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Thursday, March 2, 2017

स्वस्थ रहने के आयुर्वेदिक उपाय,Tips for Healthy Life in Hindi,

स्वस्थ शरीर ही मनुष्य का सबसे बड़ा खजाना होता है । एक सुखी स्वस्थ जीवन के लिए तन और मन दोनों का स्वस्थ होना जरुरी है । अगर हम शारीरिक रूप से स्‍वस्‍थ रहेगे , तभी हम अपने आप को सार्वजनिक एवं निजी जीवन में सफल देख पाएंगे । इसके विपरीत एक अस्वथ इन्सान हमेशा तनाव ग्रस्त हताश और परेशान दिखता है । इसीलिए अगर हमे अपने जीवन का पूरा आनंद उठाना है , तो हमे अपनी सेहत का ख्याल रखना अत्यंत ही आवश्यक है । अगर आप अपनी दिनचर्या में ये  चीजें शामिल कर लें तो दुनिया का कोई भी रोग आपको छू भी नहीं पायेगा।हृदय रोग, शुगर (मधुमेह), जोड़ों के दर्द, कैंसर, किडनी, लीवर आदि के रोग आपसे कोसों दूर रहेंगे! ऐसे ग़ज़ब हैं ये,आइये जानते हैं इनके बारे में
  • दालचीनी और शहद-सर्दियों में चुटकी भर दालचीनी की फंकी चाहे अकेले ही चाहे शहद के साथ दिन में दो बार लेने से अनेक रोगों से बचाव होता है।
  • सुबह जगने के बाद बिना कुल्ला करे 2 से 3 गिलास पानी सुखआसन मे बैठकर पानी घूटं-घूटं करके पिये यानी उषा पान करे ।
  • खाने के साथ भी कभी पानी न पिये। जरुरत पड़े तो सुबह ताजा फल का रस, दोपहर मे छाछ और रात्रि मे गर्म दूध का उपयोग कर सकते हैं।
  • भोजन हमेशा सुखआसन मे बैठकर करे और ध्यान खाने पर ही रहे, मतलब टेलीविजन देखते, गाने सुनते हुए, पढ़ते हुए, बातचीत करते हुए कभी भी भोजन न करे।
  • नाक में तेल-रात को सोते समय नित्य सरसों का तेल नाक में लगाये। और 5 – 5 बूंदे बादाम रोगन की या सरसों के तेल की या गाय के देसी घी की हर रोज़ डालें.
  • कानो में तेल-सर्दियों में हल्का गर्म और गर्मियों में ठंडा सरसों का तेल तीन बूँद दोनों कान में कभी कभी डालते रहे। इस से कान स्वस्थ रहेंगे।
  • लहसुन की कली-दो कली लहसुन रात को भोजन के साथ लेने से यूरिक एसिड, हृदय रोग, जोड़ों के दर्द, कैंसर आदि भयंकर रोग दूर रहते हैं।
  • तुलसी और काली मिर्च-प्रात: दस तुलसी के पत्ते और पांच काली मिर्च नित्य चबाये। सर्दी, बुखार, श्वांस रोग, अस्थमा नहीं होगा। नाक स्वस्थ रहेगी।
  • आंवला-किसी भी रूप में थोड़ा सा आंवला हर रोज़ खाते रहे, जीवन भर उच्च रक्तचाप और हार्ट फेल नहीं होगा, इसके साथ चेहरा तेजोमय बाल स्वस्थ और सौ बरस तक भी जवान महसूस करेंगे।
  • मेथी-मेथीदाना पीसकर रख ले। एक चम्मच एक गिलास पानी में उबाल कर नित्य पिए। मीठा, नमक कुछ भी नहीं डाले इस पानी में। इस से आंव नहीं बनेगी, शुगर कंट्रोल रहेगी जोड़ो के दर्द नहीं होंगे और पेट ठीक रहेगा।
  • छाछ-तेज और ओज बढ़ने के लिए छाछ का निरंतर सेवन बहुत हितकर हैं। सुबह और दोपहर के भोजन में नित्य छाछ का सेवन करे। भोजन में पानी के स्थान पर छाछ का उपयोग बहुत हितकर हैं।
  • हरड़-हर रोज़ एक छोटी हरड़ भोजन के बाद दाँतो तले रखे और इसका रस धीरे धीरे पेट में जाने दे। जब काफी देर बाद ये हरड़ बिलकुल नरम पड़ जाए तो चबा चबा कर निगल ले। इस से आपके बाल कभी सफ़ेद नहीं होंगे, दांत 100 वर्ष तक निरोगी रहेंगे और पेट के रोग नहीं होंगे, कहते हैं एक सभी रोग पेट से ही जन्म लेते हैं तो पेट पूर्ण स्वस्थ रहेगा।
  • सौंठ-सामान्य बुखार, फ्लू, जुकाम और कफ से बचने के लिए पीसी हुयी आधा चम्मच सौंठ और ज़रा सा गुड एक गिलास पानी में इतना उबाले के आधा पानी रह जाए। रात क सोने से पहले यह पिए। बदलते मौसम, सर्दी व् वर्षा के आरम्भ में यह पीना रोगो से बचाता हैं। सौंठ नहीं हो तो अदरक का इस्तेमाल कीजिये।Tips for Healthy Life
  • हमेशा पानी को घूट-घूट करके चबाते हुए पिये और खाने को इतना चबाये की पानी बन जाये। किसी ऋषि ने कहा है कि "खाने को पियो और पीने को खाओ"
  • खाने के 40 मिनट पहले और 60-90 मिनट के बाद पानी पिये और फ्रीज का ठंडा पानी, बर्फ डाला हुआ पानी जीवन मे कभी भी नही पिये। गुनगुना या मिट्टी के घडे का पानी ही पिये । Tips for Healthy Life

