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Wednesday, November 16, 2016

पौरुष शक्ति बढाने में सहायक है बरगद ,बरगद का फल,Health Benefits of Banyan Tree Fruit for Men Health,


 बरगद का पेड़ आपने देखा ही होगा। इसके फल भी देखे होंगे। क्या आप जानते हैं कि बरगद के ये फल आपके पौरुष शक्ति बढ़ाने में कितना मददगार है।

Health Benefits of Banyan Tree Fruit in Hindi,

  • बरगद का ये प्रयोग शीघ्र पतन, स्वपनदोष, कमज़ोरी, प्रमेह, वीर्य का पतलापन और अन्य वीर्य विकार दूर करके, काम शक्ति एवं शुक्रवर्धक, स्पर्म बढाने वाला, विवाहित जीवन में भरपूर आनंद दिलाने वाला है। ये प्रयोग बेहद सस्ता और चमत्कारिक परिणाम देने वाला है। ये प्रयोग वीर्य विकार और कमज़ोरी से ग्रस्त रोगियों के लिए अच्छे से अच्छे बल वीर्य वर्धक नुस्खों से कहीं अच्छा है।
  • काम शक्तिवर्धक एवं शुक्रवर्धक गुण बरगद में समाये हुए है। बरगद के वृक्ष में लाल लाल छोटे छोटे बेर के समान फल लगते है। बरगद के पेड़ के ये लाल लाल पके हुए फल हाथ से तोड़ें। ज़मीन पर गिरे हुए न लें। इनको ज़मीन पर कपडा बिछा कर छाया में सुखाएं। सूखने के बाद पत्थर पर पीसकर पाउडर बना लें। सुखाते समय पीसते समय लोहे का उपयोग नहीं होना चाहिए। 
  • लोहे से इन्हे नहीं छूना है। इस पाउडर के तोल के बराबर पीसी हुयी मिश्री मिला लें। मिश्री भी पत्थर पर ही पीसें। भली प्रकार मिश्री और बरगद के फलों के पाउडर को मिलाकर मिटटी के बर्तन में सुरक्षित रखें। इसकी आधी चम्मच सुबह शाम दो बार गर्म दूध से फंकी लें। 
  • इससे शीघ्र पतन समाप्त होकर काम शक्ति प्रबल हो जाती है। विवाहित जीवन का भरपूर आनंद आता है। शारीरिक स्वास्थय अच्छा होकर चेहरे पर ललाई चमकने लगती है। इस सस्ते लेकिन मेहनत से भरपूर प्रयोग को करके देखें।
  • बच्चे पैदा करने वाले कीटाणु (स्पर्म) यदि वीर्य में ना हो तो इस प्रयोग से बच्चे पैदा करने वाले कीटाणु वीर्य में पैदा हो जाते हैं। आदमी बच्चे पैदा करने योग्य हो जाता है। शुक्राणुओं के न होने से जो पुरुष बच्चे पैदा करने के अयोग्य घोषित कर दिए गए हैं, 
  • वो इस प्रयोग को ज़रूर करें, और ये प्रयोग करने के बाद अपना अनुभव ज़रूर बताएं, जिस से और लोगों को भी ये प्रयोग करने की प्रेरणा ले सकें।
  • बरगद की कली, डंठल को तोड़कर इससे निकलने वाले दूध की पांच बूंदें एक बताशे पर टपका कर खा जाएं। इस प्रकार चार बताशे हर रोज खाएं। यह सूर्योदय से पहले खाएं। नित्य दूध की एक बूंद बढ़ाते जाएं। इस प्रकार दस दिन लेकर फिर एक बूंद रोज कम करते जाएं। इस प्रकार 20 दिन यह इस्तेमाल करने से वीर्य का पतलापन, प्रमेह, स्वपनदोष ठीक हो जा

Sunday, May 1, 2016

हाइड्रोसील के उपचार,Hydrocele Treatment in Hindi

Hydrocele Treatment in Hindi
इस रोग में रोगी के अण्डकोषों में पानी भर जाता है जिसके कारण उसके अण्डकोष में सूजन आ जाती हैं। जब यह रोग किसी व्यक्ति को होता है तो उसके केवल एक ही तरफ के अण्डकोष में पानी भरता है। इस रोग का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से किया जा सकता है। कुछ लोगों में हाइड्रोसील की समस्‍या वंशानुगत या जन्मजात भी हो सकती है। जन्मजात हाइड्रोसील नवजात बच्चे में होता है और जन्‍म पहले वर्ष में समाप्त हो सकता है। वैसे तो यह समस्‍या किसी भी उम्र में हो सकती है लेकिन 40 वर्ष के बाद इसकी शिकायत अक्‍सर देखी जाती है। कभी-कभी अंडकोष की सूजन में दर्द बिल्कुल भी नही होता और कभी होता है और वह बढ़ता रहता है।

अण्डकोषों में पानी भर जाने का लक्षण ,Symptoms,

प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार इस रोग के कारण रोगी व्यक्ति के अण्डकोषों में दर्द होने लगता है। रोगी के अण्डकोष का एक भाग सूज जाता है, कभी-कभी तो ये इतने बढ़ जाते है कि व्यक्ति को चलने फिरने में दिक्कत होने लगती है। यदि रोगी व्यक्ति के अंडकोष में सूजन के साथ तेज दर्द होने लगता है तो समझना चाहिए कि रोगी व्यक्ति को हाइड्रोसील अण्डकोषों में पानी भर जाने का रोग हो गया है। जब यह रोग धीरे-धीरे बढ़ता है तो इसके कारण जननेन्द्रिय की सारी नसें कमजोर और ढीली पड़ जाती हैं जिसके कारण रोगी व्यक्ति को उल्टी तथा मितली भी होने लगती है और कब्ज भी रहने लगती है।

