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Friday, January 6, 2017

होंठ फटना,Cracked Lips Treatment in Hindi,


सर्दियों का मौसम आते ही जहां पूरा शरीर शुष्क होने लगता है वहीं होंठों के फटने की समस्या भी हो जाती है. ये एक बेहद आम परेशानी है. ये तो आप भी जानते होंगे कि हमारे होंठों की त्वचा, शरीर के किसी भी दूसरे भाग की तुलना में कहीं अधिक पतली और संवेदनशील होती है.
ठंडी हवाओं और मौसम के बदलने से होंठों की नमी कहीं खो सी जाती है और वे फटने लग जाते हैं. ऐसे में ये बेहद जरूरी हो जाता है कि हम अपने होंठों का अच्छी तरह से ख्याल रखें ताकि वो हमेशा कोमल, मुलायम और खूबसूरत बने रहें.
सर्दियों में होंठ फटने की परेशानी आम सुनने को मिलती है। य़ह शरीर के बाकी अंगों में से सबसे नाजुक और कोमल अंग है, जिसकी देखभाल करनी बहुत जरूरी है। इन्हें मुलायम रखने के लिए लड़किया लिप बाम का इस्तेमाल करती हैं। लिप बाम की मदद से कुछ देर के लिए आप होंठों को सॉफ्ट कर सकती हैं लेकिन बाद में यह फिर ड्राई हो जाते हैं। इसकी जगह पर होममेड लिप स्क्रब का इस्तेमाल कर सकते हैं जिससे आपके होंठ लंबे समय तक मुलायम के साथ साथ गुलाबी भी रहेंगे।

होंठों के फटने के कारण  Dry Cracked lips causes in Hindi

सर्दियों के मौसम में फटे या रूखे होठ एक आम समस्या है । रूखे और फटे होठों के मुख्य कारण नीचे दिए जा रहे कारणों में से कोई भी हो सकते है
  • अत्यधिक धूम्रपान
  • होठों को बार-बार चाटना
  • विटामिन की कमी
  • धूप या शुष्क हवा के संपर्क में रहने से
  • सर्दियों के दौरान सूखी और ठंडी हवा और मौसम में परिवर्तन ।
  • सबसे अहम चीज उचित खान-पान की कमी, पानी कम पीने की वजह से शरीर में मॉश्चराइजर की कमी हो जाती है जिससे शरीर में रूखापन और खुश्की जैसी समस्या उत्पन्न हो सकती है ।
  • होंठो के लिए उपयोग में लाये जाने वाले कॉस्मेटिक चीजे की गुणवत्ता यानी poor quality भी फटे या रूखे होठ की वजह बन सकती है
  • शरीर में विटामिन ई की कमी, कैल्शियम व आयरन की पर्याप्त मात्रा न मिल पाना, सूखे तथा फटे होंठों की मुख्य वजहो में एक हो सकती है
  • होंठों की सफाई को अनदेखा करना, अगर आप कही धूल-मिट्टी या धूप से आ रहे हो तो चेहरे तथा होठो की सफाई जरुरी हैं नहीं तो फटे या रूखे होठ होना तो निश्चित ही है।