Friday, January 27, 2017

खाना खाने के नियम,The Best Times to Eat in Hindi


खाना खाने के नियम,The Best Times to Eat in Hindi,

खाना खाते समय अपनाएं ये नियम, कभी नहीं पड़ेंगे बीमार आयुर्वेद में आहार और भोजन के संबंध में कई नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने पर बीमारियों से तो बचाव होता ही है, हेल्थ भी अच्छी रहती है और लंबी उम्र मिलती है। इन नियमों में खाने के समय से लेकर मात्रा और प्रकार के बारे में भी बताया गया है। जानिए ऐसे ही नियमों के बारे में

खाना खाने के नियम,The Best Times to Eat in Hindi,

  • सुबह का नाश्ता हैवी ले, लंच उससे 30% कम और डिनर लंच से 30% कम ले।
  • विपरीत गुण वाले फूड को एक साथ न खाए जैसे दूध के साथ दही, इससे नुकशान हो सकता है।
  • खाना हमेसा बैठकर ही खाए खड़े होकर या चलते चलते खाने से कई तरह की बीमारियाँ हो सकती है।
  • बगैर भूख के भोजन न करे. इससे खाना डाइजेस्टनहीं होता ओर गैस,बदहजमी जैसी प्रॉब्लम हो सकतीहै
  • पहले खाया हुआ पचने के बाद ही दूसरी बार खाए. खाने के बीच 4-5 घंटे का अंतर होना चाहिए
  • जल्दी जल्दी न खाए, खाना अच्छे से चबाकर खाए. इससे लार अच्छी बनती है ओर खाना जल्दी पचता है
  • खाते समय हँसना, बात करना नुकसानदायक हो सकता है. खाना गले या साँस की नली में फंस सकता है
  • भूख से थोडा कम खाए. पेट में 20% जगह खाली रखे।
  • खाने के समय नेगेटिव इमोशन्स न रखे. शांत और प्रसन्न मन से भोजन करे।
  • हमेशा गर्म ओर ताजा खाना ही खाए. इससे खाना अच्छे से डाइजेस्ट होता है
  • खाने में ठोस (सॉलिड) और तरल (लिक्विड) का अनुपात 70:30 का रखे
  • लंच के बाद 10-15 मिनट रेस्ट करे (सोए नहीं). डिनर के कुछ देर बाद 10-15 मिनट जरुर टहलें।
  • डिनर के 3-4 घंटे बाद ही सोएं. इससे पहले सोने से खाना अच्छे से डाइजेस्ट नहीं होता।
  • खाना खाने के करीब 1 घंटे तक पानी न पिएं. इससे डाइजेशन अच्छा होता है।
  • खाने में चिकनाई की मात्रा प्रर्याप्त मात्रा में होनी चाहिए ताकि वह आंतों में अच्छी तरह सरक सके।
  • खाना खाने वाली जगह साफ़ सुथरी और शांत होना चाहिए. गंदगी ओर शोर शराबे वाली जगह में ना खाए
  • आयु ओर प्रकृति के अनुसार ही भोजन करना चाहिए. 40-45 की उम्र के बाद हल्का खाना ही खाएं।
  • खाने में कार्बोहाईड्रेटस, प्रोटीन ओर फाइबर का बैलेंस होना चाहिए. साबुत अनाज, सब्जियां, दाले फलियां फ्रूट्स, घी, दही वगेरह शामिल हो।
  • नहाने के तुरंत बाद ना खाए ओर न ही खाने के तुरंत बाद नहाए।
  • खाना खाने से पहले अच्छी तरह हाथ पैर धो लें. गंदे हाथो से, गंदे बर्तन में या गंदगी में बना हुआ खाना न खाए।

Wednesday, January 18, 2017

पपीते के पत्ते का रस,Health-Benefits-of-Papaya-Leaf-Juice-in-Hindi

वरदान है पपीते के पत्ते का रस क्योंकि इसमे है 5 विटामिन का भरपूर मिश्रण | पपीते के पत्ते खाने में कड़वे लगते हैं लेकिन उनमें कमाल के गुण छुपे हुए होते हैं. पपीते के पत्तों में विटामिन ''ए',''बी',''सी',''डी' और ''ई' पाया जाता है साथ ही इसमें कैल्शियम भी पाया जाता है.