अंडकोष की जांच,Examining testicles,

  • अक्सर, आसपास के तरल पदार्थ की वजह से अंडकोष को महसूस नहीं किया जा सकता।
  • हाइड्रोसील में तरल पदार्थ का आकार पेट या अंडकोश की थैली के दबाव की वजह से कम या ज्यादा होता जाता है।
  • अगर शरीर में द्रव के संग्रह का आकार बदलता रहता है, तो यह अधिकतम वक्षण हर्निया के साथ जुड़े होने की संभावना भी होती है।
  • हाइड्रोसील को आसानी से पहचाना जा सकता है।
  • इसके निदान के लिए अल्‍ट्रासाउंड तकनीक भी प्रयोग कर सकते हैं। अल्‍ट्रासाउंड से अंडकोष में भरा द्रव साफ नजर आता है।

अण्डकोषों में पानी भर जाने का कारण, Causes of Hydrocele

  • प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार यह रोग किसी व्यक्ति को यौन अंगों में विजातीय द्रव्यों (दूषित मल) के इकट्ठा हो जाने के कारण होता है।
  • गलत तरीके से खान-पान की आदतें तथा समय पर खाना न खाने के कारण यह रोग व्यक्ति को हो जाता है।
  • अंडकोष पर चोट
  • नसों का सूजना
  • स्वास्थ्य समस्यायें
  • बिना लंगोट के जिम / कसरत करना
  • दूषित मल के इक्कठा होने
  • अन्य रोग जो दवा से दबाए गए हो या फिर संभोग सबंधी उत्तेजना को एक दम से रोक देने के कारण भी यह रोग हो जाता है।
  • मल-मूत्र के वेग को रोकने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
  • भारी वजन उठाने, अधिक पैदल चलने, अंगों को तोड़ने या अंगड़ाई लेने के कारण भी यह रोग हो सकता है।
  • संभोगक्रिया अधिक करने के कारण भी कभी-कभी अण्डकोषों में पानी भर जाता है।

प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार,Hydrocele Treatment in Hindi,

  • इस रोग का प्राकृतिक चिकित्सा से उपचार करने के लिए रोगी व्यक्ति को कम से कम 2 सप्ताह तक प्रतिदिन संतरे का रस या अनार का रस पीना चाहिए। रोगी को कच्चे सलाद में नींबू डालकर सेवन करना चाहिए और उपवास रखना चाहिए।
  • इस रोग को ठीक करने के लिए पीले रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 25 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन 4 बार सेवन करना चाहिए तथा इस जल का सेवन करने से पहले रोगी व्यक्ति को एक घण्टे तक लाल प्रकाश और उसके बाद कम से कम 2 घण्टे तक नीला प्रकाश अण्डकोष पर डालना चाहिए। जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।
  • रोगी व्यक्ति को कटिस्नान, मेहनस्नान, सूखा घर्षण, गर्म एवं नमक स्नान (नमक मिले पानी से स्नान) करना चाहिए। इससे यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी को खुली हवा में व्यायाम करना चाहिए तथा इसके साथ सूर्य स्नान भी करना चाहिए। इस प्रकार से रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने से रोग बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता है।
  • पांच ग्राम काली मिर्च और दस ग्राम जीरे का चूर्ण आपस में मिलाके एक पेस्ट बनाए और इस पेस्ट को गर्म करे फिर इस पेस्ट में आप इतना गर्म पानी मिलाये कि एक पतला घोल बन जाए अब इस घोल को बढे हुए अंडकोषों पर लेप करके सो जाए इस प्रकार तीन-चार दिनों तक करने से फायदा दिखेगा जब तक पूर्ण आराम न हो करे-
  • रोगी व्यक्ति को कटिस्नान, मेहनस्नान, सूखा घर्षण, गर्म एवं नमक स्नान (नमक मिले पानी से स्नान) करना चाहिए। इससे यह रोग जल्दी ही ठीक हो जाता है।
  • इस रोग से पीड़ित रोगी को खुली हवा में व्यायाम करना चाहिए तथा इसके साथ सूर्य स्नान भी करना चाहिए। इस प्रकार से रोगी का इलाज प्राकृतिक चिकित्सा से करने से रोग बहुत जल्दी ही ठीक हो जाता है।
  • इस रोग को ठीक करने के लिए पीले रंग की बोतल का सूर्यतप्त जल 25 मिलीलीटर की मात्रा में प्रतिदिन 4 बार सेवन करना चाहिए तथा इस जल का सेवन करने से पहले रोगी व्यक्ति को एक घण्टे तक लाल प्रकाश और उसके बाद कम से कम 2 घण्टे तक नीला प्रकाश अण्डकोष पर डालना चाहिए। जिसके फलस्वरूप यह रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है।

Sunday, April 10, 2016

बॉडी बिल्डिंग आहार,Bodybuilding Diet Tips in Hindi,Home Remedies for Body Building,