होंठ फटना,Cracked Lips Treatment in Hindi,

  • मुलेठी : वातज´ रोग में मुलेठी, लोबान, राल, गुग्गल, देवदारू को बराबर मात्रा मे मिलाकर पीस लें ओर छान लें। इस चूर्ण को नियमित रूप से होठों पर लगाने से होंठ फटना बन्द हो जाता है।
  • मोम : मोम, गुड़ और राल को बराबर मात्रा में एकसाथ मिलाकर तेल या घी में पकाकर लेप बना लें। इस लेप को होंठों पर लगाने से होठों की कठोरता, सुई चुभने जैसा दर्द और होंठों में से पीब आदि निकलना बन्द हो जाता है।
  • धनिया : धनिया, राल, गेरू, मोम, घी और सेंधानमक को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर और छानकर लेप करने से होंठों के घाव दूर हो जाते हैं।
  • अनन्तमूल : अनन्तमूल की जड़ को पीसकर होंठों पर या शरीर के किसी भी भाग पर जहां पर त्वचा के फटने की वजह से खून निकलता हो लगाने से लाभ होता है।
  • अजमोद : 1 से 4 ग्राम अजमोद के फल के चूर्ण को रोजाना सुबह और शाम खाने से होंठ ही नहीं, शरीर में कही भी त्वचा फटकर खून निकलता हो उसमें लाभ होता है।
  • मेथी : मेथी के बीज का चूर्ण 5 से 10 ग्राम सुबह और शाम गुड़ के साथ खाने से त्वचा या होंठ फटने की वजह से खून निकलने की शिकायत दूर हो जाती है।
  • जायफल : जायफल को पीसकर लेप करने से भी होंठ फटने की शिकायत या बिवाई (एड़ियां फटना) की शिकायत दूर हो जाती है।
  • अखरोट : अखरोट की मिंगी (बीज) को लगातार खाने से होंठ या त्वचा के फटने का रोग दूर हो जाता है।
  • सिंहोरा : सिंहोरा का दूध लगाने से होंठ या त्वचा के फटने की शिकायत दूर होती है।
  • खीरे : खीरे का पानी लगाने से होंठों का फटना बन्द हो जाता है।
  • मक्खन : मक्खन में नमक मिलाकर लगाने से होंठ नहीं फटते हैं।
  • शहद : 20 ग्राम शहद में 10 ग्राम सुहागा मिलाकर दिन में 3 बार मलने से होंठों का फटना दूर हो जाता है।
  • नारियल : 5 ग्राम मोम को 25 मिलीलीटर नारियल के गर्म तेल में डालकर घोट लें। इसे दिन में 3 बार होठों पर मलने से लाभ होता है।
  • मूंगफली : नहाने से पहले हथेली में चौथाई चम्मच मूंगफली का तेल लेकर अंगुली से हथेली में रगड़ लें और फिर होंठों पर इस तेल से मालिश करने से होंठ सुंदर बन जाते हैं।
  • मौसमी : होंठों पर मौसमी का रस रोजाना 2 से 3 बार लगाने से होंठों का कालापन दूर होता है और होठ प्राकृतिक रूप से लाल रहते हैं।
  • इलायची : होठों पर जब पपड़ी जम जाती है तो उनके उतरने पर बहुत दर्द होता है। इलायची को पीसकर मक्खन में मिलाकर कम से कम 7 दिन तक रोजाना 2 बार होंठों पर लगाने से लाभ होता है।
  • ग्लिसरीन : ग्लिसरीन को रोजाना 3 बार होंठों पर लगाने से लाभ होता है।
  • बादाम : 5 बादाम रोजाना सुबह और शाम खाने से होंठ नहीं फटते हैं।
  • बादाम रोगन : रात को सोते समय होंठों पर बादाम रोगन लगाकर सो जाएं। इससे सुबह उठने पर पपड़ी हट जायेगी और होंठ मुलायम रहेंगे तथा आगे से होंठों पर पपड़ी भी नहीं जमेगी। हमेशा ध्यान रखें कि होठों पर जमी हुई पपड़ी को नाखून या दांत से कभी नहीं नोंचे और मुंह से सांस न लें।
  • दही : दही के मक्खन में केसर मिलाकर होठों पर लगाने से होंठ लाल हो जाते हैं।
  • मलाई : सर्दियों में खुष्की से होंठ फट जाये तो उन पर आधा चम्मच दूध की मलाई में चुटकीभर हल्दी का बारीक चूर्ण मिलाकर धीरे-धीरे मलने से या लगाने से होंठ चिकने और मुलायम हो जाते हैं।
  • घी में थोड़ा सा नमक मिलाकर होंठों व नाभि पर लगाने से होंठ फटना बन्द हो जाते हैं।
  • वनस्पति घी को होंठों पर लगाने से होंठ फटना बन्द हो जाते हैं।
  • घी मे नमक मिलाकर रोजाना 2-3 बार नाभि पर लगाने से होंठों का फटना पूरी तरह से ठीक हो जाता है।
  • गुलाब के एक फूल को पीसकर उसमें थोड़ी सी मलाई मिला लेते हैं। फिर इसे 10 मिनट तक होंठो पर लगाये रहते हैं। इसके बाद इसे धो देते हैं। कुछ दिनों तक इस प्रयोग को करने से होंठों की रंगत सुंदर हो जाती है।
  • गुलाब की पंखुड़ियों को पीसकर उसमें थोड़ी सी ग्लिसरीन मिला लें। इस मिश्रण को रोजाना होंठों पर लगाने से होंठों का कालापन दूर होता है और होंठ सुंदर बनते हैं। इस दौरान स्त्रियों को लिपस्टिक लगाना बन्द कर देना चाहिए।
  • गुलाब के एक फूल को पीसकर उसमें थोड़ी सी मलाई मिलाकर होंठों पर लगाकर लेप कर दें। आधे घंटे के बाद इसे धो लें। कुछ ही दिनों तक यह लगाने से होंठ फटेंगे नहीं और होठों का रंग बिल्कुल गुलाब जैसा लाल हो जायेगा।
  • सोने से पहले सरसों का तेल नाभि पर लगाने से होंठ नहीं फटते है।
  • ठंड़ी हवा के कारण होंठों को फटने से बचाने के लिए रात को सोते समय शुद्ध सरसों के तेल या गुनगुने घी को नाभि में लगाने से लाभ होता है।
  • निर्गुण्डी : फटे होंठों पर निर्गुण्डी के तेल को लगाने से आराम मिलता हैं।

Wednesday, December 21, 2016

दांतों का पीलापन दूर करने के उपाय,Home Remedies for Teeth Whitening in Hindi,

दांतों का पीलापन दूर करने के उपाय,Home Remedies for Teeth Whitening in Hindi,
दांतों का पीलापन आज के समय में एक आम समस्या है। सही ढंग से केयर न करने या प्लांक जमने के कारण दांत पीले हो जाते हैं। इसके अलावा, खाने की कुछ चीजों के लगातार उपयोग, बढ़ती उम्र या अधिक दवाइयों का सेवन भी दांतों के पीलेपन के कारण हो सकते हैं।

पीले दांतों के कारण न सिर्फ चेहरे की खूबसूरती प्रभावित होती है, बल्कि आत्मविश्वास में भी कमी आती है। आज हम आपको दांतों का पीलापन दूर करने के कुछ घरेलू नुस्खे बता रहे हैं। ये नुस्खे आपके दांतों का पीलापन दूर करने में बहुत उपयोगी साबित हो सकते हैं