पपीता एक ऐसा फल है जिसको बहुत से लोग पसंद करते हैं और स्वास्थ्य में भी यह फल बहुत ज्यादा योगदान देता है पर क्या आप जानते हैं कि पपीते के पत्ते में भी बहुत से रोगों का निदान छुपा हुआ हैं, पपीते के पत्तों से कई प्रकार के रोगों का निदान संभव है जो की अपने में काफी घटक होते हैं। जानकारी के लिए आपको बता दें की डेंगू के इलाज के लिए भी पपीते के पत्तों का उपयोग बहुत ज्यादा लाभकारी रहता हैं यही कारण है की डेंगू के दौरान पपीते के पत्तो की मांग काफी बढ़ जाती है। साथ ही इसके पत्तों का रस पेट के कब्ज में भी बहुत ज्यादा लाभकारी होता है। ऐसे भी बहुत से फायदे पपीते के पत्तों के होते हैं जिनके बारे में आज हम आपको बता रहें हैं।

पपीते के पत्ते के रस के फायदे,Health-Benefits-of-Papaya-Leaf-Juice-in-Hindi

  • मुंहासे दूर करे : अगर चेहरे पर मुंहासे हैं तो सूखी पपीते की पत्ती लेकर उसे थोड़े से पानी के साथ मिक्स कर के पेस्ट बना लें. फिर इस पेस्ट को चेहरे पर लगा कर सुखा लें और फिर पानी से धो लें।
  • कैंसर होने से रोके : इसमें कैंसर विरोधी गुण होते हैं जो कि इम्यूनिटी को बढ़ाने में मदद करते हैं और सवाईकल कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, अग्नाशय, जिगर और फेफड़ों के कैंसर को होने से रोकते हैं।
  • बैक्टीरिया की ग्रोथ रोके : पपीते की पत्तियों में 50 एक्टिव सामग्रियां होती हैं जो कि सूक्ष्मजीवों जैसे फंगस, कीड़े, परजीवी और कैंसर कोशिकाओं के विभिन्न अन्य रूपों को बढ़ने से रोकती हैं।
  • इम्यूनिटी बढ़ाए : इन पत्तियों में सर्दी और जुखाम जैसे रोगों से लड़ने की शक्ति होती है. यह खून में व्हाइट ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स को विकास बढ़ा देती है।
  • एंटी मलेरिया गुण : यह मलेरिया से लड़ने में प्रभावकारी है. पपीते की पत्तियों का रस मलेरिया के लक्षणों को बढ़ने से रोकता है।
  • डेंगू में रामबाण : डेंगू से लड़ने के लिए पपीते की पत्तियां काफी लाभकारी है. यह गिरते हुए प्लेटलेट को बढ़ाने, खून के थक्के जमने तथा जिगर की क्षति को रोकती है, जो कि डेंगू वायरस के कारण हो जाता है।
  • माहवारी के दर्द से छुटकारा : दर्द को दूर करने के लिए एक काढ़ा बनाइए जिसमें एक पपीते की पत्ती को इमली, नमक और एक गिलास पानी के साथ मिक्स कीजिए. फिर इसे उबालिए और जब काढ़ा बन कर ठंडा हो जाए तब इसे पी लीजिए, इससे आपको आराम मिलेगा।
  • पपीते की पत्तियों का जूस अन्य फलों के जूस के साथ मिला कर भी रोगी को दे सकते हैं
  • पपीता का सेवन रोज करने से पाचन शक्ति में वृद्धि होती है। पका पपीता पाचन शक्ति को बढ़ाता है, भूख को बढ़ाता है, मोटापे को नियंत्रित करता है और अगर आपको खट्टी डकारें आती हैं तो पपीते का रस उसे भी बंद कर देगा। पके या कच्चे पपीते की सब्जी बना कर खाना पेट के लिए लाभकारी होता है।
  • पपीते के पत्तों के उपयोग से उच्च रक्तचाप में लाभ होता है और हृदय की धड़कन ठीक रहती है। यह पौरुष को बढ़ाता है, पागलपन को दूर करता है एवं वात दोषों को नष्ट करता है।
  • अगर आप पपीता खाते रहते हैं तो आपको किसी कारण से होने वाला जख्म भी जल्द भरता है।
  • लगभग हर मौसम में सस्ते में ही मिल जाने वाला पपीता आपकी खूबसूरती में चार चांद लगाता है। कच्चे पपीते का दूध त्वचा रोग के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है।
  • पपीते का प्रयोग लोग फेस पैक में भी करते हैं। त्वचा को ठंडक पहुंचाने वाला पपीता आंखों के नीचे के काले घेरे को दूर करता है। अगर आप कील-मुंहासों से परेशान हैं तो कच्चे पपीते के गूदे को शहद में मिलाकर चेहरे पर लगाएं और जब वह सूख जाए तो गुनगुने पानी से चेहरा धो लें। उसके बाद मूंगफली के तेल से हल्के हाथ से चेहरे पर मालिश करें।
  • एक महीने तक नियमित रूप से ऐसा करने से आपको काफी लाभ होगा।पपीता कफ के साथ आने वाले खून को रोकता है और खूनी बवासीर को भी ठीक करता है। हृदय रोगियों के लिए भी पपीता काफी लाभदाक होता है। पपीते के दस बीज पानी में पीस कर चौथाई कप पानी में मिला कर पीने से पेट के कीड़े मर जाते हैं। इसका एक हफ्ते तक नियमित रूप से प्रयोग करना चाहिए।
