है| 
  • बवासीर जैसे कष्टकारी रोग के इलाज के लिए नीम तथा कनेर के पत्ते बराबर मात्रा में मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को प्रभावित भाग पर लगाने से कष्ट कम होता है। नीम के पत्तों तथा मूंग दाल को मिलाकर पीस कर बिना मसाले डाले तलकर खाने से भी इस रोग में आराम मिलता है। 
  • पथरी की समस्या से निपटने के लिए लगभग 150 ग्राम नीम की पत्तियों को 2 लीटर पानी में पीसकर उबालें और पी लें इससे पथरी निकल सकती है। पथरी यदि गुर्दे में है तो नीम के पत्तों की राख की लगभग 2 ग्राम मात्रा प्रतिदिन पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है। 
  • नीम की पत्तियों को सरसों के तेल में जलाने के बाद हल्दी डालकर दुबारा जलाएं बाद में इसे छानकर शहद मिलाकर रख लें। रात को सोते समय इस मिश्रण की एक−दो बूंद लेने से कान का बहना रुकता है। गुनगुने नीम के तेल की दो−तीन बूंदें कान में टपकाने से कान के दर्द में राहत मिलती है। 
  • नीम के फूलों को गर्म पानी में मसलकर व छानकर सोते समय पीने से कब्ज दूर होती है। नीम की पत्तियों को सुखाकर शक्कर मिलाकर खाने से दस्त में आराम मिलता है। पेट के कीड़ों को नष्ट करने के लिए नीम के पत्तों के रस में शहद और काली मिर्च मिलाकर दिया जाना चाहिए। पेचिस होने की स्थिति में नीम की भुनी हुई अतर छाल का चूर्ण दही में मिलाकर लेना चाहिए। 
  • जुकाम होने पर नीम की पत्तियां काली मिर्च के साथ पीसकर गोलियां बना लें। गर्म पानी के साथ ये तीन−चार गोलियां खाने से जुकाम ठीक हो जाता है। 
  • नीम के पत्ते, छाल और निम्बोली को बराबर मात्रा में मिलाकर पीसने से बने लेप से त्वचा पर होने वाले फोड़े−फुसियां तथा घाव जल्दी ठीक हो जाते हैं। इस लेप को दिन में कम से कम तीन बार प्रभावित हिस्से पर लगाना चाहिए। 
  • नीम के पत्तों को दही में पीसकर लगाने से दाद ठीक हो जाते हैं। बेवची एक अन्य त्वचा रोग है जो घुटनों व टखनों के बीच पैर पर होता है। एग्जीमा की तरह इसमें जलन और खुजली होती है। इसमें नीम का रस या नीम की पत्तियों की राख लगाने से राहत मिलती है। रक्त को शुद्ध करने के लिए नीम के फूलों का चूर्ण आधा−आधा चम्मच सुबह शाम लेना चाहिए। दोपहर में लगभग दो चम्मच नीम के पत्तों का रस भी लें। 
  • कुष्ठ जैसे कष्टकारी रोगों की चिकित्सा भी नीम द्वारा संभव हैं इसके लिए नीम के सूखे पत्तों तथा हरड़ को बराबर मात्रा में मिलाकर व पीसकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की एक चम्मच मात्रा सुबह शाम चार−छरू हफ्ते तक लेने से लाभ होता है।
  • नीम की कोपलों के रस में मिश्री मिलाकर सुबह−शाम पीने से गर्मी में राहत मिलती है। नीम की पत्तियों का तेल हथेलियों और तलवों पर लगाने से उनकी जलन दूर होती है। गर्मी के प्रभाव के कारण अमाशय में विकृति आने पर पानी में नीम का रस मिलाकर पीना चाहिए। 
  • पित्ताशय से आंत में पहुंचने वाले पित्त में रुकावट आने से पीलिया होता है। ऐसे में रोगी को नीम के पत्तों के रस में सोंठ का चूर्ण मिलाकर देना चाहिए। इस दौरान रोगी को मात्र दही चावल ही खाने दें। कई दिनों तक बुखार रहने या भारी भोजन करने से प्लीहा यकृत के बढ़ने की शिकायत हो सकती है। ऐसे में नीम के पत्तों का चूर्ण पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है। 
  • नीम के तेल को गर्म करके मालिश करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है। वे लोग जो गठिया रोग से पीडि़त हैं उनके लिए भी यह लाभदायक होता है।