आप भी बॉडी बिल्‍डिंग का शौक रखते हैं तो हम आपको ऐसे अहारों की जानकारी देगें, जिसे नियमित खाने से आपकी बॉडी जल्‍द बनेगी। बॉडी बिल्‍डिंग करने वाले लोगों को शक्‍ति की बहुत जरुरत होती है साथ ही अगर उनका इम्‍मयून सिस्‍टम मजबूत न हो तो, कई प्रकार की बीमारियां भी लग जाती हैं। ऐसे में जरुरी है कि वे ऐसे आहार खाएं जिससे उनकी बॉडी भी बने,
  • मशरूम: सफेर रंग के मशरूम लाभदायक होते हैं। इसमें बहुत सारा पोषण होता है जिससे मासपेशियां बनने में मदद मिलती है।
  • टोफू: इसमें वह सब पाया जाता है जो मीट में होता है। इसमें अमीनो एसिड और आइसोफ्लेवोनीस पदार्थ पाया जाता है जिससे मासपेशियां बड़ी तेजी से विकसित होने लग जाती हैं।
  • दालें: आपको दाल रोज खानी चाहिये क्‍योंकि इसमें बहुत सारा प्रोटीन और पोषण होता है।
  • दही: इसमें बहुत सारा कॉप्‍लेक्‍स शुगर और घुलनशील प्रोटीन होता है। यह वर्कआउट करने के लिये शक्‍ति प्रदान करता है।
  • पाइनएप्‍पल: अगर आपको अच्‍छी मसल्‍स बनानी है तो आप ताजा पाइनएप्‍पल खाएं। इससे वर्कआउट के लिये एनर्जी मिलती है।
  • जैतून का तेल: अपने वेजिटेबल ऑयल को बदल कर जैतून तेल खरीद लीजिये। इसमें आवश्‍यक फैटी एसिड और मोनोसैच्‍युरेटेड फैट्स होते हैं जो कि मसल्‍स बनाने में उपयोगी होते हैं।
  • चॉकलेट: डार्क चॉकलेट बॉडी बनाने के लिये सबसे अच्‍छे पदार्थ माने जाते हैं। हफ्ते में एक बार डार्क चॉकलेट जरुर खानी चाहिये ।
  • अलसी: इन दानों में बहुत सारा प्रोटीन और फाइबर पाया जाता है। बॉडी बिल्‍डिंग के लिये और शारीरिक गतिविधी बढाने के लिये यह जरुर खाएं।
  • बादाम: बॉडी बिल्‍डिंग के लिये बादाम बहुत अच्‍छे स्‍नैक्‍स माने जाते हैं। इसमें बहुत सारा अमीनो एसिड होता है जो कि मसल्‍स बनाने में उपयोगी होते हैं।
  • रिकोटा: यह एक इटैलियन चीज़ होती है जो कि भेड़ के दूध से बनी होती है। इसका सेवन करने से हड्डियां मजबूत होती हैं और बॉडी भी मजबूत बनती है।
  • चुकंदर: इसमें नाइट्रेट पाया जाता है जिससे बॉडी बिल्‍डर की गतिविधी अच्‍छी हो जाती है। इसे पहले उबाल कर तब सब्‍जी के रूप में प्रयोग करना चाहिये।
  • चिकन: चिकन ब्रेस्‍ट या केवल चिकन खाने से आपको हाई क्‍वालिटी का प्रोटीन मिलेगा। इसमें बिल्‍कुल भी फैट नहीं होता इसलिये इसे जरुर खाएं।
  • एवोकाडो: एक साधारण से एवोकाडों में 20 जरुरी पोषक तत्‍व, 250 कैलोरी, 10 ग्राम फाइबर और 15 ग्राम मोनोसैच्‍युरेटेड फैट मिल जाएंगे। इसका सेवन करने से बॉडी अच्‍छी बनती है।
  • अंडा: बॉडी बिल्‍डिंग के लिये अंडे से अच्‍छा कुछ नहीं हो सकता क्‍योंकि इसके सफेद भाग में 84 प्रतिशत प्रोटीन और 0 प्रतिशत वसा होती है। अंडे को हमेशा उबाल कर ही खाना चाहिये। मसल्‍स बनाने के लिये आपको एक दिन में 5-6 अंडे तक खाने की जरुरत है।
  • क्रैब: सीफूड के फायदे के बारे में किसी को नहीं पता है कि इसमें तरह-तरह के न्‍यूट्रियंट्स पाए जाते हैं और इसमें बिल्‍कुल भी कैलोरी नहीं होती।
  • मटन: यह प्रोटीन, आयरन, जिंक और विटामिन बी से भरा होता है। हफ्ते में एक बार मटन जरुर खाएं लेकिन कोशिश यह करें कि मटन फ्राई ना किया हुआ हो।
  • मछली: आपकी मासपेशियों को बढने के लिये मोनो सैचुरेटेड फैट की आवशयकता होती है। वर्कआउट करते समय शरीर का सारा फैट बर्न हो जाता है तो ऐसे में शरीर में जमा मोनो सैचुरेटेड फैट ही शरीर में एनर्जी बढाता है।
  • घोंघा: पुरुषों के लिये यह एक स्‍पेशल बॉडी बिल्‍डिंग आहार है। इसमें विषेश प्रकार का समुंद्रिय पोषक मिला होता है जो कि टेस्‍ट्रोस्‍ट्रॉन बढाने में भी मदद करता है।
  • ओट्स: शरीर में अपचय की प्रक्रिया बढाने के लिये ओट्स खाइये। इसको खाने से शरीर में फैट नहीं जमता 
  • पनीर: इसमें बिल्‍कुल भी फैट नहीं होता और बहुत ही ज्‍यादा मात्रा में प्रोटीन होता है। इसलिये यह बॉडी बिल्‍डिंग के लिये अच्‍छा होता है।
  • मूंगफली: पीनट बटर या फिर मूंगफली खाने से शरीर को तुरंत एनर्जी मिलती है। इसको खाने से बहुत देर तक भूंख नहीं लगती।
  • केला: इसे खाने से शरीर की प्रतिरक्षा बढती है और यह प्रोटीन बढाने में भी मददगार होता है।
  • पालक: अगर बॉडी बनाने वाले इसे नियमित खाएं तो उनकी बॉडी जल्‍दी बनेगी।
  • मिर्च: लाल या हरी मिर्च बॉडी बिल्‍डिंग के लिये अच्‍छे फूड माने जाते हैं। यह हड्डियों को मजबूत करने के लिये और अच्‍छे ब्‍लड सर्कुलेशन के लिये जाने जाते हैं।
  • ब्‍लूबैरी: इनमें बहुत सारा पौष्‍टिक तत्‍व पाया जाता है, जिससे बीमारियां दूर रहती हैं। साथ ही यह शरीर में सेलुलर इलास्‍टिसिटी बनाने में भी मदद करती है।
  • ग्रीन टी: इसकी सबसे अच्‍छी बात यह है कि यह शरीर में अच्‍छे बैक्‍टीरिया को जन्‍म देती है जिससे बॉडी बिल्‍डर्स का इम्‍मयून सिस्‍टम मजबूत होता है और बीमारियां दूर होती हैं।
  • शकरकंद: इसमें सेहतमंद कार्बोहाइड्रेट मिलता है जो कि बॉडी बनाने वालों को सख्‍त जरुरत होती क्‍योंकि इसेस उन्‍हें वर्कआउट करने के लिये स्‍टैमिना मिलता है।
  • टमाटर: इमसें विटामिन ए होता है जो कि बॉडी बिल्‍डिंग के लिये अच्‍छा माना जाता है। इससे फैट भी बर्न होता है और मस्‍लस में खिंचाव भी कम होता है।
  • अंजीर: यहां पर हम ताजी अंजीर की बात कर रहे हैं न कि सूखी अंजीर की। यदि इसे रोज खाया जाए तो इससे बॉडी तगड़ी बनती है। दिन में एक अंजीर का फल खाना चाहिये