  • बच्चा मां के दूध पर निर्भर रहता है, लेकिन कई बार ऐसा देखने में आता है कि मां को पर्याप्त दूध नहीं होता, जिससे बच्चा भूखा रह जाता है। कच्चे पपीते की सब्जी खाने से मां के दूध में वृद्धि होती है।
  • पीले रंग का फल पपीते का गुदा पेट की परेशानी जैसे कब्ज , अपच को दूर करता है । अगर किसी व्यक्ति को पीलिया होता है तो पपीता बहुत ही फायदेमंद होता है ।
  • पपीते मे पपेन नमक पदार्थ होता है जो भोजन को पचाने मे सहायक होता है ।चेहरे को सुंदर बनाने के लिए भी इसका उपयोग किया जाता है । पपीते को चेहरे पर लगाने से चेहरे पर मुहासे नही होते तथा यह चेहरे की झाइयो को भी कम करता है ।
  • पपीते का उपयोग कई लोग प्रकृतिक ब्लीच के रूप मे भी करते है । पपीता आख के लिए भी हितकारी होता है इसमे विटामिन A प्रचुर मात्रा मे होता है जिससे रातोंधी नमक रोग नही होता साथ ही साथ आखो की रोशनी भी बढती है ।
  • पपीता दातों के लिए भी फायदेमंद होता है अगर दातों मे से खून आता है तो पपीता उसमे भी लाभकारी है
  • आज के दौर में ऐसे खाने से मुंह मोड़ना जो आपके पाचन तंत्र के लिए बुरा हो, लगभग असंभव है। कई बार हम ऐसा भोजन करने को मजबूर होते हैं जो या तो जंक फ़ूड की श्रेणी में आता है या अधिक तेल में पका होता है। रोज़ एक पपीते का सेवन कभी-कभार खाए ऐसे भोजन के साइड-इफेक्ट को दूर रखता है क्योंकि इसमें फाइबर के साथ-साथ पपैन नामक एक एंजाइम होता है जो आपकी पाचन शक्ति को दुरुस्त रखता है।
  • पपीता बवासीर रोग मे भी फायदेमंद है पपीता खाने से कब्ज नही होती तो बवासीर रोग मे भी लाभ होता है ।
  • पपीता मधुमेह रोगियों के लिए आहार के रूप में एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि स्वाद में मीठा होने के बावजूद इसमें शुगर नाम मात्र का होता है। साथ ही, वे लोग जो मधुमेह के मरीज़ नहीं हैं, इसे खाकर मधुमेह होने के खतरों को दूर कर सकते हैं।
  • डाइटिंग कर रहे व्यक्तियों के लिए तो पपीता राम बाण है । कई लोग जो डाइटिंग कर रहे है वह पपीते को अपने खाने मे शामिल करते है ।
  • पपीता साल मे 12 महीने मिलता है यह फल तथा सब्जी दोनों के रूप मे उपयोगी है । पपीते का उपयोग जेम तथा जेली बनाने मे भी किया जाता है ।
  • पपीते में फाइबर, विटामिन सी और एंटी-ऑक्सीडेंट प्रचुर मात्रा में होता है जो आपकी रक्त-शिराओं में कोलेस्ट्रोल के थक्के नहीं बनने देता। कोलेस्ट्रोल के थक्के दिल का दौरा पड़ने और उच्च रक्तचाप समेत कई अन्य ह्रदय रोगों का कारण बन सकते हैं।
  • आपका प्रतिरोधक तंत्र आपको बीमार कर देने वाले कई संक्रमणों के विरुद्ध ढाल का काम करता है। केवल एक पपीते में इतना विटामिन सी होता है जो आपके प्रतिदिन की विटामिन सी की आवश्यकता का 200 प्रतिशत होता है। ज़ाहिर तौर पर ये आपके प्रतिरोधक तंत्र को मज़बूत करता है।
  • जिन लोगों का लक्ष्य अपना वज़न कम करना है उन्हें अपने आहार में पपीते को ज़रूर शामिल करना चाहिए क्योंकि इसमें कैलोरी बहुत कम होती है। पपीते में मौजूद फायबर एक और जहां आपको तारो-ताज़ा महसूस करवाता है वहीं आपकी आँत की मूवमेंट को ठीक रखता है जिसके फलस्वरूप वज़न घटाना आसान हो जाता है।
  • पपीते में विटामिन ए भी प्रचुर मात्रा में होता है जो आपके आँखों की रोशनी को कम होने से बचाता है। कोई भी व्यक्ति उम्र बढ़ने की वजह से आँखों की रोशनी से मरहूम नहीं होना चाहता, और पपीते को अपने आहार में शामिल करके आप ऐसी मुसीबत से बाख सकते हैं।
  • गठिया वास्तव में एक ऐसी बीमारी है जो शरीर को बेहद दुर्बल तो करती ही है जीवनशैली को बुरी तरह प्रभावित भी करती है। पपीते खाना आपकी हड्डियों के लिए बेहद लाभकारी हो सकता है, इनमें विटामिन-सी के साथ-साथ सूजन-रोधी गुण होते हैं जो गठिया के कई रूपों से शरीर को दूर रखता है। एक अध्ययन के अनुसार विटामिन-सी युक्त भोजन न लेने वाले लोगों में गठिया का खतरा विटामिन-सी का सेवन करने वालों के मुकाबले तीन गुना होता है।