Saturday, February 20, 2016

निम्बू के फायदे-Health Benefits of Lemon in Hindi-नीबू के लाभ

Nimbu ke anek Fayde,
नींबू का रस आपको ताज़गी का एहसास तो दिलाता ही है, साथ ही कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति भी दिलाने का काम करता है।
  • शुद्ध शहद में नींबू की शिकंजी पीने से मोटापा दूर होता है। 
  • नींबू के सेवन से सूखा रोग दूर होता है। 
  • नींबू का रस एवं शहद एक-एक तोला लेने से दमा में आराम मिलता है। 
  • नींबू का छिलका पीसकर उसका लेप माथे पर लगाने से माइग्रेन ठीक होता है। 
  • नींबू में पिसी काली मिर्च छिड़क कर जरा सा गर्म करके चूसने से मलेरिया ज्वर में आराम मिलता है
  • नींबू के रस में नमक मिलाकर नहाने से त्वचा का रंग निखरता है और सौंदर्य बढ़ता है। 
  • नौसादर को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद ठीक होता है। 
  • नींबू के बीज को पीसकर लगाने से गंजापन दूर होता है। 
  • बहरापन हो तो नींबू के रस में दालचीनी का तेल मिलाकर डालें। 
  • आधा कप गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पिएं, रक्त की कमी दूर होगी। 
  • दो चम्मच बादाम के तेल में नींबू की दो बूंद मिलाएं और रूई की सहायता से दिन में कई बार घाव पर लगाएं, घाव बहुत जल्द ठीक हो जाएगा। 
  • प्रतिदिन नाश्ते से पहले एक चम्मच नींबू का रस और एक चम्मच ज़ैतून का तेल पीने से पत्थरी से छुटकारा मिलता है। 
  • किसी जानवर के काटे या डसे हुए भाग पर रूई से नींबू का रस लगांए, लाभ होगा। 
  • एक गिलास गर्म पानी में नींबू डाल कर पीने से पांचन क्रिया ठीक रहती है। 
  • चक्तचाप, खांसी, क़ब्ज़ और पीड़ा में भी नींबू चमत्कारिक प्रभाव दिखाता है। 
  • विशेषज्ञों का कहना है कि नींबू का रस विटामिन सी, विटामिन, बी, कैल्शियम, फ़ास्फ़ोरस, मैग्नीशियम, प्रोटीन और कार्बोहाईड्रेट से समृद्ध होता है। 
  • विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मसूढ़ों से ख़ून रिसता हो तो प्रभावित जगह पर नींबू का रस लगाने से मसूढ़े स्वस्थ हो जाते हैं। 
  • नींबू का रस पानी में मिलाकर ग़रारा करने से गला खुल जाता है। 
  • नींबू के रस को पानी में मिलाकर पीने से त्वचा रोगों से भी बचाव होता है अतः त्वचा चमकती रहती है, कील मुंहासे भी इससे दूर होते हैं और झुर्रियों की भी रोकथाम करता है। 
  • नींबू का रस रक्तचाप को संतुलित रखता है। 