Sunday, March 20, 2016

एड्स के बारे में - What is HIV in Hindi-HIV Symptoms,Information,

एचआईवी और एड्स के बारे में कुछ तथ्य-What is HIV in Hindi,HIV  Symptoms,Information,

एचआईवी और एड्स का प्रसार लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इसने अब महामारी का रूप ले लिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया में 33.3 मिलियन लोग एचआईवी और एड्स से ग्रसित हैं। लगभग पांच साल पुराने आंकड़ों के अनुसार पूरी दुनिया में 1.8 मिलियन लोग एड्स के शिकार होकर मौत के मुंह में चले गए। लगभग 16.6 मिलियन बच्चे इस बीमारी के कारण अनाथ हो गए।

इस बीमारी को लाइलाज माना गया है। इससे बचाव तभी संभव है, जब लोग इसके बारे में जागरूक हों। एचआईवी और एड्स के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एक्टिविस्ट्स, डॉक्टर्स, सरकारें और नागरिकों के संगठन भी कार्यरत हैं।

एड्स के कारण (Due to AIDS) एड्स रोग के होने के कारण

  • एड्स से संक्रमित स्त्री के साथ बिना कंडोम आदि के प्रयोग के सेक्स करने से दूसरे व्यक्ति को भी एड्स रोग लग जाता है।
  • एड्स रोग से ग्रस्त व्यक्ति का खून अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में चढ़ा दिया जाए तो उसे भी एड्स रोग हो जाता है।
  • एच.आई.वी. अर्थात एड्स के रोगी को लगे इंजैक्शन को अगर किसी स्वस्थ व्यक्ति को लगा दिया जाए तो उसके विषाणु उस व्यक्ति के शरीर में पहुंचकर उसे भी इस रोग से ग्रस्त कर देते हैं।
  • एच.आई.वी. अर्थात एड्स के संक्रमण से ग्रस्त महिला के द्वारा जन्म देने वाले बच्चे को भी यह रोग लग सकता है।
  • एड्स रोग फैलाने में योनि मैथुन से संभोग करने की अपेक्षा गुदामैथुन से संभोग करना ज्यादा भागीदारी निभाता है क्योंकि मलाशय की परत योनि की परत से ज्यादा पतली होती है जिनमें संभोग करते समय स्ट्रोकों के कारण खरोंच लगने या दरार पड़ने का खतरा ज्यादा रहता है 
  • इसलिए गुदामैथुन करते समय एड्स से ग्रस्त रोगी के विषाणु वीर्य के जरिये उसके सहभागी के शरीर में बहुत ही आसानी से पहुंच जाते हैं।