Thursday, January 5, 2017

दही के फायदे,Health Benefits of Curd in Hindi,Health Benefits of Dahi,

दही स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ पाए जाते हैं जो दूध की अपेक्षा जल्दी पच जाते हैं। दूध की अपेक्षा दही में प्रोटीन, लैक्टोज, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस आदि कई विटामिन्स होते हैं इसलिए दही को अधिक पोषक माना जाता है। जिन लोगों को दूध न भाता हो उनके लिए दही एक बेहतर विकल्प है।

अमेरिका में हुए एक शोध के दौरान आहार विशेषज्ञों ने पाया कि दही को प्रतिदिन खाने से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती तथा बहुत से विटामिन बनने लगते हैं। इससे जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टोज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं।

दही के फायदे,Health Benefits of Curd in Hindi,Health Benefits of Dahi,

  • दही के नियमित सेवन से आंतों के रोग और पेट की बीमारियां नहीं होती, तथा कई प्रकार के विटामिन बनने लगते हैं। दही में जो बैक्टीरिया होते हैं, वे लेक्टेज बैक्टीरिया उत्पन्न करते हैं।
  • यदि आपको मोटापा है तो मोटापा कम करने के लिए दही एक प्रभावशाली उपाय है।
  • दही में हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और गुर्दों की बीमारियों को रोकने की अद्भुत क्षमता होती है। यह हमारे रक्त में बनने वाले कोलेस्ट्रोल नामक घातक पदार्थ को बढ़ने से रोकता है, जिससे वह नसों में जमकर ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित न कर पाता और हार्टबीट सही बनी रहती है।
  • दही में कैल्शियम की मात्रा अधिक पाई जाती है, जो हमारे शरीर में हड्डियों का विकास करती है और उन्हें मजबूती प्रदान करती है। दांतों एवं नाखूनों की मजबूती एवं मांसपेशियों के सही ढंग से काम करने में भी दही सहायक होती है।
  • यदि पेट में गड़बड़ हो, पतले दस्त हों तो दही के साथ ईसबगोल की भूसी लेने से आराम मिलता है। दही के साथ चावल खाना भी लाभप्रद होता है।
  • बवासीर के रोगियों को चाहिए कि दोपहर में भोजन के बाद एक गिलास छाछ में अजवायन डालकर पीएं।
  • पेट के रोगियों को चाहिए कि ज्वार की रोटी के साथ दही लें। दही का सेवन भुने हुए जीरे व सेंधा नमक के साथ करें।
  • दही में शहद मिलाकर चटाने से छोटे बच्चों के दांत आसानी से निकलते हैं।
  • मुंह के छालों में दही कम करने के लिए दिन में कई बार दही की मलाई लगाएं। इसके अलावा शहद व दही की समान मात्रा मिलाकर सुबह-शाम सेवन करने से मुंह के छाले भी दूर हो जाते हैं।
  • गर्मी के मौसम में दही की छाछ या लस्सी बनाकर पीने से पेट की गर्मी शांत हो जाती है। इसे पीकर बाहर निकलें तो लू लगने का डर भी नहीं रहता है।
  • दुबले व्यक्तियों को चाहिए कि दही में किशमिश, बादाम, छुहारा आदि मिलाकर पीएं। इससे वजन बढ़ता है।
  • दही में नींबू का रस मिलाकर चेहरे, गर्दन, कोहनी, एड़ी, हाथों पर लगाएं। कुछ देर बाद कुनकुने पानी से धो डालें।
  • अगर गर्दन के पिछले भाग में कालापन जमा हो गया है नहाते समय गर्दन पर खट्टी दही से मालिश करें और धो लें। एक-दो सप्ताह के नियमित प्रयोग से कालापन कम हो जायेगा।
  • बालों को सुंदर, स्वस्थ व नीरोग रखने के लिए बालों को धोने के लिए दही या छाछ का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि दही में वे सब तत्व मौजूद रहते हैं, जिनकी बालों को आवश्यकता रहती है। स्नान से पूर्व दही को बालों में डालकर अच्छी तरह मालिश करें ताकि बालों की जड़ों तक दही पहुंच जाए। कुछ समय बाद बालों को धो दें। दही के प्रयोग से खुश्की, रूसी (ईखर) व फियास समाप्त हो जाती है।
  • दही को जीरे व हींग का छौंक लगाकर खाने से जोड़ों के दर्द में लाभ पहुंचता है। यह स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है।
  • गर्मी के दिनों में पसीना काफी निकलता है। पसीने की बदबू दूर करने के लिए दही और बेसन मिलाकर शरीर पर मालिश करें तथा कुछ देर बाद स्नान करें, इससे पसीने की बदबू दूर हो जाती है।
  • वे लोग जो नींद न आने से परेशान रहते हैं उन्हें दही व छाछ का नियमित सेवन करना चाहिए।
  • दही का सेवन कुछ आयुर्वेदिक औषधियों में सहपान के साथ कराने का भी विधान है, जिससे दवा का प्रभाव बढ़ जाता है।