दांत किसी के भी व्यक्तित्व को खूबसूरत बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे ठीक विपरीत अगर किसी के भी दांत गंदे, बदरंग या पीले हों तो व्यक्तित्व को खराब कर सकते हैं। इसीलिए जरूरी है कि आप अपने व्यक्तित्व को प्रभावशाली बनाने के लिए अपने दांतों का विशेष ख्याल रखें। यदि आप दांतों को जीवनभर मजबूत और सड़नरहित बनाए रखना चाहते हैं तो हम आपको बता रहे हैं दांतो की केयर के कुछ खास तरीके। इन्हें अपना लेंगे तो दांत हमेशा चमचमाते सफेद बने रहेंगे।

दांतों का पीलापन दूर करने के उपाय,Home Remedies for Teeth Whitening in Hindi,

  • रोजाना गाजर खाने से भी दांतों का पीलापन कम हो जाता है। दरअसल, भोजन करने के बाद गाजर खाने से इसमें मौजूद रेशे दांतों की अच्छे से सफाई कर देते हैं।
  • नीम का उपयोग प्राचीन काल से ही दांत साफ करने के लिए किया जाता रहा है। नीम में दांतों को सफेद बनाने व बैक्टीरिया को खत्म करने के गुण पाए जाते हैं। यह नेचुरल एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-सेप्टिक है। रोजाना नीम के दातून से दांत साफ करने पर दांतों के रोग नहीं होते व दांतों का पीलापन भी दूर हो जाता है
  • तुलसी में दांतों का पीलापन दूर करने की अद्भुत क्षमता पाई जाती है। साथ ही, तुलसी मुंह और दांत के रोगों से भी बचाती है। तुलसी के पत्तों को धूप में सुखा लें। इसके पाउडर को टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करने से दांत चमकने लगते हैं।
  • नमक से दांत साफ करने का नुस्खा बहुत पुराना है। नमक में 2-3 बूंद सरसों का तेल मिलाकर दांत साफ करने से पीलापन दूर हो जाता है और दांत चमकने लगते हैं।
  • संतरे के छिलके और तुलसी के पत्तों को सुखाकर पाउडर बना लें। ब्रश करने के बाद इस पाउडर से दांतों पर हल्के से रोजाना मसाज करें। संतरे में मौजूद विटामिन सी और कैल्शियम के कारण दांत मोती जैसे चमकने लगते हैं।
  • बेकिंग सोडा पीले दांतों को सफेद बनाने का सबसे अच्छा घरेलू तरीका है। ब्रश करने के बाद थोड़ा-सा बेकिंग सोडा लेकर दांतों को साफ करें। इससे दांतों पर जमी पीली पर्त धीरे-धीरे साफ हो जाती है। बेकिंग सोडा और थोड़ा नमक टूथपेस्ट में मिलाकर ब्रश करने से भी दांत साफ हो जाते हैं।
  • एक नींबू का रस निकालकर उसमें उतनी ही मात्रा में पानी मिला लें। खाने के बाद इस पानी से कुल्ला करें। यह उपाय रोज करने से दांतों का पीलापन चला जाता है और सांसों की दुर्गंध भी दूर हो जाती है।
  • स्ट्रॉबेरी दांतों को चमकदार बनाने का सबसे टेस्टी उपाय है। स्ट्रॉबेरी में पाया जाने वाला मैलिक एसिड दांतों को सफेद और चमकदार बनाता है। पहले स्ट्रॉबेरी को पीस लें। इसके पल्प में थोड़ा बेकिंग सोडा मिलाएं। ब्रश करने के बाद इस मिश्रण को उंगली से दांतों पर लगाएं। कुछ दिनों तक यह उपाय नियमित रूप से करने पर दांत चमकने लगेंगे।
  • केले को पीस कर इसका पेस्ट बना लें। इसके पेस्ट से दांतों को रोज एक मिनट तक मसाज करें। उसके बाद दांतों को ब्रश करें। रोजाना ये उपाय करने से धीरे-धीरे दांतों का पीलापन खत्म हो जाएगा।
  • एक चम्मच जैतून के तेल में एप्पल विनेगर मिला लें। इस मिश्रण में अपना टूथब्रश डुबाए और दांतों पर हल्के-हल्के घुमाएं। ये प्रक्रिया तब तक दोहराएं, जब तक मिश्रण खत्म न हो जाएं। इस नुस्खे को अपनाने से दांतों का पीलापन मिट जाता है। साथ ही, सांसों की दुर्गंध की समस्या भी नहीं रहती है।