एड्स रोग के लक्षण-

  • एच.आई.वी. अर्थात एड्स के विषाणु जैसे ही किसी स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में पहुंचते हैं उसके कुछ सप्ताह बाद उस व्यक्ति को बुखार, पूरे बदन में दर्द, सिर में दर्द और फ्लू आदि जैसे लक्षण प्रकट हो जाते हैं। 
  • लेकिन हर तरह के व्यक्तियों के लिए इन लक्षणों को सहीं नहीं माना जा सकता है क्योंकि कुछ समय के बाद यह लक्षण अपने आप ही गायब हो जाते हैं। 
  • इसके बाद लगभग 3 से 12 साल तक किसी तरह के लक्षण नजर नहीं आते इसलिए रोगी को ऊपर से देखकर यह कहना बहुत ही मुश्किल हैकि यह एड्स रोग से ग्रस्त है इसके साथ ही इस रोग के बारे में एक बात और भी ध्यान देने वाली यह है कि यह रोग जब किसी व्यक्ति को होता है तो उसके शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत समाप्त हो जाती है।
  • एड्स रोग होने पर रोगी की लसीका ग्रंथियां सूज जाती हैं। इसके साथ ही उसकी जांघों, बगल और गले आदि में भी सूजन के साथ गांठे निकल आती हैं।
  • एड्स से ग्रस्त रोगी को बार-बार बुखार आता-जाता रहता है।
  • रोगी रात को सोता है तो उसका पूरा शरीर पसीने से भीग जाता है।
  • रोगी को कई तरह के छोटे-मोटे रोग लग जाते हैं जो जल्दी ठीक होने का नाम नहीं लेते। इसके साथ ही दिन पर दिन उसका वजन कम होने लगता है।
  • रोगी को हल्का सा वजन उठाने में या कहीं ज्यादा दूर पैदल जाने में ही शरीर में भारी थकावट हो जाती है। कई बार तो बिना किसी कारण के ही रोगी को अपना पूरा शरीर टूटा-टूटा सा महसूस होता है।
  • रोगी को बार-बार दस्त आने लगते हैं।
  • एड्स से ग्रस्त रोगी के मुंह और भोजन की नली में फंफूदी के कारण जख्म से बन जाते हैं।
  • रोगी के मस्तिष्क में संक्रमण हो जाता है।
  • एच.आई.वी. अर्थात एड्स से ग्रस्त रोगी के शरीर में रोगों से लड़ने की ताकत दिन पर दिन कम होती जाती है जिसके कारण उसके शरीर में निमोनिया के विषाणु प्रवेश कर जाते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे रोगी के शरीर की त्वचा सूखने लगती है और वह मौत के करीब पहुंच जाता है।
  • लगातार थकान
  • रात sweats
  • वजन में कमी
  • लगातार डायरिया
  • दृष्टि blurred
  • जीभ या मुँह (leukoplakia) पर सफेद धब्बे
  • सूखी खांसी
  • सांस की तकलीफ
  • 37 C (100F) कि सप्ताह के नंबर एक रहता है ऊपर का बुखार
  • सूजन ग्रंथियों कि अधिक से अधिक तीन महीनों के लिए पिछले
  • सूजी हुई लिम्फ नोड्स के साथ बुखार
  • कमजोरी
  • अस्वस्थ महसूस कर
  • शरीर में दर्द
  • सिर में दर्द
  • गले में खराश
  • डायरिया
  • लाल चकत्ते
  • तंत्रिका क्षति या दर्द

नई दवाओं की खोज.

विश्व का दवा उद्योग अभी कम से कम 100 नई दवाओं और टीकों पर काम कर रहा है। नई दवाएं एचआईवी वायरस से लड़ने में ज्यादा सक्षम पाई गई हैं। यह सिर्फ एड्स से प्रभावित सेल्स पर ही असर डालता है और स्वस्थ कोशिकाओं पर काम नहीं करता। पहले की दवाएं वायरस से प्रभावित कोशिकाओं को खत्म करने के साथ ही स्वस्थ कोशिकां पर भी असर डाल देती थीं। साथ ही, ड्रग इंडस्ट्री ऐसी दवाओं की खोज में है जो सामान्य किस्म के हों और जिनका उपयोग करना भी आसान हो। ऐसी दवाएं विकसित की जा रही हैं जो प्रतिदिन एक डोज वाली हों

क्या यह अमेरिकी बीमारी है.

जब 1980 के दशक में एड्स का प्रसार हुआ तो सोवियत यूनियन ने यह प्रचार शुरू किया कि अमेरिका ने जानबूझकर पूरी दुनिया में यह बीमारी फैलाई है। यद्यपि यह एकदम झूठा प्रचार था, पर बहुत सोवियत नागरिकों ने बिना सोचे-समझे इस झूठ पर यकीन कर लिया।

सुरक्षा तंत्र भी विकसित हो जाता है

समय के साथ, वैज्ञानिकों ने यह पाया है कि कुछ संक्रमित लोगों में इस वायरस के प्रति इम्यूनिटी भी पैदा हो जाती है। संक्रमित होने के बाद भी वो दशकों तक इस वायरस से लड़ते हैं और उनके स्वास्थ्य पर इसका कोई खास असर दिखाई नहीं पड़ता। यह इम्यूनिटी एक निश्चित प्रकार की कोशिका में होती है जिसे cd8+t सेल कहते हैं। ये सेल एड्स से संक्रमित कोशिकाओं में प्वॉइज़न इंजेक्ट कर देते हैं। इससे वैज्ञानिकों को यह लग रहा है कि इस इम्यूनिटी वाले सेल से एड्स से लड़ने के लिए भावशाली दवा बनाई जा सकती है

कौन होते हैं सबसे ज्यादा प्रभावित

एड्स का मुकाबला करने के लिए वैज्ञानिक पूरा जोर लगा रहे हैं। लगातार नए अनुसंधान किए जा रहे हैं, पर पूरी दुनिया में एड्स का प्रभाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। सिर्फ अमेरिका में 25-44 आयु वर्ग की अश्वेत महिलाओं की मृत्यु के लिए यह सबसे प्रमुख कारण बन गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि महिलाओं और बच्चों में एड्स का बढ़ता प्रसार बहुत ही चिंता का विषय है।


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शुक्राणु बढ़ाने के घरेलू उपाय,वीर्य की मात्रा बढ़ाएँ,वीर्य पतला-Infertility in Men,