दही का प्रयोग करते समय बरतें कुछ सावधानियां

  • दही हमेशा ताजी ही प्रयोग करनी चाहिए।
  • रात्रि में दही का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
  • मांसाहार के साथ दही के सेवन को शास्त्रों में निषिद्ध माना गया है।
  • दही दस्त या अतिसार के रोगियों में मल को बांधने वाली होती है, पर सामान्य अवस्था में कब्ज कर सकती है।
  • मधुमेह से पीड़ित रोगियों में दही का सेवन थोड़ा सोच-समझकर करना चाहिए।
  • जब खांसी, ज़ुकाम, टांसिल्स या सांस की तकलीफ हो तब दही का सेवन न करें तो अच्छा रहता है।
  • दही सदैव ताज़ी एवं शुद्ध एवं घर में किसी मिटटी के बर्तन क़ी बनी हो तो अत्यंत गुणकारी होती है।
  • त्वचा सम्बन्धी रोगों में दही का सेवन सावधानी पूर्वक चिकित्सक के निर्देशन में करना चाहिए।
  • मात्रा से अधिक दही के सेवन से बचना चाहिए।

Friday, December 16, 2016

लौकी के जूस के फायदे,Health Benefits of Bottle Gourd Juice in Hindi

लौकी के जूस के फायदे,Health Benefits of Bottle Gourd Juice in Hindi

जाने-माने योगाचार्य बाबा रामदेव ने लोगों को लौकी के जूस का अधिकाधिक सेवन करने की सलाह देते हुए कहा कि इसे सदियों से स्वास्थ्यवर्धक माना जाता रहा है। लापरवाही से अगर कोई कड़वी लौकी का प्रयोग कर ले तो उसके प्रथम उपचार में तुरंत वमन करें और थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सामान्य लौकी का जूसलें।  

हर घरों में लौकी सब्जी के रूप में बनाई जाती है जिससे अधिकतर लोग खाना पसंद करते है, तो कुछ लोग नही… पर इसमें पाये जाने वाले पौष्टिक गुणों के कारण लौकी का उपयोग अब हर घरों में किया जाने लगा है। लौकी में महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की मात्रा पाई जाती है जो शरीर को कई खतरनाक बीमारियों से बचाती है। इसमें फाइबर और पानी की मात्रा अधिक होने से लोग गर्मियों के समय में इसका सेवन अधिक करते है। यह शरीर में ठंडाहट देने के साथ स्वास्थ्य एंव सौंदर्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। आइये आज जानते है कि लौकी हमारे लिये कितना उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