Tuesday, May 17, 2016

हींग के फ़ायदे,Health Benefits of Hing in Hindi,

हींग  का प्रयोग हम मुख्य तौर पर खाने में मसाले के रूप में ही करतेहै, हींग को खाने के स्वाद को बढाने केसाथ साथ कई तरह के घरेलू नुस्खों मेंभी प्रयोग किया जाता है। हींगको दाल और रायते में छौंक लगाने मेंभी प्रयोग किया जाता है, आज हम हींगसे होने वाले फायदों के बारे में बात करेंगें क्योकि हींग में बहुत से लाभदायक गुण पाये जाते है।
  • यदि कभी आपको अचानक से पेट दर्द होने लगे तब थोड़ी सी हींग को पानी में घोलकर हल्का सा गर्म करके नाभि तथा इसके आसपास लेप लगायें, ऐसा करने से पेट दर्द में तुरंत ही आराम मिल जायेगा। 
  • दांत दर्द की समस्या होने पर हींग में थोड़ा सा कपूर मिलाकर दर्द वाली जगह पर लगाने से दांत में दर्द होना बंद हो जाता है। 
  • अपने रोज के खाने में दाल, कढ़ी और सब्जियों में हींग का प्रयोग करने से खाने को पचने में सहायता मिलती है। 
  • यदि आपके शरीर के किसी जगह पर कांटा चुभ गया हो तो उस जगह पर हींग का घोल लगा दें , ऐसा करने से काँटा चुभने का दर्द भी कम होगा और कांटा अपने आप ही निकल जायेगा। 
  • एसिडिटी की समस्या होने पर थोड़ी सी हींग को गुड़ में मिलाकर गरम पानी के साथ खा लें, इससे गैस से होने वाले दर्द में आराम मिल जायेगा। 
  • पेट में दर्द व ऐंठन होने पर अजवाइन और काले नमक नमक के साथ हींग का सेवन करने से दर्द में काफी फायदा मिल जाता है। 
  • माइग्रेन और सिरदर्द में आधा कप पानी में हींग मिलाकर पीने से आराम मिलता है। 
  • दाद, खाज, खुजली जैसे त्वचा संबंधी रोगों के लिए हींग बहुत फायदेमंद होती है। चर्म रोग होने पर हींग को पानी में घिसकर प्रभावित स्थानों पर लगाने से फायदा होता है। 
  • अफीम का नशा उतारने के लिए थोडी सी हींग को पानी में घोलकर पिला दें, इससे नशा जल्दी उतर जाता है। 
  • जुकाम होने पर बहुत से लोगो की नाक बंद हो जाती है जिससे साँस लेने में काफी तकलीफ हो जाती है, हींग सूंघने से जुकाम से बंद हुई नाक खुल 
  • पसलियों में दर्द हो तो पानी में हींग घोलकर पसलियों पर लेप करें, आराम मिलेगा 
  • बच्चों को न्यूमोनिया में हींग का पानी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में देते रहने से बहुत आराम मिलता है। 
  • भोजन में हींग के नियमित सेवन से महिलाओं के गर्भाशय का संकुचन होता है और मासिक धर्म से जुड़ी परेशानियां दूर हो जाती हैं। 
  • यदि आपको दाद की समस्या है तो गन्ने के रस में सिरके के साथ थोड़ा हींग पाउडर मिलाएं। सुबह-शाम दाद पर लगाएं। कुछ ही दिनों में दाद खत्म हो जाएगा। 
  • पुराने गुड़ में थोड़ी-सी हींग मिलाकर सेवन करने से हिचकी तुरंत बंद हो जाती है। 
  • यदि कोई जहर खा ले तो उसे तुरंत हींग का पानी पिलाएं। ऐसा करने से उल्टी के द्वारा जहर बाहर निकल जाता है और जहर का प्रभाव खत्म हो जाता है। 
  • हिस्टीरिया के रोगी को हींग सुंघाने पर तुरंत होश आ जाता है