  • अगर बॉडी में विटामिन सी की मात्रा कम हो जाए, तो एनिमिया, जोड़ों का दर्द, दांतों की बीमारी, पायरिया, खांसी और दमा जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। नीबू में विटामिन सी की क्वॉन्टिटी बहुत ज्यादा होती है। इसलिए इन बीमारियों से दूरी बनाने में यह आपकी मदद करता है। 
  • पेट खराब, पेट फूलना, कब्ज, दस्त होने पर नीबू के रस में थोड़ी सी अजवायन, जीरा, हींग, काली मिर्च और नमक मिलाकर पीने से आपको काफी राहत मिलेगी। 
  • गर्मी में बुखार होने पर अगर थकान महसूस हो रही हो या पीठ और बांहों में दर्द हो, तो भी आपके पास नींबू का उपाय है। आप एक चम्मच नींबू के रस में दस बूंद तुलसी की पत्तियों का रस, चार काली मिर्च और दो पीपली का चूर्ण मिलाकर लें। इसे दो खुराक के तौर सुबह-शाम ले 
  • चेहरे पर मुंहासे होना एक आम समस्या है। इसे दूर करने के लिए नींबू रस में चंदन घिसकर लेप लगाएं। अगर दाद हो गया है, तो इसी लेप में सुहागा घिसकर लगाएं, आपको आराम मिलेगा। 
  • कई बार लंबी दूरी की यात्रा करने पर शरीर में बहुत थकान महसूस होती है। ऐसे में एक गिलास पानी में दो नींबू निचोड़कर उसमें 50 ग्राम किशमिश भिगो दें। रातभर भीगने के बाद सुबह किशमिश पानी में मथ लें। यह पानी दिनभर में चार बार पिएं। इससे एनर्जी मिलेगी और बॉडी की फिटनेस भी बनी रहेगी। 
  • अधिक थकान और अशांति के कारण कई बार नींद नहीं आती। अगर आप भी इस प्रॉब्लम से जूझ रहे हैं, तो लेमन रेमेडी अपनाएं। रात को सोने से पहले हाथ-पांव, माथे, कनपटी व कान के पीछे सरसों के तेल की मालिश करें। इसके बाद थोड़े से नीबू के रस में लौंग घिसकर चाट लें। ऐसा करने से आपको नींद बहुत जल्दी आएगी। 
  • मोटापे से आजकल हर दूसरा शख्स परेशान होता है। इससे छुटकारा पाने के लिए आप मूली के रस में नीबू का रस व थोड़ा नमक मिलाकर नियमित रूप से लें। मोटापा दूर होगा। 
  • अगर याददाश्त कमजोर हो गई है, तो गिरी, सोंठ का चूर्ण और मिश्री को पीसकर नींबू के रस में मिलाएं। फिर इसे धीरे-धीरे उंगली से चाटें। 
  • सुंदर दिखना तो सभी चाहते हैं। अगर आपकी भी यही चाहत है, तो एक चम्मच बेसन, आधा चम्मच गेहूं का आटा, आधा चम्मच गुलाब जल और आधा चम्मच नींबू का रस मिलाकर लोशन तैयार करें। इसे धीरे-धीरे चेहरे पर मलें। कुछ ही दिनों में आपका चेहरा निखर जाएगा। 
  • जहां तक हो सके, कागजी पीले रंग के नीबू का यूज करें। इसमें दो चुटकी सेंधा नमक या काला नमक मिला सकते हैं