लौकी के जूस के फायदे,Health Benefits of Bottle Gourd Juice in Hindi

    • वजन कम करने में सहायक - बेहद कम लोग इस बात को जानते हैं कि घीयावजन को कम करती है। ये और दूसरी चीजों के मुकाबले तेजी से वजन कम करने में सहायक होती है। घीया को उबालकर नमक के साथ खाने से वजन जल्दी ही कुछ ही दिनों में घट जाता है। घीया में फाइबर की अच्छी मात्रा से जल्द भूख नहीं लगती और पेट भी भरा-भरा सा लगता है।
    • चेहरे में लाए प्राकृतिक निखार- चेहरे को अंदर और बाहर से प्राकृतिक सुंदरता और निखार लाने के लिए प्रतिदिन घीया का सेवन करना चाहिए। घीया चेहरे को सुंदर और आकर्षक बनाती है। घीया का जूस पेट की अंदरूनी सफाई करता है जिससे चेहरे पर धूल, धूप, और प्रदूषण से होने वाले मुहांसों से छुटकारा मिलता है। साथ ही त्वचा खूबसूरत और मुलायम बनी रहती है।
    • डाइबिटीज – घीया डाइबिटीज के मरीजों को बेहद फायदा पहुंचाती है। खाली पेट घीया का जूस का सेवन डाइबिटीज के मरीजों को सुबह-सुबह करना चाहिए।
    • वर्कआउट के बाद पीना फायदेमंद – आप वर्कआउट के बाद जिस प्रोटीन शेक को पीते हैं, उसकी जगह घीया के जूस को पीकर देखिये। लौकी के जूस में मौजूद नैचुरल शुगर न सिर्फ ग्लाइकोजीन (glycogen) स्तर को बनाए रखती है बल्कि वर्कआउट के दौरान शरीर में कार्बोहाइड्रेट की जो कमी पैदा होती है उसे भी पूरा करती है। इसमें प्रोटीन काफी मात्रा में होता है इसलिए ये मांसपेशियों की क्षमता भी बढ़ाता है।
    • यूटीआई से निपटने में मदद करे – अगर आपको यूरीन के दौरान जलन या दर्द महसूस होता है तो आपको ज़रूरत है हर सुबह घीया का जूस पीने की। क्योंकि ऐसा यूरीन में एसिड की मात्रा बढ़ने पर होता है और लौकी के जूस से मिलने वाली ठंडक एसिड के असर को कम कर देती है।
    • पाचन – जिन लोगों को पाचन संबंधी परेशानियां हों वे घीया का सेवन करें। घीया पेट में गैस की समस्या को दूर करती है। इसलिए इसे अपने भोजन में जरूर इस्तेमाल करना चाहिए।
    • अनिद्रा से राहत – अनिद्रा की समस्या से पीड़ित लोग लौकी के रस के साथ तिल का तेल मिलाकर पी सकते हैं ।
    • सनटैन से छुटकारा दिलाए – अगर आप चाहते हैं कि आप सनटैन से बचे रहें, तो भी लौकी का जूस आपके काम आ सकता है। इसके नेचुरल ब्लीचिंग तत्व टैन त्वचा को लाइट करते हैं। साथ ही ये अच्छा मॉश्चराइज़र भी है। दिन में 3-4 बार टैनिंग वाले स्थान पर लौकी का जूस लगाने से लाभ मिलता है।
    • पेट होगा साफ – लौकी का जूस पेट की अंदरूनी सफाई करता है जिससे चेहरे पर धूल, धूप, और प्रदूषण से होने वाले मुहांसों से छुटकारा मिलता है। साथ ही त्वचा खूबसूरत और मुलायम बनी रहती है।
    • स्वस्थ ह्रदय – आजकल लोगों में दिल की कई समस्याओं के बारे में सुना जाता है जो हल्के और गंभीर दिल के दौरे को जन्म दे सकती हैं । कुछ लोगों को यह तकलीफ अनुवांशिक होती है और कुछ लोगों की जीवनशैली और अनुचित आहार इसका कारण होती है | अपने दिल को स्वस्थ रखने के लिए घीया का रस पी सकते हैं। यह रक्तचाप को नियंत्रित करके दिल का प्रभावी ढंग से विकास करके उसे स्वस्थ रखेगा ।
    • विटामिन और प्रोटीन -घीया में सभी तरह के प्रोटीन और विटामिन पाए जाते हैं। इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, विटामिन बी3, बी6, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, पोटेशियम और जिंक पाया जाता है। जो शरीर को कई बीमारियों से बचाता है।
    • कोलेस्ट्राल से बचाए – अपने खाने में घीया का इस्तेमाल करें यह दिल संबंधी बीमारियों से आपको बचाता है। घीया खाने से हानिकारक कोलेस्ट्राल कम होने लगता है और हार्ट अटैक जैसी बीमारी से इंसान बच जाता है। इसलिए घीया का जूस बेहद फायदेमंद होता है।

      सावधानिया 

      योग गुरु बाबा रामदेव भले ही लौकी के जूस को अन्य सब्जियों के जूस में मिलाकर पीने की सलाह देते हों, लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बनी विशेषज्ञ समिति ने ऐसा न करने की हिदायत दी है। उसका यह भी कहना है कि जूस निकालने से पहले लौकी का एक छोटा टुकड़ा काटकर उसे चख लेना चाहिए। अगर वह कड़वा हो तो लौकी का किसी भी रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। 

      कुछ महीने पहले लौकी का जूस पीने के तुरंत बाद दिल्ली में 59 साल के सुशील कुमार सक्सेना की मृत्यु हो गई थी और उनकी पत्नी की हालत बिगड़ गई थी। इन्होंने लौकी के जूस में करेले का जूस मिलाकर पीया था। इस घटना के बाद सरकार ने एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. एस. के. शर्मा की अध्यक्षता में एक समिति बनाई थी। समिति ने अपने अध्ययन के बाद की गई सिफारिशों में कहा है कि कड़वी लौकी के जूस को किसी भी स्थिति में नहीं पीना चाहिए और न ही ऐसी लौकी का किसी भी रूप में प्रयोग करना चाहिए। 