शारीरिक और मानसिक असंतुलित की स्थिति में शरीर के अंदर वीर्य नहीं बन पाता या ठहर नही पाता और इस कारण शरीर तेजहीन, उदास और निष्काम हो जाता है। ऐसी स्थिति में वीर्य बन भी जाता है तो पतला या बिना शुक्र के ही बन पाता है और इसे हम वीर्य की कमी कहते है। पुरुष के वीर्य में शुक्राणु होते हैं। ये शुक्राणु स्त्री के डिम्बाणु को निषेचित कर गर्भ धारण के लिये जिम्मेदार होते हैं। वीर्य में इन शुक्राणुओं की तादाद कम होने को शुक्राणु अल्पता की स्थिति कहा जाता है। शुक्राणु अल्पता को ओलिगोस्पर्मिया कहते हैं। लेकिन अगर वीर्य में शुक्राणुओं की मौजूदगी ही नहीं है तो इसे एज़ूस्पर्मिया संग्या दी जाती है।

 वीर्य के कमी होने के कारण

  • हस्थमैथुन करना
  • अधिक सहवास करना
  • खान-पान में सही देखभाल ना करना
  • स्वप्नदोष होना
  • कमजोरी महसूस होना
  • मानसीक कमजोरी
  • चिंता करना आदि।
  • तमांखु , बीड़ी , सिगरेट , शराब सेवन करना ।
  • गर्म मिर्च मसालेदार पदार्थ और मास, अंडे आदि ।

वीर्य पतला-,Men infertility Treatment

  • बेल की जड़ की छाल को सफ़ेद जीरे के साथ पीसकर घी में मिलाकर सुबह शाम पिने से वीर्य का पतलापन दूर होता है।
  • शतावरी का चूर्ण 10 ग्राम चीनी और दूध के साथ सुबह शाम सेवन करने से वीर्य के दोष दूर होते है।
  • गूंजा की जड़ 2 ग्राम को दूध में पकाकर रोज रात को खाना खाने से पहले खाने से वीर्य के दोष दूर होते है।
  • हत्था जोड़ी के पंचांग के मिश्रण 40 ग्राम से 80 ग्राम की मात्रा में सुबह शाम खाने से वीर्य दोष दूर होता है।
  • सिंघाड़े के आटे में बबूल का गोंद, देसी घी और मिश्री मिलाकर लगभग 30 ग्राम मात्रा में गर्म दूध के साथ लेने से वीर्य बढ़ जाता है।
  • तुलसी के बिज 60 ग्राम और मिश्री 75 ग्राम ले। इन दोनों को पीसकर सुरक्षित रख लेते है। इसमे प्रतिदिन 3 ग्राम चूर्ण गाय के दूध से सेवन करना चाहिए।
  • सफ़ेद मूसली और शक्कर बराबर मिलाकर चूर्ण कर ले और रोज सवेरे गाय के दूध के साथ खाने से लाभ मिलता है।
  • वीर्य अधिक पतला होने पर 1 चम्मच शहद में एक चम्मच हल्दी पाउडर मिलाकर रोजाना सुबह के समय खाली पेट सेवन करना चाहिए। इसका विस्तृत रुप से इस्तेमाल करने से संभोग करने की शक्ति बढ़ जाती है।आयुर्वेद में भी क्रियात्मक क्षमता बनाए रखने की बहुत सी दवाएं हैं
  • सुबह सुबह खाली पेट आंवला और एलोवीरा का रस पीजिये १०-१० मिली एक गिलास पानी के साथ 
  • नाश्ते के बाद शुद्ध शिलाजीत सत्व एक बूंद दूध से लीजिये ।
  • एक चम्मच असली बादाम पाक कागजी बादाम से बना हुआ लें इससे वीर्य बहुत गाढा हो जाता है
  • दोपहर को खाने के बाद शुद्ध कौंच पाक एक चम्मच लें।
  • शाम को अशवगंधा चूर्ण एक चम्मच दूध से लें ।
  • वीर्य वर्धक वटी २ गोली जल के साथ ले।
  • शाम को शुक्र संवर्धन वटी एक गोली लें।
  • काम चूणामणि रस एक गोली लें ।
  • शतावर चूर्ण एक चम्म्च लें
  • रात को सोने से पहले सर्व्कल्प चूर्ण गर्म पानी से लें
  • १०ग्राम अश्वगंधा तेल +ग्राम मालकांगनी तेल +१०ग्राम निर्गुन्डी तेल +१० ग्राम श्रीगोपाल तेल उसमे एक ग्राम असली केशर ५ ग्राम दालचीनी पाउडर ५ग्राम जायफल पाउडर डालकर अच्छी तरह मिला लें और नहाने के बाद लिंग को पोंछ्कर सुखाकर खींच खींच्कर मालिश करें इससे लिं लौहलठ्ठ और मजबूत तथा पुष्ट होता है ये बहुत अजमाया हुआ हैवसंत मालती 
स्त्री-पुरूष् दोनों में शारीरिक क्षमता और दुर्बलता, चाहे किसी कारण भी हो, नाशक स्वर्ण तथा मोती युक्त ओषधि है। ज्वरों के पश्चात के दौर्बल्य में भी अत्यंत उपयोगी है।