Monday, February 15, 2016

मूली खाने के ये फायदे जानकर आप भी हैरत में पड़ जाएंगे,मूली खाने के फायदे-Radish Health Benefits in Hindi

मूली खाने के फायदे-Radish Health Benefits in Hindi

    • बिच्छू के काटने पर-मूली के टुकड़े पर नमक लगाकर बिच्छू के काटे स्थान पर रखने से दर्द शांत होता है। बिच्छू के काटे रोगी को मूली खिलाएं और पीड़ित स्थान पर भी मूली का रस लगाने से लाभ होता है।
    • दाद-मूली के बीजों को नींबू के रस में पीसकर गर्म करके दाद पर लगाएं। पहले दिन लगाने पर जलन व दर्द होगा, दूसरे दिन यह दर्द कम होगा। ठीक होने पर कोई कष्ट नहीं होगा। यह प्रयोग सूखी या गीली दोनों प्रकार के दाद में लाभदायक है। मूली के बीजों को नींबू के रस में पीसकर लगाने से दाद में लाभ होता है। शरीफे के फलों के रस में मूली के बीज को पीसकर लगाने से दाद का रोग ठीक हो जाता है।
    • गले के घाव-मूली का रस और पानी बराबर मात्रा में मिलाकर नमक डालकर गरारे करने से गले के घाव ठीक हो जाते हैं।3. 
    • मधुमेह के मरीजों के लिए मूली में पर्याप्त मात्रा में फाइबर मौजूद होता है. वहीं इसमें मौजूद तत्व इंसुलिन को नियंत्रित करने का काम करते हैं. मूली से शुगर लेवल बढ़ता नहीं है, जिसकी वजह से यह मधुमेह पीड़ितों के लिए भी अच्छी होती है.
    • सर्दी और खांसी के इलाज में अगर आपको हमेशा ही सर्दी और खांसी की शिकायत बनी रहती है तो आपको अपनी डाइट में मूली शामिल करने की जरूरत है. मूली में anti-congestive गुण पाए जाते हैं जो कफ को खत्म करने में सहायक होते हैं.
    • किडनी को स्वस्थ रखने में मूली में diurectic गुण पाया जाता है जो किडनी के स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा होता है और शरीर से विषैले तत्वों को निकालने में भी कारगर होता है. इस वजह से इसे नेचुरल क्लींजर कहा जाता है.
    • अग्निमान्द्य (भूख का कम लगना), अरुचि, पुरानी कब्ज, गैस: भोजन के साथ मूली पर नमक, कालीमिर्च डालकर 2 महीने रोजाना खाएं। पेट के रोगों में मूली की चटनी, अचार व सब्जी खाना भी उपयोगी है।
    • अम्लपित्त (एसिडिटीज)-यदि गर्मी के प्रभाव से खट्ठी डकारें आती हो तो 1 कप मूली के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करना लाभकारी होता है100 मिलीलीटर मूली के रस में 10 मिलीलीटर आंवले का रस या 3 ग्राम आंवले का चूर्ण मिलाकर सुबह, दोपहर और शाम को सेवन करने से अम्लपित्त (एसिडिटिज) मे बहुत लाभ होता है।
    • मूली का रस और कच्चे नारियल के पानी को मिलाकर 250 मिलीलीटर की मात्रा में दिन भर में सेवन करने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) में काफी आराम आता है।
    • कोमल मूली को मिश्री मिलाकर खायें या इसके पत्तों के 10-20 मिलीलीटर रस में मिश्री मिलाकर रोजाना सेवन करने से अम्लपित्त (एसिडिटीज) का रोग कम हो जाता है।
    • मूली के रस में चीनी मिलाकर सेवन करने से पेट की जलन, गर्मी और खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं।
    • चम्मच मूली के रस में थोड़ी-सी मात्रा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से खट्टी डकारों से छुटकारा मिल जाता है।
    • मूली को काटकर सेंधानमक लगाकर खाली पेट सुबह के वक्त खाने से लाभ होता है, ध्यान रहें कि खांसी की शिकायत हो, तो मूली का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए क्योंकि यह उस समय हानिकारक होगी। गन्धनाशक (दुर्गन्ध को रोकने वाला):
    • मूली खाने के बाद गुड़ खाने से डकार में मूली की गन्ध नहीं आती है।
    • कान का दर्द-मूली के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। इसके 50 मिलीलीटर रस को मिलीलीटर ग्राम तिल के तेल में काफी देर तक पका लें। पकने पर रस पूरी तरह से जल जाये तो उस तेल को कपड़े में छानकर शीशी में भरकर रख लें। कान में दर्द होने पर इस तेल को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है। 2 से 4 बूंद मूली की जड़ों का रस गर्म करके कान में 2 से 3 बार डालें।
    • बच्चे की यकृत-प्लीहा-वृ़द्धि: 3 से 6 मिलीलीटर मूली का ताजा रस यवक्षार तथा शहद के साथ दिन में 2 बार बच्चे को देने से जिगर, प्लीहा (तिल्ली) बढ़ना कम हो जाता है।
    • मूली के जूस का सेवन करने से शीतपित्त रोग ठीक हो जाता है

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