      समिति का यह भी कहना है कि सामान्य लौकी के जूस को भी किसी भी सब्जी या फल के जूस में मिलाकर नहीं पीना चाहिए। उसने सलाह दी है कि लौकी का जूस पीने के बाद यदि किसी व्यक्ति को बेचैनी, चक्कर या उल्टी-दस्त की शिकायत हो तो उसे तुरंत नजदीकी अस्पताल में ले जाना चाहिए।

      Friday, October 21, 2016

      अंडा खाने के नुकसान Egg side effect


      अंडे दो तरह के होते है, एक वे जिसमें से चूजे निकल सकते है तथा दूसरे वे जिनसे बच्चे नहीं निकलते।निषेचित और अनिषेचित। मुर्गे के संसर्ग से मुर्गी अंडे दे सकती है किन्तु बिना संसर्ग के अंडा मात्र मुर्गी के रज-स्राव से बनता है, मासिक-धर्म की भांति ही यह अंडा मुर्गी की आन्तरिक अपशिष्ट का परिणाम होता है

       अंडो से कई बीमारियाँ

      हाल ही में हुआ बर्ड फ्ल्यू और साल्मानोला बीमारी ने समस्त विश्व को स्तम्भित कर दिया है कि मुर्गियों को होने वाली कई बीमारियों के कारण अन्डो से यह बीमारियाँ, मनुष्य में भी प्रवेश करती है। अंडा भोजियों को यह भी नहीं मालूम कि इसमें हानिकारक कोलेस्ट्राल की बहुत अधिक मात्रा होती है। अंडो के सेवन से आंतो में सड़न और तपेदिक की सम्भावनाएँ बहुत ही बढ़ जाती है। अंडे की सफ़ेद जर्दी से पेप्सीन इन्जाइम के विरुद्ध, विपरित प्रतिक्रिया होती है।
        • अंडो के अधिक से अधिक उत्पादन के लिए निषेधित ड्रग ओक्सिटोसिन(oxytocin) का इंजेक्शन लगाया जा रहा है जिससे के मुर्गियाँ लगातार अनिषेचित (unfertilized) अण्डे देती है इनको खाने से पुरुषों और स्त्रियों में हार्मोन (estrogen) असंतुलन की वजह से कई समस्या उत्पन्न होने का डर बना रहता है जैसे के वीर्य में शुक्राणुओ की कमी (oligozoospermia, azoospermia) , नपुंसकता और स्तनों का आवश्यकता से ज्यादा विकास (gynecomastia), डिप्रेशन आदि …
        • वहीँ स्त्रियों में अनियमित मासिक, बन्ध्यत्व , (PCO poly cystic oveary) गर्भाशय कैंसर आदि रोग होने का भय होता है
        • आजकल पॉलिटरी फार्मो में अंडा का उत्पादन बढ़ाने के एक विशेष प्रकार के हार्मोन्स का प्रयोग किया जाता हैं जिसमे स्टील बेस्टेरोल नामक दवा महत्त्वपूर्ण है। इससे जनित मुर्गी के अंडे खाने से हाई ब्लडप्रैशर, कैंसर, खासकर स्त्रियों को स्तन का कैंसर पीलिया जैसे रोग होने की सम्भावना रहती है।
        • साल्मोनेला एक बैक्टीरिया है जो कि मुर्गियों की आंतों में पाया जाता है। यह अंडे के बाहरी आवरण और उसके अंदर भी पाये जाते हैं । जिससे फूड प्वांजनिंग , सूजन, उल्टी व पेट की अन्य समस्या हो सकती है।
        • नियमित रूप से अंडे के ऊपर का सफ़ेद हिस्सा खाने से शरीर में बायोटीन की कमी होती है । बायोटीन की कमी से मांसपेशियों में दर्द, जकरन ,शरीर में तालमेल की कमी ,त्वचा संबंधी बीमारी जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा होना का खतरा बढ़ जाता है ।
        • नियमित रूप से अंडे का पीला वाला हिस्सा खाने से शरीर में कोलोस्ट्रोल की मात्रा बढ़ सकती है जो की हाई ब्लड प्रेशर, डाइबिटीज़ व हृदय संबंधी रोगियो के लिए जानलेवा साबित हो सकता है ।
        • जिन लोगों का ग्लोमरगुलर फिल्टरेशन रेट (फ़्लो रेट जो किडनी फिल्टर कर पाती है) कम है उन्हें खास तौर पर अंडे के प्रोटीन से खतरा है।
        • अन्डो को खाना धर्म और शास्त्रों के विरुद्ध , अप्राकृतिक माना जाता है क्योंकी जीव हत्या करना हमारे सभ्यता और संस्कृति के खिलाफ है ।

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