Thursday, May 5, 2016

संतरे के छिलके के फायदे,Health Benefits of Orange Peels,

संतरा गुणों की खान होता है। इसमें विटामिन सी एवं फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं जो आपके शरीर को काफी फायदा पहुंचाता हैं।लेकिन इसका छिलका भी कम गुणवान नहीं होता। इसके छिलके में भी सैकड़ों गुण छुपे होते हैं जो आपके शरीर को ढेरों फायदा पहुंचाते हैं। ।जब हम संतरे को खाते हैं तो सामान्यत: हम उसके छिलके को फेंक देते हैं या उसके छिलके का उपयोग एक दूसरे की आंखों में डालने व रुलाने के लिए मस्ती में करते हैं जो एक तरह से एक उपयोगी चीज का नुकसान करना ही कहलाएगा। जी हां आपको ये सुनकर आश्चर्य जरूर हो रहा होगा लेकिन यह सच है। आइये जाने संतरे के छिलकों के कुछ अद्भुत फायदे
  • बालों को खूबसूरत बनाता है- अगर आपके बाल एकदम रफ और बेजान दिखाई देते हैं तो संतरे के छिलके आपके लिए वरदान साबित हो सकते हैं। 
  • संतरे के छिलकों को पीसकर बालों में लगाकर कुछ देर रखें और फिर बाल धो लें। बाल चमकीले और मुलायम हो जाएंगे। संतरे के छिलकों को पीस कर उसमे गुलाब जल मिलाकर चहरे पर लगाने से दाग व धब्बे मिटते हैं।
  • यह भूख को नियंत्रित कर मोटापे को कम करता है. 
  • इसमें केल्शियम और फ्लेवेनोइड ऑस्‍टियोपोरोसिस से बचाते है.
  • यह ऑयली स्‍किन के लिये लाभदायक है साथ ही पिंपल की रोकथाम भी करता है। इसको फेस पैक में डालने से डेड स्‍किन साफ होती है और ब्‍लैकहेड्स भी निकलते हैं।
  • छिलके में क्‍लीजिंग, एंटी इन्‍फिलेमेट्री, एंटी फंगल और एंटी बैक्‍टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो कि पिंपल और एक्‍ने से लड़ने में सहायक होते हैं।घर में आ रही बदबू को मिटाने के लिये संतरे के छिलके को लौंग या दालचीनी के साथ पानी डाल कर उबालिये।
  • कई प्रकार के खानों में इसका प्रयोग स्‍वाद बढाने के लिये किया जाता है। साथ ही ब्राउन शुगर में नमी को खतम करने के लिये सूखे छिलको का प्रयोग कर सकती हैं।
  • आप संतरे के छिलकों को उबाल कर उसकी चाय बना कर पी सकते है जिससे हमें उसके लाभ मिले. इसे पीने से अनिंद्रा में भी काफी आराम मिलता है।
  • इसमें भरपूर विटामिन और खनिज होते है जो हमें दिमागी रोगों जैसे डिप्रेशन ,तनाव माइग्रेन आदि से बचाते है और हमारी नर्वस सिस्टम को ठीक रखते है. इनमे मौजूद विटा.सी हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है. इसमें मौजूद विटामिन ए हमारी त्वचा को और रक्त संचारण को ठीक रखता है. इसमें पेक्टिन होता है जो कब्ज़ को दूर करता है.
  • यह कैंसर से बचाता है. संतरे व नींबू जैसे खट्टे फलों में मोनोटरपीनिज नाम का तेल पाया जाता है। यह तेल त्वचा, पेट और फेफड़ों को कैंसर से सुरक्षा देता है
  • संतरे के छिलके के अंदरूनी सफेद हिस्सों में हेरपेरिदिन नामक एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है, जो कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने, रक्तचाप को सामान्य रखने और पैक्टिन तत्व शुगर के स्तर को सामान्य रखने मे मददगार साबित होता है।
  • स्किन को ग्लोइंग बनाते हैं- संतरे के छिलके में क्लीजिंग, एंटी फंगल और एंटी बैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं, जो कि पिंपल और एक्ने से लडऩे में सहायक होते हैं। 
  • संतरे के छिलके को सुखाकर पीसकर उसे दही मिलाकर स्किन पर लगाने से स्किन ग्लोइंग व स्मूथ बनती है। संतरे के छिलकों को बेसन में मिलाकर लगाना ऑइली स्किन वालों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है और पिंपल्स को खत्म कर देता है।
  • कोलेस्टॉल के रोगियों के लिए फायदेमंद है - एक अध्ययन के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को कोलेस्ट्रॉल की प्रॉब्लम हो तो ऐसे में संतरे के छिलके उपयोगी साबित हो सकते हैं। संतरे के छिलको में ऐसा गुण पाया जाता है जिससे उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर है जो मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों को फायदा हो सकता है। साथ ही ये कैंसर व हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याओं में भी विशेष रूप से लाभदायक है।
  • पाचन शक्ति बढ़ाता है- इसके छिलके में पाचनशक्ति बढ़ाने की क्षमता होती है। यह पाचन में सुधार, गैस, उल्टी, हार्ट बर्न और अम्लीय डकार को दूर करने में मदद करता है। 
  • यह भूख बढाता है और मतली से राहत दिलाने का काम करता है साथ ही संतरे का छिलका कृमि का नाश करने वाला व बुखार को मिटाने वाला भी होता है। इसलिए इन सभी रोगों के रोगियों को संतरे का छिलका पीसकर खिलाने पर फायदा होता है।
  • अनिद्रा की समस्या को दूर करता है- नारंगी के छिलके में एक विशेष प्रकार की गंध वाला तेल पाया जाता है। जी हां नारंगी के छिलके में एक विशेष प्रकार की गंध वाला तेल पाया जाता है। इस तेल का उपयोग तंत्रिकाओं को शांत करने व गहरी नींद के लिए किया जाता है। नहाने के पानी में इसका दो से तीन बूंद तेल डालिए और फिर देखिए कितनी मीठी नींद आती है।

Saturday, March 26, 2016

जोड़ों का दर्द,Joint Pain Treatment in Hindi,Arthritis Pain,

आर्थरायटिस अथवा गठिया वात अथवा जोड़ो का दर्द और तकलीफ होना आदिकाल से चली आ रही बीमारी है यह मानव जाति की अति प्राचीन बीमारी है जोड़ो की तकलीफ मनुष्यों को तो होती ही है स्तन्पायी जानवरों को भी ऐसी ही तकलीफ होती है  आयुर्वेद मे आर्थराइटिस बीमारी का बहुत अच्छा विवरण दिया गया है , इसके कारणों का उल्लेख भी किया गया है और इस तकलीफ से बचने के लिये क्या करना चाहिये और ऐसा जीवन शैली मे क्या बदलाव करने चाहिये , खान पान मे क्या एहतियात बरतना चाहिये आदि बातों के बारे मे बहुत ही सार गर्भित स्वरूप मे बताया गया है

इसके अलावा आयुर्वेद यह भी बताता है कि अगर arthritis अथवा arthritis जैसी बीमारी हो जाती है तो उसका उपचार करना चाहिये ताकि स्वास्थय और आरोग्य प्राप्त किया जा सके ? आयुर्वेद यह भी बताता है कि उपचार मे किस तरह की दवाओ का सेवन करना चाहिये और इलाज मे मदद और सहायता पहुचाने के लिये किस तरह की सहायक चिकित्सा यथा पन्च कर्म और मालिश और वाहरी उपयोगी उपचार की व्यवस्था किया जाये ताकि शीघ्र लाभ प्राप्त हो सके