  • वसंत कुसुमाकर-बलवर्घक, कामोत्तेजक, मधुमेह नियंत्रक के रूप में प्रयुक्त होता है। इसमें सोना, मोती, कस्तूरी, चांदी आदि प्रयुक्त होते हैं.
  • वसंत तिलकरस,-विशेष् रूप से पुरूष् द्वारा उपयुक्त बलवर्घक वाजीकरण तथा कामोद्दीपक, स्वर्णमुक्ता आदि प्रधान औष्धियां हैं। वृहऊंगेश्वस, वंगेश्वर दोनों ही मूल्यवान दवाइयां हैं। स्त्रियों के जननांगों के रोगों, श्वेत प्रदर, कामशीतलता आदि तथा पुरुषों के दुर्बलता शीघ्रपतन, शुक्रमेह आदि में लाभदायक दवाएं हैं।
  • शक्रवल्लभ रस-पुरुषों द्वारा अधिक सेवनीय बलवर्घक पौष्टिक उत्तेजक वाजीकर औषधियाँ हैं। इसमें भी सोना, मोती आदि मूल्यवान दवाएं डाली जाती हैं।
  • शतावरी मोदक-प्रमुख रूप से स्त्रियों द्वारा सेवन की जाने वाली यह औषधि शक्तिवर्घक स्तन रोग नाशक जननांगों के प्रदरों व गर्भाशय शिथिलता नाशक है।
  • शिलाजीत शुद्ध-स्त्रियों व पुरुषों के सभी रोगों में उपयोगी। निरंतर प्रयोग से सभी रोग होने से रोकता है। बुढ़ापा थामता है दीर्घजीवन देता है।
  • शुक्रमातृकावटी व शिवा गुटिका-अधिकतर पुरुषों को वीर्यविकारों, मूत्ररोगों, वायुविकारों, प्रोस्टेट वृद्धि आदि में दिया जाता है। शिव गुटिका स्त्रियों के कमरदर्द, थकान और मूत्र रोगों में उपयोगी है। मदनानंद मोदक, नारी गुटिका, कौंचपाक, मूसलीपाक, मदनमोदक ये दवाइयां पुरुषों द्वारा विशेष कर यौन शक्ति वृद्धि बनाए रखने व पूरे वर्ष के लिए पुष्टि प्रदान के लिए प्रयुक्त होती है।
इनमें कुछ नशीले पदार्थ भांग, अफीम आदि में प्रयुक्त किए जाते हैं। कामेश्वर, कामचूड़ामणि, मन्मथ रस ये स्त्री व पुरुषों दोनों के लिए समान रूप से उपयोगी है।
शक्ति, बल सामथ्र्य तथा कार्यक्षमता वर्घक बलवर्घक दवाइयां हैं।ये सामान्यत: नीम-हकीम तथा बिना चिकित्सक के परामर्श से इनका प्रयोग नौजवान लड़के ज्यादा करते हैं।
रतिवल्लभ मूंगपाक, सौभाग्यशुंठी ये दोनों दवाइयां मुख्यत: स्त्रियों के सेवनार्थ बनी हैं। प्रथम ये दवाये जननांगों को शक्ति, पुष्टि संकोच, गर्भाधान योग्य बनाती हैं। सोहाग सोंठ प्रसव के बाद की दुर्बलता, पीड़ा कमरदर्द, थकान, ज्वर को मिटाती है।
आयुर्वेद में कामोत्तेजक, स्तंभक, वाजीकरण शक्तिवर्घक तथा स्त्री के स्त्रीत्व को पुष्पित और प्रशस्त रखने वाली दवाओं की कमी नहीं है।
ध्यान रहे -आयुर्वेदिक चिकित्सक से विचार - विमर्श ज़रूर कर ले।

Saturday, March 19, 2016

बॉडी बनाने के घरेलू उपाय-Home Remedies for Healthy body,Body Building Food,Muscle Building,

पर्सनालिटी तभी आकर्षक लगती है। जब उनका शरीर गठीला और मसल्स मजबूत हो। जिन लोगों की मसल्स मजबूत होती हैं उनका शरीर अपने आप शेप में दिखाई देता है। इसके लिए सिर्फ घंटों जिम में गुजरना ही काफी नहीं है, बल्कि सही डाइट प्लान भी जरूरी होता है।

खानपान पर यदि पूरी तरह से ध्यान दिया जाए तो मसल्स मजबूत होती हैं और शरीर आंतरिक रूप सेताकतवर बन जाता है। आइए आज जानते हैं हम कुछ ऐसी ही  चीजों के बारे में जिनके नियमित सेवन से मसल्स मजबूत हो जाती हैं।

मसल्स को मजबूत बनाने के लिए फल और सब्जियों का भरपूर मात्रा में सेवन करना चाहिए। इनमें विटामिन, मिनरल्स और कई पोषक तत्व व प्रोटीन पाए जाते हैं, जो कि मसल्स को मजबूत बनाते हैं।

2. लो फैट डेयरी उत्पाद

कम फैट वाले डेयरी उत्पादों जैसे दूध, दही, छाछ आदि में प्रोटीन अधिक मात्रा में होता है। इसीलिए पुरुषों को इनका नियमित सेवन करना चाहिए। एक कप दूध से लगभग 8 मि.ग्रा. कार्निटिन मिलता है। दूध से बनी चीजों में कैल्शियम, विटामिन-ए जैसे आवश्यक पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं। इसके अलावा इनमें कार्बोहाइड्रेट और विटामिन डी भी अच्छी मात्रा में मौजूद होते हैं, जिससे मांसपेशियों को मजबूती मिलती है।

3. ड्राय फ्रूट्स

ड्राय फ्रूट्स और नट्स दोनों में ही भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। पुरुषों को ड्रायफ्रूट्स का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए। फिर चाहें तो इन्हें कच्चा खाएं या फिर भूनकर खाएं। इनमें फैट्स रेशे, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जिनसे मसल्स मजबूत होती हैं।

4. अंकुरित अनाज

अंकुरित अनाज पुरुषों की सेहत के लिए बहुत अच्छे होते हैं। यह पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। साथ ही, यह जिंक जैसे पोषक तत्वों का स्रोत हैं, जो पुरुषों में कमजोरी और नपुंसकता की समस्या कम करने में सहायक होते हैं व मसल्स को मजबूत बनाते हैं।