जोड़ों का दर्द उपाय,Arthritis Pain Relief,Heumatoid Arthritis Pain Relief,Knee Pain,
  • हल्दी-चूर्ण, गुड़, मैथी दाना पाऊडर और पानी सामान मात्रा में मिलाकर, गरम करके इनका लेप, रात को घुटनों पर करें व पट्टी बाँधकर रातभर बंधे रहने दें. सुबह पट्टी हटा कर साफ कर लें. कुछ ही दिनों में जबरदस्त फायदा महसूस होने लग जाएगा
  • अलसी के दानों के साथ 2 अखरोट की मिगी सेवन करने से जोड़ों के दर्द में आराम मिलता है.
  • मैथी के लड्डू खाने से हाथ-पैर और जोड़ों के दर्दो में आराम मिलता है.
  • अँकुरित मैथी दाने खाएँ और उसके खाने के बाद आधे घंटे तक कुछ न खाएँ.
  • 30 की उम्र के बाद मैथी दाने की फाँकी लेने से शरीर के जोड़ मजबूत बने रहते हैं तथा बुढ़ापे तक मधुमेह, ब्लड प्रेशर और गठिया जैसे रोगों से बचाव होता है.
  • मैथी दानों को तवे या कढ़ाही में गुलाबी होने तक सेकें. ठंडा होने पर पीस लें. रोज सुबह खाली पेट आधा चम्मच, एक गिलास पानी के साथ लें.
  • मैथी दानों को दरदरा कूटकर सर्दियों में 2 चम्मच और गर्मी में एक चम्मच की फाँकी सुबह-सुबह खाली पेट पानी के साथ लें.
  • नीम का तेल एवं अरंडी का तेल बराबर मात्रा में मिलाकर सुबह-शाम इसकी मालिश कीजिए.
  • अगर कैल्शियम की कमी से जोड़ों का दर्द हो तो खाने वाला चूना खाईए. गेंहू के दाने के आकार का चूना दही या दूध में घोल कर दिन में एक बार के हिसाब से, 90 दिन तक लीजिए. ध्यान रखें 90 दिन से अधिक नहीं लेना है
  • अगर घुटनों की चिकनाई ख़तम हुई हो गई हो और जोड़ो के दर्द में किसी भी प्रकार की दवा से आराम ना मिलता हो तो ऐसे लोग हारसिंगार (पारिजात) पेड़ के 12 पत्तों को कूटकर 1 गिलास पानी में उबालें. जब पानी एक चौथाई बच जाए तो बिना छाने ही ठंडा करके पी लें. 90 दिन में चिकनाई पूरी तरह वापिस बन जाएगी. अगर कुछ कमी रह जाए तो 1 महीने का अंतर देकर फिर से 90 दिन तक इसी क्रम को दोहराएँ. निश्चित लाभ की प्राप्ति होती है.
  • गाजर में जोड़ों में दर्द को दूर करने के गुण मौजूद हैं |चीन में सैंकडों वर्षों से गाजर का इस्तेमाल संधिवात पीड़ा के लिए किया जाता रहा है| गाजर को पीस लीजिए और इसमें थोड़ा सा नीम्बू का रस मिलाकर रोजाना खाना उचित है| यह घुटनों के लिगामेंट्स का पोषण कर दर्द निवारण का काम करता है
  • मैथी के बीज संधिवात की पीड़ा निवारण करते हैं एक चम्मच मैथी बीज रात भर साफ़ पानी में गलने दें सुबह पानी निकाल दें और मैथी के बीज अच्छी तरह चबाकर खाएं| शुरू में तो कुछ कड़वा लगेगा लेकिन बाद में कुछ मिठास प्रतीत होगी| भारतीय चिकित्सा में मैथी बीज की गर्म तासीर मानी गयी है| यह गुण जोड़ों के दर्द दूर करने में मदद करता है
  • प्याज अपने सूजन विरोधी गुणों के कारण घुटनों की पीड़ा में लाभकारी हैं दर असल प्याज में फायटोकेमीकल्स पाए जाते हैं जो हमारे इम्यून सिस्टम को ताकतवर बनाते हैं प्याज में पाया जाने वाला गंधक जोड़ों में दर्द पैदा करने वाले एन्जाईम्स की उत्पत्ति रोकता है| एक ताजा रिसर्च में पाया गया है कि प्याज में मोरफीन की तरह के पीड़ा नाशक गुण होते हैं
  • गरम तेल से हल्की मालिश करना घुटनों के दर्द में बेहद उपयोगी है एक बड़ा चम्मच सरसों के तेल में लहसुन की २ कुली पीसकर डाल दें इसे गरम करें कि लहसुन भली प्रकार पक जाए| आच से उतारकर मामूली गरम हालत में इस तेल से घुटनों या जोड़ों की मालिश करने से दर्द में तुरंत राहत मिल जाती है|इस तेल में संधिवात की सूजन दूर करने के गुण हैं| घुटनों की पीड़ा निवारण की यह असरदार चिकित्सा है
  • प्रतिदिन नारियल की गिरी का सेवन करें|इससे घुटनों को ताकत आती है
  • लगातार 20 दिनों तक अखरोट की गिरी खाने से घुटनों का दर्द समाप्त होता है
  • बिना कुछ खाए प्रतिदिन प्रात: एक लहसन कली, दही के साथ दो महीने तक लेने से घुटनों के दर्द में चमत्कारिक लाभ होता है।घुटनों में दर्द को कम करने के लिए गरम या ठंडे पेड से सिकाई की जरूरत हो सकती है
  • घुटनों में तीव्र पीड़ा होने पर आराम की सलाह डी जाती है ताकि दर्द और सूजन कम हो सके\ फिजियो थेरपी में चिकित्सक विभिन्न प्रक्रियाओं के द्वारा घुटनों के दर्द और सूजन को कम करने का प्रयास करते हैं घुटनों के लचीलेपन को बढाने के लिए दाल चीनी,जीरा,अदरक और हल्दी का उपयोग उत्तम फलकारी है| इन पदार्थों में ऐसे तत्त्व पाए जाते हैं जो घुटनों की सूजन और दर्द का निवारण करते हैं
क्या आप भी जोड़ो के दर्द से परेशान हैं और तरह-तरह के पेन किलर खा कर हार चुके हैं एक बार इसे जरूर आजमाएं-
आमवातारि रस एक रस
  • आमवातारि रस एक रस-औषधि है जिसमें रस, पारा है। पारे को ही आयुर्वेद में रस या पारद कहा जाता है और बहुत सी दवाओं के निर्माण में प्रयोग किया जाता है। 
  • पारा एक विषाक्त धातु है और इसे आयुर्वेद में केवल सही प्रकार से शोधित कर के ही इस्तेमाल किया जाता है। रस औषधियां शरीर पर शीघ्र प्रभाव डालती हैं।
  • आमवातारि रस का प्रयोग बहुत से वात-रोगों के उपचार में होता है। इसका सेवन जोड़ों की जकड़न, दर्द, सूजन आदि में आराम देता है। आमवात आयुर्वेद में रयूमेटोइड आर्थराइटिस को कहा जाता है और आमवातारि रस इसकी अच्छी औषधि है।
यह दवा किसी आयुर्वेदिक स्टोर से भी खरीद सकते है 

NOTE-किसी भी उपाय को आजमाने से पहले अपने चिकित्सक से अवश्य संपर्क करें

    Tuesday, March 8, 2016

    डायबिटीज/शुगर/मधुमेह के कारण लक्षण,शुगर का घरेलू इलाज,Sugar Treatment in Hindi‎,

    डायबिटीज अब उम्र, देश व परिस्थिति की सीमाओं को लाँघ चुका है। इसके मरीजों का तेजी से बढ़ता आँकड़ा दुनियाभर में चिंता का विषय बन चुका है। ड़ायबीटिज एक बहुत हीं खतरनाक बीमारी है लेकिन अगर आप प्राकृतिक उपायों से इस पर नियंत्रण कर सके तो मधुमेह से आपको घबराने की जरुरत नहीं है। डायबीटिज को समझें और उसका उपचार करें। निम्न कुछ प्राकृतिक उपचार से आप ड़ायबीटिज पर नियंत्रण पा सकते हैं।

    मधुमेह के मुख्य लक्षण

    • थकान, कमजोरी, पैरों में दर्द, क्योंकि ग्लूकोज ऊर्जा में परिवर्तित नहीं हो पाता।
    • पैर का घाव ठीक न होना और गैंग्रीन का रूप ले लेना। 
    • अधिक पेशाब और भूख लगना। 
    • तेजी से वजन गिरना। 
    • बार-बार चश्मे का नंबर बदलना। 
    • जननांगों में खुजली और संक्रमण होना। 
    • हृदय आघात, मस्तिष्क आघात का होना।