5. मूंगफली

मूंगफली में जिंक के साथ ही भरपूर मात्रा में वसीय अम्ल पाए जाते हैं। ये वसीय अम्ल पुरुषों के लिए फायदेमंद होते हैं। इसके सेवन से पुरुषों में कमजोरी की समस्या दूर हो जाती है।

6. लहसुन

लहसुन का सेवन भी पुरुषों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है। लहसुन में एंटी-बैक्टीरियल और एंटीवायरल तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। साथ ही, इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण भी मौजूद होते हैं। यह परिसंचरण तंत्र को भी स्वस्थ बनाता है।

7. ब्रॉकली

ब्रॉकली खाने के भी चमत्कारिक लाभ हैं। इसमें पाया जाने वाला आइसोथायोसाइनेट्स यकृत को उत्तेजित करता है। यह उन एन्जाइम्स के निर्माण में सहायता करता है, जो कैंसर उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं के प्रभाव को कम करते हैं। इसमें विटामिन-सी भी मौजूद होता है। इसीलिए इसे पुरुषों की सेहत के लिए बेहतरीन औषधि माना गया है। 

8. तुलसी टी

तुलसी टी का सेवन भी पुरुषों के लिए बहुत अच्छा होता है।तुलसी पत्ते में ओसियाम प्रचूर मात्रा में पाया जाता है। यह कैंसर होने से रोकता है।तुलसी टी रोजाना पीने से पेट, फेफड़ों व आंतों की बीमारियां दूर होती हैं।

9. आम और पपीता

आम और पपीता, दोनों में ही भरपूर मात्रा में विटामिन ए पाया जाता है। आम में अमीनों अम्ल, विटामिन ए, सी और ई, नियासिन, बिटाकेरोटिन, आयरन, कैल्शियम और पोटैशियम पाया जाता है। वहीं, पपीता में पर्याप्त मात्रा में विटामिन बी व सी के साथ ही एंटीआक्सीडेंट भी मौजूद होते हैं। इन दोनों फलों के छिलकों में बायोफ्लैवेनॉइड्स पाया जाता है। इसीलिए यह फल पुरुषों को अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए।

10. शिमला मिर्च

शिमला मिर्च भी पुरुषों के लिए फायदेमंद होती है। कुछ शोधों के अनुसार लाल शिमला मिर्च में संतरे के रस के मुकाबले तीन गुना ज्यादा विटामिन सी पाया जाता है। वैज्ञानिकों की मानें तो फ्लैवोनॉइड्स के लिए लाल शिमला मिर्च प्रभावी विकल्प है। फ्लैवोनॉइड्स पुरुषों को सेहतमंद बनाता है।

11. टमाटर

टमाटर में लाइकोपीन की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। लाइकोपीन पौधों में पाया जाने वाला एक प्राकृतिक रासायनिक पदार्थ है। यह रासायनिक पदार्थ अपने एंटीऑक्सीडेंट गुणों के लिए जाना जाता है। यह प्रॉस्ट्रेट, फेफड़े और पेट के कैंसर को खत्म करता है। साथ ही, चेहरे की लालिमा और चमक भी बढ़ाता है

12.अनार

पुरुषों को अनार का जूस अपनी डाइट में जरूर शामिल करना चाहिए। रोजाना एक गिलास अनार का जूस पीने से पुरुषों को प्रोस्टेट की समस्या नहीं होती है।

13. रागी

रागी कैल्शियम का सबसे बढिय़ा स्रोत है। यह पुरुषों को ऑस्टियोपोरेसिस से बचाता है। साथ ही, यह जिंक तथा रेशे का भी अच्छा स्रोत है। इसके नियमित सेवन से डिसलिपिडीमिया, डायबिटीज और मोटापे से बचा जा
सकता है।

कद्दू भी पुरुषों के लिए लाभदायक होता है। इसमें रेशे, विटामिन, खनिज और कई स्वास्थ्यवर्धक एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं। इसके इन्ही गुणों के कारण इसके नियमित सेवन से ताउम्र स्किन जवां बनी रहती है।

15. सोया

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सोया में मौजूद आइसोफ्लैवोन्स प्रॉस्ट्रेट की रक्षा करते हैं। यह प्रॉस्ट्रेट कैंसर के खतरे को कम करते हैं। रोजाना 25 ग्राम सोया प्रोटीन के सेवन से कोलेस्ट्रॉल स्तर को भी कम किया जा सकता है।


व्यायाम : आप यौगिक व्यायाम कीजिये. यौगिक व्यायाम का मतलब उस व्यायाम से है जिनमे आपकी एक से अधिक मांसपेशियाँ और एक से अधिक जोड़ उपयोग में आते हो. यौगिक व्यायाम को मांसपेशियों के लिए बहुत ही उपयुक्त माना गया है. साथ ही आपको सुबह सुबह जल्दी उठ कर खाली पेट भी व्यायाम करना चाहिए.

एंजाइम : ये आपके खाने को पचाने का कार्य करते है. शरीर का वजन बढ़ाने के लिए आप अधिक कैलरी लेने के लिए अच्छा आहार खाओगे और अधिक आहार लोगे ताकि आपकी मांसपेशियों में अधिक वृद्धि हो. ऐसी स्थिति में आपका पाचनतंत्र उस गति से काम नही कर पाता कि इतने सारे आहार को आप ग्रहण कर पाओ, किन्तु अगर आप एंजाइम को ले रहे हो तो ये आपके पाचनतंत्र की शक्ति को बढ़ाता है और आप जी भर कर आहार ग्रहण कर पाते हो.

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