    कैसे करें डायबिटीज कंट्रोल, डायबीटिज के उपचार के लिए.Sugar Treatment

    • दालचीनी,-अध्ययन से पता चलता है कि दालचीनी मधुमेह को नियंत्रित करने में बहुत हीं महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दालचीनी लगभग हर घर में पाया जाता है। यह हानिकारक कोलेस्ट्रोल को कम करता है और आपके शरीर में रक्त शर्करा कि मात्रा को भी घटाता है जिससे मधुमेह के रोगियों को बहुत हीं लाभ पहुँचता है। दालचीनी भले हीं मधुमेह का प्राकृतिक उपचार करने में सहायक सिद्ध होता है लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे लाभ कि बजाये नुकसान हो सकता है। आप दालचीनी पीस लें और चुटकी भर चाए में उबालकर दिन में एक दो बार पिया करें। जो लोग मधुमेह के शिकार हो चुके हैं और उसके लिए दवाइयां ले रहे हैं वे दालचीनी का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर कि सलाह अवश्य लें। लेकिन जिन्हें मधुमेह नहीं हुआ है या जो अब तक मधुमेह कि दवाइयां नहीं ले रहे हैं वे अगर दालचीनी का नियमित रूप से सेवन करें तो वे ड़ायबिटिज के शिकार होने से बच सकते हैं।
    • अंजीर के पत्ते-अंजीर के पत्ते कई प्रकार के रोगों के उपचार में लाभ पहुंचाते हैं जैसे ब्रोंकाइटिस, जननांग मौसा, लीवर सिरोसिस, उच्च रक्तचाप इत्यादि। लेकिन मधुमेह के इलाज के लिए अंजीर के पत्ते सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं। अंजीर के पत्तों से न सिर्फ मधुमेह का उपचार किया जाता है बल्कि ये पत्ते और भी कई बीमारियों में लाभ पहुंचाते है। इसके पत्ते को उबालकर, छानकर, पानी को ठंढा करके पीया करें।
    • आम के पत्ते-यूँ तो पका हुआ आम मधुमेह के मरीजों के लिए पूरी तरह से वर्जित होता है लेकिन इसके विपरीत आम के पत्ते मधुमेह के मरीजों को काफी लाभ पहुंचाते हैं। आप आम के कुछ ताजे पत्तों को एक ग्लास पानी में उबाल लें और रात भर उसे वैसे हीं छोड़ दें। सुबह होने पर पानी को स्वच्छ कपडे से छान लें और खाली पेट में पी लिया करें। ऐसा नियमित रूप से कई दिनों तक करने से ड़ायबीटीज के मरीजों को काफी फायदा पहुंचता है। यह मधुमेह के लिए एक बहुत हीं प्रभावी प्राकृतिक एवं घेरेलू उपाय है।
    • जामुन की चार-पांच पत्तियां सुबह एवं शाम को खाकर चार-पांच रोज पश्चात शुगर टेस्ट करवायें । आशा से अधिक वांछित परिणाम आयेगें ।
    • नीम की सात से आठ हरी मुलायम पत्तियां सुबह हर रोज खाली पेट चबाकर उसका रस निगल जाये ऐसा नियमित करते रहने से शुगर पर नियन्त्रण बना रहता है, एवं दस-पन्द्रह दिन तक यह प्रयोग करने के बाद आप जरूरत के मुताबिक चाय मिठी और मीठा भोजन भी ले सकते हैं । शुगर आपका कोई भी नुकसान नहीं कर सकती है ।
    • मेथी के बीज-ड़ायबीटिज को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में मेथी के बीज भी बहुत हीं कारगर सिद्ध होते हैं। मेथी के बीज में कुछ ऐसे घटक छिपे होते हैं जो आपके शरीर के भीतर मौजूद रक्त शर्करा को कम करते हैं। इसमें ४ हाईड्रोओक्सीसोल्युसीन नामक अमीनो एसिड होता है। यह अमीनो एसिड आपके अग्न्याशय से इंसुलिन का स्राव उत्तेजित करते हैं जिसकी वजह से आपके रक्त में मौजूद शर्करा इंधन के रूप में बदल जाता है। इस तरह एक ओर जहाँ इस प्रक्रिया से आपको शक्ति एवं उर्जा मिलती है वही दूसरी ओर आपके शरीर में रक्त शर्करा की मात्रा कम होती है। मेथी के बीज में जेनटियानाइन, ट्रीगोनेलीन और कारपाइन नामक घटक भी पाए जाते हैं जो आपके भोजन से कार्बोहाईडरेट का अवशोषण धीमा करते हैं और आपके रक्त प्रवाह में ग्लूकोज की मात्रा घटाते हैं।
    • करेले का रस-ताजे करेले का रस भी ड़ायबीटिज को नियंत्रित करने का एक बहुत हीं प्रभावकारी प्राकृतिक उपचार है। एक छोटे से करेले का बीज निकाल लें और करेले का रस निकलकर रोजाना सुबह सुबह खाली पेट में पीया करें। यह आपके लीवर और अग्न्याशय को स्वस्थ रखता है जिससे कि इंसुलिन का उत्पादन सुचारू रूप से होता रहता है और आपके रक्त में रक्त शर्करा की मात्रा बढ़ने नहीं पाती। 
    • अमरूद का एक या दो स्वच्छ किटाणु रहित पत्तों को थोड़ा कुटकर रात्रि को कांच के गिलास में (पात्र धातु का न हो) या चीनी मिट्टी के प्याले में भिगोकर सुबह खाली पेट पीने से एक माह में ही अनुकूल परिणाम नजर आयेगें ।

    • आयुर्वेद की दवा का जरूर इस्तेमाल करें
    • 100 ग्राम (मेथी का दाना )ले ले इसे धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
    • 100 ग्राम (तेज पत्ता ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
    • 150 ग्राम (जामुन की गुठली )लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
    • 250 ग्राम (बेलपत्र के पत्ते ) लेलें इसे भी धूप मे सूखा कर पत्थर पर पीस कर इसका पाउडर बना लें
    • मेथी का दना - 100 ग्राम -तेज पत्ता -100 ग्राम-जामुन की गुठली -150 ग्राम-बेलपत्र के पत्ते - 250 ग्राम तो इन सबका पाउडर बनाकर इन सबको एक दूसरे मे मिला लें ! बस दवा तैयार है इसे सुबह -शाम (खाली पेट ) 1 से डेड चम्मच से खाना खाने से एक घण्टा पहले गरम पानी के साथ लें 2 से 3 महीने लगातार इसका सेवन करें !! (सुबह उठे पेट साफ करने के बाद ले लीजिये कई बार लोगो से सीधा पाउडर लिया नहीं जाता ! तो उसके लिए क्या करें
    • आधे से आधा गिलास पानी को गर्म करे उसमे पाउडर मिलाकर अच्छे से हिलाएँ !! वो सिरप की तरह बन जाएगा ! उसे आप आसानी से एक दम पी सकते है ! उसके बाद एक आधा गिलास अकेला गर्म पानी पी लीजिये

    सावधानी एवं बचने के उपाय

    • सुव्यवस्थित तथा स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली अपनाएँ। 
    • रक्त में शक्कर के स्तर की नियमित जाँच करवाएँ। 
    •  एक आहार विशेषज्ञ द्वारा तय किए गए डाइट चार्ट से मधुमेह पर नियंत्रण रखा जा सकता है। 
    • उचित दवाइयाँ समय पर लें। 
    • कसरत करें और अपने आपको शारीरिक श्रम में व्यस्त रखें।
    • छोटे अंतराल तक पैदल घूमना 
    • 20 मिनट द्रुत गति से पैदल चलना (दिन में दो बार तथा सप्ताह में पाँच बार) 
    • ऐसी कसरत से पैरों में तथा पंजों में रक्त संचार होगा तथा रक्त शिराएँ मजबूत एवं विकसित होंगी। पैदल चलना दिल की धड़कनों के लिए अच्छा होता है।

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